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भाई बहन पठन समय: 16 मिनट पढ़ा गया: 1,102 बार

मैं अपने भैया की रंडी बन गयी

ललित कौशिक

17 Sep 2021 को प्रकाशित

मैं अपने भैया की रंडी बन गयी
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बहन भाई सेक्स की कहानी में पढ़ें कि मेरी जवानी आते ही भैया की नजर मुझ पर पड़ गयी. एक रात मुझे भैया के इरादे पता चले. कैसे ? और उसके बाद क्या हुआ?

दोस्तो, मेरा नाम राजकुमारी है. हम 3 भाई-बहन हैं. हम लोग पटना में रहते हैं.मेरी उम्र 23 साल है और मेरे जिस्म का साइज 34-30-36 है.

मेरी बड़ी बहन बाहर रहकर पढ़ाई कर रही है जबकि मैं सबसे छोटी हूं.

इस कहानी को सेक्सी आवाज में सुनें.

जब मैं 19 की हुई थी तभी से ही चुदाई करवा रही हूं.मेरी चूत की चुदाई मैं अपने सगे भाई से ही करवाती आ रही हूं.उसका नाम मनीष है और वो अब 25 साल का है.

मनीष मुझसे बड़ा है और जॉब करता है. ये बात तब शुरू हुई थी जब मेरे भाई ने 4 साल पहले मेरे साथ ऐसी हरकत करना शुरू की थी जिसके बाद हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध बन गये.

एक रात की बात है कि जब मैं सोकर उठी तो मेरे कपड़ों पर मुझे सुबह कुछ दाग जैसा दिखा.वो कुछ सूखा पदार्थ लगा हुआ था. मुझे समझ नहीं आया.मैंने सोचा कि शायद किचन से कुछ लग गया होगा.

फिर उसके दो दिन के बाद भी ऐसा ही हुआ. अब मैंने इस बात पर खास ध्यान देना शुरू कर प्रिया कि मेरे कपड़ों पर ये दाग कहां से आते हैं भला?

उस रात को मैं साफ कपड़े पहन कर सोई. मैंने किचन का काम भी निपटा लिया और उसके बाद मैं धुले हुए सफेद रंग के नाइट ड्रेस में सोई.

अगली सुबह जब उठी तो मेरी चूचियों पर वही दाग मिले.

अब मैंने सोच लिया कि मुझे पता करना पड़ेगा कि ऐसा कैसे हो रहा है.

फिर मैं रोज रात को जागने लगी. बस सोने का नाटक करती रहती.

दो-तीन रात ऐसे ही गुजार दी मैंने. उस दौरान मैं दिन में सोती और रात में जागती.

फिर एक रात की बात है कि करीब 1 बजे के आसपास मेरे रूम का दरवाजा खुला.मैंने धीरे से आंख खोलकर देखा तो मनीष चुपके से मेरे रूम का दरवाजा बंद कर रहा था.मेरी ओर उसकी पीठ थी तो मैंने तुरंत फिर से आंखें बंद कर लीं.

वैसे तो मुझे हल्की घबराहट हो रही थी क्योंकि मनीष कभी रात को मेरे पास नहीं आता था.पर मैं चुपचाप लेटी रही.

थोड़ी देर के बाद मुझे आवाजें और सिसकारियां सुनाई देने लगीं.

फिर उसका एक हाथ मेरे बदन पर आ गया. वो मेरी चूचियों को हल्के से छूने लगा. मुझे करंट सा लग रहा था.इससे पहले किसी लड़के ने मेरे बूब्स को टच भी नहीं किया था.

मेरी चूचियों को हल्की दबाने के बाद उसने मेरी जांघों पर हाथ फिराया और फिर मेरी चूत को भी छूने लगा.वो मेरी चूत के होंठों पर उंगली फिरा रहा था और मेरे जिस्म में करंट सा दौड़ रहा था.

सच बताऊं तो मेरा मन कर गया कि भाई मेरी चूत को पैंटी के अंदर हाथ देकर सहलाये.पर वो ऊपर से ही चूत को सहलाता रहा और मुट्ठ मारता रहा.

उसके हाथ के आगे पीछे होने की हलचल का मुझे साफ पता लग रहा था.

फिर उसने हाथ हटा लिया और उसकी सिसकारियां थोड़ी तेज हो गयीं. फिर अचानक मेरी चूचियों पर कुछ गर्म गर्म सा लिक्विड आकर लगा.

मैं जान गयी कि भाई ने अपने लंड का पानी गिराया है.अब मुझे सारी बात समझ में आ गयी कि रात को मेरे कपड़ों पर वो दाग कैसे आते थे.इस बारे में मैंने किसी को कुछ नहीं बताया.

अब मैं भैया पर ध्यान देने लगी थी. मुझे उसको देखना अच्छा लगता था. वो भी जवान था और मैं भी.मैं उसकी ओर आकर्षित हो रही थी. मगर मैं सीधे उसको नहीं बोल सकती थी.

दो दिन के बाद फिर से वही हुआ. मनीष मेरे रूम में आया और मेरी चूचियों को छेड़ने लगा.

फिर उस दिन उसने मेरी लोअर में हाथ डाला और मेरी पैंटी के ऊपर से चूत को छेड़ने लगा.

मैं भी गर्म होने लगी. भाई की उंगलियां मेरी चूत पर चल रही थीं.

मेरी सांसें भारी होने लगी. मगर मैं खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी.

मनीष मेरी चूत को सहलाये जा रहा था और मुझे मजा आने लगा था.

फिर उसने अपना लंड निकाल लिया और उसको मेरे होंठों व चेहरे पर रगड़ने लगा.उसके लंड की गंध मुझे साफ पता चल रही थी.

आज तक मैंने किसी लड़के का लंड ऐसे नहीं देखा था. देख तो उस दिन भी नहीं पा रही थी लेकिन चेहरे पर महसूस कर रही थी.

काफी देर तक वो मेरे चेहरे पर लंड को रगड़ता रहा. उसका लंड बहुत गर्म था और मुझे अपने गालों पर उसका लंड रगड़वाने में मजा आ रहा था.

फिर वो मुठ मारने लगा और उसने मेरे चेहरे पर माल गिरा प्रिया.

फिर वो चला गया. उसके जाने के बाद मैंने आंखें खोलीं और फिर खुद को आईने में देखा. मेरे गालों पर उसके लंड का माल लगा हुआ था. मैंने उसको हाथ से छुआ और फिर उंगलियों में मसल कर देखा.

मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरी चूत में भी पानी आने लगा.

अब मेरा मन करने लगा कि काश ये लंड का माल मेरी चूत पर लगा होता और मैं उसको अपनी उंगली से अंदर करते हुए चूत को रगड़ती.

उसके बाद मैं चूत में उंगली करके सो गयी. मैं अब मनीष को चाहने लगी थी. मैं उसके साथ अब खुलकर मजा लेना चाहती थी.

अब कई बार मैं उसके सामने अपनी चूचियों को उभार कर रखती थी.अपनी गांड को उसके सामने ज्यादा मटकाती थी.

वो भी मेरी ओर देखता था लेकिन चोरी चोरी देखा करता था. वो खुलकर शायद कुछ बोलना नहीं चाहता था.

अगले दिन मैं बाथरूम में नहाने गयी.जब मैं नहाने के बाद अपनी पैंटी पहनने लगी तो मैंने उस पैंटी पर भी वैसे ही दाग देखे.

ये देखकर मैं गर्म हो गयी. ठीक चूत वाली जगह पर मनीष ने अपना माल छोड़ा हुआ था.

अब मैं जान गयी कि भैया भी मेरी चूत चोदना चाहता है. इसलिए मैं भी अब उससे खुलकर बात करने के मूड में आ गयी.

फिर मैंने शाम को उसे अपने रूम में बुलाया. मैंने कहा- आपसे एक जरूरी बात करनी है.वो बोला- हां कहो?मैंने कहा- आप मुझे पसंद करते हो क्या?वो बोला- हां, तुम बहन हो मेरी, ये भी कोई पूछने की बात है क्या?

उससे मैं सीधे तौर पर पूछना चाहती थी.मैंने बोला- मैं भाई-बहन वाले प्यार की बात नहीं कर रही.मनीष- तो और कैसा प्यार होता है भाई-बहन के बीच?

मैंने कहा- भैया, आप बनो मत, मैं जानती हूं आप मेरे कपड़ों के साथ क्या करते हो. रात को भी मैं सब देख चुकी हूं.ये सुनकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया.वो बहाने बनाने लगा और बोला- ये क्या कह रही है छोटी, कैसी बातें कर रही है तू?

उसको आईना दिखाने के लिए मैं अपनी पैंटी को निकाल लाई.ये वहीं पैंटी थी जिस पर उसके लंड का माल लगा हुआ था.पैंटी दिखाते हुए मैं बोली- ये देखो, मैं सब जानती हूं. आप रात को सोते हुए मेरे साथ यही करते हो.

वो बोला- देख छोटी, मैं तुझे पसंद करता हूं. मगर ये बात तू किसी को कहना मत. मुझसे गलती हो गयी. सॉरी.मैं बोली- भैया, मैं भी आपको लाइक करने लगी हूं. आप सॉरी मत बोलो.

ये सुनकर उसने मुझे सीने से लगा लिया और मुझे किस करने लगा.मैंने कहा- अभी नहीं, रात को आना. अभी तो पकड़े जायेंगे.

वो बोला- ठीक है, लेकिन मां को क्या कहोगी?मैं- उनको मैं कुछ भी बहाना बना दूंगी. आप रात के लिए तैयार रहना.

फिर वो मुझे गाल पर किस करके चला गया.मुझे बहुत अच्छा लगा.

आज रात को मैं भैया का लंड देखने वाली थी और उससे चुदने वाली थी.

रात का खाना होने के बाद सब लोग सोने लगे.मैंने मां से कहा- मुझे रात में बहुत डरावने सपने आते हैं मां. फिर नींद खुलती है तो डर लगता है. भैया को बोलो न कि मेरे रूम में सो जाये?वो बोली- तू ही पूछ ले. मैं क्या अलग से कहूंगी?

भैया और मेरे बीच में तो पहले से ही सब सेट हो चुका था. भैया ने तुरंत हां कर दी.हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कराने लगे.

मां और पापा अपने रूम में जा चुके थे.फिर मैं अपने रूम में चली गयी.

अंदर जाकर मैंने अपने कपड़े उतार दिये और केवल ब्रा और पैंटी में बैठ गयी. कुछ देर के बाद मनीष भी रूम में आ गया.आते ही मनीष ने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया.

वो मुझे देखता ही रह गया और फिर मुझे गोद में उठा लिया. हम दोनों एक दूसरे को होंठों पर किस करने लगे.

उसके बाद उसने मुझे बेड पर लिटा प्रिया और अपने कपड़े़ खोलने लगा.वो केवल अंडरवियर में आ गया और मेरे ऊपर आकर किस करने लगा.

मैं भी उसके होंठों को चूमने और चूसने लगी.

फिर हम दोनों 10-15 मिनट तक किस ही करते रहे. उसके बाद उसने मेरी ब्रा को उतार फेंका और वो मेरी चूचियों को मुंह में लेकर पीने लगा.

मुझे बहुत मजा आने लगा. पहली बार मैंने किसी लड़के के मुंह का स्पर्श अपनी चूचियों पर करवाया था.

वो काफी देर तक मेरी चूचियों को पीता रहा.

फिर वो नीचे की ओर गया और उसने मेरी पैंटी खींचकर निकाल दी.मेरी चूत पर हल्के बाल थे और वो गीली हो चुकी थी.

फिर मनीष मेरी चूत को चाटने लगा.मैं मदहोश होने लगी. जल्दी ही मेरी चूत से बहुत सारा पानी निकल गया.उसके बाद मैं ढीली पड़ गयी.

अब मनीष ने मुझे अपने ऊपर लिटाया और फिर से मेरे होंठों को चूमने लगा.मैं अब कुछ देर उसके होंठों को चूमने के बाद उसके बदन को किस करने लगी.

किस करते हुए मैंने नीचे आ गयी. मैंने उसके लंड के पास किस किया तो मुझे लंड से अजीब सी गंध आई.वो मुझे लंड चूसने के लिए कहने लगा लेकिन मेरा मन नहीं किया.

फिर मैं उसके लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी.उसकी जांघों पर मैंने अपनी गांड रख ली और लंड को चूत पर रगड़ने लगी.

वो सिसकारियां लेने लगा तो मैंने कहा- आवाज मत करो!मगर उससे रहा नहीं जा रहा था.

उसने मुझे उठाया और फिर से नीचे लिटा लिया.अब वो मेरी टांगों को खोलकर मेरे बीच में आ गया और अपने लंड को मेरी चूत पर रगड़ने लगा.

मैं सिसकारियां लेने लगी.

फिर उसने लंड को चूत पर सेट कर प्रिया. उसने धक्का लगाया तो मेरी चीख निकली लेकिन उसने एकदम से मुंह पर हाथ रख प्रिया.वो इशारे से बोला- श्श्श्श … घरवाले उठ जायेंगे.इधर मेरी जान निकली जा रही थी.

वो फिर मेरे ऊपर ही लेट गया. मेरे होंठों को किस करने लगा.

मेरी चूत में दर्द हो रहा था. मैं छटपटाती रही.वो लंड को चूत में डाले हुए लेटा रहा.

कुछ देर के बाद उसने लंड को थोड़ा धकेला तो मुझे फिर से दर्द हुआ.

मनीष मेरी चूचियों को सहलाता रहा. मुझे ऊपर तो मजा आ रहा था लेकिन नीचे चूत में ऐसा लग रहा था जैसे कोई छील रहा है.

उसने देखा तो मेरी चूत से खून निकल रहा था.वो बोला- तेरी चूत की सील टूट गयी है.मैं बोली- तो अब?उसने कहा- अब क्या? ये पहली बार सेक्स करने में टूटती है. अब तू कुंवारी नहीं रही. तेरे भाई ने तेरी चूत का उद्घाटन कर प्रिया है.

ये सुनकर मैंने उसको गले से लगा लिया और फिर वो भी मुझे किस करने लगा.कई मिनट तक हम किस करते रहे और फिर मेरी चूत का दर्द भी कम हो गया.

अब मेरा भाई मेरी चूत में धक्के देते हुए मुझे चोदने लगा. मेरी चूत में भैया का लंड पूरा फंसा हुआ लग रहा था.मुझे अब मजा आने लगा था.

फिर वो स्पीड में चोदने लगा.

थोड़ी देर में दोनों एक दूसरे की ओर धक्के लगाने लगे और सिसकारते हुए चुदाई का मजा लेने लगे.

मुझे मनीष के लंड से चुदते हुए अब बहुत मजा आ रहा था और मैं उसके लंड से चुदते हुए मदहोश होती जा रही थी.

फिर मेरी चूत का पानी निकल गया.वो अब भी नहीं रुका और चोदता रहा.अब रूम में पच-पच होने लगी.

मेरी चिकनी चूत बहुत आवाज कर रही थी. वो भी लगातार चोदे जा रहा था.

15 मिनट तक मनीष ने मेरी चूत को बहुत चोदा और फिर वो मेरी चूत में ही झड़ गया.मैंने उसको गले से लगा लिया और मेरा भाई मेरी चूत में लंड को डाले हुए मेरे ऊपर ही लेट गया.

जब उसने चूत से लंड को बाहर निकाला तो मेरी चूत में से खून और वीर्य का द्रव बनकर निकल रहा था.

उसने मेरी चूत को साफ किया और उसके अंदर तक देखा.

चूत एकदम से लाल हो गयी थी. मैं पहली बार चुदी थी. मेरी चूत में बहुत जलन हो रही थी लेकिन भाई के लंड से चुदकर मुझे मजा भी बहुत मिला.फिर हम बाथरूम में गये और उसने मेरी चूत को धोकर उसे साफ किया.

फिर हम लेट गये. मगर थोड़ी देर के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया और एक बार फिर से उसने मेरी चूत में लंड दे प्रिया.

इस बार उसने 20 मिनट तक चुदाई की और मेरी चूत का बाजा बजा प्रिया.

दूसरी बार भाई सेक्स के बाद मेरी चूत पूरी सूज गयी. वो एकदम फूल गयी.

उसके बाद मैं थककर सो गयी.

मगर सुबह होने से पहले मनीष ने एक बार फिर से मेरी चूत चोद डाली.

इस तरह से पहली चुदाई में मैं भैया के लंड से तीन बार चुदी. मुझे बहुत मजा आया लेकिन दर्द भी बहुत ज्यादा हुआ.

उस दिन के बाद से भैया और मेरी बीच चुदाई का ये सिलसिला अभी भी चला आ रहा है.

हम दोनों किसी तरह चुदाई का मौका निकाल लेते हैं. मैं भैया की रंडी बन चुकी हूं और उससे खूब चुदवाती हूं. उसके लंड को लेकर मुझे बहुत सुकून मिलता है.

भैया ने चोद चोद कर मेरी चूत को लंडखोर बना प्रिया है. मैं अब भैया के लंड से चुदे बिना नहीं रह पाती हूं. भैया भी मेरी चूत के लिए प्यासे रहते हैं.

कुछ दिन पहले ही मेरी शादी की बात फिक्स हो गयी है. मगर मैं अभी भी अपने भाई सेक्स का मजा लेती हूँ.

मैं अपने ससुराल जाने से पहले पूरा मजा लेना चाहती हूं. मैं भैया के बच्चे की मां बनना चाहती हूं.

इस लॉकडाउन में मैंने बहुत कोशिश की कि भैया मुझे प्रेग्नेंट कर दे लेकिन हमें चुदाई का ज्यादा मौका नहीं मिल पाया क्योंकि सब लोग घर में ही रहने लगे थे.

अभी भी मैं रात को किसी तरह भैया के लंड को ले ही लेती हूं.

तो दोस्तो, ये थी हम भाई बहन की चुदाई की स्टोरी.आपको ये बहन भाई सेक्स की कहानी पढ़ने में मजा आया होगा. तो मुझे बतानाsupport@mohakkisse.com

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