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भाभी की चुदाई • पठन समय: 7 मिनट • पढ़ा गया: 589 बार

मेरे प्रिय भ्राताश्री

माइक डिसूजा

01 Dec 2021 को प्रकाशित

मेरे प्रिय भ्राताश्री
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मेरे प्रिय भ्राताश्री,

सादर प्रणाम।

आपको यह जान कर अति हर्ष होगा कि यहाँ सब कुशल-मंगल है, आप पिछले दो वर्षों से विदेश में हैं। यहाँ पर सब आपको सब बहुत याद करते हैं।

आगे समाचार यह है कि आप जब विदेश गए थे तो भाभी आपको बहुत याद करके परेशान होती थी पर आप बेफिक्र रहिये, हमने उनका अच्छे से ख़याल रखा है।

आपके जाने के बाद मुझे पता था कि भाभी बहुत परेशान होंगी तो मैं उनके पास अक्सर जाकर उन्हें समझा बुझा आता था।

पर वो हमेशा कहती- चुन्नू, तू नहीं समझता कि कितना मुश्किल है उनके बिना रहना।

फिर एक दिन मैं उनके कमरे के पास गया तो मैंने उनके कमरे से अजीब-अजीब सी आवाजें सुनी। मैंने खिड़की से झांक कर देखा कि वे बिस्तर पर लेटी हुई हैं और टाँगे फैलाकर अपनी चूत रगड़ रही हैं और मजे ले रही हैं।

मैं समझ गया कि वे आपको बहुत मिस कर रही हैं। मुझसे उनकी वो तड़प नहीं देखी जा रही थी। पर मुझे समझ नहीं आया कि मैं उनकी मदद कैसे करूँ।

फिर एक दिन मैंने उनसे पूछ ही लिया- क्या आप भैया को बहुत मिस करती हैं?

वो बोली- हाँ !

मैं बोला- मैं क्या आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?

वो मेरी बात का मतलब नहीं समझी और बोली- तू क्या मदद करेगा?

मैं बोला- मैं कुछ तो भैया की जगह ले सकता हूँ !

वह तब भी मेरा मतलब नहीं समझी और बोली- नहीं रे ! तू क्या मदद करेगा।

मैं अपना सा मुँह लेकर चला आया।

अगले दिन मैंने फिर जब भाभी को चूत रगड़ते देखा तब मैंने प्रण किया कि मैं भाभी को ऐसे नहीं तड़पने दूंगा।

मैंने फिर उनसे पूछा- मैं आपकी कुछ मदद करूँ भैया को भुलाने में?

वह फिर भी हंसने लगी- तू क्या मदद करना चाहता है?

मैंने कहा- अगर आप चाहें तो मैं आपकी सब जरूरतें पूरी कर सकता हूँ।

अब वह समझ गई कि मैं क्या बात कर रहा हूँ। उन्होंने मुझे गुस्सा होकर डांटना शुरू कर प्रिया कि मैंने ऐसी बात सोची भी कैसे।

फिर मैंने उन्हें बताया कि मैं आपको रोज़ अपने आप को संतुष्ट करते हुए देखता हूँ।

वो यह सुनकर अचानक शर्म से लाल हो गई, बोली- तूने क्या क्या देखा ?

तो मैंने उन्हें सब बता प्रिया।

वो बोली- तू किसी को बताना नहीं।

मैंने कहा- नहीं मैं किसी को नहीं बताऊंगा पर मुझसे आपकी तड़प देखी नहीं जाती। यदि आपको कोई आपत्ति न हो तो मैं आपको संतुष्ट कर सकता हूँ।

वो बोली- पर चुन्नू यह ठीक नहीं है।

मैंने कहा- आप घबराईये नहीं ! घर की बात घर में ही रहेगी।

यह कह कर मैं भाभी के पास बैठ गया। पर मुझे समझ नहीं आया कि मैं क्या करूँ।

भाभी मुस्कुराकर बोली- क्या हुआ? शरमा रहा है?

मैंने कहा- हाँ, कुछ भी हो, आप मेरी भाभी हैं।

वो बोली- फिर तो तू कुछ नहीं कर पायेगा, तू बस यह सोच कि मैं एक औरत हूँ और तू एक मर्द है और तुझे मेरी प्यास बुझानी है।

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यह कह कर भाभी ने अपना साड़ी का पल्लू नीचे गिरा प्रिया और अपने मम्मों के मुझे दर्शन कराये।

मेरा लंड खड़ा हो गया। मैं उन चूचियों पर अपने हाथ रखकर उन्हें दबाने लगा। भाभी धीरे-धीरे कराहने लगी।

उनका हाथ सीधा मेरे लंड पर आकर रुका। वो मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाने लगी। मेरा लंड मेरी पैंट फाड़कर बाहर निकलने के लिये उतावला होने लगा। मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोल दिए।

उन्होंने हाथ पीछे ले जा कर अपनी ब्रा के हुक खोल दिए ओर एक झटके में ब्लाउज और ब्रा दोनों उतार दिए और अपने सुडौल ओर तने हुए मम्मे मेरे सामने नंगे कर दिए।

वो फिर पीछे होकर बिस्तर पर आँख बंद करके लेट गई, मैं उनके बगल में लेट गया और उनकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा, दूसरे हाथ से दूसरे मम्मे को दबाने लगा।

भाभी के मुँह से आह निकालने लगी। वो बोली- चुन्नू, आज रुक मत ! अपनी भाभी को खुश कर दे।

मैं और ज़ोर ज़ोर से उनकी चूची को चूसने लगा।

उसी दौरान उन्होंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल प्रिया और उसे नीचे कर प्रिया। मैंने नीचे जाकर उनका पेटीकोट उतार प्रिया ओर उनकी जाँघों को चूमने लगा।

और फिर मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा, उनकी आह निकल गई। मैंने फिर उनकी पैंटी को नीचे खींचकर उतार प्रिया और भाभी को पूरा नंगा कर प्रिया।

फिर उनकी जांघे फैलाकर मैं उनकी चूत चाटने लगा। वो जोर जोर से कराहने लगी और बोली- चुन्नू शाबाश ! मैं बहुत दिनों से इसी के लिए तड़प रही थी। तू तो अपने भैया से भी अच्छी चाटता है।

अब तू रुकना मत ! आज तुझे अपनी भाभी की प्यास पूरी तरह बुझानी है।

थोड़ी देर में उनकी चूत ने पानी छोड़ प्रिया। उसके बाद भाभी मेरे ऊपर आ गई ओर मेरे कपड़े उतारने लगी।

मुझे पूरी तरह नंगा करके उन्होंने मेरा लंड जो अब पूरी तरह खड़ा हो गया था अपने हाथ में ले लिया और उसे चूसने लगी। मेरे अन्दर सिरहन सी दौड़ गई।

ऐसा आनंद मुझे ज़िन्दगी में कभी नहीं मिला था जैसा भाभी से अपना लंड चुसवाकर मिल रहा था। भाभी फिर घूमकर अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर ले आई और मैं उनकी चूत चाटने लगा।

इस तरह काफी देर तक वो मेरा लंड चूसती रही और मैं उनकी चूत चाटता रहा।

उसके बाद वो बोली- बस अब और नहीं रहा जाता तू! अब अपनी भाभी को चोद कर खुश कर दे।

मैं यह सुनते ही भाभी के ऊपर चढ़ गया, उनकी टाँगें फैलाई और चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा।

वो बोली- बहनचोद, जल्दी से अन्दर डाल ! कब तक तड़पाएगा अपनी भाभी को?

मैंने कहा- भोंसड़ी वाली रंडी ! साली ! शर्म नहीं आ रही ? अपने देवर से चुदवा रही है?

वो बोली- तू मुझे पागल मत कर ! और मत तड़पा !

मैंने एक झटके में अपना लंड भाभी की चूत में घुसेड़ प्रिया।

उनकी चीख निकल गई, बोली- बहन के लौड़े ! मेरी जान निकालेगा क्या?

मैंने कुछ नहीं बोला और दबा कर जोर जोर से भाभी को चोदने लगा।

मैंने अपने जीवन में इतना आनंद कभी नहीं पाया था जितना उस दिन भाभी ने प्रिया। पर मुझे संतुष्टि थी कि भाभी की ज़रुरत को मैंने पूरा किया।

भैया आप चिंता न करें हमने उसके बाद से उनकी हर ज़रूरत का ख्याल रखा है।

बाकी सब कुशल मंगल है।

आपका कनिष्ठ भ्राता

चुन्नू

पर उस दिन हम एक गलती कर गए थे कि हमने कमरे का दरवाज़ा बंद नहीं किया था तो हमें किसी ने देख लिया। किसने देखा और फिर क्या हुआ, यह मैं आपको अपने अगले पत्र में बताऊंगा।

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