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भाभी की खुल गई भैंस

चक्रेश यादव

31 Mar 2018 को प्रकाशित

भाभी की खुल गई भैंस
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Bhabhi ki Khul gai Bhainsअगस्त का महीना था, मैं खाना खाकर दरवाजे चारपाई पर मच्छरदानी लगाकर लेटा था क्योंकि गाँव में बिजली खराब थी तो पंखा तो चल नहीं सकता था इसलिए बाहर ही लेटा था।

थोड़ी देर में पता चला कि किसी की भैंस खुल गई है।

तब तक गाँव की भाभी तेज चाल में मेरे दरवाजे आईं और बोली- चक्रेश भैया, मेरी भैंस नहीं मिल रही है पता नहीं कहाँ चली गई, तुम चलकर उसे ढूंढवा दो।

‘पापा की चारपाई भी पास में ही थी, उन्होंने भी कहा- जा देख ले जाकर!

मैंने सोचा अब तो जाना ही पड़ेगा।

मैंने लाठी और बत्ती ली और कहा- चलो भाभी, देखते हैं भैंस कहाँ गई?

मैंने भाभी के साथ आस पास के कई खेतों में टार्च लगाकर देखा लेकिन भैंस का कहीं पता न चल सका।

मैंने कहा- भाभी, चलो थोड़ा आगे मेरे खेतों तक चलकर देखते हैं।

‘चलो!’ भाभी भी तैयार थी।गाँव से करीब एक किलोमीटर दूर मेरा खेत पड़ता है, हम वहाँ तक आ गए।

मैंने खेत में टार्च जलाकर देखा तो एक काला सा जानवर दिखाई पड़ा।

आगे बढ़कर देखा तो वो भाभी की भैंस ही थी।

मैं खेत में घुसा और भैंस की रस्सी पकड़कर उसे खेत से बाहर निकालकर एक पेड़ से बाँध प्रिया।

भाभी बोली- अरे! इसे यहाँ क्यों बाँध रहे हो घर ले चलो न?

मैं बोला- हाँ, अब मिल गई है तो घर भी चली जाएगी! इतनी भी जल्दी क्या है? देखो, खेत में पानी था, मेरा लोवर भीग गया है।

भाभी- अरे, तो घर चलकर कपड़े बदलो न! यहाँ क्यों रुके हो?

मैं बोला- देखो भाभी… मैंने इतनी मेहनत करके आपकी भैंस खोजी है! पहले उसकी मजूरी दे दो, तब घर चलेंगे।

भाभी मुस्कुराई और बोली- ठीक है, जितनी चाहे उतनी ले लेना मजूरी… लेकिन पहले घर तो चलो।

मैंने कहा- देखो भाभी, जितनी वाली बात तो ठीक नहीं है, मुझे तो नौ नगद ही ठीक लगते हैं, अभी देना हो तो बोलो?

इतना कहकर मैंने लोवर निकाला और उसे निचोड़ने लगा।

भाभी कुछ नहीं बोली, बस नीचे सर झुकाकर खड़ी हो गई।

मैंने धीरे से भाभी के कंधे पर हाथ रखकर कहा- क्या हुआ?

भाभी कुछ बोली, नहीं सिर्फ मुझे देखकर मुस्कुराने लगी।

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इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई, मैं अपना एक हाथ भाभी के ब्लाउज में डालकर उनकी चूची मसलने लगा।

भाभी के गालों पर मैं चुम्बन कर रहा था, भाभी भी उत्तेजित होकर मुझे चूमने लगी, मैं उनके होठों को चूसने लगा।

अब मैं भाभी के ब्लाउज के सारे बटन खोल कर उनके मम्मे चूसने लगा, एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी के अंदर डालकर चूत को सहलाने लगा।फिर धीरे से एक उँगली मैंने चूत में डाल दी।

भैया के बाहर होने की वजह से चूत काफी दिनों से चुदी न होने के कारण काफी टाइट थी।

भाभी के मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थी।

मैंने अपने लंड को कच्छे से बाहर निकाला और भाभी के हाथों में दे प्रिया।वो उसे सहलाने लगी।कुछ देर में भाभी का शरीर ऐंठने लगा।मैं चूत में उँगली जोर से अंदर बाहर करने लगा।

भाभी ‘हाऽऽय रेऽऽ’ की आवाज के साथ मुझसे लिपट गई और उनकी चूत ने ढेर सारा पानी उगल प्रिया।

मैंने भाभी को नीचे बैठा प्रिया और लंड को उनके मुँह के पास ले गया।वो मेरा इशारा समझ गई।

पहले तो उन्होंने लंड पर खूब चूमा चाटी की, फिर धीरे से लंड को मुँह में लेने लगी।

मैंने भाभी का सर पकड़ लिया और उनके मुँह की चुदाई करने लगा।

5 मिनट बाद मुझे लगा कि ऐसे ही चला तो मेरा पानी उनके मुँह में ही निकल जाएगा अत: मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और भाभी को खड़ा किया।

पास में ही एक बबूल का पेड़ था, मैंने इशारा किया तो भाभी वो पेड़ पकड़कर घोड़ी बन गई।

मैंने अपना कच्छा निकाल प्रिया और भाभी की साड़ी को उलट प्रिया, फिर धीरे से लंड को पीछे से भाभी की चूत में डाला।

भाभी के मुँह से एक लंबी ‘आऽऽह’ निकली और चूत चिकनी होने की वजह से पूरा लंड अंदर चला गया।फिर मैंने चुदाई शुरु की।

ज्यों-ज्यों मेरी रफ्तार बढ़ रही थी त्यों-त्यों भाभी की सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थी।

ऐसी हजारों कहानियाँ हैं अंतर्वासना डाट कॉम पर।

करीब 10-12 मिनट की धक्कमपेल चुदाई के बाद मेरा व भाभी का लगभग एक साथ पानी निकल गया।

मैंने लंड को बाहर निकाला और भाभी को गले लगा लिया।

भाभी को आज काफी दिनो बाद लंड का मजा मिला था, वो बहुत खुश थी।उन्होंने अपनी साड़ी से मेरा लंड पोंछा, मैंने कच्छा पहना और भाभी व उनकी भैंस को उनके घर तक पहुँचाया।

उस रात के बाद हमारा खेल भाभी के साथ अक्सर चलता रहता है।कहानी कैसी लगी? जरुर बताएँ। आपकी मेल का इंतजार है!

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

कूल जोनी

2 months ago

भाभी के साथ रोमांस हमेशा से ही बेस्ट होता है। बहुत ही हॉट स्टोरी!

किरण कुमार

2 months ago

देवर भाभी की ये कहानी सच में कमाल की थी। लेखक ने बहुत बारीकी से लिखा है।

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