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भाभी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 204 बार

आ लंड मुझे चोद! भाभी की चूत की चुदाई

सत्येन्द्र सिंह

13 Dec 2020 को प्रकाशित

आ लंड मुझे चोद! भाभी की चूत की चुदाई
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मैं शानू उर्फ सत्या उम्र 20 साल, आपके सामने अपनी पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ जो बिल्कुल सत्य घटना पर आधारित है।मैंने लोगों से सुना था कि किसी लड़की या औरत की खूबसूरती उसके उरोजों और नितम्बों से जानी जा सकती है।पहली बार चुदवाने में हर लड़की या औरत जरूर नखरा करती है लेकिन एक बार चुदने के बाद तो कहती है आ लंड मुझे चोद!

प्रिय पाठको, आप सभी को इस चूत रसिया का प्रणाम!दोस्तो, मैं आप लोगों को फालतू की बकवास नही सुनाऊँगा।

बात आज से 5 महीने पुरानी है। मैं अपने लंड की पहले से ही बहुत देखभाल किया करता था, क्योंकि मेरे मुहल्ले में मेरे एक मुँह बोले भाई हैं जो मुझे अपनी और भाभी के बीच की सभी घटनाओं का बड़े प्यार से मुझे सुनाया करते हैं। मैं भी उनकी हर बात को बड़े चाव से सुनता था लेकिन एक दिन मेरे लंड में थोड़ी फुंसी हो गई जो बहुत ही दर्द कर रही थी, जिससे मैं काफ़ी बैचेन था।

मैंने यह बात भाई को बताई तो बो बोले- तुम अपने लंड की सही से साफ-सफाई नहीं करते होगे इसलिए तुम्हें यह फुंसी हुई है।लेकिन मैंने उन्हें बताया कि मैं अपने लंड सही से साफ-सफाई और मालिश भी करता हूँ।तो भाई बोले- तब तो यह कोई नई बीमारी तो नहीं हो रही है?भाई बोले- चलो दिखाओ!

तो मैं उनको घर लाया और बड़ी शर्म के साथ मैंने अंडरवियर उतारी तो भाई की मेरा लंड देखते ही आँखें फटी की फटी रह गई, और वो बोले- तुम्हारा लंड तो वाकयी में मालिश लायक है।और उन्होंने देख कर कहा- यह तो कोई बड़ी बात नहीं है, यह फुंसी 3-4 दिन में खुद ब खुद सही हो जाएगी।

और हुआ भी ऐसा कि मेरे लंड की फुंसी बिल्कुल सही हो गई।

अब तो मैं अपने लंड की और अधिक देखभाल करने लगा, फिर मैं भाई साब से पूछ कर एक तेल लाया जो लंड को मालिश के वक्त और अधिक सख़्त बना देता था।कुछ दिन बीतने के बाद मैं अपने पुराने तरीके की तरह भाई के साथ वक्त बिताने लगा लेकिन एक दिन भाई अपनी ससुराल भाभी को लेकर गये तो रास्ते में उनकी बाइक पंक्चर हो गई और उन्होने मुझे फोन लगाया कि मैं उनके पापा की बाइक ले कर बताई हुई जगह पर आ जाऊँ।

मैंने तुरंत उनके घर जा कर चाभी ली और भाई भाभी के पास पहुँच गया।तो भाई बोले- आगे देख कर आओ कि कोई पन्चर ठीक करने की कोई दुकान है क्या?

मैंने तुरंत गाड़ी बढ़ाई और लगभग 1.5 किमी के आगे एक दुकान मिल ही गई, मैं तुरंत आया और भाई को बताया।तो वो बोले- तुम भाभी को ले जाकर वहीं पर रुकना, मैं अभी पैदल गाड़ी लेकर पहुँचता हूँ।मैंने भाभी को गाड़ी पर बिठाया और चल प्रिया लेकिन रास्ता खराब होने के कारण भाभी के बूब्स मुझसे बार-बार टकराने लगे। मुझे पता नहीं क्यों शरीर मैं गुदगुदी से होने लगी और मैं और ज़्यादा झटके लगाने लगा।

तब भाभी बोली- तुम्हारी फुंसी अब सही है?तो मैं एकदम दंग रह गया और मैंने हड़बड़ाहट में सिर हिलाया।

तब भाभी बोली- तुम तो कभी घर आते ही नहीं हो?मैंने कहा- भाई ने कभी न्योता ही नहीं प्रिया!तो भाभी बोली- चलो तुम अपना नंबर दे दो तो मैं ही तुम्हारा न्योता कर लिया करूँगी।

मैंने भाभी को अपना नंबर प्रिया और भाई आ गये।तब मैं गाड़ी लेकर वापिस आ गया, अब मेरे दिल में भाभी के लिए पता नहीं क्यों अजीब सी हलचल होने लगी और मेरी रात करवट बदलते निकल गई।

अगले दिन दोपहर के करीब एक बजे दरवाजे की घंटी बजी और मैं बाहर निकला तो लाइट हरे रंग की साड़ी में भाभी दरवाजे पर खड़ी थी, मैंने बड़े हड़बड़ाहट में भाभी को अंदर आने के लिए बोला।

भाभी उस दिन कयामत लग रही थी, देखने में तो 34-28-36 के भरे-भरे से आम के जैसे चूचे थे। भाभी का नाम अर्पणा है, भाभी अंदर आई तो बोली- माँ कहाँ है?मैंने उन्हें बताया- नानी की तबीयत खराब है इसलिए नानी को देखने माँ-पापा आज सुबह ही गये हैं।

तब भाभी बोली- मैं फिर कभी आऊँगी।लेकिन मैंने कहा- आप हमारे घर आई हैं तो कुछ नाश्ता करके ज़रूर जाइए।तो भाभी बोली- ठीक तुम कहते हो तो नाश्ता करके ही सही!

वो बोली- नाश्ते में क्या मिलेगा?मैंने कहा- जो आपको अच्छा लगे!तो भाभी बोली- तुम पहले वादा करो कि जो मुझे अच्छा लगेगा वही नाश्ता तुम मुझे दोगे?

मैंने वादा किया और भाभी मुझसे लिपट गई।और मैं भी बगैर देर किए भाभी के होंठों का रसपान करने लगा, मैं भाभी के बूब्स कस कर मरोड़ने लगा और भाभी का ब्लाऊज मैंने एक झटके में उतार प्रिया, उनके मम्मे एकदम गोरे और कसे हुए थे जिनके बिल्कुल लाल निप्पल थे। मैं एकदम से पागल हुआ जा रहा था और उनके मम्मों का रसपान किए जा रहा था।

भाभी बोली- मेरे राजा इतनी जल्दबाज़ी क्या है, अब तो मैं अभी 3 घंटे के लिए तुम्हारी हूँ क्योंकि मैं सासू माँ से ब्यूटीपार्लर पर जाने के लिए बोल कर आई हूँ, इसलिए अब तुम मुझे अपना असली माल दिखाओ, जिसके बारे में तुम्हारे भैया ने मुझसे कहा था।

मैं तुरंत समझ गया कि भाभी उस दिन फुंसी के बारे में क्यों पूछ रही थी, मैं बोला- सारा माल आपके सामने है, जो जी करे, वही देखो!

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भाभी ने तपाक से मेरी पैंट में अपना हाथ डाल प्रिया और लंड निकाल लिया, भाभी एकदम खुशी से झूमकर बोली – यह तो वाकयी असली लंड है।और भाभी ने एकदम से अपने मुँह से चूम लिया, मुझसे लिपट गई और मेरे छाती के बालों पर अपने मुलायम हाथ फिराने लगी।

मैं तुरंत समझ गया कि अब मेरी बारी है, मैंने भाभी के पेटिकोट का नाड़ा खोल प्रिया, भाभी को बैड पर पटक प्रिया और उस स्वर्णसुमन के दर्शन के लिए जैसे ही नीचे झुका, मेरे होश उड़ गये, भाभी की चूत एकदम लाल और बिना बालों के थी, उसकी दोनों तरफ की फांकों पर 1-1 सोने की बाली काफ़ी मोटी सी थी।

यह मेरे लिए नई बात थी तो मैंने तुरंत भाभी से पूछा- ये बाली आपने क्यों पहनी हुई हैं?तो भाभी बोली- कि तुम्हारे भाई और मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं, हर साल तुम्हारे भाई एक बाली पहनाते हैं और जब ये सात हो जाएँगी तो हम दोनों सात जन्मों के लिए बंध जाएँगे, इसलिए तुम्हारे भाई मेरी छमिया को दिन रात चूसते रहते हैं।

फिर क्या था, मैं उनकी छमिया पर टूट पड़ा और अपनी जीभ से भाभी की चूत रसास्वादन करने लगा, और भाभी मेरे सिर को अपने हाथों से अपनी चूत में दबाने लगी।मैं उनकी चूत को अपनी जीभ को और अधिक गहराई तक ले जाकर चूसने लगा। थोड़ी देर बाद एकदम नमकीन रस की बौछार मेरे मुँह में हुई, जो मैंने सारा अपने हवशीपन के वश में होकर पी लिया।

भाभी का शरीर पूरा ऐंठने लगा, भाभी बोली- मेरे प्यारे साजन, अब और ना तड़फाओ, अब मुझसे रहा नही जा रहा, मेरी मुनिया बहुत प्यासी हो रही है।और भाभी अपनी टाँगें खोलकर अपनी बालियाँ खींचने लगी, उनकी मुनिया पानी छोड़ रही थी और बहुत लाल हो रही थी।मेरा लंड भी फूलकर टुनकी मार रहा था।

मैंने भाभी के कंधों को और ज़ोर से पकड़ा और ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा, मेरे लगातार लिंग प्रहारों से भाभी उत्तेजना के शिखर पर पहुँचने लगी थी, वह अप्रत्याशित रूप से मेरा साथ दे रही थी, उसका सहयोग पाकर मैंने भी अपने प्रहारों की गति तीव्र कर दी।

मेरे लिंग के घर्षण से उसके अंग प्रत्यंग में जैसे नई ऊर्जा का संचार हो गया था। मेरा लिंग उसकी मदनमणि को भी छूने लगा था।इस नए अनुभव से तो उनकी मीठी किलकारियां ही गूंजने लगी थी। भाभी का तो जैसे रोम रोम ही पुलकित और स्पंदित हो रहा था। उनकी आँखें मुंदी थी, अधर कंपकंपा रहे थे और साँसें तेज चल रही थी।

वह तो आत्मविभोर हुई जैसे स्वर्ग लोक में ही विचरण कर रही थी। मुझे लगा उनकी योनि का संकुचन बढ़ने लगा है और पूरा शरीर अकड़ने सा लगा है।

उनकी कोमल बाहों की जकड़न अब बढ़ गई थी, उनके मुँह से अस्फुट सा स्वर निकला- शानू मुझे यह क्या होता जा रहा है? विचित्र सी अनुभूति हो रही है। मेरा रोम रोम फड़क रहा है, मेरा अंग अंग तरंगित सा हो रहा है… उम्म्ह… अहह… हय… याह… तुमने तो मुझे तृप्त ही कर प्रिया। इस मीठी चुभन और पीड़ा में भी कितना आनंद समाया है… आह…!उनके मुँह से एक कामरस में डूबी मीनूर किलकारी सी निकल गई।

मुझे लगा उनकी योनि के अन्दर कुछ चिकनापन और आर्द्रता बढ़ गई है। संभवतया वह रोमांच के चरम शिखर पर पहुँच कर तृप्त हो गई थी।मैंने एक बार पुनः उन्हें कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने लिंग के प्रहारों की गति तीव्र कर दी।

उन्होंने अपने पाँव थोड़े से ऊपर कर लिए तो उनकी काजल की झंकार जैसे हमारे प्रहारों के साथ ही लयबद्ध ढंग से बजने लगी।भाभी ने लाज के मारे अपनी आँखें बंद कर ली और अपने पाँव भी नीचे कर लिए।

मैंने अपने धक्कों को गतिशील रखते हुए पुनः उसके अधरों को चूमना प्रारम्भ कर प्रिया, वो बुदबुदा रही थी- उईइ… ओह… नहीं… उईईईई इ… क्या कर रहे हो… आह… ईईइ… बाबू… उईईइ… अम्मा… ओह… रुको… मुझे… सु सु… आ… रहा है… ऊईइ… ओह… छोड़ो मुझे… ओईईइ… अमाआआ… अह्ह्ह… य़ाआअ !! हाँ मेरे साथिया… तुम्हारे प्रेम में तो मैं कब की प्यासी थी… आह… मेरी जान आह… या… ऊईइ… आम्माआअ… ईई ईईई…’उन्होंने अपनी बाहें मेरी कमर पर कस लीं और मेरे होंठों को मुँह में भर कर जोर से चूसने लगी।

उनका शरीर कुछ अकड़ा और फिर हल्के हल्के झटके खाते वो शांत पड़ती चली गई। पर उनकी मीठी सीत्कार अभी भी चालू थी। सम्भोग की तृप्ति और संतुष्टि उनके चहरे और बंद पलकों पर साफ़ झलक रही थी।

मैंने उनको फिर से अपनी बाहों में कस लिया और जैसे ही मैंने 3-4 धक्के लगाए, मेरा वीर्य उनकी चूत में टपकने लगा।अब मुझे लगने लगा था कि मेरे लिंग का तनाव कुछ और बढ़ गया है, मैंने शीघ्रता से 3-4 धक्के और लगा दिए।कुछ ही क्षणों में मेरा वीर्य निकल कर उनकी योनि में भर गया।

हम दोनों की ही मीठी सीत्कारें गूंजने लगी थी, एक दूसरे की बाहों में जकड़े हम पता नहीं कितने समय तक उसी अवस्था में पड़े रहे।अब हम लोग अब किसी ना किसी बहाने से रोज चुदाई करने की प्लानिंग करने लगे।तभी हमारे पीछे का प्लॉट बिकाऊ हुआ और भाभी ने पुराने मकान का सही नक्शा ना होने का कारण बता कर अपने ससुरजी से प्लॉट खरीदवा लिया और जल्दी ही उस प्लॉट में काम लग गया।

भाभी रोज काम देखने के बहाने शाम (हल्के अंधेरे में ) को अपने पीछे प्लॉट पर आती हैं और हम दोनों चुदाई करते हैं।

अभी 2 महीने पहले ही भाभी का गर्भ ठहर गया है लेकिन भाभी कहती है कि यह तुम्हारा ही बच्चा है, तुम ही इसके असली पिता हो। तुम्हें ही इसका नाम रखने का हक है।

अब मैं कोई अच्छा सा नाम अपने प्यारे दोस्तों से पूछना चाहता हूँ, तो कृपया मेरे ईमेल support@mohakkisse.com पर मुझे कोई अच्छा नाम बताने की कृपा करें।

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