समीर चौधरी
सत्यापित कहानीकार (Verified)@samara-cathhara
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
समीर चौधरी की रचनाएं
जिस्म की जरूरत-13
मैं समझ गया था कि जिस रेणुका में मैं अपना प्यार तलाश रहा था वो रेणुका सिर्फ मुझसे अपने जिस्म की जरूरत पूरी कर रही थी…
जिस्म की जरूरत-12
जलती हुई मोमबत्ती लेकर मैं वापस कमरे में आया और बिस्तर के बगल में रखे मेज पर उसे ठीक से लगा दिया। मोमबत्ती की हल्की सी रोशनी में वंदना का दमकता हुआ चेहरा मेरे दिल पर बिजलियाँ गिराने लगा।कसम से कह रहा हूँ, उस वक़्त उसे देख कर ऐसा लग रहा था मानो कोई ...
जिस्म की जरूरत-11
चाय मेरे शॉर्ट्स पे गिरी थी… लेकिन शॉर्ट्स भी छोटी थी इसलिए मेरी जाँघों का कुछ भाग भी थोड़ा सा जल गया था।
जिस्म की जरूरत-10
कैसे हैं मित्रो… देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ, वैसे कसूर मेरा नहीं है, इस देरी की वजह है रेणुका जी और वंदना… उन दोनों की वजह से ऐसा व्यस्त हो गया हूँ कि अपनी कहानी आगे लिखने का वक़्त ही नहीं मिल रहा था।
जिस्म की जरूरत-9
मैं मज़े से उनकी चूत चाट रहा था लेकिन मुझे चूत को अच्छी तरह से चाटने में परेशानी हो रही थी।
जिस्म की जरूरत-7
उफ्फ… वो मखमली एहसास उन चूचियों का… मानो रेशम की दो गेंदों पर हाथ रख दिया हो।
जिस्म की जरूरत-6
‘ठीक है समीर जी, अब तो रोज़ ही मिलना मिलाना लगा रहेगा…’ रेणुका ने मेरे पीछे से एक मादक आवाज़ में कहा, जिसे सुनकर मैंने फिर से उनकी तरफ पलट कर देखा और उन्हें मुस्कुराता हुआ पाया।
जिस्म की जरूरत-5
‘जी नहीं… यह हमारी मम्मी का हुक्म है और उनकी बात कोई नहीं टाल सकता… तो जल्दी से दूध का बर्तन अन्दर रख दीजिये और हमारे साथ चलिए, वरना अगर मम्मी नाराज़ हो गईं तो फिर बहुत बुरा होगा।’ वन्दना ने मुझे डराते हुए कहा।
जिस्म की जरूरत-4
रेणुका तेज़ क़दमों के साथ दरवाज़े से बाहर चली गईं…मैं उनके पीछे पीछे दरवाज़े तक आया और उन्हें अपने खुद के घर में घुसने तक देखता ही रहा।
जिस्म की जरूरत-3
रैक के ऊपर के सारे बर्तन गंदे पड़े थे इसलिए वो झुक गईं और नीचे की तरफ ढूंढने लगीं।
जिस्म की जरूरत-2
उनके मुड़ते ही मेरी आँखें अब सीधे वहाँ चली गईं जहाँ लड़कों की निगाहें अपने आप चली जाती हैं… जी हाँ, मेरी आँखें अचानक ही उनके मटकते हुए कूल्हों पर चली गईं और मेरे बदन में एक झुरझुरी सी फ़ैल गई।