भाभी की चुदाई

भावना का यौन सफ़र-3

लेखक: रवीश सिंह दिनांक: 03-07-2024 पठन समय: 5 मिनट

Bhavana Ka Yaun Safar-3

दोस्तो,भावना अमरीका से आई थी, उसने जो कहानी बताई वो ही बयां कर रहा हूँ।जैसा मैंने कहा कि यह सच्ची घटना पर आधारित है, कुछ प्रसंगों को विस्तार प्रिया है कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए।

द्वितीय भाग से आगे…

भावना अपने पति विशाल से फ़ोन पर बात करने के बाद चूत में उंगली कर रही थी कि उसे अपने देवर मनोज के सिसकने की आवाज़ आई तो देवर को संभालने आई। भावना ने अपने देवर का चेहरा वक्ष में छिपा लिया।

मनोज के निरंतर बहते अश्रु से भावना का गाउन गीला हो गया और उसके मस्त मम्मे चिपक कर दिखने लगे।

भावना ने एक पैर उठा कर पलंग पर रख मनोज को और नज़दीक खींच लिया, उसकी मांसल जांघ के दर्शन होने लगे और गीली चूत के रस की महक ने मनोज की नासिकाओं में भर गई।

मनोज ने अपनी कहानी भावना को बताई।

वो समझ गई कि उसे मानसिक और शारीरिक दोनों तौर पे संभालना पड़ेगा।

भावना ने उसे अलग किया और ललाट पे चुम्बन प्रिया।

मनोज ने खुद को संभाला और फिर मुँह भावना के दर्शनीय चूचों में छिपा उन्हें चूमने लगा।

भावना ने उसे नहीं रोका, कहीं उसे भी अच्छा लग रहा था। भावना की जांघें कामरस से गीली थी।मनोज का हाथ अनायास ही उन पे चला गया और सहलाने लगा।

मनोज की पीठ पर वात्सल्य से फिरता भावना का हाथ वासना से फ़िरने लगा, मनोज का सुसुप्त लंड जागृत होने लगा।

मनोज का हाथ भावना की चूत को छू गया, पति के विरह से तड़पती चूत को मर्द के स्पर्श ने भड़का प्रिया, भावना अब खुद को रोक नही पा रही थी।

भावना ने मनोज के बाल पकड़ चेहरा ऊपर किया और होंटों पे होंठ धर चुम्बन दे प्रिया।

भावना के मीठे थूक के स्वाद ने मनोज को और उत्तेजित कर प्रिया, उसने दो उंगलियाँ डाल चूत की मालिश शुरू कर दी।

चूत ने रस धार छोड़ दी।

भावना ने उसे खड़ा किया और उसकी पेंट अंडरवियर सहित निकाल दी, खुद का गाउन भी।

दो नग्न जलते बदन एक दूसरे में समाहित हो बिस्तर पे गिर गए, एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे बरसों के प्यासे को पानी का कुआँ मिला हो।

मनोज का लौड़ा उसके भाई विशाल के लौड़े से बड़ा और मोटा था, भावना को शहजाद के लंड की याद आ गई।

उस समय तो चूत की सेवा नहीं हुई थी पर आज ऐसा नहीं होने वाला था, दोनों पूरे नंगे बिस्तर पर लोट लोट कर एक दूसरे को चूम रहे थे, चाट रहे थे, सहला रहे थे।

मनोज का लंड पूरा खड़ा था, वो दो पल रुका फिर भावना को अपने ऊपर उल्टा लिटा उसकी चूत चाटने और चूसने लगा, भावना भी मनोज के लंड को चूसने चाटने लगी।

फिर भावना नीचे आई, मनोज ने उसकी टांगें उठा के कंधों पे रखी और लौड़े को फूली चूत पे रगड़ने लगा।

मनोज रसिया था औरत को उत्तेजित करना आता था।

भावना का कमनीय बदन उत्तेजना से ऐंठ रहा था, उससे और सहा नहीं जा रहा था, उसने मनोज का लंड पकड़, चूतड़ उठा, चूत का द्वार दिखाया।

मनोज अपनी भाभी को नाराज़ भला कैसे करता? उसका लंड नई चूत की गहराई में समाने लगा।

भावना की चूत इतने मोटे लंड को थोड़े घर्षण के साथ स्वीकारने लगी।

एक बार पूरा लौड़ा अंदर हुआ मनोज ने गति बढ़ा दी।

भावना पूरी तन्मयता से उचक उचक कर सम्भोग की सहभागी बनी।

मनोज ने भावना को ऊपर आने का न्यौता प्रिया, स्वीकारते हुए भावना धीरे से खड़े लंड को चूत में डालते हुए बैठ गई।

ऊपर से लेने पर लंड और मोटा लगा, भावना को लगा अब चूत फट जाएगी। थोड़ी देर भावना लंड घुसाये बैठी रही, मनोज को भी कोई जल्दी नहीं थी।

फिर भावना ऊपर नीचे होने लगी, उसके मम्मे भी उसी तरंग में उचकने लगे।

मनोज से चुदी स्मिता और शबनम के दूदू इतने बड़े नहीं थे। भावना के बड़े चूचे उछलते देख मनोज के लौड़े में नई ऊर्जा आ गई।

मनोज भावना को अलग अलग पोसिशन्स में चोदता रहा।

भावना के पेट पर स्खलित हुआ, फिर दोनों बाँहों में बाहें डाल सो गए।

सुबह विशाल के फ़ोन ने भावना की नींद उड़ाई।

रात के सम्भोग की थकान पति के फोन से ग्लानि में बदलने लगी।

भावना बात खत्म कर सीधे बाथरूम में शावर के नीचे रात की बात को भुलाने के लिए खड़ी हो गई पर वो रात आख़री नहीं थी, बस वो तो शुरुआत थी।

कहानी जारी है।अपनी प्रतिक्रिया मेल पर दें।

भावना का यौन सफ़र-1

भावना का यौन सफ़र-2