“अंधेरे हॉल की गर्मी”
मेरा नाम रिया है। उम्र 22 साल। मैं पटना के पास एक छोटे शहर में रहती हूं। मेरी बड़ी दीदी का शादी हुए दो साल हो गए। जीजू (दीदी के पति) का नाम अजय है — उम्र 30 साल, लंबा, गोरा, जिम जाने वाला बॉडी, और बातों में बहुत शरारती। दीदी अक्सर कहती, “अजय बहुत अच्छा है, लेकिन कभी-कभी बहुत शरारत करता है।”
एक दिन दीदी ने कहा, “रिया, आज शाम को फिल्म देखने चलें? नई मूवी आई है, रोमांटिक-थ्रिलर। अजय टिकट ले आएगा।” मैं खुश हो गई। लंबे समय बाद बाहर घूमने का मौका।
शाम को हम तीनों सिनेमा हॉल पहुँचे। हॉल पुराना था, लेकिन अच्छा खासा भरा हुआ। बैक बेंच में तीन सीटें मिली — जीजू बीच में, दीदी बाईं तरफ, मैं दाईं तरफ। लाइट्स ऑफ हुईं, फिल्म शुरू हुई।
पहले 20-25 मिनट तो सब नॉर्मल था। लेकिन फिल्म में एक रोमांटिक सीन आया — हीरो-हीरोइन पास आए, किस्स करने लगे। जीजू ने धीरे से मेरी तरफ देखा। मैंने नोटिस किया, लेकिन कुछ नहीं कहा।फिर जीजू ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया। मैं चौंक गई। दीदी उस तरफ देख रही थी, फिल्म में खोई हुई। जीजू ने फुसफुसाया, “रिया… शांत रहना… बस थोड़ा मजा।”
मेरा दिल धड़कने लगा। मैंने हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने कस कर पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ मेरी सलवार के ऊपर से धीरे-धीरे सहलाने लगी। जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर… हल्का-हल्का दबाव। मैं सिहर गई।
“जीजू… मत करो… दीदी…” मैंने कान में कहा।
जीजू मुस्कुराए, “दीदी सो गई हैं। देख, फिल्म में कितना मज़ा आ रहा है। तुझे भी आएगा।”
उनका हाथ अब और ऊपर सरक रहा था। सलवार के नाड़े के पास। मैंने पैर बंद करने की कोशिश की, लेकिन जीजू ने अपना पैर मेरे पैर पर रख दिया। अब उनका हाथ मेरी चूत के ठीक ऊपर था — कपड़े के ऊपर से दबा रहे थे। गर्माहट महसूस हो रही थी। मेरा शरीर गर्म होने लगा।
फिल्म का सीन और गर्म हो गया। जीजू ने मेरी सलवार की नाड़ी खोल दी। मैं घबरा गई, लेकिन रोक नहीं पाई। उनका हाथ अंदर चला गया। पैंटी पर उँगलियाँ फिराईं। मैंने आँखें बंद कर ली। जीजू ने पैंटी साइड से सरकाई और सीधे चूत पर उँगली फेरनी शुरू की।
“उफ्फ… रिया… कितनी गीली हो गई है तू…” जीजू फुसफुसाए।
मैं काँप रही थी। क्लिट पर उँगली घुमा रहे थे। धीरे-धीरे अंदर एक उंगली डाल दी। मैंने होंठ काट लिए, आह न निकले इसलिए। जीजू ने दूसरी उंगली भी डाली। अब अंदर-बाहर कर रहे थे। मेरी चूत से रस बह रहा था।
दीदी बगल में सो रही थी, सिर मेरे कंधे पर टिका हुआ। जीजू ने अपना दूसरा हाथ मेरी छाती पर रख दिया। ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगे। निप्पल सख्त हो गए। वो उँगलियों से दबा रहे थे।
मैं अब कंट्रोल खो रही थी। जीजू ने मेरी जाँघें थोड़ी फैलाईं और तेज़ उँगलियाँ चलाईं। मैं सिहर कर झड़ गई — चुप-चाप, लेकिन चूत से पानी निकल आया। जीजू की उँगलियाँ गीली हो गईं।
फिर जीजू ने अपना लंड निकाला — अंधेरे में मैंने महसूस किया। बहुत मोटा, गरम। उन्होंने मेरी जाँघ पर रख दिया। मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ा। सहलाने लगी। जीजू सिसकारी ले रहे थे।
“रिया… अब तू मुझे गर्म कर…”
मैंने लंड सहलाया, ऊपर-नीचे किया। जीजू ने मेरी चूत में फिर उँगलियाँ डाली। दोनों एक-दूसरे को गर्म कर रहे थे। फिल्म का क्लाइमेक्स चल रहा था, लेकिन हमारा क्लाइमेक्स अलग था।
आखिर में जीजू ने तेज़ी से हाथ चलाया और मेरी जाँघ पर झड़ गए। गर्म वीर्य मेरी जाँघ पर फैल गया। मैं भी दूसरी बार सिहर गई।
फिल्म खत्म हुई। लाइट्स ऑन हुईं। दीदी जागीं। हम दोनों नॉर्मल बैठे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। जीजू ने मेरी तरफ देख कर आँख मारी।
घर लौटते वक्त कार में जीजू ने फुसफुसाया, “अगली बार… और आगे तक… सिर्फ हम दोनों।”
मैं शरमा गई, लेकिन मन में एक नई आग जल चुकी थी।
फिल्म हॉल वाली रात के बाद तीन-चार दिन बीत गए। मैं दिन भर उसी को सोचती रहती। जीजू की उँगलियाँ, उनका गरम लंड, वो गर्म वीर्य मेरी जाँघ पर… सब याद आता तो शरीर में सिहरन दौड़ जाती। दीदी को कुछ पता नहीं था, वो नॉर्मल थी। लेकिन जीजू हर बार फोन पर या मैसेज में कुछ न कुछ शरारती बात भेजते — “रिया, आज नींद आई? या मेरी याद में जाग रही हो?” मैं बस शरमा जाती, जवाब नहीं दे पाती।
फिर एक शाम दीदी ने कहा, “रिया, मैं मायके जा रही हूं दो दिन के लिए। मम्मी की तबीयत ठीक नहीं। अजय घर पर रहेगा। तू भी घर पर रहना, अकेला मत छोड़ना।”
मैंने बस “हाँ” कहा, लेकिन मन में तूफान उठ रहा था।
अगले दिन सुबह दीदी निकल गई। घर में सिर्फ मैं और जीजू। दोपहर तक सब नॉर्मल रहा। मैं किचन में चाय बना रही थी। जीजू पीछे से आए, मेरी कमर से पकड़ लिया। उनका शरीर मेरे पीठ से सटा हुआ।“रिया… अब कोई नहीं है बीच में।” उनकी साँस मेरी गर्दन पर पड़ रही थी।
Sunita Ka Jaadu – Part IV
मैं घूमी नहीं, बस बोली — “जीजू… कोई देख लेगा…”
“कौन देखेगा? दरवाजा बंद है।”
उन्होंने मुझे पलटा दिया। मेरी आँखों में देखते हुए होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। गहरा किस्स। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। मैंने जवाब दिया। हाथ उनके सीने पर रख दिए। जीजू ने मुझे काउंटर पर बिठा दिया। मेरी सलवार की नाड़ी खोल दी। हाथ अंदर सरकाया। पैंटी पहले से गीली थी।
“देख… फिल्म हॉल वाली रात से तू तैयार थी ना?”
मैंने शरमा कर सिर हिलाया। जीजू ने मेरी पैंटी उतारी। जाँघें फैलाई। घुटनों के बल बैठ गए। जीभ चूत पर रख दी। मैं चीखी — “आह्ह… जीजू… कितना गरम…”
वो क्लिट को जीभ से घुमा रहे थे। अंदर जीभ डाल रहे थे। मैंने उनके बाल पकड़ लिए। कमर उछल रही थी। कुछ ही मिनट में मैं झड़ गई — पहली बार उनके मुँह में। जीजू ने सब चाट लिया।
फिर वो उठे। अपनी पैंट उतारी। लंड बाहर आया — पहले से खड़ा, मोटा, टिप चमक रही थी।
“अब तू कर… जैसा मैंने किया था।”
मैं नीचे उतरी। घुटनों के बल बैठ गई। लंड हाथ में लिया। पहले सहलाया। फिर जीभ लगाई। टिप चाटी। जीजू सिसकारे —“हाँ रिया… पूरा मुँह में ले…”
मैंने मुँह खोला। आधा अंदर लिया। चूसने लगी। ऊपर-नीचे। जीजू मेरे बाल पकड़ कर धीरे-धीरे धक्के देने लगे। मैं गला तक लेने की कोशिश कर रही थी। उनकी साँसें तेज़।
“उफ्फ… अच्छी लग रही है… तेरी जीभ…”
कुछ देर बाद जीजू ने मुझे उठाया। किचन से बाहर निकाल कर सोफे पर ले गए। मुझे लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं। लंड चूत पर रखा। धीरे से अंदर डाला।
“आह्ह… जीजू… कितना मोटा… दर्द हो रहा है…”
“धीरे… आदत पड़ जाएगी।”
पूरा अंदर गया। वो रुके। फिर धक्के शुरू। पहले धीमे। मैं कराह रही थी —“हाँ… और अंदर… अच्छा लग रहा है…”रफ्तार बढ़ी। सोफा हिलने लगा। जीजू मेरी छातियाँ मसल रहे थे। ब्लाउज खोल कर निप्पल चूस रहे थे। मैं उनकी पीठ नाखूनों से खरोंच रही थी।
“जोर से… चोदो जीजू… मेरी चूत फाड़ दो…”
जीजू ने मुझे घुमाया। पीछे से डाला। कुत्ते की तरह। मेरी गांड पकड़ कर जोर-जोर से ठोकने लगे। हर थप्पड़ पर “पच-पच” की आवाज़। मैं चीख रही थी —“आह्ह… हाँ… इसी तरह… गहरा… मैं झड़ रही हूं…”
दूसरी बार झड़ गई। जीजू भी अब तेज़ हो गए। आखिरी झटके मारे और अंदर ही झड़ गए। गर्म वीर्य मेरी चूत में भर गया। बाहर बहने लगा।
हम दोनों सोफे पर गिर गए। जीजू ने मुझे गले लगाया।
“रिया… अब से जब भी दीदी जाएगी… हम ऐसे ही करेंगे।”
मैं मुस्कुराई। “हाँ जीजू… लेकिन अगली बार… और लंबा… और गंदा।”
शाम को दीदी का फोन आया — “सब ठीक है ना?”
जीजू ने फोन उठाया, मेरी तरफ देख कर मुस्कुराए — “हाँ जी… सब बहुत ठीक है।”
अगला भाग पढ़े:-अंधेरे हॉल की गर्मी-2