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माँ की चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,254 बार

बेटे से चुदवा कर अपना यार बना लिया

कविता दूबे

19 Jun 2020 को प्रकाशित

बेटे से चुदवा कर अपना यार बना लिया
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मेरी पिछली कहानीबेटे को बॉयफ्रेंड बना कर चुदवा लियाआपको बहुत पसंद आई, जिसके लिए आप सभी ने मुझे मेल किए, आप सभी को धन्यवाद.

आइए, उसी के शब्दों में उसकी सेक्स कहानी को पढ़िए और गर्म हो जाइए.

मेरा नाम सोनी राज है, मैं भोपाल की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 40+ हो गई है. मैं तलाकशुदा महिला हूँ.

कविता मेरी बचपन की बेस्ट फ्रेंड है.उसके पति की मृत्यु के बाद हम दोनों मिले थे.

कविता ने पति जाने के बाद अपना जीवन व्यवस्थित कर लिया था और फिलहाल वो अपने बेटे वंश के साथ बहुत खुश थी.हालांकि उसे इतना प्रसन्नचित्त देख कर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा. उन दोनों का इस मस्ती से रहना, मैं समझ नहीं पा रही थी.

जब मुझसे नहीं रहा गया तो आखिर मैंने कविता से पूछ ही लिया- जीजू के जाने के बाद भी तुम दोनों इतना खुश कैसे हो? क्या तुम्हें जीजा जी के जाने का कोई गम नहीं है?उसने बोला- पति को मैं वापस नहीं ला सकती हूँ. फिर वंश है ना मेरे साथ!

मैं बोली- वंश है, वो तो ठीक है … मगर जीजू की वो कमी तो दूर नहीं कर सकता ना!उसने बोला- नहीं … वो मेरी हर कमी दूर करता है.

उसके मुँह से इतनी बिंदास बात सुनकर मैं हैरान रह गई.मैंने उससे सीधे सीधे पूछने का तय किया और पूछा- सेक्स के लिए क्या कहोगी?कविता बोली- अब तुझसे क्या छुपाना … वंश ही मेरा सब कुछ है.

मैं एकदम अवाक होकर उसकी तरफ देखने लगी. मैंने उससे इस बात को विस्तार से जानना चाहा, तो उसने सारी बात मुझे बता दीं.

उसकी बात सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा. क्योंकि मुझे भी पति से अलग होने के बाद जिस्म की आग परेशान करती थी.मेरा भी बेटा है, तो मैंने सोचा मैं भी कविता के जैसे कर सकती हूँ.

पर ये सब कैसे होगा, इसी उधेड़बुन में मैं सोचती रही. कविता ने मुझे काफी कुछ तरीके बताए थे, मगर ये सब इतना आसान होता, तो शायद मैं इतना न सोचती.

फिर मैं वापस भोपाल आ गई.

मेरा तलाक हुए दस साल हो गए थे. जब मेरा तलाक हुआ था तब मेरा बेटा आदी दस साल का था, जो अब 20 साल का गबरू जवान हो चुका है.

हालांकि मैंने पति से अलग होने के बाद अब तक कई बार कॉलबॉय बुला कर या उसके साथ कहीं जाकर अपनी चुत की खुजली मिटवाई है और मैं नये नये जवान हुए लौंडों के साथ सेक्स एन्जॉय करती रहती हूँ.पर कविता की बात सुनकर मैं एकदम से भौचक्की थी कि खुद अपने बेटे के साथ सेक्स कैसे करूं.

हालांकि कविता ने खुद के बेटे के साथ सेक्स करने के पीछे कई कारण भी बताए थे, जो कि कहीं न कहीं सही थे.जैसे सबसे पहले तो गोपनीयता बनी रहेगी. पैसे भी बचेंगे और जब मन हुआ, तब एन्जॉय भी कर सकती थी.

मगर अपने बेटे के लिए खुली किताब हो जाने के किये कैसे उसे तैयार करूं … मेरी समझ में नहीं आ रहा था.

मैं काफी सोच विचार करती रही.कभी मुझे लगता था कि उसके साथ सेक्स सम्बन्ध न बनाऊं.

फिर कविता के उसके बेटे के साथ सेक्स रिलेशन को सोच कर मुझे भी अपने बेटे के जवान लंड की चाहत होने लगती.

मैंने सोचा कि मेरा बेटा आदी अब जवान हो गया है … और आज नहीं तो कल अपने लिए छेद तो ढूंढेगा ही.मैं उसके लंड का धागा अपनी चुत में फंसा कर ही तुड़वाने का मन बनाने लगी थी.

नए और जवान लंड की चाहत में मेरी खोपड़ी बड़ी तेजी से इस पर काम करने लगी थी कि आदी को कैसे पटाया जाए.

तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैं एक नया फोन और सिम लाई.उसमें मैंने व्ट्सऐप डाउनलोड किया और अपने बेटे आदी को हाय लिखा भेजा.

कुछ पल बाद उसका रिप्लाई भी आ गया- हैलो … जी आप कौन?मैं बोली- मैं कविता आंटी.उसने बोला- हैलो आंटी … कैसी है आप?

मैंने उससे ठीक है लिखते हुए उसका हाल चाल पूछा और उससे बाय बोल दिया.

अब मैं रोज उससे बातें करने लगी और थोड़ी बहुत बात करके उसे बाय बोल देती थी.

एक दिन मैंने उसको हाय बोल कर चैट बंद कर दी और उसे अपने रूम में बुला लिया.इस वजह से वो कविता आंटी को रिप्लाई नहीं दे सका. मतलब मुझे उसने जवाब नहीं लिखा.

मैंने उससे कुछ देर इधर उधर की बात करके उससे जाने को बोल दिया.

कुछ ही देर बाद उसका रिप्लाई आया- हैलो.मैं बोली- कहां बिजी हो गया था … कोई गर्लफ्रेंड के साथ लगा था क्या?वो बोला- नहीं आंटी … मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.मैं बोली- चल झूठा.

वह बोला- सच में आंटी … मॉम की कसम!मैं बोली- वो तेरी मॉम है, कोई गर्लफ्रेंड नहीं … जो तू उसकी ऐसे कसम खा रहा है.वो बोला- सॉरी.मैं बोली- कोई बात नहीं!

मेरे बेटे को पता ही नहीं था कि वो अपनी मॉम से ही बात कर रहा है.

फिर मैंने उससे कविता आंटी बनकर पूछा- तो कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए तुझे?पहले तो वो शरमाया, कहने लगा- अरे आंटी … आप भी कैसी बात कर रही हैं.मैंने उससे कहा- क्यों अब तुझे गर्लफ्रेंड की जरूरत नहीं होती क्या? मेरे बेटे की गर्लफ्रेंड तो मेरे घर तक आती है. वो मेरे सामने ही उसे किस वगैरह कर लेता है.

इतना सुनकर वो मुझसे थोड़ा खुला. उसने कहा- आंटी फिलहाल तो मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है … लेकिन कुछ लड़कियां जरूर मुझे पसंद करती हैं. मगर मैं ही उन्हें लिफ्ट नहीं देता.मैंने पूछा- क्यों … उनमें से कोई तुझे पसंद नहीं है या तेरी ख्वाहिश कोई और लड़की को लेकर है?वो बोला- नहीं आंटी, मुझे उन लड़कियों में से एक भी पसंद नहीं है.

मैंने उससे पूछा- तो वही तो पूछ रही हूँ कि तुझे कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए?वो बोला- अपनी मॉम के जैसी.मैं बोली- बेवकूफ है क्या … मॉम के जैसी क्यों चाहिए?

वो बोला- मेरा मतलब नेचर से, देखने से उसकी तरह केयरिंग हो.मैं बोली- अच्छा … ये मतलब था.वो बोला- हां.

फिर मैं बोली- मैं एक बात कहूँ, तू कुछ बुरा तो नहीं मानेगा न?वो बोला- नहीं आंटी … आप बोलिए न!मैं बोली- तूने बोला कि गर्लफ्रेंड देखने मैं भी मॉम टाइप की हो … मैं ये बात समझी नहीं.

वो बोला- अरे आंटी आप मेरी मॉम से मिली ही हो न … वो बहुत सुंदर हैं न … इसलिए मैंने उनके जैसी कहा.मैं बोली- मतलब तुझे गर्लफ्रेंड में मॉम चाहिए या मॉम में गर्लफ्रेंड … हैं न!वो बोला- नहीं आंटी … आप समझी नहीं.

मैं बोली- मैं सब समझ गई … मैं किसी से कुछ नहीं बोलूँगी … तेरी मॉम से भी … तू सच बता क्या तुझे तेरी मॉम बहुत पसन्द है?वो बोला- हां आंटी … पर वो मेरी मॉम हैं.

मैं बोली- वो छोड़ … तुझे अपनी मॉम को अपनी गर्लफ्रेंड बनाना है क्या?वो हिचकिचाता हुआ बोला- अगर हो सके तो जरूर!

मेरा दिल खुश हो गया कि ये भी तैयार है.

मैं बोली- तेरी मॉम को मैं तेरे से पटवाऊंगी … देख अब तू.वो बोला- प्लीज़ आंटी … ये सब किसी और को मत बताना.मैं बोली- ठीक है … तू डर मत.आदी बोला- ठीक है आंटी.

मैं बोली- मैं यहां से तेरी मॉम को तेरे लिए पटाती हूँ … वहां तू भी थोड़ा उनको इंप्रेस कर और तुझसे जैसा मैं बोलूं, वैसा किया कर.वो बोला- हां आंटी, ठीक है.

मैंने बोला- जब मॉम परेशान लगा करें … तो उसे गले लगा कर सम्भाला कर … जब वो खुश दिखे, तब भी उसे गले से लगाया कर.वो बोला- ठीक है आंटी.

फिर मैं आंटी की बात को ध्यान में रखकर उसे अपनी तरफ खींचने लगी. आदी भी अब जब चाहे मुझसे लिपट कर प्यार जताने लगा था. जब भी मुझसे चिपक कर मुझे सहलाता था, तो मुझे बहुत अच्छा लगता था. मैं भी उसके लंड को किसी न किसी बहाने से टच करके देख लेती थी कि मेरे बेटे का लंड कितना बड़ा है.

अब तो वो घर आते ही मेरी गोद में सर रख कर लेट जाता और मेरे मम्मों से अपने सर को रगड़ने लगता.मैं भी झुक कर अपने चूचों में उसके सर को दबाते हुए उसके माथे पर चुम्बन करती, तो वो अपने हाथों को पीछे लाकर मेरे सर को अपने सर पर झुका लेता था, जिससे मेरी चूचियां और दिल की धड़कनें उसे गर्म करने लगती थीं.

कभी मैं लेटी हुई होती, तो मेरे साथ चिपक कर लेट जाता और मुझे अपनी बांहों में भर कर मुझसे लाड़ जताता रहता.

ये सब मैं ही उसे चैट में कविता आंटी बन कर सिखाती रहती थी कि कैसे उसे मुझको चिपकाना है और कैसे चूमना है.मैं खुद उसे जोर से अपनी बांहों में भर कर चूमती रहती थी.

अब मैं उसके सामने छोटे छोटे कपड़े पहन कर भी भी रिझाने लगी थी.वैसे भी मैं जींस टॉप पहन कर तो रहती ही थी.

एक दिन मैं बिना आस्तीन वाले चुस्त टॉप और हाफ पेंट पहन कर भी उसके सामने आ गई थी.वो मुझे देख कर एकदम से उछल पड़ा था और ‘वाओ मॉम’ कह कर मुझे मेरे पीछे से अपनी बांहों में जकड़ लिया था.उस समय मुझे उसका बड़ा लंड अपनी गांड में गड़ता सा महसूस हुआ था.

खुद मैंने उसके हाथों को अपने चूचों पर रख कर उसके हाथों को दबा लिया था.वह भी एकदम गर्म हो गया था.

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मैंने उससे पूछा- क्या वाकई इस ड्रेस में मैं हॉट लग रही हूँ?वह बोला- मॉम एकदम मल्लिका शेरावत लग रही हो आप. यदि आप मेरी गर्लफ्रेंड होतीं तो …

मैंने पूछा- तो … पूरी बात बोल ना?वो बोला- कच्चा खा जाता.

मैं हंस पड़ी और घूम कर उससे चिपक गई. मैंने उसे अपनी चूचियों में भींच लिया और उसके गाल चूमने लगी.

वो भी मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे भींचे हुए था. उसका लंड मुझे मेरी चुत पर गड़ता हुआ साफ़ महसूस होने लगा था.

फिर दो दिन बाद उसका जन्मदिन था.

मैंने सोच लिया था कि आज से आदी से चुदना ही है.

तब मैंने तैयारी की … अपने पूरे जिस्म में वैक्स की और ब्लू ब्रा पेंटी, घुटने तक की ब्लू नाईटी, जिसमें से मेरे आधे बोबे बाहर दिख रहे थे. मैंने ये हॉट सी ड्रेस पहनी और तैयार हो गई.

जब रात के 12 बजे तो मैं उसके रूम में गई और उसे बर्थडे विश करते हुए अपने गले से लगा कर उठाया और अपने कमरे में ले आई.वो मेरे रूम की सजावट देख कर हैरान हो गया. वो बोला- मॉम ये सब मेरे लिए किया आपने?मैं बोली- हां.

मैंने रूम सजाया था, केक लाई थी और वाइन और व्हिस्की की बोतल भी रखी थी.

मैं उसे प्यार से चूमते हुए बोली- मेरा बेटा जवान हो गया है … इसलिए अब से सब चलेगा. चल आ कर केक काट!

वो केक के पास गया.मैं भी साइड में जा कर खड़ी हो गई.

उसने केक काटा और मुझे खिलाया. मैंने केक को अपने होंठों में दबाए रखा और वैसे ही अपने मुँह को उसके होंठों के पास लेकर गई और उसको भी केक खिलाया.

उसने और मैंने उसी केक के टुकड़े को आधा आधा खाया. फिर हग किया और किस भी किया.

मैंने इसके बाद उसे सोफे पर बिठाया और वाइन की बोतल खोल कर पैग बना कर तैयार किया.मैं पैग लेकर उसके पास गई. मैं उसकी गोद में बैठ कर बोली- हैप्पी बर्थडे टू यू माय सन!वो मुझे अपनी बांहों में लेते हुए बोला- थैंक्स मॉम … यू आर सो स्वीट.

मैं बोली- कैसा लगा?वो बोला- बहुत अच्छा.

मैं बोली- किस किस ने विश किया?वो बोला- इट्स ओनली यू मॉम.

मैं बोली- क्यों तेरी गर्लफ्रेंड ने नहीं किया?वो बोला- आपको पता है न मॉम कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.

मैं बोली- चल बता … तुझे गर्लफ्रेंड कैसी चाहिए?वो मेरी आंखों में झांकता हुआ बोला- सच बताऊं?मैं बोली- हाँ बिंदास बोल.वो बोला- आपकी जैसी गर्लफ्रेंड चाहिए.मैं बोली- मेरी जैसी या ये चाहता है कि मैं ही बन जाऊं?

पहले तो वो शांत हो गया और बस मुझे देखने लगा.

मैं बोली- बेटा, एक राज की बात बताऊं?वो मेरी तरफ हैरान होकर देखने लगा- हां बताओ न मॉम.मैं- जिससे तू चैट करता है न … वो कोई कविता आंटी वांटी नहीं है.वो एकदम चौंकते हुए बोला- मतलब?मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और कहा- वो मैं ही हूँ.

वो खुश हो गया और उसने मेरे होंठों को लम्बा चूमते हुए मुझे अपने गले से लगा लिया.

फिर हम दोनों ने एक ही पैग से वाइन का मजा लिया. मैंने दूसरा लार्ज पैग व्हिस्की का बनाया और साथ में आकर पिया.

मैं उसके होंठों को चूमते हुए बोली- आई लव यू माय स्वीट आदि.वो भी बोला- आई लव यू माय डार्लिंग.

मैंने ये सुना तो तुरन्त, बिना वक़्त गंवाए नीचे बैठ गई.उसके समझने के पहले ही मैंने उसका शॉर्ट उतार दिया. अगले ही पल उसकी चड्डी भी बाहर थी.

अब मेरे सामने उसका लंड फनफना रहा था.मैंने लंड को बिना देखे फटाक से मुँह में डाल लिया और किसी रांड की तरह लंड चूसने लगी.

“आउम … उमुम … उम्म हह … हय… याह… मुआह मुह … मुआह.”

मैं आदी का जवान लंड अपने गले के आखिरी छोर तक ले ले कर चूस रही थी.आह … आज सालों बाद कितना मस्त लंड मिला था … मेरे बेटे का जवान लंड देख कर मैं पागल हुए जा रही थी.

मैं लंड को बेरहमी से चूस रही थी.मैंने अपने बेटे का लंड इतना अधिक चूसा था कि नीचे फर्श तक लार ही लार हो गया था.

मैं उसका लंड चूसते समय उसकी गांड के छेद में भी जीभ चला रही थी.उफ्फ … क्या मजा आ रहा था!

उसने मेरे बालों को पकड़ा और अचानक से मुझे ऊपर उठा कर किस करने लगा. हम दोनों जंगली होते जा रहे थे.

हम दोनों ने फिर से शराब पी और एक दूसरे के पूरे जिस्म को चाटा. उसके बाद मैंने आदी बेटे की गांड पूरी जीभ डाल डाल कर चाटी.

“ऊफ्फ आऊह आह मुआ मुआह …”

इसके बाद उसने मुझे गोद में उठाया और बिस्तर पर सीधी लिटा दिया. उसने मेरी नाइटी को फाड़ दिया, ब्रा भी पेंटी भी फाड़ते हुए अलग कर दीं.मेरी नंगी टाँगें फैला कर मेरे बेटे ने मेरी चूत को चाटना चालू कर दिया.

क्या बताऊं दोस्तो … कैसा मस्त लग रहा था. इतना मजा तो मेरे पति ने भी नहीं दिया था, जो मेरा बेटा आज मुझे दे रहा था.आह ओअह आह उफ्फ म्म आह …

उसने पूरी जीभ से मेरी चुत को गीली कर दिया और मुझे सम्भलने का मौका दिए बिना ही मेरे ऊपर चढ़ गया.

अगले ही पल उसने अपना बड़ा मोटा लंड अपनी माँ की चूत में सैट कर दिया और एक बार में पूरा अन्दर कर दिया.

मेरी चीख निकल गई- आह आओह माँ … मैं मर गई!मेरे बेटा आदी ने मुझे चोदना चालू कर दिया.

कमरे में सिर्फ ‘आह उह आह उहम्म..’ के सिवा और कुछ नहीं सुनाई दे रहा था.

मैं ‘हैप्पी बर्थडे टू आदी बेटा..’ बोली और चुत में अपने बेटे के लंड को शान्ति देने लगी.

पूरी रात में आदी ने मुझे 4 बार चोदा, जिसमें से 3 बार चूत बजाई और एक बार गांड मारी.उसने हर बार लंड का माल मेरे मुँह में ही मुझे पीने को दिया.

जब उसने मुझे छोड़ा, तब मैं एकदम लस्त हो गई थी.मेरा बेटा भी मुझे चोद चोद कर थक गया था.

मैंने बड़ी मुश्किल से बिस्तर की दराज से सिगरेट की डिब्बी निकाली और आदी से एक सिगरेट जलाने के लिए कहा.आदी ने एक सिगरेट जलाई और लम्बा कश लेकर मेरे मुँह से लगा दी.

आह … आज मैं अपने बेटे के लंड से चुदने के बाद बड़ा आराम महसूस कर रही थी.

इसके बाद की रातें कभी सूनी नहीं रहीं. मेरा बेटा मुझे रोज लंड का सुख देने लगा था.

तो कैसी लगी दोस्तो ये सेक्स कहानी, कृपया मेल करके मुझे बताइएगा.

आपकी प्यारी कविता का, सभी लंड धारी और चूत धारिणी बहनों, भाइयों बेटों बेटियों को मेरी चूत का नमस्कारsupport@mohakkisse.com

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Hello dosto kese ho aap aur meri pichli story kaisi lagi aapko uske liye comments jrur karna ab aage btata ho.

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Hello story readers, sorry kaafi late ho gaya story laane mein. Maafi chaahunga. Last part mein aapne padha tha, ki kaise Faizan aur mummy ek-doosre se chipak gaye the.

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