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भाभी की चुदाई • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 728 बार

भाभी के पैरों का दर्द

संजय शर्मा, दिल्ली

05 Dec 2021 को प्रकाशित

भाभी के पैरों का दर्द
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नमस्कार प्रिय पाठको, मैं दीपक एक बार फिर आप लोगों को अपनी कहानी सुनाने आया हूँ। मेरी पिछली कहानीखेल खेल में चोदाआप लोगो को बहुत पसंद आई और मुझे कई मेल भी मिले उसके लिए धन्यवाद।

दोस्तो! चुदाई ऐसा मज़ा है कि बार बार लेने का मन करता है। जब तक मोना मेरे साथ रही हमने सेक्स का बहुत मज़ा लिया पर उसके जाने के बाद मुझको नए साथी की तलाश थी, रोज रोज मुठ मार कर कब तक काम चलता!

पापा का ट्रान्सफर होने पर हम लोग नई जगह रहने आ गये। यहाँ पास ही में हमारे दूर के रिश्ते के भईया रहते थे। उनके घर में उनकी पत्नी यानि मेरी भाभी और उनकी दो लड़कियाँ रहती थी। पास रहने से हमारा उनके यहाँ आना जाना हो गया था। भाभी थोड़ी अच्छी सेहत की थी पर दिखने में बहुत सेक्सी थी। भाभी को देख कर मेरा मन उनको चोदने का होता था। भाभी से मेरी खुल कर बात होती थी और कई बार मैं उनको अश्लील चुटकले भी सुनाया करता था पर वो कुछ कहती नहीं थी। मुझको लगता था कि वो कुछ चाहती हैं पर रिश्ते के कारण कहने की हिम्मत नहीं होती थी।

भाभी के पैरों में बहुत दर्द रहता था तो कई बार मुझसे अपने पैर दबवा लेती थी। उनके पैर दबाते वक़्त मैं धीरे धीरे उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर देता था। उनके पैर बहुत गोरे थे तो उनकी तारीफ भी कर देता था। उन्होंने कभी मुझको कुछ नहीं कहा, मेरी हिम्मत बढती गई और एक दिन मैंने सोच लिया कि आज तो उनको अपने मन की बात कहनी ही है।

मैं दिन के वक़्त उनके घर गया, तब भैया ऑफिस गए हुए थे। उन्होंने मुझको अंदर बुलाया और हमने थोड़ी देर बाते की, फिर उन्होंने मुझसे अपने पैर दबाने को कहा। मैं तो इसी मौके की तलाश में था। वो पेट के बल लेट गई और मैं उनके पैर दबाने लगा और धीरे से उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर दी और पैर दबाने की जगह उनको सहलाने लगा। वो कुछ नहीं बोली

तो मैंने पूछा- भाभी, और ऊपर तक दबा दूँ?उन्होंने कहा- हाँ!

तो मैंने धीरे धीरे उनकी साड़ी और ऊपर कर दी। अब उनकी गोरी-गोरी जांघें मेरे हाथों में थी और मैं उनको सहला रहा था। भाभी वैसे ही लेटी थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई। तब मैंने एक झटके में उनकी साड़ी पूरी ऊपर कर दी। उन्होंने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी और गोरी टांगों पर वो बहुत ही मस्त लग रही थी।

अब भाभी ने थोड़ा सो मुँह घुमा कर मुझको देखा तो मैं डर गया पर वो मुझको देख मुस्कुराई और फिर वैसे ही लेट गई। मैं समझ गया कि लोहा गर्म है। अब मैं धीरे धीरे उनके नितम्ब सहलाने लगा। सच में दोस्तो, उनके नितम्ब कितने चिकने और मुलायम थे आपको क्या बताऊँ!

थोड़ी देर मैं उनके नितम्ब सहलाता रहा और दोनों नितम्बों के बीच की दरार में ऊँगली करता रहा तो वो मुझको बोली- यही करते रहोगे या कुछ और भी करोगे?

अब मुझको कुछ करना था ताकि यह औरत मुझसे चुदने को तैयार हो जाये। सो मैंने उनकी पैंटी उतार दी और अपना मुँह उनकी दरार के बीच ले जाकर जीभ से उनकी गांड चाटने लगा और वो अपने मुँह से अजीब सी आवाजें निकालने लगी जो मुझको बहुत अच्छी लगी। अब मैं भी गर्म हो गया था और मेरा लण्ड पैंट में नहीं समा रहा था सो मैंने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए और वहीं खड़ा हो कर मुठ मारने लगा।

तब भाभी ने मुझको और मेरे लौड़े को देखा और कहने लगी- यह मेरा काम है! तुम अपना काम करो!

इतना कह कर उन्होंने मेरा लौड़ा अपने मुलायम हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से उसको सहलाने लगी। उनके सहलाने का अंदाज इतना अच्छा था कि मुझको लगा कि मैं तुरन्त झड़ जाऊँगा।

अब भाभी करवट लेकर पीठ के बल लेट गई। उनकी गुलाबी, बिना बालों की चूत मेरे सामने थी और उनका आंचल भी हट चुका था जिसने आज तक उनके मोटे मोटे स्तनों को मेरी नजरों से छुपाये रखा था। आज मेरी एक और इच्छा पूरी होने वाली थी सो मैंने बिना देर किये अपना मुँह उनकी चूत पर रख प्रिया और उसको चाटने लगा। मेरे दोनों हाथ उनके वक्ष को दबा रहे थे और वो अपने हाथों से मेरे सर को सहला रही थी।

थोड़ी देर बाद मैं थक कर लेट गया तो वो मेरे ऊपर आई और मेरे पूरे शरीर को चूमने लगी और धीरे धीर उनका मुँह मेरे लंड पर चला गया। उन्होंने मेरे लण्ड को बड़े प्यार से चूमा और मेरा लंड लॉलीपोप की तरह उनके मुँह में उतर गया। वो बहुत देर तक मेरे लंड को चूसती रही। इस वक़्त मुझको उनके स्तनों के जो दर्शन हो रहे थे, क्या बताऊ आपको! उनके दोनों चूचे बहुत जोर से हिल रहे थे।

थोड़ी देर बाद मैंने उनको बाहों में ले लिया और उनके होठों को चूमने लगा और एक हाथ से उनकी साड़ी उतारने लगा। जल्दी ही भाभी सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई। क्या बला की सुंदर लग रही थी वो औरत उस वक़्त!

मैंने उनके स्तन हाथ में ले कर खूब दबाये और जल्द ही उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थी और अब मेरा अपने ऊपर कोई वश नहीं था। शायद वो समझ गई थी, सो उन्होंने अपनी टाँगे चौड़ी कर मुझको अपना लंड डालने का निमंत्रण दे प्रिया। मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत पर रखा और अपना वजन उन पर डाल प्रिया। मेरा लंड उनकी चूत में उतर गया। फिर मैंने धीरे धीरे धक्का मारना शुरु किया। वो भी अपने नितम्ब उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। भाभी के साथ सेक्स करके मुझको ऐसा लग रहा था कि मानो मैं स्वर्ग में हूँ। थोड़ी देर बाद हम दोनों झड़ गए तो उन्होंने मेरा लंड चाट कर साफ़ कर प्रिया।

अब बारी उनकी गांड मारने की थी, सो मैंने उनको घोड़ी बनाया और जल्दी से क्रीम लगा कर अपना लंड उनके छेद में डाल प्रिया। यह काम शायद वो पहली बार करवा रही थी इसलिए हम दोनों को बहुत दर्द हुआ। पर कहते हैं ना कि कुछ पाने के लिए कुछ सहन भी करना पड़ता है।

थोड़ी देर के दर्द के बाद हम लोगों को मज़ा आने लगा। अब मेरा लंड उनकी गांड में और हाथ उनके स्तनों पर थे। थोड़ी देर के बाद मैं झड़ गया और मैंने अपना लावा उनकी गांड में निकाल प्रिया। फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए। उस दिन हमने दो बार और सेक्स किया और हर बार अलग अलग अवस्था में!

फिर तो यह सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा। आज हम वहाँ नहीं रहते पर जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाता हूँ और हम एक दूसरे की दुनिया रंगीन बनाते हैं। अब उनकी बेटियाँ भी जवान हो गई हैं।

आगे क्या होता है!मैं दुआ करुँगा कि आपको भी ऐसी ही कोई पड़ोसी, भाभी मिले या हो सकता है आपके पड़ोस में ऐसी भाभी हो जिस पर आपकी नज़र नहीं गई हो!

आपको मेरे जीवन की यह घटना कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करके जरूर बताएँ!support@mohakkisse.com

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