होम पर वापस जाएं
भाभी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,166 बार

भाभी के यौवन का भोग

विहान स्मार्टी

03 Sep 2025 को प्रकाशित

भाभी के यौवन का भोग
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विहान है. यह बात दो महीने पहले की है. मैं दिल्ली अपनी कोचिंग के लिए आया था, काफी रूम देखे लेकिन कोई पसन्द नहीं आया. आखिर में एक फ्लैट अच्छा लगा, वहां के मकान मालिक एक बुजुर्ग दंपत्ति थे. उनका एक बेटा था, जो जयपुर में नौकरी करता था और उसकी बीवी यानि अंकल आंटी की बहू, उनके साथ ही रहती थी. उनकी बहू यानि भाभी बहुत सुंदर और दिखने में बड़ी ही कामुक थीं. मैंने अंकल से रूम को किराए पर लेने की बात करते हुए उन्हें अपने बारे में बताया.

चूंकि मैं एक बहुत अच्छे कॉलेज से पढ़ा था, इसलिए कॉलेज का नाम सुनते ही वो प्रभावित हो गए. उन्होंने मुझसे कुछ बातें पूछी और रूम की बात फाइनल हो गई. अगले दिन मैं वहां शिफ्ट हो गया.कुछ दिन बीत गए, मैंने किसी से ज्यादा बात नहीं की.

फिर एक दिन जो अंकल थे यानि भाभी के ससुर, उनकी तबीयत खराब हो गई. घर पर उनका बेटा नहीं था. वो सिर्फ रविवार को आता था.. तो भाभी ने मुझसे उनको अस्पताल ले जाने को कहा. मैं और भाभी उनको अस्पताल ले गए और एडमिट करा प्रिया. डॉक्टर ने कुछ देर बाद कहा कि सब नार्मल है.इस कारण हमने भैया को बुलाना जरूरी नहीं समझा और हम सब घर वापस आ गए.

मैंने उस दिन भाभी से पहली बार बात की थी.अगले दिन से मैं जब भी भाभी को देखता, तो हम दोनों ही मुस्कुरा देते.

एक दिन मैं छत पर खड़ा था, शाम का वक़्त था. भाभी कपड़े लेने छत पे आई थीं. उन्होंने मुझसे पूछा कि कैसी चल रही है तैयारी विहान?मैंने बोला- बस भाभी.. सब अच्छा चल रहा है.इस तरह हम दोनों की बातें शुरू हो गईं. हमने खूब बातें की, तभी आंटी ने भाभी को आवाज लगाई और भाभी चली गईं.

उस दिन भाभी की साड़ी बहुत कामुक लग रही थीं. उनकी पतली कमर और काली आंखों पर मेरा दिल आ गया था. भाभी के बोबे बहुत बड़े और गोल थे. उनकी तस्वीर मेरे आंखों में बस गई. उस दिन रात को मैंने भाभी के यौवन का भोग, अपने दिमाग में उनकी चूचियों को रख कर और हाथों के सहारे लंड को हिला कर किया. मतलब भाबी की जवानी को याद करके मुठ मारी.

अगली सुबह भाभी को झुक कर झाड़ू लगाते देखा, तो भाभी की उठी हुई गांड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं बस यूं ही उनकी हिलती हुई गांड को देखता रहा. उसी दिन से मेरे मन में भाभी के यौवन को भोगने की प्यास जाग गई. मैं उनके यौवन का भोग करके अपनी कामुकता को पूरी करना चाहता था. मैं भाभी को याद कर करके लंड हिलाने लगा.

बाद में मौके मिलते ही उनसे बात करता, पर ये सब काफी नहीं था. मुझे तो पूरा सुख लेना था. मैंने भाभी से बात की लेकिन वो बहुत कम बाहर आती थीं और मेरा रूम काफी साइड में था.

मैंने शाम को भाभी से बोला कि मेरा मोबाइल रूम में मिल नहीं रहा है, क्या आप कॉल कर देंगी.भाभी ने अपना फ़ोन प्रिया और मैंने कॉल किया. अब मेरे पास भाभी का पर्सनल नंबर आ गया था.

रात को मैंने भाभी को मैसेज किया, उन्होंने मेरी व्हाट्सअप प्रोफाइल पिक्चर की तारीफ की. तो मैंने कहा- आपसे अच्छी नहीं है.बस यूं ही व्हाट्सअप पर बातें होने लगीं. मैंने भाभी से सब कुछ पूछ लिया. भैया बहुत कम आते थे इसलिए भाभी थोड़ा उदास रहती थीं.

मैंने एक दिन भाभी के फिगर की तारीफ कर दी तो बोलीं कि लगता है विहान पढ़ाई में ध्यान नहीं है तुम्हारा?मैं जरा मुस्कुरा प्रिया तो फिर बोलीं कि मजाक कर रही हूँ और थैंक्स कह प्रिया.बस मेरा हौसला बढ़ने लगा. भाभी खुद मुझसे बहुत बातें करती थीं.

एक दिन रात काफी हो चुकी थी, भाभी और मैं बात करते करते सेक्स के टॉपिक पे आ गए. भाभी सेक्स के बारे में बहुत जानती थीं. मैंने उनकी पसंद की सेक्स पोजीशन पूछी, तो वो बोलीं कि सेक्स बहुत कम हुआ है.. तुम्हारे भैया शादी के कुछ दिन तक तो करते रहे थे, फिर जॉब के कारण सिर्फ जब आते हैं.. तब ही हो पाता है, वो भी ज्यादा नहीं.

मैंने पूछा- भाभी आप सेक्स मूवी देखती हो?वो बोलीं- पहले देखती थी, लेकिन शादी बाद नहीं देखी.मैंने कुछ नहीं कहा तो उन्होंने पूछा कि क्या आपके पास सेक्स मूवीज हैं?तो मैंने भाभी को मूवीज के स्क्रीन शॉट भेजे, बस भाभी और मैं कामुकता में खो गए. अब हम दोनों सेक्स चैट करने लगे.

उस दिन से मेरी कामुकता बहुत बढ़ गई मुझे अब बस भाभी को चोदना था. मैंने बोला कि अकेले में मिलते हैं.वो बोलीं- विहान ये गलत है और मम्मी पापा दिन भर यहीं होते हैं.

कुछ दिन बीते, हम फोन पे भी सेक्स चैट करने लगे. भैया जब भी आते मेरी कामुकता बढ़ जाती. मेरे दिमाग में भाभी के यौवन ने कब्जा कर लिया था. मुझे उस आनन्द का भोग करना था.आखिरकार वो दिन आ ही गया, जिसके इंतजार में मैंने अपने लंड को हिला हिला कर अपनी कामुकता दूर की थी. अंकल और आंटी को कहीं रिश्तेदारी में जाना था और शाम को भैया आने वाले थे. इसलिए वो अकेले निकल गए, भाभी को घर ही छोड़ गए.. क्योंकि वो अगले दिन आ ही जाने वाले थे. इस तरह हमारे पास शाम तक का टाइम था. भैया शनिवार की शाम को आते थे.

जैसे ही अंकल आंटी घर से बाहर गए, मैंने भाभी को कॉल किया. मुझे नहीं मालूम था कि अंकल आंटी शहर से बाहर जा रहे हैं.

भाभी बोलीं कि विहान मेरे मोबाइल में कुछ प्रॉब्लम हो गई, तुम एक बार देख लोगे??मैंने बोला- ठीक है.वो बोलीं- अभी आ जाओ.

मुझे नहीं पता था कि घर में कोई नहीं है. मैं गया.. तो देखा भाभी सूट में थीं. भाभी बोलीं- अन्दर आ जाओ.

शायद भाभी खुद उनकी यौवन की प्यास बुझाना चाहती थीं.

मैं अन्दर चला गया तब उन्होंने बताया कि घर में कोई नहीं हैं और भाभी का मोबाइल बिल्कुल ठीक था.वो बोलीं कि यार पता नहीं.. थोड़ी देर पहले काम नहीं कर रहा था.लेकिन न जाने मुझे क्यों लगा कि भाभी झूठ बोल रही थीं.. मगर मुझे क्या.. मेरा लंड बस भाभी को चोदने के लिए पागल हो रखा था.

यह भी पढ़ें (Recommended)

Yasmin ko sleeper bus me choda-2

भाभी की नजर मेरे खड़े लंड पे गई, वो हंसी और थोड़ा पास सट कर बैठ गईं. मेरा हाथ भाभी की उंगली पे टच हुआ, तो मैंने पूरा हाथ पकड़ लिया. भाभी कुछ नहीं बोलीं.

मैंने भाभी को हग किया तो वो बोलीं- विहान, यार ये सही नहीं है.लेकिन फिर भी वो मुझे हग करके बैठ गईं. वो बोलीं- तुम बहुत हॉट हो यार.

मैं अब होश से बाहर था. मैंने अपने होंठ भाभी के होंठों पे रखे और उनको किस करने लगा. अब चुदास की ये आग जल चुकी थी. दो जिस्म एक होना चाहते थे. भाभी मेरा साथ देने लगीं, मैंने हाथ भाभी की पेंटी में डाल प्रिया. मुझे हल्के नर्म बालों के बीच एक गर्म चूत का एहसास हुआ. मैं अपनी उंगली भाभी की चूत में चलाने लगा,भाभी की कामुकताकी आग विशाल रूप ले चुकी थी.. उनकी टांगें खुल चुकी थीं और वे चूत की रगड़ाई से मचल उठी थीं.

मैंने भाभी को गोद में लिया और ले जाकर बेड पे गिरा प्रिया. भाभी के पूरे कपड़े उतार दिए. भाभी मेरे सामने नंगी थीं, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था. मैंने भाभी के बड़े बड़े बोबों पर अपना मुँह रखा और चूसना शुरू किया. भाभी के सुनहरे रंग के निप्पल मेरे मुँह में थे. मुझे बहुत मजा आ रहा था.

भाभी भी आनन्द से सराबोर हो रही थी और ‘आहह.. ऊम्म.. आहहहहह आउच..’ की आवाज निकालने लगीं. मैं समझ गया कि भाभी की जवानी को लंड की सख्त जरूरत है. फिर भाभी के उन बड़े मम्मों का रसपान करके मैंने अपनी पैन्ट उतारी और अपना लंड निकाल कर भाभी को पकड़वा प्रिया. भाभी की आँखों में हवस का नशा था, बिना कुछ बोले ही भाभी मेरा लंड चूसने लगीं. लंड भाभी के मुंह में जाते ही मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगी थीं.

फिर मैंने कहा- भाभी ना जाने कब से तड़पा रही हो.. आज इतने दिन बाद जा के मौका मिला है.भाभी पागलों की तरह मेरा लंड चूस रही थीं. वे बोलीं- आह.. विहान कितना बड़ा लंड है यार.. मजा आ गया.

फिर मैंने भाभी को अपनी बांहों में जकड़ लिया और उनकी गर्दन चूमने लगा. भाभी कामवासना से पागल होने लगी थीं, मेरे बालों में उंगली फेरने लगीं.

मैंने भाभी को लेटाया और चूत चाटने लगा. भाभी ने गांड उठाते हुए कहा- विहान उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह.. आउच..उनकी सिसकारियां बढ़ने लगीं. भाभी की चूत बहुत प्यारी थी और उसकी खुशबू मेरे अन्दर की कामुकता को और बढ़ाने लगी.

मैंने अपनी जीभ जितनी अन्दर जा सकती थी, भाभी की चूत में डाल दी और जीभ को चूत में चलाने लगा. भाभी मेरे बालों को जकड़ चुकी थीं.

वो बोल रही थीं- विहान बस.. अह.. मार डालोगे क्या आज आआआहह..मैंने कहा- भाभी अभी कहां से बस.. अभी तो शुरू किया है जान..

तभी भाभी अकड़कर झड़ने लगीं. उनकी चूत से कामुकता का रस टपक रहा था, वो झड़ चुकी थीं, मगर ये आग अभी कहां शान्त होने वाली थी. मैंने भाभी को लेटाया ओर लंड चूत के ऊपर रख के रगड़ने लगा.भाभी बोलीं- विहान, प्लीज डाल दो यार, मत तड़पाओ.मैंने झटके से लंड घुसा प्रिया. भाभी तड़प उठीं और मैंने उनको चोदना शुरू कर प्रिया. मादक सिसकारियां कमरे में गूंजने लगीं. मैं पूरे जोश में झटके दे रहा था.

दस मिनट बाद मैंने भाभी को मेरे ऊपर आने को कहा, वो मेरे लंड पर आ बैठीं. इस बार झटके और तेज हो गए थे. भाभी ‘इहह.. आआहहह.. आहहहह..’ की आवाज कर रही थीं. दो बदन कामुकता की इस आग में ऐसे मिल गए, जैसे कि एक ही शरीर हों.

मैंने भाभी को अलग अलग पोजीशन में हचक कर चोदा, सब कुछ गीला हो गया था. मैंने उस दिन अपना मुठ तीन बार भाभी के बदन पे झाड़ा. भाभी ने भी अपनी चूत मेरे मुँह पे रख दी. मैंने खूब देर तक चूत चाटी.

शाम होने को थी, हमको पता भी नहीं चला. हम दोनों बहुत थक चुके थे. हम दोनों ने कपड़े पहने और अलग हो गए.

भाभी बोलीं- यार अब रात को तुम्हारे भैया के साथ नहीं हो पाएगा.इस बात पर मैं मुस्कुरा प्रिया.

मैंने उस दिन के बाद 8-9 बार भाभी को चोदा, फिर मुझे अपना रूम चेंज करना पड़ा. मैंने और भाभी ने मिल कर ये फैसला किया और हम दोनों इस कामुकता की आग से बाहर आ गए.

आज 3 महीने हो गए हैं, अब बस यादें ही शेष हैं. हम दोनों ने बात करना भी छोड़ दी.. कुछ कारण भी रहे थे.

तो दोस्तो यह थी मेरी पहली चुदाई की कहानी… आपको मेरी सेक्स स्टोरी कैसी लगी? अपने विचार मुझे जरूर लिखेंsupport@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Yasmin ko sleeper bus me choda-2
भाभी की चुदाई

Yasmin ko sleeper bus me choda-2

Hello friends.. Aap log ne meri kahaniYasmin ke sath masti walapichle bhag mein padha tha ki. Bus ke safar mein slipper coach mein mere sath ek khubsurat aurat thi aur me use chodne ke firak mein tha par sath me uska beta bhi tha to mene uska band...

10 मिनट 824
तेरहवीं का चाँद : भाभी की चुदाई
भाभी की चुदाई

तेरहवीं का चाँद : भाभी की चुदाई

नमस्कार दोस्तो, मैं आपका दोस्त अमन एक नयी कहानी लेकर आपके सामने आया हूँ, उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आयेगी।मैं मुंबई के ठाणे शहर में रहता हूँ और एम बी ए की पढ़ाई कर रहा हूँ, मैं दिखने में ठीक ठाक हूँ और मेरा लंड 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है।

13 मिनट 555
हमारी हॉट कुक गुजराती भाभी को पटा कर चोदा
भाभी की चुदाई

हमारी हॉट कुक गुजराती भाभी को पटा कर चोदा

दोस्तो, मेरा नाम आरती है(आरती लड़कों का नाम भी होता है), मैं पुणे महाराष्ट्र का रहने वाला कॉलब्वॉय हूँ, मैं दिखने में स्मार्ट हूँ, कद काठी भी ठीक ठाक है.

8 मिनट 659

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।