Group Sex Story

अंगूर का मजा किशमिश में-10

लेखक: सारिका कंवल दिनांक: 28-07-2023 पठन समय: 10 मिनट

सारिका कंवलमैं अगले दिन उठी और अपने भाई और भाभी से कहा- आज दोपहर में मैं सुधा और अजय के साथ उनको गाँव दिखाने और गाँव के बारे में बताने के लिए जा रही हूँ तो देर हो जाएगी।मैंने तौलिया और बाकी का सामान साथ ले लिया।मैं घर से निकल ही रही थी कि मेरे पति का फोन आया और उन्होंने मुझसे कहा- घर जल्दी आ जाओ.. कुछ काम है !मैंने कहा- ठीक है मैं कल आ जाऊँगी।यह सुन कर मेरा दिल टूट सा गया क्योंकि पिछले 3 रातों से जो हो रहा था, उसमें मुझे बहुत मजा आ रहा था और ये सब अब खत्म होने वाला था।मैं निकल पड़ी, रास्ते में वो दोनों तैयार खड़े थे।हम नदी की ओर चल पड़े, रास्ते में हम बातें करते जा रहे थे।बातों-बातों में हम नदी के किनारे पहुँच गए, पर हम ऐसी जगह की तलाश करने लगे, जहाँ कोई नहीं आता हो और हम नदी में नहा भी सकें।चलते-चलते हम पहाड़ी के पास पहुँच गए, जहाँ से जंगल शुरू होता था। थोड़ा अन्दर जाने पर ये हमें सुरक्षित लगा क्योंकि ये न तो पूरी तरह जंगल था, न ही यहाँकोई आता था।छोटी सी पहाड़ी सी थी, जहाँ से झरना जैसा बह रहा था और नीचे पानी रुका सा था, तालाब जैसा.. जिसमें कुछ बड़े-बड़े पत्थर थे।मेरी सहेली ने तब अपने बैग में से एक कपड़ा निकाला और मुझसे कहा- पहन लो।मैंने देखा तो वो एक छोटी सी पैन्टी और ब्रा थी।मैंने पूछा- ये क्या है.. मैंने तो पहले से पहनी हुई है।तब उसने कहा- यह मॉडर्न टाइप की है, इसे बिकिनी कहते हैं ! लड़कियाँ समुन्दर में नहाने के टाइम पहनती हैं !मैंने पूछा- क्या ये मुझे फिट होंगे?तो उसने कहा- हाँ.. मेरे साइज़ का है।मैंने साड़ी उठा कर पहले अपनी पैन्टी निकाल दी, फिर दूसरी पहनी फिर ब्लाउज निकाल कर ब्रा हटा कर दूसरी पहनी जिसको पहनने में मेरी सहेली ने मेरी मदद की, फिर मैंने अपनी साड़ी और पेटीकोट निकाल प्रिया।अजय ने मुझे इस लिबास में बहुत गौर से देखा और कहा- तुम इसमें बहुत सेक्सी लग रही हो !मैंने सुधा से पूछा- तुमने ऐसे क्यों नहीं पहनी?तो उसने अपनी सलवार कमीज उतार दी और मुझे दिखाया बिल्कुल मेरी तरह का उसने भी पहले से पहन रखा था।यह लिबास इतना छोटा था कि मुझे अजीब लग रहा था, पर खैर.. वहाँ हम तीनों के अलावा कोई नहीं आने वाला था।ब्रा इतनी छोटी थी कि मेरे आधे से ज्यादा स्तन दिखाई दे रहे थे और पैन्टी तो बस नाम की थी। एकदम पतला धागे जैसी जिससे मेरी योनि ही सिर्फ ढकी थी बाकी मेरे कूल्हे तो साफ़ खुले दिख रहे थे।मेरी सहेली को शायद इन सबकी आदत थी, तो उसे कुछ खास फर्क नहीं पड़ रहा था। तभी अजय ने भी अपने कपड़े निकाल दिए और उसका पहनावा देख मुझे हँसी आने लगी, पर मैंने खुद को काबू में किया और हँसी रोक ली।उसने जो अंडरवियर पहनी थी, वो बिल्कुल लड़कियों की पैन्टी की तरह थी और उसके चूतड़ साफ़ दिख रहे थे।हम पानी में चले गए और नहाने लगे और एक-दूसरे के साथ छेड़खानी करने लगे। अजय कभी मेरे स्तनों को दबाता तो कभी मेरे चूतड़ों को या फिर मेरी सहेली के।हम भी कभी उसके चूतड़ों पर चांटा मारते या उसे छेड़ते.. काफी मजा आ रहा था। तीनों पानी के अन्दर थे।तभी अजय ने मुझसे पूछा- तुमने अब तक कितने लोगों के साथ सम्भोग किया है?मैंने अनजान बनते हुए कहा- सिर्फ 3 लोगों से !उसने मुझसे फिर पूछा- किसके-किसके साथ?मैंने कहा- पति, अमर और तुम्हारे साथ !हालांकि मैंने अजय से पहले और अमर के बाद एक और लड़के के साथ कुछ दिन सेक्स किया था, पर उस वक़्त बताना ठीक नहीं समझा।फिर मेरी सहेली ने मुझसे पूछा- अमर कौन है?मैंने उसको बताया- मैं उससे उड़ीसा में मिली थी और काफी दिन हमारे बीच सेक्स हुआ।फिर मुझसे पूछा- मेरा यादगार दिन कौन सा है?मैंने उस वक़्त कह प्रिया- सभी लोगों के साथ बिताए दिन यादगार हैं !पर उन्होंने जोर प्रिया तो मैंने बता प्रिया- अमर के साथ।तभी अजय ने मुझसे पूछा- ऐसा क्या था और कोई एक दिन ही यादगार होगा हर दिन नहीं।तब मैंने उनको बताया- उसके साथ मैंने 16 दिन लगातार सम्भोग किया था, वो भी दिन में और रात में कई-कई बार और एक दिन 24 घंटे के अन्दर हमने 11 बार किया था।वो लोग हैरान हो गए कि ऐसा कैसे किया !तब मैंने बताया कि लगातार नहीं.. बल्कि बीच-बीच में रुक कर 24 घंटे में किया था।फिर मैंने बताया कि अगले दिन मेरी हालत क्या थी, वो लोग उत्सुकता से मेरी बातें सुनने लगे।मैंने उनको बताया- उस दिन पति एक दिन के लिए बाहर गए थे, अगले दिन आने वाले थे। तो करीब 11 बजे हमने एक बार किया फिर दोपहर को 3 बार, फिर शाम को 2 बार, फिर रात भर में 5 बार, सुबह 8 बजे आखिरी बार किया तो मेरी हालत ख़राब हो गई थी। न वो झड़ रहा था न मैं, मैं बार-बार उससे विनती कर रही  थी कि मुझे छोड़ दे.. पर वो मानने को तैयार नहीं था। बस थोड़ी देर कह कह के मुझे बेरहमी से चोद रहा था। मेरी बुर में बहुत दर्द होने लगा था और खून निकल आया था। जब हम अलग हुए तो मैं ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।उसके जाने के बाद मैं वैसे ही नंगी पड़ी रही और जब आँख खुली तो देखा के बिस्तर पर खून लगा है और मेरी जाँघों और बुर में भी। मैं उठ कर साफ़ करने के लिए खड़ी हुई तो जाँघों में इतना दर्द था कि मैं लड़खड़ाते हुए गिर गई। 12 बज रहे थे मैंने उसको फोन करके बुलाया तो वो दफ्तर से छुट्टी लेकर आया और मुझे उठाकर बाथरूम ले गया। वहाँ मैंने खुद को साफ़ किया, फिर दिन भर सोई रही।शाम को अमर ने बताया कि उसको मालूम नहीं था कि खून निकल रहा है और उसके लंड में भी इतना दर्द हो रहा था कि उसने चड्डी तक नहीं पहनी उस दिन।ये सब सुनकर उनके होश उड़ गए और मेरी तरफ देखते हुए कहा- कमाल है, तुम्हारी सेक्सी देह किसी को भो जोश से भर देगी इसमें उस बेचारे का दोष नहीं !हम अब यूँ ही खेलते हुए पानी में थोड़ी और गहराई में चले गए। वहाँ पानी करीब मेरे गले तक था और ऊपर से झरने जैसा पानी गिर रहा था, जो अधिक नहीं था।पास में कुछ पत्थर थे, अजय एक पत्थर पर पीठ के बल खड़ा हो गया, फिर मुझे अपनी और खींच लिया।मुझे पीठ के बल अपने से चिपका लिया और मेरे स्तनों को पकड़ कर मुझे भींच लिया। तभी सुधा ने नीचे पानी के अन्दर जाकर मेरी पैन्टी निकाल कर पत्थर पर रख दी, फिर ऊपर आकर मुझे चिपक गई।अब मेरा और सुधा का चेहरा आमने-सामने था तथा अजय मेरे पीछे। अजय ने अपनी टाँगों से सुधा को जकड़ लिया और मैं उन दोनों के बीच में थी।सुधा ने मेरे सिर को किनारे किया और अपने होंठों से अजय के होंठों को चूमने लगी। तब मैंने भी सुधा की पैन्टी निकाल दी।अजय ने मेरे स्तनों को मसलते हुए मेरी ब्रा को निकाल कर अलग कर प्रिया, फिर सुधा की ब्रा को निकाल प्रिया।हम दोनों औरतें अब नंगी थीं।अजय ने अब सुधा को छोड़ प्रिया और मुझे अपनी और घुमा कर मेरे होंठों को चूसने लगा।तब सुधा ने अजय का अंडरवियर निकाल प्रिया।अब हम तीनों ही नंगे हो चुके थे।मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था, क्योंकि दिन का समय था और हम खुले आसमान के नीचे थे।अजय मुझे चूमते हुए कभी मेरे स्तनों को दबाता तो कभी चूतड़ों को। मैं भी उसके होंठों को चूसने और चूमने में मग्न हो गई।मेरे हाथ भी हरकत करने लगे, मैंने उसके लिंग को पकड़ कर सहलाना शुरू कर प्रिया, कभी मैं उसके लिंग को सहलाती तो कभी उसके अन्डकोषों को।तभी सुधा मेरे पीछे आ गई और मुझे पकड़ कर अपना हाथ मेरी योनि में लगा प्रिया।मैंने कहा- क्या कर रही हो?तो उसने जवाब प्रिया- तुझे तैयार कर रही हूँ, तुझे गर्म कर रही हूँ चुदवाने के लिए !उसकी इस तरह की बातें मुझे अजीब तो लग रही थीं, पर एक तरफ से मुझे उत्तेजित भी कर रही थीं।फिर सुधा ने मेरी योनि को सहलाते हुए 2 उंगलियाँ अन्दर डाल दीं और उसे अन्दर-बाहर करने लगी।मैं गर्म होने लगी थी, उधर मेरे सहलाने की वजह से अजय का लिंग भी सख्त हो चुका था।अजय ने तब मेरी टाँगों को फैला कर अपने कमर के दोनों तरफ कर मुझे गोद में उठा लिया। उसने मेरी दोनों जाँघों को पकड़ कर सहारा प्रिया और मैं उसके गले में दोनों हाथ डाल कर किसी बच्चे की तरह लटक गई।फिर सुधा ने अजय का लिंग पकड़ कर मेरी योनि पर रगड़ना शुरू कर प्रिया, इससे मुझे बहुत मजा आ रहा था, मन कर रहा था कि जल्दी से उसे मेरी योनि में डाल दे।मैं भी अपनी योनि को उसके ऊपर दबाते हुए अजय को चूमने लगी।तब अजय ने मुझसे कहा- आज एक चीज़ तुम दोनों को करना होगा मेरी खातिर !मैंने पूछा- क्या?कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।support@mohakkisse.com