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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 511 बार

Bhabhi Ki Film Dikha Kar Choda

Kunsinraj

30 Oct 2017 को प्रकाशित

Bhabhi Ki Film Dikha Kar Choda
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नमस्कार दोस्तों। जिस घटना के बारे में मैं लिख़ने जा रहा हूँ वो सिर्फ़ एक कहानी ही नही बल्कि मेरी जीवन की सच्ची घटना है। मै पहली बार कहनी लिख रहा हूँ अगर कोई गलती हो जाये तो अपनी सलाह दे।

अब कहनी की ओर चलते हैं।

मेरा नाम अमित है। मेरा क़द 5’8″ हैं , मेरी उम्र 25 वर्ष हैं।। मैं एक छोटे से शहर का रहने वाला हूं। अभी सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दे रहा हूँ। मेरे परिवार में हम 6 लोग हैं, मैं, माँ, पापा , मेरा बड़ा भाई- राजेेश , भाभी- पूजा औऱ उनकी 1 वर्ष की बच्ची हैं।

ये घटना मेरे औऱ मेरी भाभी के बीच का है। मेरे भाई की उम्र 28 है और भाभी की 26 है। भाई सरकारी नौकरी में है और भाभी घरेलू महिला हैं।भाभी का क़द 5’3″ है , उनका फिगर 36-30-36 है, वो हल्की सी सांवली त्वचा की है।

भाई की शादी दो साल पहले हुई थी। जब पहली बार मैंने भाभी को देखा था । उसी समय से मुझे अपनी भाभी (पूजा) से प्यार हो गया था। मैं रोज भाभी को सोच -सोच कर मूढ़ मरता था। किसी भी बहाने से उन्हें छुने की कोशिश करते रहता हूं मैं। कभी कभार मज़ाक़ मज़ाक़ में मैं उनके गाल पर हल्की सी चुम्बन कर लेता था।

वो भी कभी इन सब बातों का बुरा नही मानती थी। लेकिन मेरे पास इतनी हिम्मत नही थी कि मैं इस से आगे बढ़ता। वैसे भी घर मे माँ , पापा और भाई सब लोग रहते थे। मुझे कभी भाभी के साथ अकेले में समय व्यतीत करने का मौका ही नही मिला था।

फिर कुछ महीनों बाद मुझे पता चला भाभी गर्भवती है। मैं खुश और उदास दोनो था उस दिन। ऐसे ही देखते देखते दो साल व्यतीत हो गया पता ही नही चला। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

जब भी भाभी घर की सफाई करती है या बच्ची को दूध पिलाती हैं तो मै उनके स्तन को बड़े गौर से देखता हूँ। उन्हें भी पता था कि मैं देखता हूँ फिर भी वो कुछ नही बोलती थी। कभी- कभी उनकी ब्रा-पैंटी बाथरूम में मिल जाती थीं ।

पहले तो केवल मै ब्रा-पैंटी को सूंघ कर छोड़ देता था। पर अब उसमें मूठ मार के अपना स्पर्म गिरा देता था। भाभी तब भी इस बारे में कुछ बोलती नही थी लेकिन मुझे लगता था कि उन्हें सब पता है क्योंकि मज़ाक़ मज़ाक़ में वो बोल देती थी कि आजकल बहुत काम कर रहे हैं देवरजी आप… खाना अच्छे से खाया करो। लेकिन मेरी हिम्मत नही होती थीं उनसे इस बारे में बात करने की।

दस दिन पहले की बात है मेरे बुआ के सास का देहांत हो गया था। सब उनके घर जाने का प्लान बना रहे थे 2 दिन के लिए, लेकिन भाभी ने जाने से मना कर दिया , उनकी बच्ची को परेशानी होगी वहाँ ऐसा बताया। फिर भाई ने बोला अमित तू भी रुक जा। माँ भी कहने लगी तू रुक जा यही तो मैं रुक गया।

सब के जाने के बाद हमने रात का भोजन किया।और भाभी घर के काम निपटाने लगी और मैं बच्ची के साथ खेल रहा था। फिर भाभी आयी और हमारे पास ही बैठ गई। फिर वो बच्ची को सुलाने के लिए मेरे सामने ही उसे अपनी एक चूची निकाल कर दूध पिलाने लगी।

मैं भी उनकी चूची को लालची नज़र से देख रहा था , इतने में भाभी ने मुझसे पूछा क्या हुआ ? मैं घबरा गया फिर मामला संभालते हुए बोला , लगता है बच्ची सो गयी । भाभी ने देखा तो वो सही में सो गई थी। फिर वो उसे अपने बेड रूम में सुलाने चली गयी।

मैं वही बैठा अपने लैपटॉप पर एक हॉरर फिल्म पैरानॉर्मल एक्टिविटी ( हॉलीवुड फ़िल्म ) देखने लगा। कुछ देर बाद भाभी भी आ गयी बच्ची को सुला कर और साथ बैठकर फ़िल्म देखने लगी, फिर वो बोली बच्ची अकेली सो रही है उनके बेडरूम में वही चल कर फिल्म देखते हैं, मैंने वैसा ही किया। बेड के किनारे में मैं बीच मे भाभी और दूसरे किनारे पर बच्ची सो रही थी। हमने एक ही कंबल से अपने को ढका हुआ था। लैपटॉप भाभी के जांघों पर था।

फ़िल्म देखते समय जब भी भाभी को थोड़ी सी भी डर लगती तो वो मेरा हाथ पकड़ लेती थी। कुछ ही देर में हम दोनो आपस मे चिपक कर बैठ गए। भाभी की जांघ से मेरा जाँघ बिल्कुल चिपका हुआ था अब मेरा ध्यान फ़िल्म में नही भाभी पर था।

जब भी कोई सीन हल्की सी भी डरावनी आती तो मैं उनके जाँघ को पकड़ लेता था और कुछ देर बाद वो भी ऐसा ही करने लगी। मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था ।पैंट फाड़ के बाहर आने को तैयार था।

मैंने नाईट पैंट और टीशर्ट पहना हुआ था और भाभी ने साड़ी। अब मैं अपनी कोहनी से भाभी की एक चूची को कपड़े के ऊपर से ही हल्का हल्का दबाने लगा। भाभी का भी एक हाथ मेरे जाँघ पर था।

मुझे कुछ शरारत सूझी। मैने पैंट में से अपना खड़ा लंड निकाल लिया जो कि इस समय 6.5 का हो गया था। धीरे धीरे भाभी की चूची को अपने कोहनी से दबा भी रहा था। फिर मैं भाभी की तरफ हल्का सा घुम गया जिससे मेरा लंड भाभी के हाथ को जो मेरे जाँघ पर था उस को छूने लगा।

भाभी एकदम से चौंक गयीं और अपना हाथ पीछे खींच लिया। लेकिन बोली अभी भी कुछ नही। मैं भी डर गया था। अपनी कोहनी भी भाभी के चूची से हटा लिया । लेकिन बैठे अभी भी हम दोनों चिपक कर थे। मेरे मन मे चल रहा था कि आज तो चुत मिलेगी। हम ऐसे ही बैठ कर 5 मिनट तक फ़िल्म देखते रहे । मैं सोच रहा था कि फिर से एक बार कोशिश करता हूँ, शायद इस बार बात बन जाये।

तभी आचानक से भाभी ने बोला अमित मुझे नींद आ रही है , पूरी फिल्म कल देखेंगें। मुझे बहुत गुस्सा आया मन कर रहा था भाभी का गला दबा दू, लेकिन मैं क्या कर सकता था । मैंने बोला ठीक है भाभी और लैपटॉप लेकर अपने रूम में चला गया ।

अभी बस 5 मिनट ही हुए थे तभी बाहर से भाभी की आवाज़ आई। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

भाभी- अमित आप सो गए क्या?

मैं- नही भाभी , क्या हुआ?

भाभी- दरवाजा खोलो।

मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था। फिर भी मैंने दरवाजा खोला और भाभी से पूछा क्या हुआ? भाभी बोली कि उन्हें हॉरर फ़िल्म देखने के बाद डर लग रहा है अकेले सोने में ,आज तुम भी मेरे कमरे सो सकते हो क्या ?

ये सुन कर मैं ख़ुशी से पागल हो रहा था लेकिन अपनी खुशी को अंदर ही छुपाते हुए मैन बोला हां भाभी मुझे भी अकेले सोने में डर लग रहा था।फिर हम भाभी के कमरे में आगए। अभी फिर से भाभी बीच मे और एक किनारे मैं दूसरे किनारे बच्ची सो रही थी। कंबल भी एक ही था बड़ा सा। कुछ देर बात करने के बाद मुझे लगा भाभी सो गई।

लेकिन मेरी आँखों से नींद ग़ायब थी। एक बार मैंने धीरे से आवाज़ दिया लेकिन भाभी ने कुछ नही बोला।अब मेरे दिमाग मे फिर से गंदे ख्याल आने लगे।

कुछ देर बाद मै भाभी की तरफ़ हल्का हल्का खिसकने लगा और उनके बिल्कुल क़रीब पहुँच गया। ऐसा करके मै भाभी के शरीर से एक दम चिपक गया था ।

लेकिन अभी भी भाभी के शरीर मे कोई हलचल नही हुई। भाभी की पीठ बिल्कुल मेरे सीने से चिपकी हुई थी , उनकी कमर मेरे कमर से और मेरा लंड पूरे उफ़ान पर था। मेरा लंड भाभी के चूतड़ से पूरी तरह से सटा हुआ था।

फिर मैंने अपना एक हाथ भाभी के नंगे पेट पर धीरे से रखा। और अपनी उंगलियों से उनके नाभी के चारो तरफ धीरे धीरे घुमाने लगा। भाभी की साँसे हल्की हल्की तेज हो रही थी। इससे मेरी हिम्मत थोडी बड़ सी गयी लेकिन डर भी लग रहा था।

फिर भी मैं अपने हाथ को वही रखा और अपना चेहरा उनकी गर्दन के बिल्कुल नज़दीक कर दिया जिस से मेरे होंठ भाभी के गर्दन को हल्के हल्के छूने लगे।

धीरे -धीरे मैन अपना हाथ नाभि से हटा कर भाभी की चूची की तरफ करने लगा। हल्के से मैं उनकी दाहिनीं चूची को छुआ। भाभी की साँसे अब बहुत तेज हो गई थी । जिस से मुझे पता चल गया कि भाभी जाग रही हैं और मज़े भी ले रही हैं।

अब मैं अपने होठों से उनकी गर्दन को चूमने लगा और एक हाथ से उनकी चूची को भी मज़े से दबाने लगा। भाभी अब धीरे धीरे आवाज़े निकाल रही थी । अब मैं उनकी ब्लाउज़ उतारने लगा उन्होंने इसका ज़रा सा भी विरोध नही किया। भाभी ने अंदर ब्रा नही पहना था। धीरे धीरे मै उनकी नंगी चूचियो को मसल रहा था और पीछे से उनहे चुम रहा था।

भाभी के कान में मैं धीरे से बोला – मज़ा आ रहा है। उन्होंने बोला कुछ नही लेकिन तुरन्त मेरी तरफ़ करवट लिया और मेरे होंठ चूसने लगी। मैं तो एकदम से पागल हो गया , मुझे विश्वास ही नही हो रहा था। फिर मैं भी उनका साथ देने लगा और उनके होठों के रस कम से कम दस मिनट तक चूसा। फिर उनकी गर्दन को मैने चूमा। पूरे समय भाभी के मुँह से मादक आवाज़े निकलती रही।

एक एक कर के उनकी चूचियो को काभी देर तक मैंने चूसा फिर नाभि । अब मैने अपना टीशर्ट और पैंट उतार दिया। मेरा लंड अब बिल्कुल आज़ाद था। । मैं भाभी की साड़ी और पेटिकोट भी उतारने लगा , वो भी मेरा मदद कर रही थी। मै उठा और नाईट बल्ब जला दिया।

अब हम दोनो देवर भाभी बिल्कुल नंगे थे। भाभी बहुत सुंदर और कामुक दिख रही थी , उनके चुत पर थोडे बाल भी थे। भाभी मेरे खड़े लंड को बहुत प्यार से निहार रही थी , हालांकि वो थोड़ा शरमा भी रही थी।

मैं उनका एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया, वो धीरे धीरे अपना हाथ आगे पीछे करने लगी। मै भी उनके होंठ चूसने लगा और एक हाथ से भाभी के चुत सहला रहा था। मैंने भाभी को बोला मेरा लंड चूसने को लेकिन उन्होंने माना कर दिया बोला उन्हें नही पसंद चूसना। मैंने भी ज़्यादा ज़ोर नही डाला।

अब मैं उनके जांघो के बीच आ गया था। एक उंगली भाभी की चूत में पहले मैंने डाला ,चूत बहुत गीली थी । कुछ देर बाद मैं उनकी चुत को चाटने लगा। भाभी मेरे बालो को पकड़ के दबा रही थी मुझे। भाभी पूरी जोश में आ गयी।

अब लंड को चुत में डालने को बोल रही थी। अब मैं भाभी के ऊपर था ,और लंड को उनके चुत पर धीरे धीरे रगड़ता रहा। अब मुझसे भी बर्दाश्त नही हो रहा था ।

मैं लंड का अगला भाग धीरे से चुत में घुसा दिया। भाभी की तो आह निकल गयी। फिर मैंने एक करारा झटका मारा जिससे आधा लंड तो चुत में घुस गया लेकिन भाभी एक चिख भी निकल गयी।

फिर एक और ज़ोरदार झटका और पूरा लंड चूत के अंदर , हालांकि भाभी की चिख इस बार और तेज थी। फिर धीरे धीरे मैने चुदाई शुरू कर दी। भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। कभी मै उनके होंठ चूसता तो कभी चूची दबाता।

ऐसे ही हमारी चुदाई क़रीब 20 मिनट चली होगी कि भाभी का शरीर अकड़ने लगा और वो मुझे बहुत कस के रखा था। मैं समझ गया क्या हो रहा है और मैने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी।

भाभी अब थोडी ढ़ीली हो गयी थी तभी मेरा लंड अकड़ने लगा तो भाभी ने मुझे फिर से कस के पकड लिया और मैं उनकी चुत में ही झड़ने लगा। मैने अपना पूरा वीर्य भाभी की चूत में ही छोड़ दिया।

फिर हमने कुछ देर तक एक दूसरे को चूमा । फिर मैंने भाभी को अपने सीने से लगा कर नंगा ही लेट गया।फिर कब नींद आ गयी मुझे पता ही न चला।

ये कहानी पढ़ने के लिए आप सब का धन्यवाद।

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