अब तक आपने इस सेक्सी स्टोरी में जाना था कि दीपक अपनी मुँहबोली बहन की कमसिन लड़की नेहा के साथ अपने वासना का खेल शुरू करने वाला था।अब आगे..
दीपक को देख कर नेहा ने हल्की सी मुस्कान दी- क्या हुआ.. क्यों मुस्कुरा रही है?नेहा- मामू अब पढ़ाई बहुत हो गई.. अब हम थोड़ा रेस्ट करेंगे ना?दीपक- हाँ तो कर लो किसने रोका है।नेहा- मामू आप कल की तरह वहाँ कुर्सी पर रेस्ट करो ना.. साथ में मुझे भी झूला झुला देना।
दीपक ने मन में कहा कि साली इत्ती सी है.. मगर इसको मज़ा पूरा चाहिए.. इसको नहीं मालूम कि जब मेरा लंड घुसेगा.. ये मज़ा इसकी सज़ा बन जाएगी।नेहा- क्या सोचने लगे आप आओ ना।
दीपक ने दरवाजा बंद किया और कल की तरह लाइट ऑफ कर दी।
नेहा- वाउ मामू आप ग्रेट हो.. आज भी आप कल की तरह मज़ा दोगे ना?दीपक- हाँ मेरी जान.. आज तुझे उससे भी अच्छा मज़ा दूँगा आ जा जल्दी से!नेहा- मगर मामू आज भी अगर सूसू आया तो मुझे छोड़ देना.. मैं भाग कर बाथरूम में चली जाऊंगी।दीपक- नहीं नेहा वो सूसू नहीं होता है वो मज़ा रस होता है.. तुम सोचो अगर सूसू होता तो मेरे भी सारे कपड़े गंदे हो जाते ना कल!नेहा- हाँ मामू.. मैंने कल सोचा कि वो इतना ज़्यादा भी नहीं आया था.. ये मज़ा रस क्या होता है मामू?दीपक- ये तुझे बाद में समझा दूँगा.. अभी तो आ जा.. झूले का मज़ा ले ले और हाँ.. आज तू अपनी चड्डी निकाल कर बैठना.. नहीं तो कल की तरह फिर गंदी हो जाएगी।नेहा- हाँ मामू सही है.. मगर चड्डी नहीं होगी तो आपके कपड़े गंदे होंगे ना?दीपक- अरे मेरे होंगे तो होने दे.. मैं तो यहीं रहता हूँ, तुझे घर जाना होगा.. तेरी मॉम को पता लगेगा तो गुस्सा करेगी।नेहा- हाँ सही है मामू.. वैसे मेरी कल वाली चड्डी कहाँ है मामू?
नेहा की बात सुनकर दीपक को रात की बात याद आ गई.. जब वो टीना को चोद कर वापस घर आया था। उसका लंड फिर खड़ा हो गया था तब उसने नेहा की चड्डी पर मुठ मारी थी, तब कहीं उसको सुकून आया था।
नेहा- मामू बताओ ना.. आप बार-बार कहाँ खो जाते हो?दीपक- अरे वो मैंने धोकर सुखा दी है.. तू जाते टाइम ले जाना।नेहा- ठीक है मामू.. चलो अब बैठ जाओ, मैं भी चड्डी निकाल कर आती हूँ।
दीपक कुर्सी पर बैठ गया, उसने बरमूडा नीचे कर लिया और नेहा को उल्टा ही पास आने को कहा ताकि उसको लंड दिखाई ना दे।
वैसे तो लाइट बंद थी.. मगर दिन की रोशनी अलग ही होती है ना, कितना भी लाइट बुझाओ थोड़ा बहुत तो दिख ही जाता है।
जैसा दीपक ने कहा.. नेहा उल्टे पाँव उसके पास आ गई। जब वो बैठने लगी दीपक ने उसका स्कर्ट ऊपर कर प्रिया और उसको कल की तरह बैठा लिया। अब लंड सीधे चुत से टकराया तो नेहा सिहर उठी।नेहा- इससस्स उफ़फ्फ़ मामू आपकी गोद में आज ये गर्म-गर्म क्यों लगा?दीपक- तूने चड्डी नहीं पहनी ना इसलिए.. अब बोल मत बस मज़ा ले।
दीपक का लंड भी कुँवारी चुत की गर्मी महसूस कर रहा था। अब वो धीरे-धीरे कुर्सी हिलाने लगा और लंड को चुत पर घिसने लगा था।
नेहा- सस्स आह.. मामू आज तो आह.. कल से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ़ जोर-जोर से हिलाओ ना आह.. मज़ा आ रहा है।
दीपक को खुद बहुत मज़ा आ रहा था वो और तेज कुर्सी हिलाने लगा।
नेहा मज़े से सिसकियां ले रही थी.. अब तो दीपक का लंड भी बहुत गर्म हो गया था.. उसमें से बूंदें यानि प्रीकम बाहर आने लगा था। यही हाल नेहा का था उसकी चुत भी पानी छोड़ने लगी थी।
नेहा- आह.. उफ़फ्फ़ ससस्स मामू आह.. बहुत मज़ा आ रहा है आह.. सस्स..दीपक धीरे से बोला- रानी अभी ये मज़ा ले ले.. फिर तुझे चोद कर असली मज़ा दूँगा।
मज़ा लेते हुए नेहा को जाँघों पर चिपचिपा सा लगा तो उसने आगे हाथ डाल कर चैक किया और जैसे ही उसने नीचे हाथ प्रिया.. दीपक का लंड उसके हाथ में आ गया, जोकि लोहे जैसा सख़्त और गर्म था। लंड का स्पर्श पाते ही वो घबरा गई और जल्दी से उठ गई।
दीपक को कुछ करने का मौका भी नहीं मिला.. अब तक नेहा पलट गई थी और उसने लंड महाराज के दर्शन कर लिए।नेहा- ऊऊ बाप रे.. मामू अपने भी चड्डी निकाली हुई है और आपकी फुन्नी कितनी बड़ी है।
दीपक इस हमले से बौखला गया मगर फ़ौरन उसने अपने आपको संभाल लिया।दीपक- अरे तू उठ क्यों गई.. ऐसे मैंने चड्डी इसलिए निकाली कि तेरे मज़ा रस से ये खराब ना हो।नेहा- वो तो ठीक है मामू मगर आपकी फुन्नी आर्यन से कितनी बड़ी और मोटी है!दीपक- तूने कब देखी आर्यन की फुन्नी?नेहा- मॉम उसको नहलाती हैं.. तब मैंने कई बार देखी।दीपक- अरे वो छोटा है ना.. इसलिए उसकी छोटी है और मैं बड़ा हो गया हूँ इसलिए मेरी बड़ी है, चल अब आजा बैठ जा।नेहा- मामू कल आपकी फुन्नी मुझे चुभ रही थी ना और ये इतनी गर्म क्यों है?दीपक- अरे पगली कल भी यही थी और ये तो गर्म ही रहती है.. तेरी फुन्नी भी तो गर्म है.. हाथ लगा के देख!
नेहा ने अपनी चुत पर हाथ लगा कर देखा वो भी कामवासना में जल रही थी।नेहा- हाँ मामू, मेरी फुन्नी भी गरम हो रही है मगर ये ऐसे गर्म क्यों है?दीपक- अरे भोली गुड़िया जब मेरी फुन्नी और तेरी फुन्नी आपस में मिलती हैं ना.. तब ये गर्म होती हैं और तभी चुत रस एम्म.. मेरा मतलब है मज़ा रस बाहर आता है। अब तू सवाल ही करती रहेगी या मज़ा भी लेगी!नेहा- मामू आपकी फुन्नी और मेरी फुन्नी मिलती है तब मज़ा भी बहुत आता है इसी लिए मज़ा रस निकालता है।दीपक- हाँ अब सुन तुझे और ज़्यादा मज़ा लेना है क्या?नेहा- हाँ मामू मुझे बहुत.. बहुत सारा मज़ा लेना है।दीपक- अच्छा फिर कुर्सी को जाने दे तू बिस्तर पर सीधी लेट जा, मैं मेरी फुन्नी को तेरी फुन्नी से अच्छे से मिलाऊंगा तब बहुत ज़्यादा मज़ा आएगा।
नेहा बेचारी मज़े की मारी दीपक की बातों में आ गई। अब दीपक के मज़े थे वो खुल कर मज़ा ले सकता था।
सौ लौड़ों से चुद चुकी हूँ मैं !!
दीपक ने नेहा के पैर फैलाए और लंड को हाथ से पकड़ कर चुत पर घिसने लगा।नेहा- आह आह मामू सच्ची आह.. अब ज़्यादा मज़ा आ रहा है.. ससस्स उफ़फ्फ़ गुदगुदी हो रही है आह.. मेरा बदन भी आह.. मामू गर्म हो रहा है।दीपक- आह.. मेरी नेहा आह.. तेरी चुत कितनी गर्म है आह.. बाहर लंड रगड़ रहा हूँ तो आह.. ये हाल है अन्दर जाएगा तो पता नहीं आह.. उफ़फ्फ़ जल ही जाएगा।
दीपक धीरे से बोला था और जोर से भी बोलता तो भी शायद नेहा ध्यान नहीं देती, वो तो अपने मज़े में आँखें बंद करके आहें भर रही थी।
दीपक- आह.. आ नेहा तू बहुत प्यारी है उफ़ तेरी जैसी लड़की मेरे नसीब में आई आह.. शायद मैंने आह.. कोई अच्छे कर्म किए होंगे आह.. ले आह.. मज़ा आ रहा है ना!नेहा- ससस्स आह मामू बहुत मजा आ रहा है उफ़.. कल जैसे ही आह.. आज भी सूसू जैसा लग रहा है आह.. आह..
दीपक के मन में ख्याल आया कि कच्ची कली का चुत रस कैसा होगा.. उसको तो टेस्ट करना चाहिए। ये सोच कर उसने लंड से घिसाई बंद कर दी।
नेहा- उफ़ क्या हुआ मामू रुक क्यों गए आह.. कितना मज़ा आ रहा था।दीपक- मेरी जान क्या तुझे इससे भी ज़्यादा मज़ा लेना है?नेहा- हाँ, मामू लेना है।दीपक- तो मेरी बात सुन अपनी आँखें बंद कर ले और कुछ भी हो जाए.. जब तक मैं ना कहूँ खोलना मत।नेहा- ठीक है मामू मैं नहीं खोलूँगी आप बस मुझको मज़ा दो।दीपक- तो ठीक है अब देख ऐसा मज़ा दूँगा तू याद करेगी अपने मामू को।
नेहा ने कस कर आँखें बंद कर लीं और दीपक कुत्ते की तरह अपनी जीभ से उसकी चुत को चाटने लगा। वैसे तो वो किसी सील बंद तिजोरी की तरह थी, जीभ की नोक भी अन्दर नहीं जा पा रही थी.. मगर दीपक नोक से उसको कुरेद रहा था और पूरी चुत को होंठों में दबा कर चूस रहा था।
नेहा को तो जैसे दुनिया का सबसे हसीन तोहफा मिल गया था। वो हवा में उड़ने लगी थी और उसका जिस्म आग की तरह तपने लगा।
नेहा- आह आह आह सस्स मामू उफ़फ्फ़ ये क्या आह.. इतना मज़ा आह.. मेरी आह.. फुन्नी आह.. पता नहीं आह.. मामू उफ़फ्फ़..
मज़े और वासना के चलते नेहा कुछ बोल भी नहीं पा रही थी और दीपक तो पक्का खिलाड़ी था। उसने ऐसी ज़बरदस्त चुत की चुसाई की कि बेचारी नेहा 3 मिनट भी नहीं टिक पाई।
नेहा- आह.. आईईइ मामू आह.. मैं आ गई आह.. मेरा आह.. जोर से करो आह.. जोर से करो आह.. मेरा मज़ा रस आह.. निकलने वाला है उफ़ अफ आह.. एयाया आआ आह..
नेहा कमर को जोर-जोर से हिलाने लगी दीपक ने उसकी टांगें कस के पकड़ी हुई थीं और वो अपनीबहन की बेटी की चुत के रसकी एक बूँद भी वेस्ट नहीं करना चाहता था। उसने बड़े स्वाद से चुत को पूरा चाट कर साफ किया, फिर नेहा से कहा- अब आँखें खोलो।
नेहा के जिस्म से तो जैसे किसी ने सारा खून निचोड़ लिया हो.. वो एकदम बेजान सी हो गई थी।
नेहा- उफ़ मामू सच्ची आज तो बहुत मज़ा आया आह.. ओह मामू आई लव यू।दीपक- आई लव यू टू बेबी मेरे साथ रहोगी तो ऐसे ही मज़ा देता रहूँगा।
नेहा को ना जाने क्या याद आया.. उसने नीचे देखा और अपनी चुत को भी हाथ लगा कर चैक किया।
उधर दीपक का लंड तो लोहे जैसा सख़्त हो रहा था। वो सोच रहा था कि अब इसे कैसे शांत करूँ, तभी उसकी मुश्किल नेहा ने आसान कर दी।
नेहा- मामू अपने तो मेरी फुन्नी को चाट के साफ कर प्रिया और सारा मज़ा रस भी पी गए.. आपको घिन नहीं आई फुन्नी चाटने से?दीपक- तुझे कैसे पता मैंने चाटा है?नेहा- मामू मेरी आँखें बंद थीं.. मगर इतना तो फील हुआ कि आप चाट रहे हो.. सच्ची बहुत मज़ा आ रहा था।दीपक- नेहा फुन्नी से कैसी घिन.. कोई सूसू थोड़े था जो घिन आती, वो तो मज़ा रस था उसमें बड़ा स्वाद होता है।नेहा- सच्ची ओह मामू आप सारा अकेले पी गए.. मुझे भी टेस्ट करना है।
इतना सुनना था कि दीपक की बांछें खिल गईं उसको अगला कदम साफ़ दिखने लगा था।
आपको मजा आ रहा है न.. तो जल्दी से मेरी इस बहन की बेटी की चूत की सेक्सी स्टोरी पर मेल लिखो ना।support@mohakkisse.comकहानी जारी है।