पिछला भाग पढ़े:-गांव के लड़कों ने छोटी बहन काव्या को अपने जाल में फंसाया-1
आशा है कि आपने पिछली कहानी में पढ़ लिया होगा कि कैसे सोनू काव्या को ट्यूबवेल पर आने के लिए तैयार करता है, और कैसे वो काव्या की मखमली गदराई जवानी देख कर पागल सा हो जाता है। और फिर काव्या को अपने प्रेमजाल में फंसा कर उसके सारे कपड़े धीरे-धीरे करके निकाल देता है। फिर काव्या को अपने प्रेमजाल में फांस कर उसकी जवानी से खेलने की कोशिश करता है।
तभी अचानक से मौसम अपना रुख बदलता है और तेज हवा चलने की वजह से उनके कपड़े उड़ने लगते हैं। तो वो दोनों कपड़े को पाने के लिए कपड़े के पीछे खेत में दौड़ते हैं।
दोनों कपड़ो को पकड़ने के लिए दौड़ते-दौड़ते खेत में ज्यादा अन्दर तक घुस गए। उन्होंने देखा कि कपड़े आगे जाके सरसो के पेड़ पर रुक गये है और कुछ कपड़े आगे जाकर गिरे है। और ऐसा करते-करते वो दोनों अपने अपने कपड़ों को पाते हैं। पर उन्हें इस बात की कोई भनक तक नहीं होती, कि उन दोनों को कोई देख रहा था। पर वो सही से पहचान नहीं पाते, तब तक ये दोनों उनकी आंखो से ओझल हो जाते हें। पर वो चाचा काव्या को बिना कपड़ों के देख कर अचंभित थे, क्यूंकि काव्या की भरी हुई चूचियां दौड़ते वक्त तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे,जो देख चाचा के मन में काव्या को देखने की लालसा जग चुकी थी।
क्यूंकि वो चाचा दोनों को बिना कपड़ों को देख ये समझ गए थे, कि दोनों चुदाई करने के लिए ही आए थे। तो वो भी मौके के नजाकत का फायदा उठाना चाहते थे। फिर वो उन दोनों का धीरे-धीरे छुप कर पीछा करने लगे, और एक पेड़ की छाया में खड़े होकर धीरे से फोन काॅल करके अपने दोस्त को बुलाया, कि अगर किसी कच्ची कली जैसी चिड़िया को चुदवाते हुए देखना है तो जल्दी आओ। फोन पर इतना कहते हुए फोन को रख दिया।
फिर मोबाइल को जेब में रख कर उनके पीछे-पीछे चल पड़े। तो वो देखते हैं कि सोनू उस लड़की के पीछे दौड़ रहा था और वो लड़की आगे दौड़ रही थी, जिसकी बड़ी-बड़ी गांड मटक रही थी। काव्या की चूचियां जोर-जोर से उछल रही थी। काव्या की छलकती जवानी देख वो चाचा पागल से होने लगे। तभी वो देखते हैं कि काव्या और सोनू ट्यूबवेल के पास पहुंच चुके थे।
ट्यूबवेल के पास पहुंचते ही सोनू काव्या से जा कर चिपक गया, और उसे अपने आगोश में ले लिया। वो पीछे से उसकी चूचियों पर हाथ फेरने लगा। वो काव्या के जवान जिस्म को चूमने लगा, उसके बालों में अपने हाथ फेरने लगा, और अचानक से वो काव्या को लेकर पीछे की ओर मुड़ गया, और काव्या को चूमने लगा।
इधर वो मोहन चाचा चुपके से सरसो के खेत में बैठ कर काव्या की जवानी लुटते हुए देख रहे थे। वो अपने लंड को मसल रहे थे, पर वो आगे इसलिए नहीं बढ़ रहे थे, क्यूंकि वो ये मौका गंवाना नहीं चाहते थे।इधर सोनू काव्या को चूमते हुए काव्या की तारीफ के पुल बांध रहा था, ताकि काव्या पूरी तरह से सोनू पर फिदा हो जाए।
सोनू: काव्या डार्लिंग तुम बहुत हाॅट हो यार। तुम्हारी जवानी उफान पर है यार। क्या माल हो तुम। तुम्हारी पपीते जैसी चूचियां खाने का मन कर रहा है। तुम जैसे कोई परी हो। तुम्हारी गांड कद्दू को भी फेल कर दिए हैं। तुम मेरे लंड को लोगी ना जान?
कहते हुए अपने लंड को काव्या के बदन पर स्पर्श कराता है। और कहता है: मैं तुम्हारी गदराई जवानी को भोगना चाहता हूं।मैं तुम्हारी मदमस्त जवानी पर लोटना चाहता हूं।तुम्हारे जिस्म के नशे में मैं इस कदर डूब चुका हूं।देखो तुम्हारी चूत को मैं ऊपर ऊपर से चोद रहा हूं।
ये सब कहते हुए कहते हुए सोनू ने अपने हाथों के गिरफ्त में काव्या की बड़ी-बड़ी चूचियों को कैद कर लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये। काव्या सोनू के शायरी में इतना खो चुकी थी कि उसे पता ही नहीं चला कि कब सोनू ने उसकी चूचियों को हाथ से मसलने लगा और कब उसकी चूचियों को मुंह में भर कर पीने लगा।
जब वो अपने बड़े-बड़े हाथों से मेरी बहन के मम्मे दबाने लगा तो वो “……अई अई….अई… .इसस्स्स्स्स्स्स्स्… … .उहह्ह्ह्ह … ..ओह्ह्ह्हह्ह….” करके चिल्लाने लगी, उसकी निपल्स बड़ी-बड़ी और भरी हुई थी। निपल्स के चारो ओर बड़े-बड़े भूरे-भूरे घेरे बहुत ही सेक्सी लग रहे थे, जिसे देख कर सोनू पागल हो रहा था। वो एक हाथ से काव्या के मम्मों को दबा रहा था तो दूसरे हाथों से काव्या के चूचों को मुंह में भर कर पी रहा था और मजे ले रहा था। और साथ साथ अपने शायराना अंदाज में शायरी भी मार रहा था।
सोनू: तुम्हारी रसमलाई से भरी चूचियां मैं आज पी जाऊंगा।मेरी जानू काव्या आज तुम्हे मैं अपने लंड पर नचाऊंगा।
मेरी प्यारी बहन काव्या जवानी की आग में मचल रही थी। उसका सोनू से चुदवाने का मन पहले तो नहीं था पर सोनू के शायरी ने काव्या को इतना मदहोश कर रखा था कि उसकी चूत सोनू के लंड से चुदवाने के लिए तैयार थी और अपनी कमसिन जवानी सोनू से लुटवाने को बेताब थी।
सोनू खेतों के बीच बने ट्यूबवेल वाले घर में मेरी बहन की कस कर ठुकाई करने को तैयार हो चुका था। काव्या की रसीली चूत सोनू के मोटे लौड़े से कसके चुदने वाली थी। सोनू को मेरी बहन काव्या बहुत ही खूबसूरत माल लग रही थी। वो उसकी तारीफ़ कर रहा था और उसके दूध को मजे से मुंह में लेकर चूस रहा था।
सोनू: तेरे जिस्म की खुश्बू मुझे पागल कर रही है।देख मेरी रानी तेरी चूत मेरे लंड के लिए कितना मचल रही है।मेरे मोटे लौड़े से मैं तुम्हारी आज चूत फाडूंगा।नखरे मत करना जान आज तुम्हारी गांड भी मारूंगा।
मेरी बहन सोनू के लंड के लिए लालची हो रही थी। तभी सोनू मेरी बहन की चूत को मुंह लगा कर पीने लगा और चूत चाटने लगा। वो किसी चुदासे कुत्ते की तरह मेरी बहन की चूत चाट-चाट कर साफ करते हुए बोला-
Meri Behan Bani Meri Biwi
सोनू: तेरे चूत से निकले सारे पानी को आज मैं पी जाऊंगा।रूक जा रानी तुझे आज मैं अपनी घोड़ी बनाऊंगा।चूत में थूक गिराऊंगा, लौड़े को भी भिगाऊंगा।तेरे चूत को चाटूंगा मैं, अपने लौड़े को चटवाऊंगा।लौड़ा मेरा भीगेगा, तेरी चूत भी भिगाऊंगा।लौड़े को चूत में तेरे पेलूंगा, बूब्स भी दबाऊंगा।फिर तुम चिल्लाओगी, उह आह की गुहार लगाओगी।झटके मारूंगा जल्दी जल्दी, तुम फिर चिल्लाओगी।धक्के मारूंगा तेरे चूत में ऐसे, जैसे कभी चुदी ना हो किसी से।फिर हर बार मिलने आओगी, अपनी चूत तुम चुदवाओगी मुझसे।धक्के मार-मार कर चोदूंगा, मैं तेरे बाल पकड़ कर चोदूंगा।चूचियां जोर-जोर से उछलेंगी, इस प्रकार तुमको चोदूंगा।चिल्लाना ना तुम कभी जोर से, प्यार करूंगा मैं सिर्फ तुमसे।उह आह उह आह करना तुम, चोदूंगा मैं तुम्हे प्रेम से।
इतना सब कहते हुए सोनू काव्या की चूत से होता हुआ, उसकी चूचियों को चूसने लगता है। चूचियों को चाट-चाट कर गीला कर देता, काव्या के निप्पल एक-दम से टाईट हो जाते हैं तो सोनू फिर बोलता है:तेरी तो आज चूत चुदेगी, ऊपर से तेरी गांड फटेगी।चूचे भी पिये जाएंगे, फिर तू मेरी रानी हो जाएगी।
ये सब सोनू कह ही रहा था कि तभी वहां पर गांव के वही चाचा खेत से निकल रहे थे, जो उन्हें खेत में चुपके से देख लिए थे, और साथ में उनका एक दोस्त जिनको वो फोन करके बुलाए थे। वो भी आ रहे थे जो कि पूरी तरह भीग चुके थे। वो जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाते हुए ट्यूबवेल की तरफ चले आ रहे थे। अचानक वो सोनू की आवाज सुनते हैं और रुक जाते हैं, जब वो ध्यान से सुनते हैं तो उन्हे शायरी सुनाई देती है। उन्हें शक हो जाता है कि ये कोई और नहीं सोनू ही था। पर वो जब तक समझ पाते कि आवाज कहां से आ रही थी, तब सोनू को किसी के आने की आहट सुनाई दे जाती है।
तब तक चाचा बोल पड़ते हैं कि: कौन है वहां पर?
तो सोनू सतर्क हो जाता है और काव्या को लेकर झट से कोने में छिप जाता है ताकि चाचा को खिड़की से कुछ दिखे ना। पर चोर कितनी भी कोशिश कर ले, वो पकड़ा ही जाता है, और ऐसा ही हुआ।
सोनू काव्या को लेकर छुप तो जाता है, और जल्दी से कपड़े भी छुपा देता है। पर वो जल्दी-जल्दी में काव्या की कच्छी और ब्रा जो फाड़ कर बगल रख दिया था, वो हटाना भूल गया। और जब तक वो ब्रा और कच्छी हटाना चाहा, तब तक चाचा खिड़की के पास आ गए, और वहां से इधर-उधर कमरे में देखे तो कोई दिखाई नहीं दिया। पर वो कच्छी और ब्रा को बगल में पड़ा देख लिए, और वो समझ गए कि यहां पर कोई तो था, पर उनकी आवाज सुन कर छिप गया है।
चाचा भी बड़े वाले चुदक्कड़ थे, तो उन्हे पता था कि ये गेम कैसे खेलना है और कैसे रंगे हाथ उनको पकड़ना है। इसलिए वो थोड़ा ऊंची आवाज में बोले ताकि वो दोनों भी सुन लें।
वो बोले कि: क्या मोहन तुम्हारी उम्र ज्यादा हो गई है। मुझे लगता है कि मेरे कान बजने लगे हैं। कोई तो नहीं था। फालतू में इधर चला आया। चल घर फालतू में पानी में भीग रहा।
इतना कहते हुए जल्दी से खटपट-खटपट की आवाज करते हुए दूर जाने लगा। फिर कुछ दस कदम जाने के बाद दबे पांव वहां से चुप-चाप आकर खेत में छुप गया। और उन्होंने अपने दोस्त को भी छुपने को बोल दिया।
जी हां आपको बता दूं मोहन की उम्र 32 साल, बड़े-बड़े मूछों वाले, हट्टे-कट्टे मर्द थे। उनके दोस्त का नाम लाखन सिंह था। लाखन 33 वर्ष के लम्बे कद-काठी के थे। चौड़ी छातियां और बलिष्ठ शरीर था। ये दोनों चाचा बहुत बड़े चुदक्कड़ थे। जिनके लंड की दीवानी गांव की कई भाभियां थी, जो अपने ही खेतों में अपनी चूत का दर्शन उनके लंड को करा चुकी हैं।
मौसम का मिजाज और मौके की नज़ाकत देख कर ऐसा ही लग रहा था आज काव्या को भी उनके लंड का दर्शन हो सकता था और वो भी उनके लंड की दीवानी होने वाली है।
इधर जब सोनू को लगा कि चाचा चले गए, तो वो झट से खिड़की के पास आया और जब देखा कि कोई नहीं था, तो वो जल्दी से दरवाजा खोला और बाहर आकर इधर-उधर देखा तो कोई नहीं था। फिर वो जल्दी से अन्दर आ गया, और अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया।, क्यूंकि बारिश तेज हो चुकी थी तो इस बारिश में किसी के आने का कोई चांस ही नहीं था। और तुरन्त आकर फिर एक शायरी मारते हुए काव्या से बोला-
सोनू: देर मत कर आजा मेरी जान, अब ले ले मेरे मोटे तगड़े लांड।चुदवा ले तू अब अपनी रसीली चूत, पी जा मेरे लंड के सफेद मूत।
इतना कहते हुए सोनू काव्या को पकड़ कर घोड़ी बनाने ही वाला था, कि तुरन्त खिड़की पर किसी ने सोनू को आवाज दी। सोनू ने देखा कि वो वही चाचा मोहन की आवाज थी। वो पीछे मुड़ कर जब तक खिड़की का दरवाजा बन्द करता, तब तक चाचा दौड़ कर ट्यूबवेल वाले कमरे के खिड़की से अन्दर झांकने लगे। और जब तक सोनू जल्दी से खिड़की बन्द करता, मोहन चाचा ने जो देखा वो देखते ही उनकी हवाई उड़ गई। आखिर उन्होने क्या देख लिया, जानने के लिए बने रहें अपने राजू भाई के साथ।
धन्यवाद! कमेन्ट करके प्रतिक्रिया जरूर दे, आपको कहानी कैसी लगी।
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