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माँ की चुदाई पठन समय: 14 मिनट पढ़ा गया: 588 बार

माँ बेटा चुदाई: बेटे ने मेरी हवस मिटाई-2

प्रभा शर्मा

03 Jun 2015 को प्रकाशित

माँ बेटा चुदाई: बेटे ने मेरी हवस मिटाई-2
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दोस्तो, अपने मेरी पिछली कहानीमाँ बेटा सेक्स: बेटे ने मेरी हवस मिटाईको इतना पसंद किया उसके लिए आप सभी का अपने जिस्म से शुक्रिया अदा करती हूँ.

तो मेरी पिछली कहानी में आप लोगों ने देखा कि कैसे मुझ विधवा की प्यासी जवानी की जलती आग को मेरे बेटे सोनू ने शांत किया.अब आगे की कहानी पढ़िए!

उस रात के बाद अब हम दोनों माँ बेटे खुल चुके थे पूरी तरह से! अगले दिन मैं दूकान चली गयी और बेटा कॉलेज चला गया, दिन एकदम सामान्य रोज़ की तरह गया.लेकिन रात का नशा उतर नहीं रहा था, सच कहूँ तो मुझे पति से भी ज्यादा अपना बेटा पसंद आ रहा था क्योंकि छह फुट का जवान लड़का एकदम हट्टा-कट्टा अगर साथ में चले तो उसकी और मेरी उम्र से ज्यादा फर्क नहीं पता चलता!खैर अब मुझे बदनामी का भी डर नहीं था चूँकि घर में ही सब मिल गया था मुझे!

शाम को करीब 9 बजे मैं दूकान बढ़ा कर घर आयी, शिवानी अपनी पढ़ाई में लगी हुई थी और सोनू लैपटॉप में कुछ कर रहा था!मैं उसके पास गयी और पूछा- क्या कर रहे हो बेटा?सोनू- मम्मी मुझे एक अंतर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर में नौकरी मिली है कोलकाता में, महीने की तनख्वाह है छब्बीस हज़ार रुपये और इंसेंटिव अलग से!मैंने- यह तो बहुत ख़ुशी की बात है बेटा!

सोनू- माँ, क्यों न हम लोग एक काम करें… यहाँ अब रहने का भी दिल नहीं करता, यह दूकान बेचकर हम कोलकाता ही शिफ्ट हो जाते हैं, मैं तुम और शिवानी! वहां खुलकर अपनी ज़िन्दगी जी भी पाएंगे हम लोग!

हालाँकि बात में दम तो था लेकिन मैं ससुराल वालों की वजह से थोड़ी हिचक रही थी, मैंने सोनू से कहा- बेटा सोचते हैं इस बारे में! इतनी जल्दी तो कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता.इसके बाद मैंने सोनू से कहा- तुम्हें चिकन बहुत पसंद है न?सोनू- हाँ मम्मीशिवानी भी बोली- हाँ माँ, आज चिकन बनाया जाए!

मैंने सोनू को अंदर के कमरे में बुलाया और उसे पैसे दिए और कहा- बेटा, चिकन ले आओ, मैं बना देती हूँ!इस पर सोनू मुस्कुराया और पैसे लेकर बाहर चला गया.

थोड़ी देर में सोनू चिकन लेकर आ गया, मैंने चिकन बनाया और सबसे पहले शिवानी को खिला प्रिया.खाना खाने के बाद वो सोने चली गयी हॉल में!फिर मैंने सोनू से कहा- बेटा, तुम अंदर के कमरे में चिकन लेकर जाओ, मैं अभी आती हूँ!

सोनू अंदर चला गया, घर का सारा काम कर के मैं भी अंदर कमरे में आयी. सोनू बेड पे लेटा हुआ था और चिकन बेड पे ही रखा हुआ था.मैं भी बेड पर बैठ गयी.

जब तक सोनू के पापा थे, चिकन के साथ एक दो पेग दारू जरूर पीते थे और मुझे भी पिलाते थे.चिकन तो दिख रहा था लेकिन कुछ कमी लग रही थी और मैं अपने बेटे से दारू की कैसे कहूँ? यह सोच कर मैं सोच में डूबी हुई थी.

तभो सोनू ने कहा- मम्मी, क्या सोच रही हो? खाओ न चिकन, तुम्हें भी तो बहुत पसंद है!मैं- बेटा, पसंद तो है लेकिन ऐसे सूखा सूखा कुछ अच्छा नहीं लग रहा!सोनू तुरंत समझ गया और मुझसे तपाक से कहा- मम्मी, क्या तुम पीती भी हो?मैं- बेटा जब तक तुम्हारे पापा थे, मुझे हमेशा ही पिलाते थे चिकन के साथ!

सोनू हंसने लगा और बोला- चलो, अब पीने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं … मैं लेकर आता हूँ अभी!

मैंने कहा- नहीं, रहने दे बेटा, अब कहाँ जायेगा!इस पर वो बोला- अरे माँ, तुम चिंता न करो, मैं अभी लेकर आता हूँ, पीने के बाद रात वाला नशा फिर से चढ़ेगा और जबरदस्त!

सोनू बाहर गया और थोड़ी ही देर में एक ब्लेंडर्स प्राइड की बोतल ले आया, साथ में सोडा भी!जब तक सोनू बाहर था तो उसे लुभाने के लिए मैंने अपनी पुरानी स्कर्ट और टॉप पहन ली जो सोनू के पापा मुझे पहनाया करते थे सेक्स करने के पहले! लेकिन ऐसे कपड़े पहन कर कभी कमरे से बाहर नहीं गयी थी मैं!

सोनू अंदर आकर बेड पे बैठा और मेरी गोरी चिकनी जाँघें निहारने लगा. मैं समझ गयी कि इसे मेरा बदन बहुत पसंद आ रहा है.मैं उठी और दो गिलास और बर्फ लेकर आ गयी.

अब हम दोनों मम्मी बेटा बेड पे बैठ गए और मैंने पेग बनाया पटियाला … उसमें बर्फ डाली और सोनू को कहा- मुझे नहीं लगता कि हमें दो गिलास की जरूरत है. एक से ही हम दोनों पियें तो?

सोनू का लौड़ा फनफना के खड़ा हो चुका था, उसने अंडरवियर नहीं पहना था तो मैं साफ़ देख के महसूस कर पा रही थी सोनू के लन्ड को!मैं समझ गयी कि बेटा अब गर्म हो रहा था. तो पेग उठा कर और एक हाथ में चिकन का लेग पीस लेकर मैं सोनू की जांघों पर बैठ गयी. पहले उसे चिकेन खिलाया, फिर घूँट घूँट कर के उसे पिलाने लगी और खुद भी उसी में से पी और खा रही थी.

बीच बीच में हम दोनों माँ बेटे एक दूसरे के होंठों को भी चूस रहे थे और सोनू ने हाथ मेरे टॉप के अंदर घुसा रखा था और मेरे निप्पलों को मसल रहा था जिससे मैं अब धीरे धीरे गर्म हो रही थी.

एक पेग ख़त्म होने के बाद मैं दूसरे पेग उठाने के लिए उठी तो सोनू ने अपने सारे कपड़े खोल दिए और अपना खड़ा लन्ड मेरी स्कर्ट के ऊपर से ही मेरी गांड के छेद पर भिड़ा प्रिया.मेरे मुँह से आउच निकल गया, मैंने जानबूझ कर आज ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी.

मैं पेग बना कर एक हाथ में चिकन लेकर खड़ी होकर अपने बेटे के मोटे मूसल लौड़े को देखने लगी. इतने में सोनू नीचे बैठ गया और मेरी स्कर्ट के अंदर घुस के मेरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा.मैं कसने लगी थी, मेरी जवानी एकदम उफान मार रही थी, मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने लगी अपने आप! मुझसे सहन नहीं हुआ और मैंने आधा पटियाला खुद ही पी लिया और बाकी अपनी स्कर्ट के अंदर डालने लगी जो मेरी चूत तक पहुंच रहा था और वहां से मेरे बेटे के मुँह में!सोनू अब मेरी चूत से बहती हुई शराब और मेरी चूत के निकलते पानी का एक साथ मज़ा उठा रहा था.

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थोड़ी देर बाद सोनू ने मेरी स्कर्ट खींच दी और अपनी ही माँ को नंगी कर प्रिया और खड़े होकर मुझसे लिपट गया. मैंने भी कस के पकड़ लिया अपने बेटे को और हम एक दूसरे को चूमने लगे थे पागलों के जैसे!

फिर सोनू ने कहा- मम्मी, तुम अपने पूरे नंगे बदन पर शराब गिरा के मुझे पिलाओ, तुम्हारी जाँघें चूसने का दिल कर रहा है!यह सुनकर मैं और गर्म हो गयी और मैंने शराब अपनी जांघ पे गिरायी जिसे मेरा बेटा चाटता चला गया.

मैं खड़ी ही थी कि अचानक उसने मुझे किस किया और मुझे घुमा प्रिया और खुद नीचे बैठ गया और मेरी गांड के दोनों पल्लों पर किस करने लगा फिर दांत से काटा.बेटे के द्वारा गांड पे दांत काटने और मेरी गांड को मसलने पर मेरी चूत से पानी नहीं बल्कि झरना बहने लगा था. मैंने कहा- सोनू बेटा, गांड मारेगा या चूत चोदेगा अपनी माँ की?सोनू- मम्मी, आज सिर्फ तेरी चूत पेलूंगा मैं … और एक बात कहना चाहता हूँ मम्मी तुझसे … लेकिन एक शर्त है!मैं- कैसी बात और कैसे शर्त? जो ख़ुशी तू मुझे दे रहा है उसके लिए मुझे तेरी सारी शर्तें और बातें मंजूर हैं. बता जो भी कहना है?

सोनू- रुक फिर … तेरी गांड भी मार ही लेता हूँ… तेरी गांड में अपना लौड़ा डालने के बाद तुझे चोदते हुए बताऊंगा!मैं- ठीक है बेटा, ले बन गयी मैंने तेरी कुतिया, अब कुत्ता नहीं तू आज सांड बन के मेरी गांड चौड़ी कर दे मेरा राजा बेटा!

सोनू ने फिर मुझे पीछे से मेरी कमर को पकड़ा और एक ही बार में सरसरा के अपना पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुसेड़ प्रिया, मैं चीख पड़ी लेकिन नशे में थी तो दर्द महसूस नहीं हुआ.अब सोनू मेरी गांड मारते हुए मुझसे बोला- मम्मी, तू मुझे बहुत पसंद है. कोलकाता चल, वहां हमे कोई जानता भी नहीं होगा. वहां ढंग से खुल के दिन रात तेरी जवानी की गर्मी उतारूंगा!

यह सुनकर मेरे जोश की कोई रीमा न रही क्यूंकि मैं दिन रात लन्ड चाहती हूँ अपनी चूत में! मैंने कहा- आअह्ह्ह बेटा, ठीक है! चल, जल्दी से जल्दी मैं भी अपनी जवानी एन्जॉय करना चाहती हूँ! लेकिन वहां अगर कोई पूछेगा तो तेरा बाप कौन है और तेरा मेरा रिश्ता क्या है तो क्या कहेंगे? क्यूंकि मैं जब ज्यादा जोश में आ जाऊँगी तो आवाज़ होगी और पड़ोसी जान जायेंगे!सोनू- मम्मी साली, तू चिंता मत कर! एक तो बड़े शहर में किसी को किसी से मतलब नहीं होता. अगर कोई पूछेगा भी तो कह देना मैं ही तेरा पति हूँ. जरूरत पड़ी तो शादी कर लेना मुझसे कुछ साल के लिए ताकि तू और मैं दोनों अपनी जवानी के मज़े लूट सकें!

यह बोलकर सोनू ने मेरी गांड से अपना लौड़ा निकला और सीधा खड़े कर के मेरी चूत में पेल प्रिया और मेरी गांड पकड़ के मुझे गोदी में उठा लिया और मैंने भी तुरंत उसके कंधे पकड़ लिए और हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे!

मैंने कहा- बेटा, तो फिर शर्म किस बात की? वहां कोई हमें पहले से जानता नहीं, तो क्यों न हम दोनों शादी कर लें ताकि समाज में कोई कुछ बोलेगा भी नहीं और हम आराम से मजे लूट सकते हैं. और जब तुझे अपनी सही वाली शादी करनी होगी तो किसी दूसरे सिटी में जाकर बस जायेंगे!सोनू- एकदम सही कह रही हो तुम मम्मी, यही प्लान करते हैं जल्दी से जल्दी! लेकिन शिवानी को कैसे समझायेंगे?मैं- उसे मैं समझा दूंगी, तुम चिंता न करो, वो सब समझती है अब, उसको मैं समझा दूंगी पर मुझे तुमसे भी एक चीज़ चाहिए!

अब सोनू ने मुझे बेड पे पटक प्रिया और मेरे दोनों पैर अपने कंधे पे रख कर मेरी चूत को चोद चोद कर भोसड़ा बनाने लगा और बोला- बोल न मम्मी, क्या चाहिए तुझे?मैं- मुझे एक बच्चा चाहिए तेरा अपनी कोख में! पहले कुछ साल मेरी जवानी का रास निचोड़ अच्छे से उसके बाद बच्चा टिका देना मेरी कोख में!

इतना सुनते ही उसने मेरे दोनों बूब्स कस के मसल के मेरी चूत को फाड़ डालने के जैसे चोदने लग गया और बोला- मैं भी चाहता हूँ मम्मी कि तू मेरे बच्चे की मम्मी बने!

इतना सुनकर मैं भी अपनी गांड उठा कर अपने बेटे का पूरा साथ दे रही थी अपनी चूत को चुदवाने में और सोनू से कहा- बेटा, बर्बाद कर दे मेरी चूत को! आज इतना कस कस के चोद कि मैं बेहोश हो जाऊँ और मेरी चूत का भोसड़ा बना दे तू आज! चोद साले हरामी रंडी की औलाद, अपनी ही माँ को चोद रहा था है साले मादरचोद… और चोद मुझे! अपनी माँ की जन्म जन्म की जिस्म की आग बुझा दे रे हरामखोर!

मेरा जोश एकदम सातवें आस्मां पे था और शराब का नशा था सो अलग, सोनू भी नशे और जोश से लबालब भरा हुआ था, वो बोला- ले न मम्मी साली, एकदम रांड बना के छोड़ूँगा तुझे, ऐसे पेलूंगा जैसे तुझे पैसे देकर लाया हूँ और चोद चोद के पैसे वसूल करने हैं!मैंने- हाँ बेटा चोद अपनी माँ की चूत… मज़े ले पूरे मेरी जवानी के!

थोड़ी ही देर में हम दोनों का एक साथ गिर गया मेरी चूत के अंदर ही! मैं तुरंत उठी और पेशाब करके आयी ताकि सोनू का सारा माल निकल जाए!

फिर हम दोनों नंगे ही सो गए और सुबह बहुत लेट उठे. तब तक शिवानी स्कूल जा चुकी थी. हम समझ गए थे कि उसने हम माँ बेटे को नंगे देख लिया है. लेकिन दारू के नशे के कारण हमारी नींद नहीं खुली!खैर हमारे लिए तो बढ़िया ही था तो हम सुबह नाश्ता वगैरह करने के बाद प्लान बनाने में लगे हुए थे कि अब कोलकाता का प्रोग्राम कैसे क्या होगा और शिवानी को कैसे राज़ी किया जाए!

दो बजे गए और शिवानी स्कूल से आ गयी. वो चुपचाप अंदर आयी और अंदर से आवाज़ दी- मम्मी इधर आओ!मैं तुरंत उसके पास गयी और पूछा- क्या हुआ बेटी, सुबह तुम बिना नाश्ते किये ही स्कूल चली गयी?शिवानी- मम्मी, कल रात मैंने सब कुछ देखा था भैया जिस तरह से तुम्हे प्यार कर रहे थे, मुझे अच्छा लगा क्यूंकि पापा के जाने के बाद तुम्हें इतनी खुश मैंने कभी नहीं देखा!

मैंने- बेटी, यह बात किसी को न बताना और अब हम सब कोलकाता चलेंगे!शिवानी- माँ, जिसमें तुम खुश हो, वही ठीक है, बड़े शहर में जाऊँगी तो मेरी पढ़ाई भी ठीक से होगी. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी, आप और भैया को जो ठीक लगे वो कीजिये, मैं आप लोगों का पूरा साथ दूंगी!

यह सुनकर मेरी टेंशन ही ख़त्म हो गयी और मैंने सोनू को भी सब कुछ बताया.

कुछ दिन तक ऐसे ही चला, फिर हम कोलकाता के लिए निकलने का प्लान बनाने लगे, दूकान बेच दी और टिकट भी करवा ली!

तो दोस्तो, माँ की चूत गांड चोदन कहानी का यह भाग आपको कैसा लगा, मुझे ईमेल कर के जरूर बतायें!मेरा ईमेल है- support@mohakkisse.comआपकी अपनी रांड: माँ प्रभा

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