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भाभी की चुदाई • पठन समय: 4 मिनट • पढ़ा गया: 880 बार

मेरी सीधी सरल भाभी

राजीव शर्मा

16 Jul 2024 को प्रकाशित

मेरी सीधी सरल भाभी
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नमस्ते दोस्तों ! यह कहानी बिल्कुल सच्ची है। मैं विदिशा, मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरे भाई की नई-नई शादी हुई थी। वैसे मेरी भाभी पर कभी ग़लत निग़ाह तो नहीं रहती थी, पर पता नहीं एक दिन क्या हुआ कि भाभी पर अलग सा लगने लगा। मेरी भाभी थोड़ी कम समझदार थी। वह हमेशा एक समझदार औरत बनना चाहती थी, पर हमेशा घर में और भाई की पढ़ाई कम होने के कारण खुश नहीं रख पाती थी। मैंने इसी बात का फायदा उठाया। एक दिन मैंने भाभी से कहा कि आपको सब गलत कहते हैं, “आप अपने-आप को सुधारती क्यों नहीं हो?”

उन्होंने कहा, “राजीव भैया आप ही बताओ कि मैं क्या करुँ।”

“कल से मैं आपको कुछ चीज़ें बताऊँगा कि स्टैण्डर्ड मुहल्ले में कैसे रहते हैं। बड़े घरों में क्या-क्या होता है।”

“ठीक है।”

दूसरे दिन जब भाभी अपने कमरे में थीं तो मैं वहाँ पहुँच गया और भाभी से बात की और कहा – “बड़े घर में बहुत कुछ होता है, मेरा एक दोस्त तो अपनी भाभी से बहुत नज़दीक रहता है, वो दोनों हाथ पकड़ कर बात करते हैं। एक-दूसरे को चूमते हैं, और गले भी लगते हैं।

भाभी को ग़लत लगा, उन्होंने कहा – “ऐसा कहीं नहीं होता भैया।”

“भाभी आपको वाक़ई में घर वालों की डाँट नहीं सुननी, तो बोल देना।”

अगले दिन मैं उनको अंग्रेज़ी सिखाने लगा, फिर मैंने कहा, “कुछ सोचा उस बारे में?”

“नहीं, मैं आपके भैया को धोख़ा नहीं दे सकती हूँ”

“इसमें धोखा कहाँ है, मैं कोई आपके साथ सेक्स थोड़े ही करने को कह रहा हूँ। आप ते मेरे साथ बिल्कुल दोस्त जैसी रहो।”

वो चुप रही, फिर मैंने कहा, “अच्छा बताओ, देवर तो बेटे जैसा होता है ना?”

“हाँ”

“तो क्या बेटा माँ का दूध नहीं पी सकता?”

मैंने धीरे से उसके ब्लाउज़ पर हाथ रखा और पूछा, “बताओ, कुछ बुरा लगा क्या?”

“नहीं लगा”

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तो मैंने उनकी चूचियाँ चूसते हुए दूध पिया। पर पहला दिन था, तो ज़्यादा कुछ करने से खेल बिगड़ जाता।

कुछ दिन तो मैंने उनको खूब दूध पिये, फिर एक दिन मैंने कहा, “अब तुम कितनी खुल गई हो?”

“हाँ, पहले से कहीं ज़्यादा !”

“आज मैं आपको और अधिक खोलना चाहता हूँ, लो मेरे नीचे हाथ डालो।”

वो मना करने लगी, बोली, “आपने कहा था कि सिर्फ ऊपर !”

“हाँ, यह तो मेरा नीचे का है, आपका नहीं।” और मैंने लगभग ज़बर्दस्ती उसका हाथ अपने अन्डरवियर में डलवा प्रिया और कहा, “इसे हिलाओ।”

उसने मेरा लंड हिलाना शुरु कर प्रिया। फिर मैंने उसे मेरा लंड मुँह में लेने को कहा, तो उसने मना कर प्रिया। मैंने उसे पलंग पर लिटाकर लंड उसके मुँह में डाल प्रिया। उसने मुँह में तो ले लिया पर उसे उल्टी सी आने लगी, शायद पहली बार लंड मुँह में लिया था। मैंने फिर बात को अधिक आगे नहीं बढ़ाया। भाभी अब और खुलने लगी थी।

कुछ दिनों के बाद भाभी का जन्मदिन आया। वह मेरे कमरे में आकर बोली, “भैया मुझे आपने बधाई नहीं दी, सब तो कर चुके।”

मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने कहा बधाई के साथ-साथ उपहार भी ले लो। वह हमेशा सेक्स के मूड में नहीं रहती थी। मैंने कमरे से झाँक कर देखा, घरवाले नीचे बैठे थे। भाई तो नौकरी पर गया था। मैंने भाभी को पलंग पर पटका और चड्डी निकाल कर पलंग के नीचे डाल दी और ब्लाऊज़ भी खोल प्रिया। अब मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और वो चुपचाप टाँगे चौड़ी करके पड़ी थी। उसे भी पता था, कि इतना कुछ हो गया था कि चुदना तो है ही।

मैंने अपना लंड उसकी चूत में धपाक् से डाल प्रिया, वह सिनमिना उठी और मेरे लंड के नीचे हाथ फेरने लगी। मैंने उसे ख़ूब चोदा और अन्त में अपना लंड निकाल कर उसके मुँह पर झड़ गया।

भाभी ने कहा, “जब घर पर कोई नहीं होगा, तो हम अच्छे से करेंगे। आज तो अच्छे से नहीं हो पाया।”

अब हमें जब भी मौक़ा मिलता है तो चलते-फिरते भी चुदाई ज़रूर करते हैं।

support@mohakkisse.com

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