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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 632 बार

अंजान दोस्त ने मेरी चूत मारी(Anjan dost ne meri chut maari)

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21 Dec 2014 को प्रकाशित

अंजान दोस्त ने मेरी चूत मारी(Anjan dost ne meri chut maari)
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मैं दीपा 45 वर्षीय शादी-शुदा हूँ। मैं अपने पति और बच्चों के साथ मज़े में रह रही थी। पर अचानक मेरे पति की नौकरी में कुछ मुसीबत होने लगी और जिसकी वजह से वह थोड़े परेशान रहने लगे। इसी कारन हमारे बीच में ज्यादा सेक्स नहीं हो रहा था।

मैं भी थोड़ा परेशान थी। मैंने सोचा कि क्यों नहीं पार्क जाना शुरू करूँ। थोड़ा मन शांत होगा और नए-नए लोगों से मुलाकात होगी। मैंने अपने पति से बात की कि मैं सुबह जल्दी उठ कर पार्क जाउंगी, तोह उनको कोई परेशानी नहीं थी। उन्होंने कहा कि तुम चली जाओ वैसे भी उनकी सुबह की शिफ्ट होती है तो वह सुबह 4 बजे निकल जाते हैं। तो मैंने उनके जाने के बाद का प्रोग्राम बना लिया और घर लॉक करके पार्क जाना शुरू किया।

नवंबर से मेरा पार्क जाना शुरू हो गया मैं पैदल अकेले जाती थी। कुछ दिनों के बाद मैं लोगों के साथ घुल-मिल गयी और काफी लोगों के साथ बातें भी होती थी। उनमें से 1 का नाम राजन था। मेरी और राजन की काफी बातें होने लगी थी। राजन भी शादी-शुदा था और 43 साल का हैंडसम था। मैं और वह काफी बातें किया करते थे और क्यूंकि राजन का अपना व्यवसाय था तो वह ज्यादातर अपनी BMW से आता था।

कुछ दिनों के बाद राजन ने मुझे कहा कि, “मैं तुम्हे घर छोड़ दिया करूँगा। कहाँ तुम पैदल जाते हो।” तो इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं हुई और राजन मुझे मेरी सोसाइटी से थोड़ी दूर छोड़ने लगे, क्यूंकि मैंने ही उन्हें कहा था कि कहीं कोई देख ना ले मुझे ऐसे। ऐसे करते 1 महीना गुज़र गया और मैं और राजन अब काफी खुल गए थे।

अब वह मुझे घर से भी लेने आने लगा था और मेरी सोसाइटी से थोड़ी दूर मेरी वेट करता था। मैं अब अपनी परेशानियों से थोड़ा परे हो गयी थी और राजन के साथ थोड़ी खुश रहने लगी थी। ऐसे करते 2 महीने हो गए थे और दिसंबर की ठंड काफी ज्यादा होने लगी थी।

राजन कभी मुझसे बोलता था कि मैं काफी खूबसूरत हूँ और बहुत ही सेक्सी लगती हूँ। मैं उसकी इस बात से थोड़ा शर्मा जाती थी। जब भी मैं राजन की कार में बैठती थी तो राजन मेरी टांगों पर सूट के ऊपर हाथ फेरता रहता था। मुझे इसमें कोई परेशानी ना लगती थी और राजन गाड़ी चलाते हुए मेरी टांगों पर हाथ फेरता रहता।

अब थोड़े दिनों से उसका हाथ मेरी चूत के पास भी चला जाता और मेरे सूट के ऊपर से कभी वह मेरी चूत को सहलाता रहता। 1 सुबह उसने मुझसे कहा कि, “चलो कॉफ़ी पीने चलते हैं।” मैंने कहा कि, “4:15 बजे इतनी सुबह कहाँ मिलेगी?” तो उसने कहा कि,‌ “तुम चलोगी तो।” मैंने हाँ बोला और वह मुझे गाड़ी में लेकर 1 दुकान पर ले गया। वहां से उसने 2 कॉफ़ी ली और गाड़ी जो दुकान से कुछ दूर पर खड़ी थी वहां आ गया।

फिर मैं और वह दोनों कॉफ़ी पीने लगे। कॉफ़ी पीते-पीते उसने मेरी ओर देखा तो मेरे होंठों पर कॉफ़ी की झाग लगी हुई थी। तो राजन मेरे करीब आया और उसने मेरे होठों को चूम कर कॉफ़ी की झाग को साफ़ किया। मैं थोड़ा हड़बड़ाई कि क्या हुआ तो मैंने उसे डांटा कि ऐसा क्यों किया। तो उसने कहा कि, “कॉफ़ी की झाग लगी थी। वह साफ़ की।” मैंने कहा कि, “यहाँ ऐसे कोई देख लेता तो?” इस बात पर उसने कहा कि, “कोई नहीं है यहाँ, जो हमें देखेगा।”

यह कह कर हम कॉफ़ी पीने लगे और राजन का हाथ मेरी टांगों पर चलने लगा और इस बार उसका हाथ मेरी चूत के आस-पास ही रह रहा था। फिर से मेरे होंठों पर झाग लग गयी थी तो दुबारा राजन मेरे करीब आ कर मेरे होठों पर लगी झाग हटाने लगा और इस बार उसने मेरे होठों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। मुझे थोड़ा अच्छा लगा तो थोड़ा चूसने के बाद हम दोनों अलग हुए, और मैंने उसे बोला कि, “टाइम ज्यादा हो गया है, तो मुझे घर पर छोड़ आओ।”

फिर उसने गाडी स्टार्ट की और मेरी टांगों पर हाथ फेरना चालू रखा। अब वह सिर्फ मेरी चूत पर ही हाथ फेर रहा था और कभी मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत में ऊँगली डालने की कोशिश करता। ऐसा करते हम दोनों मेरी सोसाइटी के पास आ गए। उसने उतारने से पहले मुझे अपनी बाहों में लिया और मेरे होठों को चूम कर मुझे बाय बोला। मैंने भी उसके गालों पर किस्स की और गाड़ी से उतर कर अपनी सोसाइटी की तरफ चली गयी।

इस तरह मैं रोज़ 4 बजे घर से निकलती और राजन के साथ थोड़ी देर गुरूद्वारे में जाते। उसके बाद हम दोनों कहीं कॉफ़ी पीने जाते। उस दिन बहुत ठंड थी और मैं और राजन कॉफ़ी पीने गए। बाहर कोहरा भी बहुत था। राजन ने 2 कॉफ़ी ली और थोड़ा आगे थोड़ी खाली जगह पर गाड़ी खड़ी कर दी। फिर मैं और वह कॉफ़ी पीने लगे और राजन मेरी टांगों पर अपना हाथ चलाने लगा। वो मेरी चूत के पास जाने लगा।

क्यूंकि मैं अपनी टांगें जोड़ कर बैठी थी तो राजन ने मेरे करीब आ कर मेरे कान में कहा कि मैं अपनी टाँगे खोल कर बैठूं। मैंने पुछा क्यों, तो उसने जवाब नहीं दिया और बोला, “खोल कर बैठो ना।” मैं समझ गयी थी कि उसने अपना हाथ मेरी चूत पर फेरना था, इसलिए उसने ऐसा कहा। तो मैं अपनी टांगें खोल कर बैठ गयी और उसका हाथ मेरी चूत के पास चला गया।

अब वो सलवार के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगा। मैंने उसे बोला कि, “ऐसा नहीं करो, कोई देख लेगा तो?” उसने कहा कि, “शीशों पर फिल्म लगी हुई है, कोई नहीं देख सकता।” फिर वह मेरे करीब आ कर मेरे होठों को चूसने लगा और बोला-

राजन: दीपा तुम बहुत सेक्सी हो।

दीपा: राजन ऐसी बातें नहीं करो।

राजन: क्यों क्या होता है ऐसी बातों से?

दीपा: पता नहीं।

और इतना बोल कर मैं शर्मा गयी।

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राजन (थोड़ी धीरे से): दीपा, क्या तुम अपनी सलवार ढीली कर सकती हो?

दीपा (चौंक कर): पागल हो, कोई देख लेगा ऐसे हमें!

राजन: कोई नहीं देखेगा, प्लीज।

और इतना बोल कर राजन ने अपने दोनों हाथों से मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ मेरी पैंटी के अंदर दाल कर मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह की आवाज़ें निकलने लगी और मेरी चूत एक-दम गीली हो गयी थी। मैंने उसे रोकना चाहा पर रोक नहीं पायी, क्यूंकि मुझे भी उसका हाथ अपनी चूत पर चलना अच्छा लग रहा था।

अब राजन ने 1 हाथ मेरी चूत के छेद में डाला और अपने दूसरे हाथ से अपना पायजामा और अंडरवियर नीचे करके अपना बड़ा सा लंड बाहर निकाल लिया। मैंने पूछा,‌ “यह क्या कर रहे हो?” उसने कुछ नहीं कहा और मेरे हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया। मैं कुछ नहीं बोल पायी और उसके बड़े और मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ लिया।

अब राजन ने मेरी टांगों को और चौड़ा किया, जिससे उसका हाथ आसानी से मेरी गीली चूत के अंदर जा सके और अपनी ऊँगली मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगा। मैं पागल हो रही थी और मैंने भी उसके लंड की मुठ मारनी शुरू कर दी। थोड़ी देर मेरी चूत के अंदर ऊँगली करने के बाद मेरी चूत का पानी झड़ गया। तो मैंने अपना हाथ उसके लंड पर ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे करने लगी।

फिर थोड़ी देर के बाद उसके लंड ने ज़ोर की पिचकारी मारी, और उसका पानी निकल गया और डैशबोर्ड पर गिर गया। हम दोनों शांत हुए तो उसने मेरे होंठों को चूसा और कपड़े से अपना डैशबोर्ड साफ़ किया। फिर मुझे घर छोड़ने के लिए चल दिया।

मेरी सोसाइटी के पास पहुँचने के बाद उसने मुझे ज़ोर से चूमा और बोला कि कल मैं जल्दी आऊं। तो मैंने पूछा क्यों। उसने कहा कि, “बस आ जाना।” मैंने उसे हाँ बोला और घर चल दी।

अगले दिन मैं जल्दी से तैयार हुई और आज मेरे हस्बैंड को भी जल्दी जाना था। तो उनके जाते ही मैं घर को लॉक करके चल दी। मेरे दोनों बच्चे सो रहे थे। सोसाइटी से कुछ दूर राजन की गाड़ी खड़ी थी तो मैं जा कर उसमे बैठ गयी। आज बहुत ज्यादा कोहरा था और आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। राजन ने मुझे देखा और मुझसे गले लग कर मेरे होठों को चूसने लगा। मैंने बोला कि, “यहाँ से चलो, कोई देख लेगा।”

हम दोनों निकल गए और राजन ने अपनी गाड़ी एक सुनसान जगह पर रोक दी। वहां कोई आता-जाता नहीं था। उसके बाद उसने अपनी गाड़ी पर कवर चढ़ा दिया। अब ऐसे लग रहा था जैसे किसी की गाड़ी वहां पार्क थी। उसके बाद उसने कार का दरवाज़ा खोल कर मुझे पीछे बैठने को कहा। मैं गाड़ी के पीछे आ गयी और वह भी अंदर आया और गाड़ी बंद कर दी।

मैंने पुछा कि, “कवर क्यों चढ़ाया?” तो उसने कहा कि, “अब हमें कोई नहीं देख सकता।” और यह बोलते ही वह मेरे से चिपट गया और मुझे चूमने लगा। मेरी सांसें तेज हो रही थी, और मैं भी उससे चिपट गयी। हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे। उसके बाद उसने बोला कि उसे मेरा दूध पीना था जैसे छोटे बच्चे को पिलाते हैं। तो मैं गाड़ी पर टेक लगा कर बैठ गयी और वह मेरी गोदी में लेट गया। फिर मैंने अपनी कमीज ऊपर की।

नीचे मैंने ब्लू कलर की नेट की ब्रा पहनी थी। उसको ऊपर किया और अपनी निप्पल उसके मुँह में दे दी। वह उसे चूसने लगा और मैं आअह्ह्ह आआह्ह्ह्ह की आवाज़ें निकलने लगी। उसके बाद उसने अपना पायजामा और टी-शर्ट और अंडरवियर उतार दिया और एक-दम नंगा हो गया। मैंने कहा कि, “कोई देख लेगा।’ उसने कहा,‌ “अब कोई नहीं देख सकता।”

फिर वो मेरी कमीज उतारने लगा। मैंने खुद अपनी कमीज उतार दी। उसके बाद उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोला और उतारने को बोला। मैंने सलवार भी उतार दी और अब उसके सामने मैं ब्लू कलर की ब्रा और पैंटी में थी। राजन ने मुझे लिटाया और मेरे पास लेट कर मेरे होठों को चूसने लगा, और एक हाथ मेरी पैंटी में डाल कर मेरी चूत सहलाने लगा।

मैं भी उसके लंड को अपने हाथों में लेकर ऊपर-नीचे करने लगी। उसके बाद राजन ने मेरी पैंटी उतारी और मेरी चिकनी चूत देख कर पागल हो गया और मेरी टांगों को खोल कर उसे चाटने लगा। उसकी गरम जीभ जैसे ही मेरी चूत पर लगी, मेरे मुँह से आह्ह आअह्ह्ह ऊऊफफफफ ओह्ह्ह्ह निकलने लगी। फिर मैंने उसे बोला कि, “जानू और चाटो मेरी चूत को।” इसके बाद उसने अपना लंड मेरे मुँह की तरफ कर दिया और खुद लेट कर मेरी चूत चाटने लगा।

मैंने उसके लंड को अपने मुँह में लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। हम दोनों पागल हो रहे थे। मैंने बोला, “जानू, अब जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो। मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा।” और यह बोलते ही राजन ने मेरी टांगें खोली और अपना गरम लंड मेरी चूत के छेद पर रख कर एक झटका मारा। उसका लंड मेरी चूत में फिसल कर अंदर चला गया।

उसके बाद वो अपने लंड को मेरी चूत के अंदर-बाहर करने लगा। मैं भी अपनी चूत को ऊपर-नीचे कर रही थी और मेरी आवाज़ें अब तेज़ हो रही थी। मैंने बोला, “जानू कोई आएगा तो नहीं ना?” तो उसने ना में सिर हिलाया और ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूत चोदने लगा। मैं भी उसका साथ दे रही थी। थोड़ी देर के बाद मैंने उसे बोला कि, “जानू मैं झड़ने वाली हूँ।” तोः उसने अपने लंड की स्पीड बढ़ा दी, और जल्दी ही मैं झड़ गयी। उसके बाद राजन ने मुझे बोला कि, “रानी मैं भी आने वाला हूँ।” तो मैंने कहा की, “मेरी चूत में ही झड़ जाओ।”

फिर राजन ने ढेर सारे पानी से मेरी चूत भर दी। उसके बाद राजन मेरे ऊपर गिर गया और मेरी निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं उसके बालों पर हाथ फिराने लगी। थोड़ी देर के बाद हम दोनों अलग हुए और जैसे ही मैं उठी, मेरी चूत में से सारा पानी निकल कर सीट पर गिरने लगा। राजन ने टिश्यू से मेरी चूत साफ़ की और सीट भी। उसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहने और राजन मुझे घर छोड़ने चल दिया। सोसाइटी से कुछ दूर ही उसने गाड़ी रोकी और हम दोनों ने एक-दूसरे को किस्स की। फिर मैं मुस्कुराती हुई अपने घर चल दी। मैं बहुत खुश थी, क्यूंकि आज काफी महीनों के बाद मेरी चूत की प्यास बुझी थी।

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