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बैंक की नौकरी के लिए मेरा गैंगबैंग

प्रिया राव

11 Nov 2014 को प्रकाशित

बैंक की नौकरी के लिए मेरा गैंगबैंग
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सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, जो आज से 3 साल पहले की है. सबसे पहले मेरा परिचय आपको दे रही हूँ. मेरा नाम दिया गँगवार है और मैं 24 साल की हूँ. मैं झाँसी की रहने वाली हूँ. मैं बैंक में पियून की जॉब करती हूँ. अभी मेरा फ़िगर साईज 34डी-32-38 का है.

ये बात तब की है, जब मैं 21 साल की थी और मैंने बीए सेकंड ईयर में एडमिशन लिया था. मेरा घर गांव में है, इसलिए मुझे सिटी में रूम किराए पर लेकर रहना पड़ता था. गांव के बैंक में मेरा अकाउंट था. मेरे फ़ोन पर बैंक में सम्पर्क करने के लिए मैसेज आया, इसलिए मैं बैंक गई. वहां सब स्टाफ मुझे एक काउंटर से दूसरे काउंटर भेजने लगे.

मुझे गुस्सा आ गया और मैं सीधे मैनेजर के केबिन में चली गई. मैं गुस्से में बोली- एक काम के लिए इस बैंक में सब इतना दौड़ाते हैं.इसी बीच मेरा दुपट्टा फिसल गया और मेरे बड़े बड़े चूचे दिखने लगे.

मैनेजर लगभग 40 साल की उम्र के थे. उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और मुझे पानी देकर बोले- तुम रिलैक्स होकर बैठो.

मैंने जानबूझ कर दुपट्टा सही नहीं किया और अपने मम्मों का क्लीवेज दिखाती रही. मैनेजर की नजर मेरी छाती पर ही टिकी रही.

वो बोले- क्या नाम है तुम्हारा?मैंने कहा- दिया.वो बोले- क्या करती हो?मैंने कहा- मैं बीए कर रही हूँ.

उन्होंने मुझसे समस्या पूछी, तो मैंने उन्हें अपनी बात बतायी.

उन्होंने मेरा काम तुरंत कर प्रिया और बोले- तुम्हें कोई भी काम हुआ करे, तो तुम सीधे मेरे पास आ जाया करो.मैंने हंस कर कहा- तो क्या हर बार मुझे जल्दी काम निकलवाने के लिए क्लीवेज दिखाना पड़ेगा?इस पर वो हंसने लगे और बोले- जितना दिखाओगी … उतना ज्यादा जल्दी काम हो जाएगा.

फिर उसके बाद से मैं उनके पास ही जाकर सब काम करवा लेती थी. एक बार मुझे कुछ काम था, तो मैं बैंक में गई और सीधे मैनेजर के केबिन में चली गई. मैंने देखा कि मैनेजर कोई लिस्ट लिए थे.

मैंने कहा- सर ये कैसी लिस्ट है?तो बोले- नये पियून की भर्ती हो रही है. मेरे पास कई लोग सिफारिश लाये हैं, ये उसी की लिस्ट है.मैंने कहा- तो प्लीज मुझे भी भर्ती करवा लीजिये.

इस पर मैनेजर हंस के बोले- अरे ये इतना आसान नहीं है. इसके लिए सबसे 2 लाख रुपये लेंगे, जो देगा उसकी नौकरी पक्की.मैं मायूस हो गई, तो मैनेजर बोले- तुम भी 2 लाख ला कर दे दो, तो तुमको नौकरी मिल जाएगी.मैंने कहा- मेरे पास 2 लाख होते, तो आपको आज ही दे देती.मैनेजर बोले- फिर नहीं मिलेगी नौकरी.

मैंने कहा- और कोई तरीका नहीं है क्या?वो बोले- नहीं.. कम से कम 2 लाख रुपये ही लगेंगे.मैंने कहा- मैं रुपये नहीं दे पाऊंगी, पर और बहुत कुछ कर सकती हूँ. नजारा तो आप देख भी चुके हैं.

इस बात पर मैनेजर की आंखों में भूखे भेड़िये सी चमक आ गई. वो मेरे दूध देखते हुए बोले- क्या क्या कर सकती हो?मैंने भी अपनी चूचियां उठाते हुए कहा- जो आप बोलोगे, सब कुछ कर दूंगी.

मैनेजर ने मुझसे मेरा मोबाइल नम्बर लिया और कहा- अगर कोई रास्ता निकला, तो तुम्हें कॉल कर देंगे.मैं खुश हो गई और मैंने कहा- सर आप चाहें, तो टोकन के लिए अभी कुछ कर सकते हैं.

वो मुझे अपने साथ टॉयलेट ले गए और मेरी टी-शर्ट को ऊपर करके मेरी ब्रा को ऊपर खिसका प्रिया.मैनेजर बोले- तेरे चूचे तो बहुत बड़े हैं … कितनों से दबवाये हैं?मैंने कहा- सर मैं वर्जिन हूँ लेकिन छोटे से ही रोज तेल से चूचियों की मालिश करती हूँ, तभी इतने बड़े हो गए हैं.मैनेजर बोले- अभी चुदायी का टाईम नहीं है. तू जल्दी से लंड चूस कर मजा दे दे.

मुझे लंड चूसना आदि कुछ आता नहीं था इसलिए मैं सही से लंड चूस नहीं पा रही थी. जबकि वो मेरे बाल पकड़कर जोर जोर से मेरे मुँह में लंड डाल कर मेरे मुँह की चुदायी करने लगे.

उनके बड़े लंड से मेरी तो जैसे साँस ही रुक गई … इतना मोटा और लम्बा लंड था कि मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. लगभग 5-6 मिनट के बाद मुझे अपने गले से कुछ गरम गरम महसूस हुआ. मैंने मुँह से लंड हटाना चाहा.

मैनेजर बोले- मलाई है .. पी जा.

लेकिन मुझे उल्टी सी आने लगी. मैनेजर लंड अड़ाए हुए बोले- जॉब चाहिये तो पी जा साली.मैं मैनेजर का मुठ पी गई.फिर हम दोनों केबिन में वापस आ गए.

मैनेजर बोले- ये तो बस ट्रेलर हुआ, अगर कुछ जुगाड़ बना, तो बहुत कुछ करना पड़ेगा.मैं बोली- मैं सब कर लूंगी.फिर मैं घर वापस आ गई.

चार दिन बाद मैं वापस कॉलेज के लिए सिटी चली गई. मैंने सोची कि शायद कोई कॉल नहीं आएगा.

आठ दिन बाद एक नम्बर से कॉल आया. मैंने कहा- कौन?तो उधर से आवाज आयी- नौकरी चाहिये, तो कल शाम मैसेज में दिए पते पर आ जाना.मैं समझ गई कि मैनजर बोल रहा है. मैं बोली- ठीक है.

फिर मेरे पास एड्रेस का मैसेज आ गया. वो एड्रेस ग्वालियर का था. मैंने रात को ही अपने शरीर के सब बाल साफ कर लिए और अगले दिन ग्वालियर के लिए चल दी. शाम तक मैं बतायी हुई जगह पर पहुंच गई.

वो एकदम सुनसान घर था. मैंने गेट की घंटी बजाई, तो उसी मैनेजर ने गेट खोला. मैं उन्हें देखकर खुश हो गई. मैं ब्लैक साड़ी पहन कर गई थी.सर मुझसे बोले- बहुत सेक्सी लग रही हो.वो मुझे हाथ पकड़ कर अन्दर ले गए और ले जाकर हॉल में बैठा प्रिया. वहां जाकर मैं चौंक गई, क्योंकि वहां 4 लोग और बैठे थे.

मैं इतने लोगों को देखकर डर गई और मैनेजर से बोली- सर इतने लोग … मैं वापस जा रही हूं.मैनेजर बोले- देखो तुम चाहो, तो जा सकती हो … लेकिन आज अगर सबके साथ चुदाई करवा लोगी, तो नौकरी मिल जाएगी.

मैं सोच में पड़ गई. मेरी कुंवारी चूत और पहली बार में ही चार लंड … सोच कर ही गांड फटने लगी थी.

मैनेजर बोले- तुमने ही तो कही थी कि तुम सब कुछ कर सकती हो.मैंने कहा- लेकिन 5 लोगों के साथ कैसे कर पाऊंगी?सर बोले- परेशान मत हो तुम्हें भी मजा आएगा.

मैं राजी हो गई. सब साथ बैठ गए. वो सब बैंक के बड़े ऑफिसर्स थे. उनके नाम अरविंद, बलवन्त, केशव और दिनेश था और सीनियर मैनेजर का नाम सुनील था. वो सब मुझे घूर कर देख रहे थे और मुझे खूब शरम आ रही थी. उन सबने मेरे बारे में जो कुछ भी पूछा, मैंने बता प्रिया.

फिर सुनील ने कहा- चलो शुरू करते हैं.मैंने कहा- मुझे कुछ पता नहीं … आप लोगों को जो कुछ करना है, कर लीजिये.

सुनील ने मेरी साड़ी पकड़ कर खींच दी. मैं गोल गोल घूमते हुए साड़ी निकलवाती गई. ये देख कर सब हंसने लगे.

अरविंद बोला- अरे यार, इसके चूचे कितने बड़े हैं.

केशव ने मुझे पकड़ कर खींच लिया और सीधे होंठ पर अपने होंठ रख कर जोरदार किस करने लगा. मुझे किस में मजा आने लगा और मैं भी किस करने लगी.

बलवन्त बोला- अरे वाह, ये तो तुरंत चालू हो गई.ये कहते हुए उसने मेरा पेटीकोट खोल प्रिया.

मैं अन्दर काली पैंटी पहनी थी. दिनेश और सुनील ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरे चूचे दबाने लगे. फिर उन दोनों ने मेरा ब्लाउज़ भी उतार प्रिया. मेरी ब्रा भी ब्लैक थी.अब सबने मुझे छोड़ प्रिया.

सुनील बोले- वाह ब्रा पैंटी दोनों ब्लैक हैं.

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अब सब पूरे नंगे हो गए. सबके लंड बड़े और मोटे थे. सब मुझे घेर के खड़े हो गए. मैं बीच में खड़ी थी, तो बलवन्त बोला- चल सबके लंड चूस.

मैं नीचे बैठकर सबके लंड बारी बारी से चूसने लगी. मुझे बहुत मजा आ रहा था. मैं कभी किसी का, तो कभी किसी का लंड चूस रही थी. बीच बीच में वो लोग मेरा मुँह भी चोदने लगते थे. गले तक लंड जाते ही मैं खांसने लगती थी.

तभी दिनेश ने मेरी ब्रा उतार दी और केशव ने पैंटी उतार दी. अब मैं उन सबके सामने पूरी नंगी हो गई थी.

अरविंद और सुनील मेरे एक एक चूचे पर टूट पड़े, दिनेश मेरी चूत चाटने लगा. मैं सोफे पर लेटी थी. केशव मेरे मुँह में लंड ठूंस कर मेरा मुँह चोदने लगा. बलवन्त का लंड मैं अपने हाथ से हिला रही थी.

अब बारी आयी मेरी चुदायी की. सबसे पहले दिनेश आया. उसने मुझे लिटा प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ गया. उसने अपने लंड को मेरी चूत के छेद पर रखकर थोड़ा सा घुसाना शुरू किया. मुझे मजा आ रहा था.

तभी उसने एक जोर का झटका प्रिया और उसके लंड का आगे का टोपा घुस गया. मैं दर्द से चीख पड़ी. मुझे इस दर्द की उम्मीद नहीं थी. मैं रोने लगी और कहने लगी- मुझे कुछ नहीं करना … जाने दो मुझे.वो लोग बोले- घबराओ नहीं मजा भी आएगा.

तभी सुनील ने मेरे मुँह में लंड ठूंस प्रिया. अब मैं चिल्ला नहीं पा रही थी, बस रोती जा रही थी.

इसी बीच दिनेश ने 2-3 जोर के झटके लगाकर पूरा लंड अन्दर तक पेल प्रिया. मैं सह नहीं पा रही थी और रोए जा रही थी. मेरी चूत से खून बह रहा था. लेकिन दिनेश रुका नहीं और जोर जोर से चोदने लगा.

लगभग 5 मिनट के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मजा आने लगा, जिसकी वजह से मैं गांड उठा उठा के चुदने लगी.

अब सुनील ने मेरे मुँह से लंड निकाल प्रिया और बोला- लंड का मजा आ रहा है.मैं बोली- ऊनंह.. पर दर्द भी हो रहा है … और मजा भी आ रहा है.

फिर दिनेश अलग हो गया और सुनील ने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी चूत में लंड एक ही झटके में पेल प्रिया. मैं फिर चिल्ला दी. सुनील जोर जोर से मुझे चोदने लगा.

उसने मुझे लगभग 15 मिनट चोदा, इसके बाद वो हट गया.

अब बारी आयी बलवन्त की. उसने कहा- मैं इसकी गांड खोलूंगा.मैंने कहा- वो क्यों?तो वो बोला- तेरी गांड भी मारनी है.मैंने कहा- आज मैं आप सबकी हूँ.. जो करना है … कर लो.

केशव ने कहा- पहले इसकी गांड में तेल डाल दे … वरना लंड घुसेगा ही नहीं.

बलवन्त ने मुझे घोड़ी बनाया और तेल की शीशी खोल कर ढेर सारा तेल मेरी गांड के छेद में डाल प्रिया. फिर उसने अपने लंड मेरी गांड में रखके पूरी ताकत से झटका दे मारा. मुझे लगा जैसे किसी ने खंजर से मेरी गांड चीर दी हो. मुझे बहुत जोर से दर्द हुआ और मैं दर्द से तड़पने लगी, लेकिन बलवन्त ने बिना रुके 3-4 झटकों में ही अपना पूरा लंड मेरी गांड में पेल प्रिया.

बलवन्त बिना रुके जोर जोर से मेरी गांड मार रहा था और मैं दर्द से कराहते हुये रो रही थी.

फिर बलवन्त हट गया और केशव ने मेरी गांड मारना शुरू कर प्रिया. उसने भी बहुत जोर जोर से गांड मारना चालू रखा.

इतनी देर में मेरी गांड ढीली हो गई थी. अब मुझे भी गांड मराने में मजा आने लगा था.

केशव ने लगभग 10 मिनट मेरी गांड मारी. फिर अरविंद आ गया. उसने पीछे से मेरी चूत मारनी शुरू कर दी. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

सब बारी बारी से कभी गांड मारते, तो कभी चूत मार रहे थे.

फिर बारी आयी उस चीज की जिसकी अर्चना करना किसी लड़की के लिए बहुत मुश्किल होता है.

केशव नीचे लेट गया और मुझसे बोला- मेरे ऊपर आ कर अपनी चूत में मेरा लंड लो.मैंने वही किया, जैसा अरविंद ने कहा. मैं अरविन्द के लंड पर बैठ गई. अरविन्द ने मुझे अपने सीने से चिपका लिया. तभी मैंने देखा कि पीछे से बलवन्त गांड में लंड घुसा प्रिया.

मेरी जोर की कराह निकल गई. वे दोनों एक साथ चूत गांड मारने लगे.

इसी तरह इन दोनों ने मुझे काफी देर चोदा और फिर अरविंद और दिनेश मेरी चूत गांड चोदने लगे.

काफ़ी देर चोदने के बाद दिनेश हट गया और सुनील ने गांड मारना चालू कर प्रिया. इसी तरह सबने कई बार मेरी चूत गांड एक साथ चोदी.

मेरा कम से कम 6-7 बार पानी निकल चुका था, पर गोली खाने की वजह से उनमें से किसी का मुठ नहीं निकला था.

फिर सबने मुझे बीच में लिटा प्रिया और एक साथ ही सबने मेरे चेहरे और मुँह के अन्दर अपना सारा मुठ निकाला.

मैंने सबका मुठ पिया.

उसके बाद सबने कपड़े पहन लिए. मुझसे उठा भी नहीं जा रहा था. सुनील ने मुझसे कहा- तुम रात में यहीं रुको.. सुबह तुम्हें झाँसी छोड़ दूंगा.

मैं वैसे ही नंगी सो गई.

अगली सुबह मुझे जॉब का लेटर मिल गया. सुनील में मुझे झाँसी तक छोड़ प्रिया.

इसके बाद की और भी कहानियां हैं, अगर ये कहानी आपने पसंद की और मुझे मेल लिखे तो मैं आगे भी लिखती रहूँगी.

आप सब मुझे ईमेल कर सकते हैं. मेरी आईडी है support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आदित्य पटेल

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

मोनू यादव

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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