Hindi Chudai Kahani

बहनों की ताबड़तोड़ चुदाई-1(Behno ki tabadtod chudai-1)

लेखक: lizzie90 दिनांक: 01-10-2014 पठन समय: 8 मिनट

मेरी नई चुदाई कहानी में आपका स्वागत है। उम्मीद है आपको कहानी पसंद आएगी।

कहानी मेरे चाचा की लड़की यानि मेरी बहन की है, जिसकी मैंने चूत और गांड मार कर उसे अपना बनाया और वो मेरे लंड की गुलाम बनी।

मेरी चाचा की लड़की का नाम मनीषा है। उसकी उम्र 19 की थी। चाचा और उनका परिवार गाव में रहता था। चाचा के घर में चाचा-चाची, उनका 1 लड़का और उनकी 5 लड़किया थी। हां-हां जनता हूं आपके मन क्या सवाल आ रहे है, कि चाचा की तो 5 लड़किया थी, तो मैंने उनकी चौथी लड़की को ही क्यों चोदा? वो आपको मैं कहानी में आगे बताऊंगा।

मेरे चाचा किसान है और चाची घर का काम करती थी। मेरे चाचा की 5 लड़कियां थी, जिनका नाम रानी (बड़ी), पूजा (रानी से छोटी), शांती (पूजा से छोटी), मनीषा (शांती से छोटी), राधिका (मनीषा से छोटी)।

रानी का फिगर कुछ खास नहीं था। बड़ी तो थी, लेकिन उसका फिगर मुझे कभी अच्छा नहीं लगा। छोटे बूब्स, पतली कमर, पतली गांड। तो वो मुझे पसंद नहीं थी।

पूजा मुझे अच्छी लगती थी। उसका थोड़ा फेस कट अच्छा था और उसके बूब्स भी थोड़े निकले हुए थे। लेकिन सेक्स वाली बात नहीं लग रही थी उसमें। अब बारी है शांती की। शांती अच्छी लड़की थी। सब कुछ काम कर सकती थी। वो समझदार भी थी और उसके बूब्स और कमर मोटी थी। हमेशा ही टी-शर्ट और प्लाजो में रहती थी। उससे मेरा कुछ खास लगाव नहीं था, लेकिन माल तो वो चोदने लायक ही थी।

अब बारी आती है मनीषा की, जो मेरे सपनो की रानी थी। उसका जिस्म एक-दम नुकीला और दमदार था। बूब्स बड़े-बड़े, कमर मोटी, और गांड पीछे निकली हुई थी। वो घर में टी-शर्ट में रहती थी। जब उसे देखता तो क़यामत लगती थी। मन करता था कि अभी ये मान जाये तो इसकी गांड मार कर इसे उठने ना दूं।

फिर बारी आती है लास्ट राधिका की, जिसकी उम्र 18 की थी। लेकिन देखने में सभी बहनों से खुबसूरत और अच्छे जिस्म की लड़की थी। एक-दम स्लिम और बढ़िया फिगर था उसका और एक-दम माल लगती थी।

एक रोज चाचा घर आए और पापा से बात करने लगे कि, “दादा रानी बड़ी हो गई है, उसके लिए लड़का ढूंढो। उसकी शादी करनी है। अगर लड़का अच्छा मिल जाये तो रानी और पूजा की शादी एक साथ कर देंगे।”

पापा ने उनसे कहा: ठीक है, मैंने देखे है रानी के लिए कुछ लड़के। अगर तू कहे तो जाकर देख लेते है।

तो चाचा ने कहा: दादा आप ही देखो। आपकी ही लड़की है दोनों, जो आपको उचित लगेगा कर लेंगे।

चाचा पापा की बहुत इज्जत करते थे, तो उन्होंने सब पापा के भरोसे छोड़ दिया। फिर एक रोज चाचा, पापा, हमारे पड़ोस के ताऊ जी, उनका लड़का, और मैं, लड़का देखने चले गए। हमने कुछ दिन तक लड़के देखे और पापा और चाचा को 2 लड़के पसंद भी आ गए। उनका नाम कपिल और सचिन था। दोनों भाई थे और अच्छे परिवार से थे। दोनों लड़को में से एक खेत और घर का काम देखता था और दूसरा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था।

पापा और ताऊ जी ने उन्हें कहा, “एक दिन आप आकर हमारी बच्चियों को देख लो। आपको अगर अच्छी लगे तो आगे बात कर लेंगे।” उन्होंने ने भी कहा, “ठीक है, हम 2 दिन बाद आपके यहाँ आयेंगे, और आपका घर और आपके परिवार से भी मिल और देख लेंगे।”

हम लोग चाय नाश्ता पानी करके घर को आ गए और घर आकर मैं चाचा को छोड़ने घर आ गया, और चाचा खेत पर निकल गए। रानी और पूजा दोनों ने मुझे उनके कमरे में बुलाया और पूछा, “भाई बता ना कैसे दिखते है तेरे जीजू?”

मैं: जीजू? अभी तो वो बस देखने आयेंगे। उसके बाद कुछ पता चलेगा। इतनी जल्दी मत सोचो कुछ भी।

रानी: चल ठीक है। ये तो बता कि दिखने में कैसे है दोनों?

मैं: अच्छे बहुत दिखते है, और अच्छा परिवार भी है। दोनों का नाम कपिल और सचिन है‌।

पूजा: कपिल से किसकी बात की है और सचिन से किसकी बात है?

मैं: यार तुझे बहुत पड़ी है बहन शादी की (और हसने लगा)।

रानी: हां भाई बता ना।

मैं: कपिल रानी के लिए और सचिन पूजा के लिए देखा है। अब देखते है वो 2 दिन बाद आने का कह रहे थे।

रानी: भाई थैंक-यू, तूने उनका फोटो लिया क्या?

मैं: नहीं यार भूल गया। वो 2 दिन बाद आयेंगे तो देख लेना।

और मैं जाने लगा तो मुझे बाहर राधिका और मनीषा दिखी। दोनों कुछ काम कर रही थी। दोनों ने मुझे देखा और कहा, “अरे भैया आप। क्या हुआ? कैसा है लड़का दीदी के लिए?”

मैंने उन्हें यही कहा कि 2 दिन बाद वो आयेंगे जब देख लेना। मेरी नज़र मनीषा पर गई। क्या कमल लग रही थी। उसने ब्लैक टी-शर्ट और जीन्स पहना था और उसका जिस्म देख कर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा। राधिका ने मेरा लंड देखते हुए कहा, “भाई अब आप जाओ, आप से बाद में मिलते है।” मैंने जाते हुए शांती के बारे में पूछा। उसने कहा, “दीदी उनकी सहेली के घर गई है।” और मैं वह से निकल आया।

2 दिन बाद दोनों लड़के और उनके पापा और उनके अंकल रानी और पूजा को देखने आए। दोनों बहुत ही अच्छे से सजी थी। रानी ने कला रंग का सूट और पूजा ने पीले रंग का सूट डाला था। रानी को मैंने कभी इतने ध्यान से नहीं देखा। लेकिन उस दिन देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा। उनका जिस्म देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी।

कपिल ने रानी को देखा तो देखता ही रह गया। रानी भी कपिल को देख कर मुस्कुराई और सचिन ने भी पूजा को देखा और वो भी देख कर मुस्कुराया। पूजा ने भी हस्ते हुए चाय और नाश्ता दिया।

सब घर वाले बैठ कर बात कर रहे थे, और कपिल रानी को घूरे जा रहा था और रानी भी कपिल को घूरे जा रहा था। उसका मन एसा कर रहा हो, मानो आज ही रानी हां कह दे तो कमरे में ले जाकर रानी की चूत फाड़ दे।

उधर सचिन भी एसी ही हरकत कर रहा था, और पूजा भी उसको इशारे कर रही थी। मैं ये देख कर दंग रह गया कि देखो दोनों को मस्ती चढ़ी है। लड़को के सामने कितना मुस्कुरा रही है। फिर 2-3 घंटे के बाद उन्होंने अपनी जेब से नेकलेस निकाल कर रानी और पूजा को दिया और कहा, “भाईसाब हमें आपकी बच्चियां पसंद है। आप जब कहो शादी कर देंगे।”

ये सुन कर दोनों अन्दर चली गई और अन्दर से झांक कर देख रही थी। कपिल की नजर रानी से हट नहीं रही थी, और ये सब मैं अच्छे से नोटिस कर रहा था। लेकिन अब मुझे जलन सी महसूस होने लगी। इतने में लड़को के पापा ने शांती और मनीषा को देखा और कहा, “भाईसाब आपकी कुल कितनी लड़कियां है?” तो चाचा ने कहा, “भाईसाब, मेरी 5 लड़कियां है। और ये मेरी बच्चियांं है।”

इसके आगे की कहानी अगले पार्ट में।