हरेश जोगनी
सत्यापित कहानीकार (Verified)@harasha-jagana
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
हरेश जोगनी की रचनाएं
मुझे रण्डी बनना है-11
इतने में सुनीता कस्टमर से चुदवाकर बाहर आई। मैंने उसे मौसी ने जो कहा वो बताया तो बोली- बिल्कुल सच है, मुझे यह सब भाने लगा है। साले मूछ पे ताव देने वाले मर्द भी हमारे भोसड़े पे सब कुर्बान करने चले आते हैं.. पर मैं सिर्फ और एक हफ्ता रुकूँगी, फिर तुम्ह...
मुझे रण्डी बनना है-10
अपनी पैंट उतारी और चड्डी निकालकर अपनी फ़ुद्दी को सहलाना चालू किया और अपने ही हाथों से अपने बड़े-बड़े नारियल जैसे स्तनों को सहलाना चालू किया। उसने इधर उधर देखा तो उसे मौसी का खिलौने वाला लौड़ा दिखा जिसे मौसी ने जानबूझ कर रखा था। उसने उसे लेकर अपनी फ़ुद्...
मुझे रण्डी बनना है-9
मौसी ने मुझे खींचते हुए अपनी बाहों में लिया और बोली- भड़वे, तेरी तारीफ मैंने सभी रण्डियों से सुनी तो सोचा मैं भी तेरा लौड़ा ले ही लूँ। आज रात मैं सोने वाली नहीं और तुझे भी नहीं सोना।
मुझे रण्डी बनना है-8
जूली- कल आपका आखिरी दिन है तो वादा करो कि कल दिन भर आप मेरी गोद में लिपटे रहोगे ! और किसी के पास नहीं जाओगे?
मुझे रण्डी बनना है-7
जूली- चलो छोड़ो ! अच्छा यह बताओ कि राजा बाबू अभी तक मौसी को चोद रहे हैं क्या? और जाहिदा भी नहीं दिखती?
मुझे रण्डी बनना है-6
मौसी ने इशारा किया और कहा- क्या राजा बाबू ! हमारी गाण्ड मारने में आपको मज़ा आता है और इसकी गाण्ड तो अछूती है !
मुझे रण्डी बनना है-5
मौसी- बस अब तुम अपने कस्टमर सम्भालो ! मैं और सीमा एक कस्टमर की गोद में रहने वाली हैं पूरे दिन..
मुझे रण्डी बनना है-4
मैं तो उसके मुंह से ऐसी रंडी वाली भाषा सुनकर दंग रह गया। साली पूरी रंडी ही बन चुकी थी। बड़े बेफिक्र होकर पैंट से सिगरेट निकाली और जला कर कश लेने लगी। उसके सामने धुंआ फेंका और उसके शर्ट को पकड़ा।
मुझे रण्डी बनना है-3
हम मौसी के कमरे में पहुंचे आलीशान कमरा था और ए सी भी लगा था। मौसी ने सिगरेट जलाई, बड़ी सेक्सी लग रही थी, उसकी उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होगी। उसने सी.सी.टी.वी. चालू किया और हर कमरे का नजारा दिखाई दिया। जाहिदा के पास भी कस्टमर आ पहुँचा था और वो उस...
मुझे रण्डी बनना है-2
सुशी ने नखरीले अंदाज में मुझे बाहों में लपेटा और मेरे कमर पर हाथ डाल कर ले गई। उसने बिन बांह का नीला ब्लाउज और नीली साड़ी पहनी थी।
मुझे रण्डी बनना है-1
बीते दिनों की बात है, मैं हमेशा की तरह ट्रेन में सफ़र कर रहा था, बारिश के कारण ट्रेन में भीड़ नहीं थी।एक डिब्बे में सिर्फ 5-6 लोग अलग अलग बैठे थे।