नन्दिनी
सत्यापित कहानीकार (Verified)@nanathana
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
नन्दिनी की रचनाएं
सोनू से ननदोई तक-6
रात को मेरी खाट पर मेरी रजाई में मैंने किसी को पाया।उसने दबी आवाज़ से कहा- मैं हूँ काला ! चुप रह !यहाँ क्यूँ आये हो? मैं धीरे से बोली।रात के दो बज रहे हैं, घोड़े बेच सो रहे हैं सभी !
सोनू से ननदोई तक-5
वो खुश होकर दोबारा नाचने लगे।मैं लग ही इतनी पटाखा रही थी !क्या करूँ ! भगवान ने ऐसे मम्मे दिए जिन्हें देख बुड्ढे का लौड़ा खड़ा हो जाए।
सोनू से ननदोई तक-4
जैसे मैंने पिछले भाग में बताया कि :एक दोपहर मैं काले के साथ नंगी गन्ने के खेत में चुद रही थी तभी वहां उसका दोस्त आ टपका, बोला- मुझे भी फ़ुद्दी दे, वरना भाण्डा फोड़ दूंगा।
सोनू से ननदोई तक-3
दो दिन बाद की बात है, मेरी चाची के पिता जी परलोक चले गए।मेरे सभी घर वाले वहीं चले गए, सबका जाना बनता ही बनता था इसलिए। उस दिन तो भाभी को भी जाना पड़ा।उधर खेतों में सीरी(नौकर) काम कर रहे थे, मुझे दिन में दो बार उनको खाना, चाय आदि बना कर भेजनी थी।
सोनू से ननदोई तक-2
चलो अब पहले भाग से आगे चलते हैं :जैसे कि मैंने पिछले भाग में बताया, दोस्तो, मैं लुट चुकी थी, रंडी बनने का रास्ता मिल गया था। उसने मुझे कई तरीकों से चोद-चोद निहाल कर दिया।