रूपिन्द्र कौर
सत्यापित कहानीकार (Verified)@nprpanathara-kara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
रूपिन्द्र कौर की रचनाएं
कामुकता की इन्तेहा-7
तो दोस्तो, अब फिर एक बार मेरी ठुकाई की तैयारी पूरी हो चुकी थी, मेरे चोदू यार ने मेरी टाँगें उसने एक बार फिर अपने डौलों पर धर लीं और मेरी तह लगा दी मगर उसने खुद लौड़ा अंदर नहीं डाला और मुझसे बोला- डाल जट्टीये अपने आप अंदर!मुझे यह बात बहुत पसंद है कि...
कामुकता की इन्तेहा-6
मेरी जवानी की कहानी के पिछले भागकामुकता की इन्तेहा-5में पढ़ा कि मेरा यार ढिल्लों अपनी चार उँगलियों से मेरी फुद्दी की सर्विस कर रहा था.
कामुकता की इन्तेहा-5
मेरी जवानी की वासना की कहानी के पिछले भागकामुकता की इन्तेहा-4में पढ़ा कि मेरा मनपसंद लंड मेरी चूत में था और…
कामुकता की इन्तेहा-4
मेरी जवानी की वासना की कहानी के पिछले भाग में पढ़ा कि मेरा मनपसंद लंड मेरी चूत में था और…
कामुकता की इन्तेहा-3
मेरी जवानी की हवस की कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि मेरी कामवासना की आग ने मुझे कोई तगड़ा जानदार लंड खोजने पर मजबूर कर प्रिया. मुझे मनचाहा लंड मिल भी गया.
कामुकता की इन्तेहा-2
मैंने बड़ी मुश्किल से आंखें खोल कर ध्यान से उसके हाथों को देखा, उसकी हरेक उंगली मेरे पति के लौड़े जितनी मोटी थी। जब उसने उंगली का बाकी तीसरा हिस्सा भी अंदर सरका प्रिया तो उसके रूखेपन ने मेरी जान ही निकल दी। मज़ा एक बार फिर तेज़ दर्द की एक लहर में बदल गया।
कामुकता की इन्तेहा-1
मैं पंजाब के एक बड़े शहर से हूँ और मेरी बी ए तक की पढ़ाई भी वहीं की है। मेरे पिता जी की मौत बहुत पहले हो चुकी है। जिसकी वजह से घर में मेरी मां और मेरा छोटा भाई ही रहते थे। पिता जी की मौत जल्दी होने के कारण मेरी मां के दो एक अफेयर हैं लेकिन उन्होंने ...