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पड़ोस की भाभी के साथ चुदाई का सफर

राहुल 789

29 Aug 2015 को प्रकाशित

पड़ोस की भाभी के साथ चुदाई का सफर
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भाभी फक Xxx स्टोरी पड़ोस की भाभी के साथ मेरे सेक्स की है जिसकी शुरुआत एक फैमिली ट्रिप से हुई. वो सफर हमें एक दूसरे के करीब ले आया और दो बेताब बदन ट्रिप में सेक्स का भरपूर आनंद लेने लगे।

नमस्कार दोस्तो,मैं विकास आपके सामने एक कहानी लेकर आया हूँ जो मुझ पर बीती है और जो हमेशा सुखद अहसास कराती है जब मैं भाभी की चूत को मज़े लेकर चोदता हूँ.

भाभी फक Xxx स्टोरी की शुरूआत एक मज़ेदार ट्रिप से हुई थी।

कौन क्या लिखता है खुद की बड़ाई में … मेरा लन्ड ऐसा है या वैसा है … मैं उस पर ध्यान नहीं देता।मेरा लन्ड जैसा एक आदमी का होना चाहिए वैसा ही है.

और मैंने जिस भी भाभी को चोदा है, वो कहती है- मुझे तुम्हारे साथ चुदाई में मजा आया. तुम्हारा चुदाई करने का अंदाज़ बहुत पसंद आया. तुम जिस लड़की को प्यार दोगे, वो तुम्हारी होकर रह जाएगी।मेरा नाम विकास है और अभी मैं छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर शहर में रहकर काम करता हूँ.

एक साल पहले दिसम्बर महीने में हमारे आस पास के लोगों ने निर्णय लिया कि इस साल कहीं घूमने चलते हैं।सबने पूरे छत्तीसगढ़ को घूमने का प्लान बनाया।

मेरे घर वाले भी जा रहे थे घूमने!मेरा मन तो नहीं था … पर मैं काम से थोड़ा फ्री होना चाहता था तो मैंने भी हामी भर दी।

हमारे पड़ोस के 12 फैमिली वाले जा रहे थे.

उनमें से घर से कुछ दूरी पर रहने वाले चाचा जी ने अपने बेटे को भी बुलवा लिया था।पुनीत नाम था उनके बेटे का … वह अपनी पत्नी के साथ ट्रिप पर जा रहा था।

हम सबने अपनी सीट चुन ली और यात्रा के लिए निकलने ही वाले थे कि चाचा जी अपने परिवार के साथ चढ़े बस में!उनके साथ उनकी पत्नी, उनका बेटा पुनीत और उसकी पत्नी यानि इस कहानी की नायिका भाभी भी चढ़ी।

सारे मर्द उन्हें देखते ही रह गए … वह इतनी खूबसूरत लग रही थी।

दिखने में बहुत ज्यादा तो नहीं … पर गोरी थी.पर उसने अपने खूबसूरत ड्रेसिंग सेंस से सबको आकर्षित कर लिया था।

मैं पीछे की तरफ बैठा हुआ था.

चाचा जी की फैमिली देर से आई तो उन्हें पीछे की सीट मिली.

मेरे सामने चाचा जी और चाची जी और मेरे पीछे की सीट पर पुनीत और उसकी पत्नी बैठी हुई थी।

मेरे बाजू में एक प्यारी से बच्ची बैठी हुई थी जिसकी उम्र 12 के करीब होगी.वह बाहर के नजारे देखना चाहती थी तो मैंने उसे खिड़की की सीट दी.और मैं भी कुछ देख सकूं इसलिए मैं साइड में आ गया.

अब मैं बच्ची को कुछ दिखाने के बहाने बाहर देखता तो तिरछी नजर से भाभी को देख लेता था।

चूंकि हम शाम को 9 बजे निकले थे तो रात के 11 बजे के करीब बस रुकी एक ढाबे में.सब नीचे उतरे और थोड़ी देर बाद सब खाना खाकर ऊपर चढ़ने लगे.

तो मैंने सोचा बात करनी चाहिए क्योंकि पुनीत लगभग मेरी उम्र का ही रहा होगा.तो मैंने पीछे पलटकर बात शुरू की।

मैं- नमस्ते भैया जी, मेरा नाम विकास है।पुनीत- मेरा नाम पुनीत है ये मेरी पत्नी आशा!

मैं- नमस्ते भाभी जी।आशा- नमस्ते।

मैं- आप यहीं रहते हैं … देखा नहीं कभी।पुनीत- हम भोपाल में रहते हैं. वहाँ जॉब है मेरी!

इस तरह बातों बातों में दोस्त जैसा संबंध बना लिया.पर भाभी से उतनी बात नहीं हो पाई।

ढलती रात के साथ सब सोने लगे.पर मुझे जल्दी सोने की आदत नहीं थी तो मैं मोबाइल में मूवी और व्हाट्सएप चलाने लगे।

अब सब सोने लगे थे, हमने लाइट भी ऑफ करवा ली.

शायद पुनीत ने गुड किस भी ले ली थी क्योंकि चुम्मी की आवाज़ आयी थी.तो मैं हल्का सा पीछे मुड़ा तो भाभी मुस्कुरा रही थी.मैं भी उन्हें देख मुस्कुरा प्रिया और ‘लगे रहो’ करके थंब अप किया तो वह मुस्कुराने लगी।

मुझे उस हसीन हुस्न को देखकर अब सुकून कहाँ था … मैं तो मुठ भी नहीं मार सकता था.पर लन्ड राजा सोने का नाम भी नहीं ले रहे थे।

कुछ देर बाद पीछे मुड़ा तो पुनीत सो चुका था.भाभी बाहर के नजारे देख रही थी.

पर मेरी नज़र को न जाने कैसे उन्होंने भांप लिया और मेरी निगाहें उन्होंने पकड़ ली कि क्या निहार रही हैं।

बाहर से आने वाली रोशनी में भाभी बहुत खूबसूरत लग रही थी।मेरी निगाहों को पकड़ कर मुझसे इशारे में कहा- क्या देख रहे हो?

मैंने हाथ के इशारे से बताया- बहुत खूबसूरत लग रही हो!तो वे फिर स्माइल करने लगी।

उसने ग्रे रंग की साड़ी पहनी हुई थी।पूरे ब्लाउज में भी उसका भरा बदन एक जवान मर्द को तड़पाने वाला हुस्न था।

रात के करीब 2 बजे बस एक ढाबे पर रुकी और सबसे कहा- जिसे वाशरूम जाना हो, होकर आ जाये.तो कुछ लोग उतरे.

मैं भी उतर गया मज़े लेने खुली हवा में!

कुछ देर बाद आशा भी उतरी और मुझसे पूछा- वाशरूम कहाँ है?मैंने कहा- चलिए, मैं पूछता हूं!क्योंकि खुले में एक महिला का जाना सही नहीं।

वे हंसी और मेरे साथ आगे बढ़ी.और फिर आकर मुझसे बात करने लगी- आप कहाँ रहते हो?

उनके इस प्रशन का पता नहीं कैसे उत्तर निकल गया मुंह से- आपके दिल में!फिर मैंने कहा- सॉरी. मेरा मतलब यहीं रहता हूं, मेरा खुद का बिज़नेस है।

वे हंस ही रही थी.तो मैंने कहा- आपकी ड्रेसिंग सेंस बहुत अच्छी है. देखते ही रह गए सब आपको!उसने थैंक्स कहा।

मेरा मन कर रहा था कि किस कर लूं उनको … पर कंट्रोल में रखा खुद को … क्योंकि कुछ हुआ ही नहीं था.

थोड़ी देर बाद सब बस में चढ़ गए और सोने लगे.और मैं उसकी स्माइल को याद कर नीन्द से दूर होने लगा।

मैं फिर पीछे पलटा तो वे सोने लगी थी.उनकी साड़ी हल्की से नीचे हुई तो ब्लाउज के अंदर के कट दिखने लगे और देखकर लन्ड तन गया।

मुझे देखते हुए 5 मिनट से ज्यादा हो गए थे.भाभी की अचानक आंख खुल गयी और उनकी नज़र मुझपर पड़ी.मैं सीधा हो गया डर कर!

फिर मैं पलटा थोड़ी देर बाद … तो आशा भाभी सोई नहीं थी.उन्होंने मुझे देखते हुए देखा पर उन्होंने अपनी साड़ी को ठीक नहीं किया, बस मुझे देखने और मुस्कुराने लगी.मुझे ऐसा लगा कि उन्हें मेरा देखना अच्छा लगा!

तभी उन्होंने एक हाथ अपने ब्लाउज के अंदर डाल प्रिया.मेरे लन्ड की हालत और बिगड़ गयी.पर मैं कुछ कर नहीं सकता था।

लेकिन मुझे उसकी मुझ पर चाहत का सिग्नल मिल चुका था।उस पल कुछ नहीं हुआ.

फिर सुबह 5 बजे के करीब गाड़ी रुकी और फिर परिचालक ने वही कहा- जल्दी बाथरूम होकर आ जाइये. गाड़ी यहाँ 20 मिनट रुकेगी.

तो मैं उतर कर भाभी की राह देखने लगा.

जैसे ही वे उतरी और बाथरूम से होकर आयी, मैंने उन्हें बस के पीछे आने का इशारा किया.

एक किनारे पर जाकर उनके हाथों को पकड़कर सहलाया और धीरे से होंठों को किस करने लगा।वे भी सेक्स की प्यासी लग रही थी तो मेरा साथ देने लगी.

मैं फिर उनके मम्मे दबाने लगा और ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर दबाने लगा।वे भी साथ दे रही थी।

उस टाइम उससे ज्यादा न हो सका और हम बस में आकर बैठ गए.

और थोड़ी नींद लेने लगे मुझे थोड़ा चैन आया अब।

सुबह हम रायपुर पहुँच गए थे.एजेंसी ने हमारे लिए रूम बुक किया हुआ था होटल में … होटल में फ्रेश होकर हम सब वहां कई जगह घूमे दिन में!

उस दौरान तो कोई मौक़ा मिलना मुश्किल था तो मैंने खुद को संभाला।

रात हम रायपुर के होटल में ही रुकने वाले थे तो होटल में जाकर खाना खाकर सोने लगे.

मुझे तो आज चुदाई की आस थी तो नींद मुझसे कोसों दूर थी।

वैसे इतने सारे लोगों के बीच सेक्स होना मुश्किल था.पर जब बदन में आग लगी हो तो मौका निकल ही आता है.

मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.मैं रूम से बाहर टहल रहा था इस आशा में कि रात को कहीं वो मिल जाये तो चुदाई हो जाये.

और किस्मत ने मेरा साथ प्रिया.

वे रूम से बाहर आयी.मुझे देख कर बोली- सोये नहीं?

मैंने कहा- सोया कुछ भी नहीं है, देख लो नीचे!

वे देखने लगी तो मेरी पैंट में लन्ड तन कर खड़ा था।मैंने कहा- आप नहीं सोई?

भाभी बोली- ये तो अपना काम करके सो गए. पर मेरा भी आप जैसा हाल है।

मैंने कह प्रिया- तो फिर मिला लें इस बेहाल तन को?वे मुस्कुरा उठी.

तो मैंने कहा- आपके पति न जाग जायें?वे बोली- नहीं. ये सेक्स के बाद सोने पर नहीं उठते. वैसे भी पीकर सोये हैं।

मैंने देर न करते हुए होटल के रिसेप्शन में बात कर एक रूम बुक कराया और आशा को रूम में लेकर चला गया भाभी फक Xxx के लिए!

दरवाजा बंद करते ही मैं भाभी उसे किस करने लगा और उसके स्तन सहलाने लगा।वे मज़े लेने लगी थी, मेरा साथ दे रही थी.

पर हम दोनों को इतनी बेताबी छाई थी कि हम नहीं रोक पा रहे थे एक दूसरे को!हम प्यार में इतने मशगूल हो गए कि हम दोनों को पता न चला कि कब हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए.नंगे बदन हो गए थे हम!

भाभी को बिस्तर में लिटाकर मैं उनके ऊपर आकर उन्हें चूमे जा रहा था और वे मज़े से आह आह कर आनंद ले रही थी।

मैं चूमते चूमते उनके निप्पल को मुख में लेकर चूसने लगा और काट भी लेता था.जैसे ही मैं काटता तो वे आह करती … उसकी आह बड़ी मज़ेदार थी।

और वे अपने हाथों से मेरे बालो को सहलाकर मेरे सर को अपने निप्पल पर दबाती।

उनके बदन को चूमते चूमते मैंने उनकी नाभि में किस किया.और फिर जैसे ही मैंने भाभी की चूत को चूमा.

वे छटपटा उठी,मैं चूत में जीभ डालकर चूमता रहा।मैंने इतना चूमा चाटा कि भाभी अपना पानी निकाल बैठी.मेरा चेहरा उनके पानी से भीग गया और वे हाम्फने लगी।

मैं उनके निप्पल को फिर से मुंह में लेकर चूसने लगा।

अब मैंने उसे अपना लंड दिखाकर चूसने का न्योता प्रिया.तो वे मना करने लगी और कहने लगी- ये मैंने कभी किया नहीं!मैंने कहा- ठीक है!क्योंकि मैं उनके साथ चुदाई तो करना चाहता था पर कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था।

पर मैं उन्हें जल्दी से चोदकर पहले सेक्स का पहला मज़ा किरकिरा नहीं करना चाहता था.तो मैंने सोचा उन्हें थोड़ा तड़पाता हूँ ताकि वे खुद चुदने को बेकरार हो जायें।

मैं उनके बदन को लगातार चूमे जा रहा था ताकि वे और गर्म हो जायें … चुदाई के लिए उतावली हो जायें क्योंकि मैं चाहता था कि वे मेरे साथ खुलकर सेक्स करें, सेक्स के मज़े लें मेरे साथ!मैं उन्हें भी मज़े देना चाहता था।

मैं उन्हें चूम रहा था, उनके निप्पल चूस रहा था.

अब वे बेताब हो उठी और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में डालने लगी.मैं उन्हें तरसा रहा था.

तब उन्होंने मुझे अपने ऊपर से हटाया और बिस्तर पर लिटाकर मेरे लंड को चूमने लगी.फिर मेरे ऊपर आकर वे अपनी चूत में सेट कर डालने लगी।

मुझे उनकी यह अदा पसंद आई और मैंने हल्के से उठ कर उनकी चूत में सेट लंड को पेल प्रिया।वे मेरे लन्ड के ऊपर उछल उछल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी।

उछल कर जब वे चुदती तो मैं उनके निप्पल को पकड़ कर मसलता, उसे ज़ोर से दबाता और मुख में लेकर चूस भी लेता।

अब वे चुदवाते हुए थकने लगी तो मैंने उन्हें अपने नीचे किया और उसके ऊपर आकर चोदने लगा.

जल्दी ही मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।वे आह आह करके चुदाई का मज़ा लेने लगी.

उन्होंने मज़े से मुझे ज़ोर से पकड़ लिया.मैं समझ गया कि वे झड़ने के करीब हैं.तो मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और थोड़ी देर में दोनों एक साथ झड़ गए।

मैंने उनकी चूत में झड़ने पर आशा से माफी मांगी और कहा- बेताबी और तुम्हारी चूत की गर्मी के आगे मैं खुद को न रोक पाया और चूत में ही अपना माल गिरा प्रिया!

तो वे मुझे कस के पकड़ कर चूमने लगी और थैंक यू कहा.मैं उनके निप्पल को पकड़ कर चूमने लगा और कहा- मुझे इन निप्पलों का प्यार हमेशा देती रहना!

उस रात हमने एक बार और चुदाई के बाद वे अपने रूम चली गयी।

उस रात के बाद बाकी बचे ट्रिप में हमें 2 बार और चुदाई का मौका मिला और हमनेमज़े से चुदाईकी।

उसके बाद जब भी मौका मिलता है, हम दोनों एक होकर मज़े लेने लगते हैं सेक्स का!उम्मीद है कि आपको मेरी और आशा की भाभी फक Xxx स्टोरी पसंद आयी होगी।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

ललित पटेल लकी

2 months ago

क्या भाभी सच में मान गई थी? अगला भाग जल्दी लाओ!

डी के

2 months ago

भाभी के साथ रोमांस हमेशा से ही बेस्ट होता है। बहुत ही हॉट स्टोरी!

सुमीत के

2 months ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

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