पिछला भाग पढ़े:-भाभी की चूत चोदी-7
उसने मुझे कहा: आज तुम्हें हो क्या गया था? कितना जोरों से चोद रहे थे। बिलकुल भी रहम नहीं करा तुमने तो मुझ पर। इतना जोर से पहले तो चोदा नहीं। आज इतना जोश कहा से ले आए? मेरी हालत ही ख़राब कर दी तुमने आज। वो भी सुबह-सुबह। छुट्टी का दिन है, पता नहीं आज क्या करोगे।
मैं: कुछ नहीं आज पूरा दिन तुझे चोदूंगा और तेरी चूत को अपने पानी से भरूँगा। तेरी गांड भी आज ही मारूँगा और तुझे प्रेग्नेंट भी करूँगा।
भाभी: सच में आज तुमने मुझे असली मर्द की तरह चोदा है। और आज मैं खुद को एक औरत मान रही हूं जो इतने अच्छे और बड़े लंड ने मेरी चूत को चोदा है। वादा करो मेरी ऐसे ही चूत को चोदा करोगे। तुम मेरी चूत पर रहम मत करना, बस उसे फाड़ देना। मैं तुमसे बेपनाह चुदना चाहती हूं और तुम्हारे बच्चे की माँ बनना चाहती हूं।
मैंने उसे किस्स किया और उससे कहा: अब नहा ले वर्ना आशीष मेरा बेटा आ जाएगा।
फिर हम दोनों साथ उठे और साथ में नहाये। मैंने उसे नहाने के बाद उसकी चड्डी और ब्रा पहनाई और उसने मुझे मेरा अंडरवियर पहनाया। मैंने उसके वहीं पर दूध को दबाया और थोड़ी देर मस्ती करने के बाद हम दोनों बाहर आ गए।
भाभी ने हमारे लिए खाना बनाया और हम तीनों ने खाना खाया।
मैंने आशीष को बोल दिया कि: बेटा आज तुम अपने दोस्त के यहां चले जाओ, और वहीं खेलना।
भाभी ने भी उसे कहा: हां बेटा, आज तुम अपने दोस्तों के साथ खेलो।
आशीष ने हमारी बात मानी और वो खाना खा कर उसके दोस्तों के घर चला गया जो हमारे घर के पास ही उसका घर था। खाना खाकर जब हम उठे तो भाभी किचन में चली गई और बर्तन साफ़ करने लग गई। मैं भी उसके साथ वहीं चला गया और उसे पीछे से पकड़ कर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी और खींचा और उसकी पीठ पर चूमने लगा और वो भी मदहोश होने लगी।
फिर उसने पीछे घूम कर मेरे गले में हाथ डाला और मेरी आँखों में देख कर बोली: क्या इरादा है? आज अपने बेटे को भी उसके दोस्त के घर भेज दिया है। तुम्हारे इरादे ठीक तो नहीं लग रहे है मुझे (और वो हसने लगी)।
मैंने उसे अपनी और दबोचते हुए कहा: आज सच में मेरे इरादे नेक नहीं है मेरी जान। आज तुम्हें जी भर कर प्यार जो करना है। बोलो करने दोगी मुझे तुमसे प्यार?
भाभी: अभी तक तुम्हें मना किया है क्या जान जो अब रोकूंगी? मैं अब तुम्हारी हूं और जो तुम करोगे मैं भी तुम्हारा साथ दूंगी।
फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होठ रख दिए और हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लग गए। होंठ चूसते-चूसते मैंने उसके दूध को दबाने लगा और जोरों से उसके उसके निप्पल को मसलने लगा।
भाभी: सुनो यहां मत करो तुम, बेडरूम में चलो। मैं अभी आ रही हूं।
मैं उसकी बात सुनी और बेडरूम में चला गया कुछ टाइम बाद वो आई और मेरे गले में हाथ डाल कर मुझे फिर से चूमने लगी। वो अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसाने लगी और मैं उसकी जीभ को चूसने लगा। कभी वो मेरी जीभ चूसती तो कभी मैं उसकी जीभ चूसता। हम दोनों लगातार एक-दूसरे की जीभ के साथ खेल रहे थे।
मैंने उसके कपड़े उतारे और उसे ब्रा और चड्डी में कर दिया। उसका बदन बेडरूम की लाइट में बहुत चमक रहा था और मैं उसे चूमे जा रहा था। उसका जिस्म मुझे जोश दिला रहा था। मैं भाभी के जिस्म को चूमता और काटता रहता, जिससे वो चीख देती और मैं उसे चूमता रहता।
फिर मैंने उसकी ब्रा निकाली और उसके निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चूसने लगा। इससे भाभी को दर्द होने लगा, लेकिन वो कुछ बोल नहीं रही थी, बस मेरे काटने और चूसने का मजा ले रही थी, और मैं बीच-बीच में उसके दूध को दबा देता था जिससे वो अह्ह अह्ह्ह करती रहती थी।
फिर मैंने उसे बेड पर सुलाया और उसकी चड्डी को निकाल कर उसकी चूत को चाटने लगा। भाभी अपनी चूत को हमेशा साफ़ ही रखती है, और इतनी सुन्दर चूत है उनकी कि लंड देख कर ही खड़ा हो जाता है। मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं लगातार उसकी चूत में अपनी जीभ से उसे चोदा जा रहा था और वो मेरा सर उसकी चूत में दबाए जा रही थी, और अहह अह्ह्ह किए जा रही थी।
थोड़ी देर बाद मैं उठा और अपना अंडरवियर उतार कर उसके जिस्म से होकर उसके दूध के पास बैठ गया। फिर मेरा लंड उसके मुँह के पास लेकर कर दिया, और उसने बिना कुछ कहे मेरा लंड अपने मुँह उतार लिया। फिर उसे चूसने लगी और मैं ऊपर उसके मुँह में धक्के देने लगा और लंड उसके गले में उतारने लगा।
Madmast bhabhi ki jawani ka ras piya
उसके गले में लंड फंसा कर रखा। कुछ देर बाद उसका मुँह चोदने के बाद मैंने लंड निकाला और नीचे उतर कर उसके ऊपर लेट कर लंड उसकी चूत में लगा कर उसकी चुदाई चालू कर दी और उसे चोदने लगा।
इतना चोदने के बाद भी उसकी चूत टाइट ही लगती थी। मैं जोरों से चोदने लगा और वो अहह अह्ह्ह जान और तेज चोदो मुझे। बोले जा रही थी। आधे घंटे अलग-अलग पोजीशन में चोदने के बाद मैंने उसे कहा, “अब मैं तुम्हारी गांड मारूँगा।” तो वो देखने लगी। मैंने उसे पीछे घुमाया और थोड़ा सा तेल लेकर उसकी गांड के छेद पर लगाया और थोड़ा तेल मेरे लंड पर लगाया। फिर लंड को उसके गांड के छेद पे लगाया।
जैसे ही मैंने लंड उसकी गांड के छेद में लगाया, वो सिहर उठी। मैंने थोड़ा जोर से पुश किया और मेरा लंड गढ़ते हुए उसकी गांड के 2 इंच घुस गया। इससे भाभी तड़पने लगी और पीछे हाथ करके मुझे धकेलने लगी। लेकिन मैंने हाथ पकड़ लिए और कहा-
मैं: बस हो गया मेरी जान, थोड़ा सा और है, फिर दर्द नहीं होगा।
भाभी: जान दर्द हो रहा है, जलन हो रही है। प्लीज थोड़ा और तेल लेलो, जलन हो रही है। इतने दिनों बाद आज तुम ही डाल रहे हो पीछे। थोड़ा आराम से डालो ना।
भाभी की बात सुन कर मैंने थोड़ा और तेल लिया और लंड और गांड में डाल दिया। थोड़ा ऊंगली से उसकी गांड खोली। ऊंगली उसकी गांड में अन्दर डाल कर थोड़ी देर अन्दर-बाहर कर थोड़ा गांड को ढीला कर दिया। उसके बाद लंड उसकी गांड के छेद में लगाया और फिर से धक्का मारा।
इस बार 3 इंच अन्दर घुस गया था और भाभी चीखी: अहह जान, रुको रुको, दर्द हो रहा है, अह्ह्ह्ह। माँ, जान ऐसा मत करो। जलन हो रही है।
मैंने उसे थोड़ा सा समझाया और फिर से एक जोरों का धक्का मारा और पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया। इससे उसकी हालत ख़राब हो गई, और वो पीछे हाथ कर मेरा लंड पकड़ने लगी। लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए। फिर मैं उसे पीछे से चूमने लगा और धीरे-धीरे लंड को उसकी गांड में घुसाने लगा।
अब लंड थोडा फ्री होकर उसकी गांड में अन्दर-बाहर हो रहा था और उसकी जलन अब थोडा कम हो चुकी थी, और मैं थोड़ा जोरों से धक्के देने लगा। मैं उसकी गांड में अब जोरों के धक्के देने लगा और वो चीखे जा रही थी।
गांड भाभी की बहुत ही टाइट थी। लंड डालने के लिए बहुत ताकत लगानी पढ़ रही थी, और मैं फिर भी गांड में लंड धकेले जा रहा था। उसकी आवाजें आती रही, लेकिन में रुका नहीं। करीब आधे घंटे अलग-अलग पोजीशन में भाभी की गांड मारने के बाद मैंने लंड निकाला, तो उसकी गांड का छेद खुल गया था। इससे मेरे लंड के आकार का गांड का छेद बन गया था।
मेरे अब लंड का पानी निकलने वाला था। तो मैंने उसे कहा जल्दी से सीधी लेट जाये। उससे उठा नहीं जा रहा था, तो मैंने भाभी की मदद की और सीधा लिटा दिया। फिर मैंने उसके ऊपर आकर लंड उसकी चूत में पेल दिया और चूत में चोदने लगा। 5-6 धक्के देने के बाद मेरा लंड ने इतनी जोरों से पानी निकला, कि भाभी का जिस्म और साँसें फूलने लगी। मेरे भी धक्के बंद हुए और सारा पानी भाभी की चूत में खाली कर दिया। मैं वहीं साइड में भाभी के पास लेट गया और हम दोनों आराम करने लगे।
भाभी: जान तुमने आज मेरी जान ही निकाल दी है। तुमने आज सच-मुच ही मेरी जान लेली है। इतनी जलन हो रही है मुझे पीछे। मैंने कभी भी तुम्हारे भाई को मेरी गांड में डालने नहीं दिया। लेकिन आज जब तुमने डाला तो पता चला के बहुत दर्द और जलन होती है, चाहे आप तेल लगाओ या कुछ और। जब गांड में लंड जाता है तो दर्द जरुर होता है, और आज आपने तो मेरी गांड को फाड़ कर रख दिया है।
मैं: जान आज जाकर तुम असली औरत बनी हो। औरत जब ही बनती है जब उसकी गांड और चूत दोनों फट जाये और आज तुम्हारी चूत और गांड को फाड़ कर मैंने औरत बनाया है। अब जाकर तुम औरत बनी हो। मुझे तुमने बहुत मजा दिया है जान। मैं रोज तुम्हें ऐसे ही प्यार करता रहूँगा।
भाभी: जान रोज नहीं प्लीज 2-3 दिन छोड़ कर कर लेना। आज जो तुमने किया है उससे शायद ठीक होने में ही 3-4 दिन लगेंगे।
मैं: ठीक है जान, 2 दिन छोड़ कर तुम्हे मैं ऐसे प्यार करूँगा, और अब तो तुम माँ बनने के लिए भी तेयार हो।
1-2 महीनों तक हमारी चुदाई ऐसे ही चलती रही और एक दिन भाभी ने बताया कि वो प्रेग्नेंट हो गई थी। मैं और वो बहुत ही खुश हुए। रात को मैंने और भाभी ने केक से सेलिब्रेट किया। आशीष को हमने कुछ नहीं बताया। अभी जब वक्त आएगा तब उसको बताएँगे।
6 महीने में आशीष को हमने सब बताया और उसने कुछ कहा और हमने उसे इसे बताया कि उसके साथ खेलने के लिए हम गुड़िया लाने वाले थे। वो खुश हो गया। 9 महीने बाद, भाभी ने यानि जो अब मेरी बीवी बन चुकी थी, एक बच्ची को जन्म दिया, जो बिलकुल मेरी बीवी पर गई थी। दोनों ठीक है और अब भाभी मेरी बीवी है। तो हम दोनों भी खुश है।
कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद। यह कहानी का आखरी पार्ट था, इसीलिए थोड़ा लम्बा हो गया है। मुझे उम्मीद है आपको ये कहानी पसंद आई होगी। मुझे कमेंट में ज़रुर बताये आपको कैसी लगी ये कहानी। अभी के लिए चलता हूं, दोस्तों बने रहिये मेरे साथ।