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भाभी की चुदाई • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 518 बार

भाभी की प्यासी भोंसी की चुदाई करनी पड़ी

गोविंदा इन्दौरी

08 Aug 2021 को प्रकाशित

भाभी की प्यासी भोंसी की चुदाई करनी पड़ी
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नमस्ते दोस्तो, आपके दोस्त गोविन्दा का आपको प्यार भरा नमस्कार!मेरी पिछली प्रकाशित कहानीचुत ना मिली तो गांडू के साथ सुहागरातको आपका सबका बहुत अच्छा रिस्पांस मिला।

उस कहानी में मैंने बताया था कि मैंने पहली बार सेक्स 2014 में एक भाभी के साथ किया था, जिसकी कहानी मैं अब बताने जा रहा हूं।उस दौरान मैं इंजीनियरिंग का फर्स्ट सेमेस्टर का स्टूडेंट था तथा अपनी मौसी के घर इंदौर में ही रहता था।

तो बात कुछ ऐसी है कि मेरी मौसी के घर के पास में एक भाभी किरायेदार थी। उनका नाम वंदना था, वह 37 साल की गदराये हुए बदन वाली मोटी गांड की औरत थी। वंदना भाभी अपने पति और एक लड़की स्वीटी के साथ रहती थी। दिखने में कुछ खास नहीं थी मगर उसकी चुची देखकर हर किसी का चूसने का मन हो जाये।

अंकल वन विभाग में होने से अक्सर कई दिनों तक घर पर नहीं रहते थे। वंदना भाभी को जब भी बाजार का कुछ काम होता था तो वह मुझे बोलती थी और मेरे साथ बाईक पर जाती थी। अक्सर वंदना भाभी बाईक पर पीछे से मेरी कमर को टाईट पकड़ती थी या सहलाती थी लेकिन मैंने कभी यह सोचा नहीं था कि उनके दिल में कुछ और ही चल रहा है।

एक दिन मुझे उन्होंने घर पर बुलाया और बोला- बेटा गोविन्दा, स्टूल पर चढ़ कर वह बैग निकाल दो क्यूंकि स्वीटी को स्कूल ट्रिप पर उदयपुर वगैरह जाना है तो पैकिंग करनी है।

मैं उस समय पतले कपड़े वाले अंडरवीयर में था जिसमें से मेरा लटका हुआ लंड दिखता था। स्टूल पर चढ़कर बैग निकालते वक्त वंदना भाभी ने मेरे सोये हुए लंड को छूकर हल्का सा दबा प्रिया और बोली- बेटा सॉरी, गलती से हाथ वहाँ चला गया।फिर मैं पैकिंग में उनकी मदद करने लगा।

काम करते करते वंदना भाभी मुझसे बोली- तुम्हारी गर्लफ्रेंड है? और तुमने कितनी बार सेक्स किया है?मैं शर्म के मारे बोला- ऐसा कुछ नहीं है, पर आप ये सब क्या बोल रही हो?उन्होंने आगे बढ़कर मेरे होंठों पर हाथ रखा और बोली- तुम नहीं जानते गोविन्दा कि मैं कितनी अकेली हूँ। तुम्हारे अंकल घर पर कई दिन तक नहीं रहते क्यूंकि उन्होंने एक रखैल रख ली है जिसके साथ वो हमेशा उसके घर में ही पड़े रहते हैं और मुझे यहाँ अकेली विधवा सी छोड़ रखा है। तुम अपनी भाभी के दर्द को समझ सकते हो… मेरी कुछ मदद करो।

मैं कुछ समझ पाता कि उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और होंठों को चूसने लगी। जमीन पर ही उन्होंने मुझे लिटाया और मेरे मुंह में खुद का मुंह डालकर चुम्बन का आनन्द लेने लगी।यह मेरा पहला सेक्स था और मेरा लंड ठोस होकर खड़ा हो गया था।

चुम्बन करते हुए वंदना भाभी ने मेरे अंडरवीयर को नीचे सरकाया और फिर चड्डी के नीचे से मेरे लंड को निकालकर मसलने लगी।मैं तड़फने लगा और उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज करने लगा।

उन्होंने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया मगर मैं खुद पर कोई नियंत्रण नहीं कर सका और आधे मिनट में ही लंड से माल उनके मुंह में छोड़ प्रिया।वो मेरे लंड का माल पी गई और मैंने अंडरवीयर ऊपर कर लंड अंदर कर लिया।मैंने वंदना भाभी को सॉरी बोला और वहाँ से भाग गया।

उस रात मैं बिल्कुल भी नहीं सो पाया और अगले दिन तक वंदना भाभी से नजर बचाकर कॉलेज जाने लगा।

एक दिन वंदना भाभी ने मुझे चौराहे की आटा चक्की के सामने पकड़ लिया और बोली- गोविन्दा, मुझे तुमसे कुछ काम है इसलिए शाम को घर जरूर आना!मैं शाम को वंदना भाभी के घर गया और भाभी को आवाज लगाई।

घर पर सिर्फ वंदना भाभी थी, स्वीटी स्कूल ट्रिप पर गई हुई थी। भाभी ने मुझे सोफे पर बिठाया और मैं बार बार भाभी को सॉरी बोलने लगा कि उस दिन पता नहीं क्या हो गया कि मैं कभी कुछ नहीं किया।भाभी ने मेरी घबराहट देखी और बोली- अरे गोविन्दा, छोड़ो और मेरी बात सुनो!

उन्होंने मुझे ठंडा पानी लाकर प्रिया और बोली- तुम्हारी इच्छा हो तो ही मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूंगी। पहली बार में ये सब हो जाता है, तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हें असली मर्द बना दूंगी।मैं वंदना भाभी को बोला- ये सब गलत तो नहीं है?

भाभी मुझे हाथ पकड़कर रूम में ले गई, बोली- रूको, मैं दरवाजा बंद कर आती हूँ और फिर तुम्हें सही गलत बताती हूँ।

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वापस आकर उन्होंने बिस्तर पर मुझे लेटाकर किस करने लगी औैर गले के आसपास चूमने लगी। उनके इशारे को समझकर मैं भी यही करने लगा।हम दोनों जीभ से चाटकर एक दूसरे को गीला कर प्रिया।

फिर उन्होंने अपना ब्लाउज और ब्रा निकाल कर मेरा मुंह उनकी चुची के निप्पल पर रख प्रिया। मैं छोटे बच्चे की तरह उनके निप्पल और चुची को चूसने व काटने लगा जिससे मुझे और वंदना भाभी दोनों को मजा आ रहा था।

फिर उन्होंने मेरी जीन्स खोलकर लंड को बाहर निकाला और मेरे लंड को मुंह में अंदर बाहर करने लगी। लंड को चूसते भी और पूरा लंड मुंह में भर लेती, जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था।

वंदना भाभी ने अपना पेटीकोट और पेंटी उतार कर फेंक दी, मुझसे भी कपड़े उतारने को कहा और कपड़े उतारने पूरे बदन को जीभ से चाटकर गीला करने लगी।

मैं भी उनके पूरे बदन को चाट रहा था और वह बीच बीच में मुझे टाईट पकड़ कर दबा देती जिससे मुझमें करंट सा फैलने लगता।

अब उन्होंने मुझे 69 पोजीशन के बारे में बताया और बोली कि वो मेरा लंड चूस रही हैं तो मैं उनकी चुत चाटूँ।

मैं उनकी चुत जो कि भोसड़ा हो गई थी उसको किस कर चाटने लगा और थूक से गीला करने लगा। मुझे चाटने में उतना मजा नहीं आ रहा था लेकिन मेरे लंड को वंदना भाभी चूस रही थी तो मैं मगन होकर उनकी भोंसी को चाट रहा था।उनकी भोंसी के रस का स्वाद अजीब सा फीका फीका था।

कुछ देर बाद उन्होंने बिस्तर के नीचे से कंडोम निकाला और मेरे लंड पर चढ़ा प्रिया। वो पीठ के बल पैरों को चौड़ा कर लेट गई और मुझे खुद पर लिटा कर मेरे लंड को पकड़ कर भोंसी में घुसा प्रिया।

मैं धक्के मारने लगा और वो मेरे बदन पर हाथ फेरकर मुझे बोलती गई कि मेरे गोविन्दा फाड़ दे अपनी रांड के भोसड़े को, बुझा दे अपनी भाभी की प्यास को… कर दे अपनी भाभी की चुदाई!

मुझे दर्द हो रहा था लेकिन मैं पागल सा बस लंड को धक्के लगाये जा रहा था। करीब तीन मिनट के बाद ही मेरे लंड ने माल छोड़ प्रिया और मैं उनके सीने पर लिपट कर सो गया।

वंदना भाभी मेरे बालों में उंगलियाँ फिरा कर बोली- गोविन्दा तुम बहुत अच्छे हो। तुम हमेशा ऐसे ही मेरा साथ देना और मैं तुम्हें कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगी।

बाथरूम में भी हम दोनों ने सेक्स किया था जिसकी कहानी में अगली बार बहुत जल्द लिखूंगा। उस दिन से मैंने कई बार वंदना भाभी की चुदाई की और वो मेरा पूरा खर्चा उठाती थी।

तो दोस्तो, यह था मेरा पहला सेक्स, जिस पर आप अपने विचार मेरे जीमेल के अकाउंट पर जरूर बताना।support@mohakkisse.com

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