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Hindi Sex Story पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,072 बार

बीपीएल राशनकार्ड बनवाने की फीस

भाई 420

06 Feb 2016 को प्रकाशित

बीपीएल राशनकार्ड बनवाने की फीस
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हैलो दोस्तो, मेरा नाम विजय है. मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ. आज मैं आपके सामने अपनी अगली कहानी पेश कर रहा हूँ. ये कहानी किसी दूसरे लेखक/पाठक ने मुझे भेजी है. जिसने मुझे ये कहानी भेजी है, वो एक आंटी है, उसने अपना नाम भी बताया है, लेकिन मैंने इधर उसका नाम बदल प्रिया है.आंटी का नाम सुजाता है, उसकी उम्र 38 साल की है और उसका फिगर साईज 34-28-38 का है. सुजाता दिखने में भी बहुत सुंदर है और गांड बहुत मोटी है. आंटी का एक दोस्त था. उसका नाम विजय था, ये नाम भी बदल कर अपना नाम दे प्रिया है. विजय की उम्र 47 साल की थी. विजय की दोस्ती सुरेश नाम के एक बहुत बड़े नेता से थी. सुरेश की उम्र पचास साल की थी.

विजय को जब जब टाइम मिलता था, तब तब वो सुजाता की चुदाई करने आ जाता था, लेकिन आज तक सुजाता ने और किसी दूसरे का लंड नहीं लिया था.

सुजाता एक दिन विजय से कहने लगी- आप अपने दोस्त सुरेश से मिले हैं?विजय ने बोल प्रिया- हां मिला था. क्या तुमको उससे मिलना है?सुजाता- मुझे अपना बीपीएल राशनकार्ड बनवाना था.विजय ने आँख दबाते हुए कहा- तुम जानती हो, बीपीएल राशनकार्ड कैसे बनता है?सुजाता ने झुक कर अपनी चूचियों को हिलाया और कहा- हां, मुझे सब मालूम है.

विजय ने उसकी इस अदा पर एकदम से झपटते हुए सुजाता को अपनी बांहों में भर लिया और कहा- वाह मेरी रन्नो, आज तो पूरे मूड में दिख रही हो.. चक्कर क्या है.सुजाता ने भी विजय को चूमते हुए कहा- आजकल यही जमाना है, गिव एंड टेक … मेरे पास जो है वही तो दे सकती हूँ. वैसे मुझे नेतागिरी के चक्कर में पड़ने का कोई शौक नहीं है. यदि तुम बिना गिव एंड टेक के मेरा काम करवा दो तो ये मेरे लिए और भी अच्छा होगा.विजय ने कहा- नहीं रे … सुरेश भी तेरे साथ मस्ती करने की बात मुझसे एक दो बार कह चुका है, पर मैंने ‘तेरा मूड नहीं है.’ बोल कर उसे टरका प्रिया है.

इतनी देर में सुजाता एकदम नंगी होकर बिस्तर पर जंग छेड़ने को तैयार हो गई उसने अपनी चूत खोलते हुए विजय से कहा- चल डाल दे और उसको भी कह देना के वो भी अपने मन की कर ले. साथ ही मेरा बीपीएल राशनकार्ड भी बनवा दे.

विजय ने लंड पेला और धकापेल चुदाई चालू कर दी. दस मिनट बाद दोनों संतुष्ट होकर अलग हो गए. विजय सुजाता के घर से चला गया.

इसके बाद विजय ने उसी दिन देर शाम को अपने दोस्त को फोन किया और बोला- सुजाता को तुमसे मिलना है, उसे तुमसे अपना राशनकार्ड बनवाना है.सुरेश ने हंस कर बोला- हां कल मिलने का रख ले ना, अपने गेस्टहाउस में मिल लेते हैं.उसने ये कह कर फोन काट प्रिया.

दूसरे दिन शाम को सुजाता और विजय गेस्ट हाउस में सुरेश से मिलने चले गए. वहां पर सुरेश अपने रूम में लेटा हुआ था. सुजाता और विजय अन्दर गए. वे सब वहां मिलकर बात करने लगे. सुरेश ने दारू की बोतल उठाई और सुजाता से पैग बनाने को बोला.सुजाता ने दो गिलास भरे तो सुरेश ने कहा- अरे, विजय के लिए भी बना न!सुजाता- ये आपके और विजय जी के लिए ही तो है.

सुरेश ने सिगरेट सुलगाते हुए एक ठहाका लगाया और बोला- और तू क्या सूखी सूखी होली खेलेगी? चल एक और बना.. और हां पहला वाला तगड़ा बनाना.सुजाता पीती तो थी, पर वो सकुचा रही थी, उसने कहा- मैं पीने के बाद घर कैसे जा पाऊंगी?सुरेश ने सुजाता को अपनी गोद में खींचा- अले मेली छोना को घल भी जाना है.. आज की रात तो राशनकार्ड पूरा बनेगा. फिर सुबह जाने की सोचना.सुजाता ने कुछ नहीं कहा और वो जाम बनाने लगी.

कुछ देर दारु का दौर चला तो विजय सुजाता के चरित्र के बारे में बोलने लगा कि सुजाता एक अच्छे चरित्र की महिला है, वो तो सिर्फ आपके व्यवहार से खुश हो गई थी, इसलिए उसने आपसे मिलना स्वीकार कर लिया है, वर्ना राशनकार्ड बनवाना तो आजकल बांए हाथ का काम है.सुरेश खुश हो गया.ये सब बात करते-करते विजय बोलने लगा- मैं बाहर से आता हूँ. आप दोनों एन्जॉय कीजिएगा.विजय ये कह कर बाहर चला गया.

सुरेश और सुजाता एक दूसरे से चिपक कर दारू पीते हुए बात करने लगे. सुरेश ने सुजाता को कहा- तुम बहुत हॉट लगती हो.सुजाता बोलने लगी- तुमको किसने बोला है?सुरेश बोलने लगा- मेरे को सब मालूम है विजय का और तुम्हारा क्या लफड़ा रहता है.यह कहते हुए सुरेश ने सुजाता का दूध पकड़ लिया.सुजाता बोलने लगी- सुरेश.. प्लीज़ धीरे से करो प्लीज़.

इतने में विजय अन्दर आ गया था.सुजाता विजय को बोलने लगी- सुरेश जी को तुमने क्या बोला है मेरे बारे में?विजय बोलने लगा- दोस्ती की बात दोस्तों ही को तो बोलते हैं यार.सुरेश जी बोलने लगे- दोस्ती में तो सभी खुला होता है.विजय बोलने लगा- मैंने सुरेश को तुम्हारे बारे में सब बोल प्रिया है.

ये सुनते ही सुरेश जी ने सुजाता का हाथ पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा. सुजाता झटके से सुरेश की गोद में आ गिरी, सुरेश झट से सुजाता के मम्मों को दबाने लगा.सुजाता ‘नहीं नहीं’ बोलने लगी. मगर वो छूटने की कोशिश भी नहीं कर रही थी. विजय यह सब देख रहा था.

सुरेश अब बिल्कुल आटा गूंथने के जैसे सुजाता के मम्मों को मसलने लगा. अब सुजाता को मजा आ रहा था. उसने खुद को ढीला छोड़ प्रिया और अपने मम्मों को मसलवाने का मजा लेने लगी. दरअसल अब तक वो दारू के नशे में मस्त हो चुकी थी.

तभी सुरेश ने सुजाता की ब्रा को खोल प्रिया और उसके एक चूचे को अपने मुँह में भरके चूसने लगा. अब तो सुजाता भी पागल होने लगी थी और अपने हाथ से अपना दूध पकड़ कर सुरेश को पिलाते हुए कहने लगी- और चूसो प्लीज.वो मानो पागल हो गयी थी और मुँह से ‘आय यस स्श्ह इह्ह उऔऔ इह्ह उऔ ऊया औ उहिही उहू..’ की आवाज निकाल रही थी. वो मस्ती में अपनी गांड उछालने लगी थी.

विजय सामने बैठ कर ये सब देख कर मजा ले रहा था.

सुरेश ने अब धीरे-धीरे अपनी स्पीड तेज की और सुजाता के मुँह से भी उतनी ही तेजी से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा.

फिर सुरेश ने सुजाता की साड़ी उतार दी. अभी सिर्फ सुजाता पेटीकोट में रह गई थी. अब विजय भी सुजाता के पास उसके बाजू में आ गया था.तभी विजय गुस्से में बोला- साली रंडी हरामजादी, चल अब यूँ ही घुटनों के बल बैठकर कुतिया जैसे चलकर मेरे पास आती है.

जब सुजाता घुटनों पर बैठी, तो बिना ब्रा के उसके दोनों चूचे बाहर को लटक कर मस्ती से झूलने लगे. ये सीन देख कर विजय और सुरेश जी ने अपनी अपनी पैन्ट खोल दी.अब विजय और सुरेश जी दोनों के लंड खुलकर सुजाता के सामने आ गए. सुजाता विजय का लंड मुँह में ले कर चूसने लगी. साथ ही सुरेश जी के लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. बारी बारी से सुजाता दोनों का लंड चूस रही थी. दोनों लंड सुजाता के गले तक जा रहे थे और सुजाता के मुँह से पानी निकल रहा था.

विजय और सुरेश जी को दोनों को मजा आ रहा था और सुजाता जोर-जोर से मजा ले कर लंड चूस रही थी. दोनों ने सुजाता के मुँह में लंड का पानी निकाल प्रिया, सुजाता बाथरूम में में जाकर अपना मुँह साफ करने लगी. इतने में विजय अन्दर आ गया और उसने सुजाता की गांड पर हाथ रख प्रिया और सुजाता की गांड के छेद पर लंड सैट करके एक जोर का धक्का प्रिया, तो उसका पूरा मोटा काला लंड सुजाता की गांड को चीरता हुआ अन्दर घुस गया.

सुजाता चीखने लगी और ‘आआ.. ईईईईईइ.. ऊऊफ़्फ़्स्स..’ चिल्लाने लगी.लंड घुसाने से उसकी दर्द के मारे चीख निकल गई- आऐईईइ ऊऊऊ ऊऊऊऊ.अधिक दर्द के कारण सुजाता गाली देने लगी- मादरचोद मार प्रिया … भोसड़ी के गांड में मत कर … दर्द हो रहा है.

विजय और जोर-जोर से गांड में लंड घुसेड़ने लगा. पूरे बाथरूम में फच फच की आवाजें आने लगीं. कुछ देर गांड मारने के बाद विजय ने अपना लंड का पानी सुजाता की गांड के अन्दर ही निकाल प्रिया.फिर विजय और सुजाता बाथरूम से बाहर निकले.

अब सुरेश जी बाहर बैठे हुए थे.

वे सुजाता को नंगी देख कर बोलने लगे- आज मुझे भी तुम्हारी चुदाई करना है, तुम जो बोलगी, वो लाकर दूँगा.सुजाता के मन में पता नहीं क्या आया, वो बोलने लगी- सुरेश जी आपका हक है … आप जो चाहोगे, मैं आज आपके लिए वो करूँगी.सुरेश जी ने सुजाता को अपने पास बुलाया और सुजाता को बोलने लगे- मेरे लंड के ऊपर बैठोगी तुम?

सुजाता सुरेश जी लंड के ऊपर बैठ गई. सुरेश जी लंड खड़ था, सीधा सुजाता की चूत के अन्दर घुस गया और सुजाता एक बार को सिहर गई लेकिन उसने जल्दी ही पूरा लंड खा लिया.

लंड घुसेड़ने के बाद में सुरेश जी अपनी तरफ से ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे. उधर सुजाता भी गांड उचकाते हुए लंड पर कूद कूद कर चुदने का मजा लेने लगी.

इस चुदाई में उन दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था. फिर कुछ देर बाद सुजाता भी नीचे से अपने कूल्हों को और तेजी से उछाल उछालकर लंड लीलने लगी. उसे तेज उछलता देख कर सुरेश जी भी उसकी चुदाई करने के लिए काफ़ी तेज झटके मारने लगे.

पन्द्रह मिनट तक लगातार झटके मारने के बाद सुजाता झड़ गई. उस दिन सुजाता की तीन बार चुदाई हो गई और सुजाता सुरेश काफ़ी देर तक ऐसे ही नंगे पड़े रहे.

एक घंटे बाद उसने सुरेश जी उठाया और विजय व सुजाता ने कपड़े पहने. उसके बाद सुजाता और विजय वहाँ से चले गए. अब सुरेश जी को जब जब टाइम मिलता है, तब तब वो सुजाता को बुला लेते हैं और चुदाई का भरपूर मजा करते हैं.

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