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भाभी की चुदाई पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 868 बार

मैं और मेरी प्यारी भाभी पूजा

अमित सेक्स

11 May 2022 को प्रकाशित

मैं और मेरी प्यारी भाभी पूजा
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प्रेषक : रोहित

मेरे एक रिश्ते के भाई, जो काफ़ी दिनों तक हमारे घर पर रहे थे, की शादी में मैं सपरिवार शामिल हुआ लेकिन मैं अपनी भाभी को देख नहीं पाया। मेरे पेपर थे, इसलिए मैं उसी रात को अकेला वापिस आ गया। लेकिन पेपर खत्म होने के बाद एक महीने की छुट्टी में मैं अपने उस भाई के घर गया तो मैंने पहली बार भाभी को देखा तो देखता ही रह गया। भाभी की लम्बाई करीब साढे पांच फ़ीट होगी और उनका रंग मानो दूध। भाभी के बाल तो उनके चूतड़ों से भी नीचे थे। उमर भी बीस-इक्कीस से ज्यादा नहीं लगती थी।

उनको मैं देखता ही रहा और कुछ बोल नहीं पाया। फ़िर भाभी बोली – आपका नाम रोहित है ना ! मैं चौंक गया, इतनी सुन्दर आवाज?

मैंने उनसे कहा- भाभी जी नमस्ते ! हां भाभी मेरा नाम रोहित ही है।

भाभी काफ़ी खिली खिली सी लग रही थी। शायद यह नई नई शादी का असर था।

भाई मुम्बई में सर्विस करते थे और उनकी शादी के कारण काफ़ी छुट्टियां हो गई थी, इसलिए उन्हें मुम्बई जाना था। उनका ट्रेन का रिजर्वेशन आज का ही था इसलिए भाभी कुछ उदास सी हो गई। लेकिन भैया को तो आज ही जाना था सो चले गए।

तो मैं रात को भाभी के पास ही सो जाता था, शायद भाभी को भी कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि मेरी उमर कम ही थी। भाभी और मैं काफ़ी घुलमिल गए थे। वो मेरे सामने ब्लाउज़ पेटिकोट में ही आ जाती थी और मेरे सामने ही साड़ी पहन लेती थी। इस हालत में भाभी को देख कर मेरे लण्ड में बहुत उत्तेजना होती थी और मैं चाहता था कि किसी तरह से उनकी चूची दबाउं और चूत देखूं। मैं अपनी उत्तेजना हस्तमैथुन करके ही शान्त करता था। बस इसी तरह मेरी एक महीने की छुट्टियां समाप्त हो गई और मैं अपने घर आ गया।

इस प्रकार चार साल चलता रहा लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पाई कि मैं कुछ कर सकूं। इस बीच उनके कोई बच्चा भी नहीं हुआ। अबकी बार जब मैं उनके घर गया तो मैंने भाभी से पूछा कि शादी को काफ़ी दिन हो गए हैं, खुशखबरी कब सुनाओगी?

तो उन्होंने कहा कि अभी मैंने ही आपके भैया से मना कर प्रिया है। कुछ दिनों बाद बच्चे के बारे में सोचेंगे। उस रात मैं उनके साथ ही बेड पर सो गया। भाभी भी ब्लाउज़ पेटिकोट में ही मेरे पास लेट गई और सो गई। मैंने थोड़ी हिम्मत की और अपना हाथ उनकी चूची पर रख प्रिया। भाभी की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने धीरे धीरे चूची को दबाना शुरू कर प्रिया। इससे आगे मेरी हिम्मत नहीं हुई और मैं उठ कर गया, हस्तमैथुन करके वापिस भाभी के पास लेट गया।

अगली रात को भी बस ऐसे ही हुआ। आज मैंने भाभी की चूची को थोड़ा जोर से दबाना शुरू किया। फ़िर ब्लाउज़ के ऊपर से ही उनकी चूची को अपने मुंह से चूमने लगा। मेरा उत्साह बढता ही जा रहा था। मैंने हिम्मत करके ब्लाउज़ के ऊपर के दो हुक खोल दिए। इससे भाभी की गोरी गोरी चूचियों का ऊपरी हिस्सा दिखने लगा जिसे मैं काफ़ी देर तक देखता ही रहा। फ़िर मैंने अपने होठों से उनकी चूचियों कि नंगे हिस्से पर किस किया और हाथ से दबाया। फ़िर मैंने उनके लाल लाल होठों को जीभ से चाटा। थोड़ी देर में मेरा वीर्य निकर में ही निकल गया। अपने आप वीर्य निकलने का यह मेरा पहला अनुभव था।

मुझे कब नींद आ गई मुझे पता ही नहीं चला। जब मैं सुबह जागा तो मुझे याद आया कि मैंने ब्लाउज़ के हुक तो बंद ही नहीं किए थे। मुझे बहुत डर लगा। हिम्मत करके मैं नहाने चला गया। नाश्ते के समय भाभी और मैं आमने सामने बैठ गए।

मैंने भाभी से पानी मांगा तो उन्होंने झूठे गिलास में पानी दे प्रिया। मैंने मज़ाक में कहा- मैं किसी का झूठा नहीं खाता।

तो भाभी ने फ़ौरन जवाब प्रिया कि मुंह से मुंह तो लगा लेते हो, लेकिन झूठा नहीं खाते। इस बात को सुनकर मैं हक्का-बक्का रह गया। नाश्ता खत्म करके मैं बाहर चला गया और रात को ही घर आया।

रात को मैं भाभी से अलग लेट गया तो भाभी ने कहा- रोहित ! क्या हुआ, आज मेरे पास नहीं लेटोगे?

मैंने कहा- आज मैं अलग ही सोऊंगा।

इस पर भाभी बोली- हां ! अब तुम काफ़ी बड़े हो गए हो और अपना निकर भी गंदा करते हो।

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यह कह कर भाभी अलग ही लेट गई। लेकिन मेरे मन में तो भाभी की चूची और चूत के ही ख्याल आ रहे थे।

इतने में भाभी ने कहा- चलो, बहुत देर हो गई। अब आ ही जाओ मेरे पास। इतना सुनते ही मैं भाभी के पास आ गया। लेकिन आज भाभी काले रंग की साड़ी पहने थी और बहुत सुन्दर लग रही थी।

मैंने कहा- भाभी ! आज आपने साड़ी क्यों पहन रखी है, सोने का विचार नहीं है क्या।

भाभी बोली- तुम मुझे रात को सोने ही कहां देते हो। रात में मैं काफ़ी परेशान हो जाती हूं।

मैंने कहा- क्यों?

उन्होंने कहा- रात को तुम जो परेशान करते हो।

इतना सुनते ही मैं भाभी के और पास गया और कहा- भाभी आज मैं आपको परेशान नहीं करुंगा, लेकिन भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, और मैं भाभी के पास ही उनके एक हाथ पर सिर रख के लेट गया। भाभी मेरी तरफ़ अपना मुंह करके लेट गई। फ़िर मैंने अपना एक हाथ भाभी के पेट पर रख प्रिया और भाभी ने अपनी आंखें बंद कर ली। अमिं समझ गया कि चार साल की मेहनत आज रंग लाई है।

फ़िर मैंने भाभी के चूतड़ों पर हाथ घुमाना शुरू कर प्रिया। भाभी मुझ से चिपट गई। अब क्या था, मैंने देर ना करते ह्ये उनको किस किया। वो कुछ बोली नहीं। मैंने उनकी साड़ी को अलग कर प्रिया तो भाभी ब्लाउज़ और पेटिकोट में रह गई। आज मानो मेरी सारी मुरादें पूरी हो गईं। मैं इस कदर उत्तेजित था कि मैंने भाभी के मुंह के अन्दर अपनी जीभ दे दी जिसे भाभी काफ़ी आनन्द के साथ चूस रही थी। मैं पागल हुए जा रहा था, मैंने उनका ब्लाउज़ पेटिकोट भी अलग कर प्रिया।

भाभी के पूरे शरीर को चूमना शुरू किया तो वो तड़फ़ने लगी। शायद वो काफ़ी दिनों बाद यह सब कर रही थी। मैंने भाभी के पैरों को फ़ैला प्रिया और बीच में आकर मैंने उनकी चूत पर अपना लण्ड लगा प्रिया।

भाभी ने अपने चूतड़ उठा कर मेरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया। उनकी चूत से पानी सा आ रहा था जिससे मेरे लण्ड को उनकी चूत में जाने में कोई परेशानी नहीं हुई और मैं उनकी चूत में जोर जोर से धक्का देने लगा। भाभी भी पूरे जोश से अपने चूतड़ों को उठा उठा कर मज़े लेने लगी।

काफ़ी देर बाद भाभी और मैं एक साथ चरम रीमा तक पहुंच गए। मुझे इस पल जैसा आनन्द कभी नहीं मिला था। उस रात मैंने भाभी को चार बार चोदा और हम कब सो गए, पता ही नहीं चला।

सुबह आंख खुली तो हम दोनो नंगे ही लेटे हुए थे। मैंने भाभी की चूची को चाटना शुरू किया तो वो भी जाग गई और फ़िर मैं और भाभी रात की ही तरह एक दूसरे को चूमने लगे। फ़िर मैंने भाभी को घोड़ी बना कर उनकी ली। लेकिन भाभी ने कहा – रोहित तुमने अपना वीर्य मेरी चूत में डाल प्रिया है और मुझे पीरियड्स भी अभी पांच दिन पहले ही हुए हैं।

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा।

उसके बाद मैं और भाभी रोज तीन चार बार सम्भोग करते रहे। आज भाभी के पास एक लड़का है जो मेरे सांवले रंग पर ही है। तब से आज तक जब भी हमें मौका मिलता तो चुदाई करते। लेकिन अब भाभी भैया के साथ मुम्बई में ही हैं। मैं दो बार ही वहां गया, भैया जब भी आफ़िस जाते तो मैं भाभी के साथ चुदाई करता।

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