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भाभी की चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 851 बार

सपना पूरा हुआ

राज ठाकरे

19 Sep 2023 को प्रकाशित

सपना पूरा हुआ
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प्रेषक : राज

पहली

और दूसरी

मुझे पहला सेक्स अनुभव चाची ने ही प्रिया इसीलिए उनका शुक्रिया अदा करता हूँ कि उनकी वजह से मैं चुदक्कड़ बन गया और आये दिन इसको-उसको चोदने के बहाने ढूंढने लगा।

दोस्तो, यह कहानी भी एकदम सच्ची है जो अभी मैं आपको बताने जा रहा हूँ।

चलो मैं आपको बता दूँ कि मेरा सपना क्या था और वो कैसे पूरा हुआ।

उसने मुझे अपने साथ चलने के लिए बोला और मैं तैयार हो गया क्योंकि मैंने भाभी को देखा नहीं था। हम लोग उनके घर में गए तो भाभी की माँ घर पर नहीं थी और भाभी का छोटा भाई हमारे साथ बातें कर रहा था।

भाभी हमारे लिए अन्दर नाश्ता बना रही थी। 15 मिनट में नाश्ता तैयार हो गया और भाभी उसे लेकर आई।

जैसे ही भाभी बाहर आई उनको देखते ही मैं अपने होश खो बैठा। क्या बला की ख़ूबसूरत थी वो, गोरी चिट्टी, 5’3″ कद, पूरा भरा हुआ बदन, 36″ की चूचियाँ, 30 की कमर और 38 के चूतड़, ऊपर से सलवार कमीज में वो तो एकदम माधुरी दीक्षित नजर आ रही थी।

मेरा पूरा ध्यान तो उनकी चूचियों की गोलाई की तरफ था। उतने में ही वो मेरे पास आ गई और बोलने लगी- अरे नाश्ता लीजिये।

और आवाज सुनते ही मेरे होश ठिकाने आ गए।

हम लोग नाश्ता करने के बाद अपने घर वापिस गए। उस रात को मैं ठीक से सो ही नहीं पाया, बार-बार मुझे भाभी का चेहरा ही दिख रहा था, उनकी चूचियाँ ही नजर आ रही थी। रात भर सोच सोच कर ही दिमाग चकरा रहा था कि काश उनकी शादी मेरे साथ होती तो।

और जैसे जैसे दिन बीतते गए, मैं भाभी को सोच सोच कर मुठ मारने लगा।

एक महीने के बाद शादी का दिन आ गया और शादी हो गई। वो रात उनकी सुहागरात थी और मैं और मेरे दोस्त भैया के लिए बेड सजा रहे थे लेकिन मैं पूरा नर्वस होकर ये सब कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मुझे भाभी से प्यार हो गया हो, वो मेरी प्रेमिका है और मैं उसे किसी दूसरे के हवाले कर रहा हूँ।

रात के ग्यारह बज गए थे, भाभी को मेरी बुआ की लड़की ने कमरे में पहुँचा प्रिया।

“क्या गजब की सुन्दर दिख रही थी वो साड़ी में !”

काश ! आज मैं सुहागरात मना रहा होता !

वो अन्दर जाकर बेड पर बैठ गई और थोड़े ही समय के बाद भैया भी चले गए।

भैया मुझसे बड़े थे लेकिन मेरा उससे दोस्त के जैसा रिश्ता था इसीलिए जब वो अपनी सुहागरात मनाने के बाद सोकर उठे तब मैंने उससे पूछा- तूने कितनी बार चोदा भाभी को।

तो उसने बोला- चार बार चुदाई की तेरी भाभी की।

ऐसे ही समय बीतता गया और अगले ही साल उनकी एक बेटी हो गई। मैं अन्दर ही अन्दर घुट रहा था कि काश मुझे भी एक बार भाभी को चोदने का मौका मिल जाये। अब मेरा इंजीनियरिंग पूरा हो गया था और मैं जॉब करने के लिए जलगाँव चला गया।

मुझे जॉब करते करते तीन साल पूरे हो गए थे, इस बीच मैं कभी कभी अपनी बुआ के यहाँ आता जाता था तब ही भाभी से मुलाक़ात होती थी। सही बोलूँ तो मैं सिर्फ भाभी को ही देखने आता था।

ऐसे ही मैं अमरावती अपने बुआ के यहाँ आया था तो भाभी से मुलाक़ात हो गई, तब भाभी थोड़ी नर्वस लगी।

मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ भाभी, आप नर्वस क्यों हो?

भाभी बोली- इनको ठेकेदारी में नुकसान हुआ और अभी ये कुछ काम नहीं करते। इसकी वजह से इनको दारू की भी आदत पड़ गई है।

मैं बोला- तो भैया को बोलो न कोई जॉब कर ले।

वो बोली- ये तो मेरी एक भी नहीं सुनते। आप ही बोलो शायद आपकी सुन लें।

उस रात मैं उनके यहाँ ही रुक गया और भैया से बात करके उसे अपने साथ जलगाँव चलने के लिए बोला।

दो दिन के बाद हम लोग जलगाँव चले गए और मैंने अपने ही कंपनी में भैया को इंजिनियर का जॉब दिला प्रिया।

अब मैं ज्यादा ही खुश रहने लग गया था कि भैया इधर मेरे पास है उधर भाभी अकेली है। मेरे दिमाग में फिर शैतानी दांव-पेंच आ रहे थे कि भैया को इधर ड्यूटी में व्यस्त रखने का और उधर मैं अकेला भाभी से मिलने जाया करूँगा और मौका देख कर अपना गेम जमा लूँगा क्योंकि भाभी को भी भैया से अलग रह कर बहुत दिन हो गए थे जिसकी वजह से उनकी चूत को भी लंड की जरुरत तो पड़ेगी ही। ऊपर से मेरा अहसान।

इसी प्लानिंग के साथ मैं बुआ के यहाँ आता-जाता रहा लेकिन सब लोग होने की वजह से मौका हाथ में ही नहीं आ रहा था। अब भाभी पहले से ज्यादा खुल कर बात करती थी।

ऐसे ही दिन बीतते गए लेकिन मौका हाथ में नहीं आ रहा था और मैं इसे सपना ही समझ कर भूल रहा था।

हम दोनों जलगाँव में एक बेडरूम के फ्लैट में रहते थे। एक दिन भैया ने बोला- जा और भाभी को इधर लेकर आ ! एक-दो महीने अपने साथ में भी रहेगी और खाने का भी बंदोबस्त हो जायेगा।

यह सुनते ही मैं खुश हो गया और छुट्टी लेकर भाभी को लेने के लिए अमरावती पहुँच गया। मैंने बस के दो टिकट बुक करवा दिए और दूसरे ही दिन मैं भाभी और भैया की एक साल की लड़की जलगाँव आने के लिए बस में बैठ गए बस में !

रात के तीन बज चुके थे, पूरा अँधेरा था, भाभी नींद में ही थी, उनकी बाजू की सीट पर मैं बैठा हुआ था, मुझे उस रात नींद ही नहीं आ रही थी, बस मैं भाभी के पल्लू को ही देख रहा था कि कब वो नीचे गिरे और मैं भाभी की चूचियों को देखूँ।

अब भाभी का सर धीरे से मेरे कंधे पर आ गया जिसके वजह से मेरे शरीर में एकदम से करंट आ गया। अब मैंने भी अपना सर भाभी के सर के साथ टिका प्रिया, उनकी बेटी मेरे गोद में सोई हुई थी। मैंने धीरे से अपना दायाँ हाथ बाहर निकाला और भाभी को मेरे सर से अलग करके सीधा खिड़की की तरफ कर प्रिया।

अब मैंने अपना पूरा सर उनके कंधे पर रखा और धीरे धीरे उनकी गर्दन को अपने होठों से चूमना शुरु किया। अब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था। भाभी कुछ भी हलचल नहीं कर रही थी जिसकी वजह से मेरी हिम्मत और बढ़ गई थी। अब मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी चूचियों पर रखा और उसे ऊपर से सहलाने लगा। ऐसा लग रहा था मानों मैं मल्लिका शेरावत के वक्ष पर हाथ फेर रहा हूँ। बहुत ही कड़े लग रहे थे, शायद ब्रा की वजह से।

अब मेरी और हिम्मत बढ़ गई थी जिसकी वजह अब मैं और कुछ करने वाला था। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू धीरे धीरे करके ऊपर करना शुरु किया, अब मुझे उनकी दोनों चूचियाँ पूरी तरह से दिख रही थी, ऐसे लग रहा था मानों ब्लाउज से निकलने ही वाली हैं। मैंने अपनी एक उंगली उनकी वक्ष-घाटी में डाल दी और गहराई नापने लगा तो मेरी पूरी उंगली पूरी अन्दर चली गई लेकिन गहराई का पता नहीं चला।

मैंने उंगली निकाल कर अब उनके उरोज दबाने शुरु किये, थोड़ी देर चूचियाँ दबाने के बाद भाभी को एकदम से होश आ गया, मैंने झटके से अपना हाथ खींच लिया लेकिन तब तक वो नींद से जाग गई थी और उन्हें पता चल गया था कि मैं क्या कर रहा था।

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उन्होंने अपनी चूचियों की तरफ देखा और अपने पल्लू को नीचे खींच कर उनको ढक प्रिया और सो फिर से सो गई।

तब सुबह के चार बज गए थे और थोड़ी ही देर में हम जलगाँव पहुँचने वाले थे इसीलिए मैंने आगे कुछ नहीं किया।

5 बजे हम जलगाँव पहुँच गए और ऑटो करके हम अपने फ्लैट में पहुँच गए। भैया भी नींद से उठ गए थे, पहुँचते ही भाभी ने सब सामान कमरे में रख प्रिया और चाय बनाई, हम तीनों ने भी चाय पी ली।

सात बज चुके थे, भाभी ने पूछा- आज कौन कौन ड्यूटी पर जा रहा है, मैं खाना दूँ !

तो मैंने झट से बोला- मैं नहीं जाने वाला हूँ।

फिर भाभी ने भैया के लिए खाना बना प्रिया और भैया नौ बजे ड्यूटी पर चले गए।

भाभी ने भी सब काम पूरे कर लिए। दोपहर बारह बजे हम दोनों ने साथ में खाना खाया और मैं लॉबी में सोने के लिए चला गया, भाभी भी बेडरूम में सोने के लिए चली गई।

मैं नीचे ही गद्दे पर सो रहा था और रात का वाकया याद कर कर के अपने लंड को सहला रहा था, मैं बनियान और बरमूडा पहन कर लेटा ही था।

एक घंटे के बाद मुझे बेडरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई तो मैंने सोचा कि शायद भाभी जाग गई होगी तो इधर आकर देख सकती हैं, तो मैंने सोने नाटक किया और एक हाथ से अपना लंड सहलाना जारी रखा वैसे भी लंड पूरा खड़ा हो गया था और बरमुडा पूरा तम्बू दिख रहा था।

भाभी उठी और बाथरूम में चली गई और मूतने के बाद लॉबी में आ गई। भाभी आई तो उनको मैं सोया हुआ दिखा तो उनकी नजर मेरे लंड पर गई, मैं अभी भी जानबूझ कर अपना हाथ उस पर घुमा रहा था। मैं यह सब अपनी अधखुली आँखों से देख रहा था। मेरा खड़ा लंड देख कर उनके मुँह में पानी आ रहा था, वो अपनी जीभ अपने होठों पर फेर रही थी।

अब वो मेरे नजदीक आ गई और अपने ही हाथों से अपनी चूचियों को दबाना शुरु किया। अब धीरे धीरे वो गर्म हो रही थी उन्होंने अपने ब्लाउज के दो बटन भी खोल लिए और जोर से अपने चूचे दबाने लगी। मैं यह सब देख रहा था जिसके वजह से मैंने भी अब अपना हाथ सीधा अपनी चड्डी के अन्दर डाल प्रिया और अपने लंड की मुठ मारने लगा। उन्हें अभी भी ऐसे ही लग रहा था कि मैं नींद में ये सब कर रहा हूँ।

अब भाभी ने अपना पल्लू नीचे छोड़ प्रिया और अपना पूरा ब्लाउज खुला कर प्रिया था जिससे उनकी चूचियाँ ब्रा होने की वजह से आधी दिख रही थी। अब मैं सोच रहा था कि आज तो भाभी को चोद कर ही छोडूँगा।

मैंने एकदम से अपनी आँखें खोली और भाभी का हाथ पकड़ लिया, भाभी एकदम चौंक गई और अपना पल्लू सही करने लगी।

मैंने भाभी को बोला- भाभी, मैंने आपको अपनी चूचियों को दबाते हुए देख लिया है और आपने भी मुझे अपना लंड सहलाते हुए देख लिया है तो अब आप ये सब क्यों छुपा रही हैं। मैं भी रात को बस में आपके बूब्स दबा रहा था।

भाभी बोली- मुझे मालूम है आप रात को क्या कर रहे थे लेकिन बस में होने की वजह से मैं चुप ही बैठी।

मैं बोला- तो चलो जो रात को नहीं किया वो अभी कर लेते हैं।

मैंने भाभी को अपने पास खींच लिया और उन पर कुत्ते के जैसा चढ़ गया।

मैंने उनकी पूरी साड़ी अलग कर दी और पेटीकोट, ब्लाउज भी अलग कर प्रिया। अब मेरा सपना पूरा होने वाला था, मैंने भाभी के होठों को अपने मुँह के अन्दर ले लिया और चूसने लगा, मैं अपनी जीभ उनके मुँह में घुमा रहा था।

अब मैंने उनकी गर्दन को भी चूमना चालू किया तो वो अब ज्यादा ही गर्म हो गई थी वो भी मेरी गर्दन को चूम रही थी। मैंने उनकी ब्रा खोल दी और नीचे गद्दी पर लिटा प्रिया और मैं उनके शरीर के ऊपर हो गया।

उसकी गोरी बड़ी बड़ी चूचियाँ देख कर मुझे सुहागरात की रात याद आ गई और जोश में मैं उनके ऊपर टूट पड़ा। अब मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी चूचियाँ दबा रहा था, निप्पल चूस रहा था। जैसे ही मैं जोर से दबाता वैसे ही वो कराहती, कहती- प्लीज… जोर से मत दबाओ, दर्द होता है।

अब मैं उनका पूरा शरीर चूम रहा था, चूमते-चूमते मैं उनकी चूत के पास आ गया और उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को चूमने लगा तो और गर्म हो गई, मैं उसके पैरों को सहलाने लगा, उनकी टाँगों पर बाल थे। मुझे मालूम था कि जिस औरत को बाल ज्यादा हों तो वो बहुत ज्यादा सेक्सी होती है।

मैं अपने होठों से उनके बाल भी खींच रहा था। अब मैं 69 की अवस्था में आ गया, मुझे लग रहा कि ये मेरा लंड तो चूसेंगी नहीं लेकिन आगे-पीछे जरूर करेगी।

मैंने उनकी चूत में अपनी एक उंगली डाली तो उसकी आवाजें बढ़ गई- आह्ह…आह्ह… हम्म्म्म… प्लीज राज… आप इसे चोद डालो, चार महीने से प्यासी हूँ, आज इसकी प्यास बुझा दो।

उनकी चूत गीली हो गई थी, अब मैं अपनी उंगली जोर-जोर से अन्दर-बाहर कर रहा था और वो एकदम मस्त होकर मेरे लंड को सहला रही थी।

अब मैंने उंगली निकाल ली और उनको दोनों टांगो से खींच कर अपने मुँह के पास कर लिया और जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरु किया !

वाह.. क्या मजेदार पानी था ! उनका पानी चाट कर ही मेरी प्यास बुझे जैसी लग रही थी।

अब उन्होंने भी मेरी चड्डी उतार दी और एक पल के बाद मैं तो देख कर चौंक गया, उन्होंने मेरा पूरा 6″ लम्बा और 2″ मोटा लंड अपने मुँह में ले लिया। अब तो मुझे और ही मजा आ रहा था, यह तो मेरे लिए सोने पे सुहागा वाली बात थी।

ऐसा 5 मिनट तक चला। इधर मैं उनकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी।

अब मैंने उनको सीधा किया और अपना लंड उनकी चूत पर रख प्रिया और एक ही झटके में पूरा लंड उनकी चूत में डाल प्रिया।

वो चिल्ला उठी- मैं मर जाऊँगी… आराम से डालो… आह्ह्ह्ह…आह्ह…

मैंने धीरे धीरे लंड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया अब उनको भी अच्छा लग रहा था। उनकी हर आवाज पर मैं अब झटके बढ़ा रहा था।

वो बोली- अब जोर से चोदो… मेरी प्यास बुझाओ।

अब मैं अपने पूरी ताक़त से अपना लंड उनकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था और अपने दोनों हाथों से चूचियाँ दबा रहा था।

अगले 10-12 झटकों में ही वो झड़ गई और थोड़ी देर के बाद मैं भी झड़ गया और अपना पूरा पानी उनकी चूत में छोड़ प्रिया। उस दिन हमने 3 बार चुदाई की और अगले 2 महीने तक मैं भाभी को रोज चोदता रहा उसके लिए मैंने अपनी रात वाली ड्यूटी भी लगवा ली थी।

जब मैंने भाभी को बताया कि मैंने आपकी सुहागरात को रात भर में तीन बार मुठ मारी तब भाभी बोली- मुठ क्यों मारी? आ जाना था अन्दर कमरे में ! तुम्हारे साथ भी सुहागरात मना लेती क्योंकि तुम्हारे भैया तो एक ही बार में सो गए थे।

तब भैया का झूठ पकड़ में आया। इन 2 महीनों में भैया से ज्यादा मैंने ही भाभी को चोदा और हर आसन में उनकी चूत की खाल निकाल दी। इसी दो महीने में वो गर्भवती भी हुई और अब उनको एक लड़का है, भाभी बोलती हैं कि वो मेरा ही है।

इसके साथ ही मेरा भाभी को चोदने का सपना पूरा हुआ और अब भी मैं मौका मिले तो भाभी को चोदता रहता हूँ।

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