स्वप्न कांत शर्मा
सत्यापित कहानीकार (Verified)@savapana-kata-sharama
18+ कामुक और रोमांस हिंदी कहानियों के आधिकारिक लेखक।
स्वप्न कांत शर्मा की रचनाएं
लण्ड न माने रीत -8
अब तक आपने पढ़ा..मैंने इत्मीनान से एक सिगरेट सुलगा ली और हल्के-हल्के कश लगाने लगा.. एक तो शराब का सुरूर ऊपर से यह अहसास कि आरती मेरे साथ घर में अकेली है और कुछ ही देर बाद उसका नंगा बदन मेरी बाँहों में होगा और रात अपनी होगी ही।ख़ास अहसास यह.. कि लड़की...
लण्ड न माने रीत -7
अब तक आपने पढ़ा..जब मैं उठ कर आने लगा तो भाभी जी बोलीं- कल मैं और आपके दोस्त मेरे मायके जा रहे हैं.. मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया था। वो होली पर जाना पड़ता है ना.. आरती घर पर अकेली रहेगी। परसों इसकी ननद भी इसके ससुराल से आने वाली है। हो सके तो आप...
लण्ड न माने रीत -6
अब तक आपने पढ़ा..मैंने आरती को उसकी सील तोड़ने तक का पूरा मंजर अपनी यादों में जैसे उतार लिया था.. मैंने कई सालों बाद आज फिर से अपने गाँव उससे मिलने की चाहत में आ गया था।अब आगे..
लण्ड न माने रीत -5
अब तक आपने पढ़ा..मैंने उसके दोनों मम्मों पर अपनी हथेलियाँ जमा दीं और उसकी झांटें चाटने लगा.. जीभ से ही उसकी चूत की दरार खोलकर भीतर तक ‘लपलप..’ करके चाटने लगा। ऐसे करते ही उसने पैर ऊपर की तरफ मोड़ लिए.. जिससे चूत और उभर गई। मेरी जीभ अब उसकी कुंवारी च...
लण्ड न माने रीत -3
अब तक आपने पढ़ा..‘अब झूठ भी बोलने लगी तू.. मैंने तुझे कल तेरी सहेलियों के साथ बगीचे में वो गन्दा वाला खेल खेलते देखा है..’ मैंने कड़कती आवाज़ में कहा।‘नहीं.. वो..वो..वो..!’ इसके आगे आरती कुछ न बोल पाई और उसकी आँखें झुक गईं..तभी मैंने वो डिल्डो अपनी ज...
लण्ड न माने रीत -2
अब तक आपने पढ़ा..ऐसे ही हंसी-ठिठोली करते हुए वे सब ये गन्दा खेल खेलती रहीं। मैं दम साधे वो सब देखता रहा.. मेरी कनपटियाँ गर्म होने लगी थीं.. लण्ड तो पहले से ही खड़ा था.. अब उसमें हल्का-हल्का दर्द भी होने लगा था।मुझे आरती पर क्रोध भी आ रहा था.. लेकिन ...
लण्ड न माने रीत -1
उस दिन माँ का फोन सुबह सवेरे ही आ गया ‘बेटा.. कैसे हो.. इस बार होली पर आ रहे हो ना.. कितने साल हो गए घर आए हुए?’‘नहीं माँ.. मैं नहीं आ पाऊँगा.. ऑफिस से बहुत छुट्टियाँ ले चुका हूँ.. मार्च आने वाला है.. अब तो एक दिन की छुट्टी लेना भी मुश्किल है..। द...