राजवीर वीरू दादा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@rajavara-vanpr-thatha
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
राजवीर वीरू दादा की रचनाएं
एक ही बाग़ के फूल-4
मैं और छाया का भाई गन्दी गन्दी बातें करने लगे कभी नीता के बारे में तो कभी छाया के बारे में।
एक ही बाग़ के फूल-3
मैंने भी उसको देख के हाथ हिलाया और फ़ोन में सन्देश के माध्यम से पूछा- कैसा लग रहा है?उसने कहा- पता नहीं … अजीब सा लग रहा है. पर मज़ा बहुत आया।मैंने कहा- ठीक है, अब सो जा।उसने मेरे से पूछा- दोबारा घर आ जाऊं? जो हुआ उसके बारे में बता देते।मैंने कहा- न...
एक ही बाग़ के फूल-2
मेरी नज़र अब आंटी की चूत पे गयी जहाँ उसके हल्के बाल दिखाई दे रहे थे, ऐसा लग रहा था कि कुछ दिन पहले ही उसने बाल साफ़ किये थे. तभी याद आया कुछ समय पहले उनकी शादी की सालगिरह थी. शायद उसी टाइम उन्होंने अपनी चूत साफ़ की होगी।
एक ही बाग़ के फूल-1
दोस्तो, कैसे हो आप सब लोग!आपने मेरी पिछली कहानीदो जवान बहनें और साथ में भाभीपढ़ी होंगी. मुझे उसके काफी सारे मेल भी आये, जिनके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूँ।
देखा… मैं बच्ची नहीं हूँ
यह आरजू नहीं कि किसी को भुलाएँ हमन तमन्ना है कि किसी को रुलाएँ हमजिसको जितना याद करते हैंउसे भी उतना याद आयें हम !
दो बूंद आँसू
राजवीरदोस्तो, मेरीपिछली कहानियाँपढ़ के आपने जो अपने कीमती मेल भेजे उसके लिए शुक्रिया।तो मैं अपनी नई कहानी पर आता हूँ।