होम पर वापस जाएं
Hindi Chudai Kahani पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 565 बार

अगर मुझसे मोहब्बत है-18(Agar mujhse mohobbat hai-18)

iloveall ?️

01 Jan 2016 को प्रकाशित

अगर मुझसे मोहब्बत है-18(Agar mujhse mohobbat hai-18)
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

मोहब्बत की यह महफ़िल में चलो कुछ खेल खेलेंगे।

वह गर पेलेंगे उनके लंड की हम मार झेलेंगे।

छिपाएंगे ना चूत अपनी ना चूचियों को छिपाएंगे।

चूसेंगे लंड उनका हम खुले दिल से चुदवायेंगे।

मैंने किरण के स्तनों के ऊपर से छोटी सी टॉप के आवरण को हटा कर, रीता के पके हुए खरबूजों से फूले हुए स्तनों के ऊपर नाचती हुई सख्त गुलाबी रंग की निप्पलों को अपनी उंगलियों में दबाते हुए किरण को कहा, “पता नहीं इस वक्त तुम्हारे पति सूरज मेरी पत्नी रीता को स्विंमिंगपूल में ही पकड़ कर हमारी ही तरह चूम ना रहे हों।”

किरण ने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे लगता है की हमारी मेहनत आज जरूर रंग लाएगी, और तुम्हारी बीवी आज जरूर मेरे पति से चुदवायेगी। उस पार्टी में रीता ने सूरज का तगड़ा लंड महसूस किया है। मैं जानती हूं कि कोई भी स्वस्थ युवा स्त्री स्वाभाविक रूप से यदि मानसिक संकीर्णता से ऊपर उठने का मादा रखती हो, उसके लिए योग्य वातावरण हो, और उसे सही मौक़ा मिले, तो मेरे पति सूरज जैसे मनपसंद हैंडसम मर्द के तगड़े लंड से चुदवाने के लिए वह लालायित रहेगी ही। इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है।”

मैंने किरण की छोटी सी पैंटी को नीचे उतारा और किरण ने उसे अपने पांव से नीचे की ओर खिसका कर निकाल फेंका। मैंने कहा, “किरण, मेरी पत्नी रीता को चुदवाना ही हमारा एक मात्र ध्येय नहीं है। मुझे भी तुम्हें चोदना है वह तुम क्यों भूल रही हो?”

किरण ने मुझे अपने बाहुपाश में और सख्ती से जकड़ते हुए मेरी आँखों में आँखें डालते हुए एक शरारती मुस्कान देते हुए कहा, “अगर मैं भूलना भी चाहूं तो तुम मुझे भूलने भी दोगे क्या?”

मैंने किरण की टांगों को फैलाया और उसकी जांघों के बीच किरण के प्रेम छिद्र की पंखुड़ियों को अपनी जीभ से चाटता हुआ बोला, “तुम्हें याद दिलाने के लिए मैं पहले यह तो देखूं कि तुम्हारी चूत से कितना स्त्री रस रिस रहा है और उसका स्वाद कैसा है?”

जैसे ही मेरी जीभ ने किरण की चूत की पंखुड़ियों को अपनी जीभ से कुरेदना और किरण की चूत से रिस रहे स्त्री रस को चाटना और निगलना शुरू किया, किरण की बोलती बंद हो गयी, और वह अपनी चूत पर पूरी तरह अपना पूरा ध्यान केंद्रित करती हुई अपने मुंह से सिकारियां निकालने लगी। जैसे-जैसे मैं किरण की चूत को और जोश से चाटता गया, वैसे-वैसे किरण का उन्माद बढ़ता ही गया, और उसके मुंह से निकल रही सिसकारियों की आवाज और तेज होती गयी।

कुछ ही पलों में वह क्लब हॉल किरण की सिसकारियों से गूंजने लगा। किरण मेरी चूत भक्ति देख कर हैरान रह गयी। कुछ ही देर में किरण से मेरी जीभ का कुरेदना बर्दाश्त से बाहर होने लगा। तब वह मुझे पकड़ कर हिलाती हुई बोली, “राज मुझे तुम्हारा लंड चूसना है यार! अब तुम मेरी चूत को कुछ आराम दो। उसे आज रात तुम्हारे लंड का पूरा रस निकाल लेना है।”

ऐसा कह कर किरण ने मेरी निक्कर निकाल दी, और खुद नीचे झुक कर बैठ गयी, और मेरा लंड अपने मुंह के करीब रख कर मेरे लंड का टोपा चाटने लगी।काफी समय से मेरी बीवी रीता ने मेरा लंड अपने मुंह में लिया नहीं था। मैं उसे बार-बार कहता रहता था पर वह कुछ ना कुछ बहाना कर मेरी बात को टाल देती थी। किरण की जीभ से मेरे लंड के टोपे को चाटने से मेरे पूरे बदन में जैसे एक बिजली का झटका सा लगा। मेरी कमर मारे उत्तेजना के बल खाने लगी। मैं अपने मुंह से “उन्ह… ओह… आह…” की आवाजें निकालने लगा।

किरण ने धीरे-धीरे मेरा लंड उसके मुंह में लेते हुए अपने होंठों से उसे ऐसा जबरदस्त उत्तेजक उन्माद पैदा किया कि मेरे लंड की रगों में मेरे वीर्य का उफान उठने लगा। किरण मेरे उन्माद से और भी उत्साहित हो कर और जोर से मेरे लंड को अपने मुंह से अपने होंठों के बीच से अंदर-बाहर करने लगी। मुझे मेरी पत्नी ने कभी इतना बढ़िया ओष्ठ मैथुन का अवसर नहीं दिया। मैं किरण की इस हरकत के कारण ही उसके ऊपर कुर्बान सा हो गया।

मुझे तब समझ में आया कि चुदाई में विविधता के क्या मायने होते हैं। हर पुरुष और स्त्री की चोदने और चुदवाने के अलग-अलग तरीके होते हैं, अलग-अलग लंड या चूत की अलग-अलग लम्बाई मोटाई या गहराई होती हैं। अलग-अलग स्तनों की अलग-अलग गोलाई, सख्ती या नरमी होती है। अलग-अलग जांघों के अलग-अलग आकार होते हैं। अलग-अलग गांड के अलग-अलग गालों की कोमलता या विशालता होती है।

अलग-अलग व्यक्तियों के अलग-अलग तरीके के केश होते हैं। अलग-अलग शरीर की अलग-अलग रचना होती है, और सब से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि चोदने और चुदवाने की हरेक स्त्री या पुरुष की अलग-अलग मानसिकताएं होती हैं, और ऐसी और भी कई तरह की विविधताएं होती है।

हर पुरुष और स्त्री इस विविधता से एक दूसरे को चोदना या एक-दूसरे से चुदवाना चाहते हैं। यह प्रकृति का नियम है। इस प्राकृतिक नियम को नजरअंदाज किया जाए तो कई विकृतियां होती हैं जैसे स्त्री और पुरुष का चोरी छिपे नाजायज सम्बन्ध स्थापित करना इत्यादि।

इसके कारण कभी-कभी गंभीर सामाजिक या आर्थिक या पारिवारिक संकट हो सकते हैं। इससे बेहतर है कि एक-दूसरे की सहमति से विवाहेतर सम्भोग तक का सम्बन्ध बनाना और उसे सम्भोग तक ही सीमित रखना और उसे सामाजिक, आर्थिक या पारिवारिक संबंधों से दूर रखना।

हालांकि हमारे मानसिक और सामाजिक परिपेक्ष में यह जरा सा भी आसान नहीं है, बल्कि बहुत ही चुनौतीपूर्ण है। कुछ गिने-चुने लोग ही इसे सही तरीके से सफलतापूर्वक कर पाते हैं। पर यदि इरादा पक्का हो और सही मौक़ा हो तो यह हो सकता है।

शायद किरण के मुकाबले बहुत कम स्त्रियां इतनी दक्षता से ओष्ठ मैथुन करतीं होंगी। जो भी स्त्रियों से मेरा अनुभव रहा था वह किरण मुकाबले में कुछ भी नहीं थी। जिसमें मेरी पत्नी रीता को भी शामिल करूंगा।

मैं किरण के ओष्ठ मैथुन से झड़ने के कगार पर पहुंच रहा था। जिसके कारण मैंने किरण को रोका और मैंने किरण को अपने नीचे लिटा कर मैं उसके ऊपर सवार हो गया। किरण की दोनों टांगों को मेरे कन्धों पर टिका कर जैसे ही मैं किरण की चूत में मेरा लंड डालने वाला था कि स्विंमिंगपूल की तरफ से मुझे रीता और सूरज की कराहटें सुनाई दीं।

मुझे पूरा यकीन नहीं था पर जब किरण ने भी मुझे कहा कि उसने भी उन्हें सूना तब हमने अपनी चुदाई का कार्यक्रम रोकना सही समझा क्योंकि मुझे डर था कि कहीं रीता हम दोनों को इस हालत में देख कर कुछ उल्टा-पुल्टा ना कर बैठे।

हम दोनों ने फुर्ती से अपने कॉस्च्यूम पहने और तेजी से यह आवाज कैसी थी, यह जानने के लिए स्विंमिंगपूल की ओर चल पड़े। स्विमिंगपूल के इर्द-गिर्द अन्धेरा था, पर दूर आसमान के टिमटिमाते सितारों की हलकी सी रौशनी में मैं और किरण ने पूरी नंगी रीता को नंग-धड़ंग सूरज के नीचे लेटी हुई महसूस किया। मैंने उत्तेजना के मारे किरण का हाथ थामा और उसे कस कर दबाया। मैं सच कहता हूं कि उस दृश्य की हलकी सी झांकी को देख कर मुझ पर क्या बीत रही थी वह मेरे लिए कहना नामुमकीन होगा।

मैं प्रार्थना कर रहा था कि मेरी पत्नी को किसी तगड़े लंड से चुदवाने की मेरी बरसों की कामना उस शाम को सूरज पूरी करे। मेरी पत्नी रीता सूरज के नीचे लेटी हुई सूरज की बाहों में दिख रही थी और सूरज के होंठो से कस कर अपने होंठ चुसवा और चटवा रही थी।

किरण ने मेरी और देखा और अपने होंठों पर अपनी उंगली रख कर मुझे बिल्कुल आवाज ना कर, उन दो प्रेमी युगल के मैथुन में बाधा ना पहुंचे इसके लिए इशारा किया। मैं भी उनकी चुदाई के इंतजार में वहीं छिप कर उनकी प्रेम क्रीड़ा को देखता रहा। हम उतनी दूरी से उन दो प्रेमियों के बीच के वार्तालाप को नहीं सुन सकते थे। पर जैसे ही मैं सोच रहा था कि अब सूरज रीता की चूत में अपना लंड डालेगा, रीता उस पोजीशन से अचानक सूरज के साथ उठ खड़ी हुई। पता नहीं क्या हुआ था।

हमारे सारे उत्साह और उत्तेजना का मेरी पत्नी ने गुड़गोबर कर दिया था। पर कुछ ही पलों में फिर से हमारी जान में जान तब आयी, जब हमने उस अंधेरे में भी देखा कि मेरी नंगी पत्नी रीता कूद कर सूरज की कमर के इर्द-गिर्द अपनी टांगों को कस कर बांधती हुई बिल्कुल दोपहर की घटना को दोहराते हुए अपनी चूत को सूरज के लंड से सटा कर सूरज को चूमने लगी। सूरज भी रीता की गांड को अपनी हथलियों में पकड़े हुए अपने लंड को रीता की चूत के प्रेम छिद्र पर केंद्रित करने की कोशिश करने लगा। कुछ ही देर में हमें यकीन हो गया कि सूरज ने मेरी पत्नी को हवा में अपनी कमर पर रखते हुए चोदना शुरू कर दिया था।

हमें अंधेरे में ऐसा लगा भी जैसे सूरज ने मेरी बीवी को चोदना शुरू कर दिया था। तभी दोबारा रीता ने हमारा दिल तोड़ते हुए सूरज को रोक दिया। उसके कानों में कुछ बोला और सूरज का हाथ थाम कर सूरज को नजदीक की लम्बी सी कुर्सी पर लिटा दिया। उस समय मेरा बहुत मन किया कि मैं वहां जा कर उन दोनों को कुछ अच्छी सी गालियां दूं। पर किरण ने मेरा हाथ अपने एक हाथ से कस कर थाम रखा था, और दूसरे हाथ से मुझे चुप रहने का भी इशारा कर रही थी।

खैर हमें कुछ उम्मीद की किरण जगी, जब मेरी पत्नी ने सूरज के तगड़े लंड को गजब की तत्परता से चाटना और चूसना शुरू कर दिया, और सूरज मारे उत्तेजना से सिसकारियां भरने लगा। मैंने यह देख कर उत्तेजित होते हुए किरण की चूचियों को कस कर दबाया, और उसी तरह किरण ने भी मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी हथेली में हिलाना शुरू किया।

रीता और सूरज का तो मुझे पता नहीं पर किरण के मेरा लंड पकड़ कर हिलाने से मुझसे रहा नहीं गया और मेरे मुंह से अनायास ही एक थोड़ी तेज सी सिसकारी निकल गयी। मेरी चौकन्नी पत्नी ने उस आवाज को सुना और एक-दम सूरज के लंड को अपने मुंह से निकालती हुई बोली, “कोई है?”

किरण ने मेरा हाथ थामा और तेजी से मुझे खींच कर चेंज रूम में ले गयी। वहां हमने अपने कपड़ों को पहना और हम वहां से क्लब हाउस चल दिए। वहां फ्रिज में रखे हुए कुछ व्यंजन उठाये। दो प्लेटों में उन व्यंजनों को रख कर हमारे सामने एक टेबल पर रख कर यह दिखावा करने लगी, जैसे हम तैरने के बाद उन व्यजनों का आनंद ले रहे थे।

कुछ ही देर में हमने देखा की रीता और सूरज भी अपने कपड़े पहने हुए वहां आ पहुंचे और हमें देख कर हमारे पास आये। उनके चेहरों को देख कर यह भांपना कठिन नहीं था कि दोनों कुछ संवेदनशील समय से गुजरे हुए लग रहे थे। किरण ने हालांकि मुझे चुप्पी का इशारा कर कुछ भी बात करने से रोका।

उसी तरह वह दोनों भी क्या हुआ था उसके बारे में चुप्पी साधे हुए वहीं आ कर हमारे सामने बैठ गए। मैं समझ रहा था, कि रीता और सूरज के साथ जो हुआ था उसके बाद वह एक-दूसरे से क्या बात करें वह समझ नहीं पा रहे थे। किरण ने उन्हें कुछ जलपान दिए और सूरज और रीता कुछ जलपान कर एक-दूसरे की और देखते चुपचाप बैठे रहे।

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Drishyam, ek chudai ki kahani-17
Hindi Chudai Kahani

Drishyam, ek chudai ki kahani-17

जैसे ही अर्जुन वहाँ से निकला की सिम्मी ने कमरे का दरवाजा बंद किया और आ कर कालिया के सामने खड़ी हो गयी। सिम्मी की आँखों में अब कालिया से कोई भय नहीं था। वह कालिया को कुछ तरस भरी निगाहों से देख रही थी। अब कालिया था की वह सिम्मी की और ऐसे देख रहा था ज...

12 मिनट 275
बदचलन बीवी-1(Badchalan biwi-1)
Hindi Chudai Kahani

बदचलन बीवी-1(Badchalan biwi-1)

मेरी बीवी ज्योति बहुत सीधी भी है, और एक नंबर की चदक्कड़ भी है, यह तो मुझे पता है। शादी के बाद तीन लोगों से चुदते हुए तो मैंने देखा है। लेकिन उसके रंडी-पने की असली कहानी मुझे दो दिन पहले पता चली, जब मुझे मेरी सोसाइटी के नीचे मेरा जानने वाला मिला।

8 मिनट 565
अगर मुझसे मोहब्बत है-14(Agar mujhse mohobbat hai-14)
Hindi Chudai Kahani

अगर मुझसे मोहब्बत है-14(Agar mujhse mohobbat hai-14)

करूंगा ख्वाहिशें तेरी पूरी मैं तुझ को पाने को।

13 मिनट 283

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।