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भाई बहन पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 164 बार

बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख

मोनिका मान

02 Apr 2009 को प्रकाशित

बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख
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दोस्तो, मैं तनुजा मान अपने वादे के मुताबिक फिर से अपनी कहानी ले कर हाज़िर हूं।आप सब मुझे जानते ही हो जो नए पाठक हैं वो मेरी पिछली कहानीब्रदर सिस्टर सेक्स: भाई से सील तुड़वायीपढ़ें।मेरे प्यारे मित्रो, मुझे आपके बहुत से मेल मिले हैं, मैं सबका रिप्‍लाई तो नहीं कर सकी, जिनको रिप्‍लाई नहीं किया उनसे माफ़ी चाहती हूं। दोस्तो, मुझे मेरी कहानी पर अपने विचार मेल जरूर करना ताकि मैं आपसे मेरे जीवन की घटनाओं को बांट सकूँ।

आपका ज्यादा टाइम न लेकर सीधे कहानी पर चलते हैं।

मैं अपने भाई रोहण के साथ दो महीने रही और हमने एक दिन भी ऐसा नहीं गंवाया जिस दिन हमने चुदाई न की हो।पता नहीं सेक्स में ऐसी क्या बात है कि 2 महीने में मेरे शरीर में निखार आने लगा।

दो महीने बाद मैं घर आ गयी और मैंने हिमाचल में एक कॉलेज में एड्मिशन ले लिया। उसी कॉलेज में ही मेरी बुआ जी का लड़का दीपक पढ़ता था। मेरा कॉलेज मेरी बुआ जी के घर से 50 किलोमीटर दूर था। लेकिन न उनको पता था और न ही मुझे पता था के हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं, वो भी हॉस्टल में रहता था और मैंने भी हॉस्टल ले लिया।

जब मैं हॉस्टल में गयी तब मुझे नवप्रीत नाम की लड़की के साथ कमरा मिल गया। एक-दो दिन में ही हमारी अच्‍छी दोस्ती हो गयी। हम सब बातें शेयर करने लगी।मैंने कभी मेरे भाई के साथ सम्बन्धों के बारे में उसे नहीं बताया।

एक दिन मैं जब अकेली क्लास से हॉस्टल जा रही थी तो मेरी मुलाकात मेरी बुआ के लड़के दीपक से हो गयी। वो मुझे देखकर अचम्भित हो गए और मुझसे बोले- तनुजा तुम यहाँ?मैंने दीपक भैया को बताया- भैया, मैं यहीं पढ़ती हूं.फिर उनसे पूछा- और आप यहाँ कैसे?तब उन्होंने भी बताया कि मैं भी यहीं पढ़ता हूं।

तब एक दूसरे से हमने बहुत सी बातें की।

भाई दिखने में बहुत ही स्मार्ट था। अक्सर हम जब भी मिलते तो मुस्कुरा देते।

एक दिन नवप्रीत ने हमें एक साथ देख लिया। तब मेरी रूममेट हॉस्टल में जाकर मुझसे बोली- यार, जीजू तो स्मार्ट हैं।मैं एकदम से हैरान हो गयी और पूछा- कौन जीजू? किसकी बात कर रही है तू?उसने कहा- आज तू कॉलेज में जिस से बातें कर रही थी … वही जीजू और कौन?मैंने पता नहीं क्यों नवप्रीत को कुछ भी नहीं बताया कि वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मेरी बुआ का बेटा, मेरा भाई है।

अगले दिन मैं जब दीपक भैया से मिली तो उनको बताया कि मेरी रूममेट नवप्रीत ये कह रही थी।वो हंसने लगे।इतने में नवप्रीत भी आ गयी और बोली- लगे रहो … लगे रहो।उसे देख कर हम हंस दिये।

पता नहीं क्यों, दीपक ने भी उसे नहीं बताया कि हम भाई बहन हैं।

एक महीना ही हुआ था कि दीपक ने मुझे कॉल किया और पूछने लगे- तनुजा, आज मूवी देखने चलोगी? मैं अकेला हूं।मैंने ‘हां; कर दी और नवप्रीत को भी साथ ले चलने को पूछा।तब उन्होंने कहा- जैसा तुमको ठीक लगे।तो मैंने कहा कि हम दोनों ही चलेंगे, नवप्रीत को रहने देते हैं.

मैं तैयार हो गयी मैंने उस दिन ब्लू जीन्स और स्काई शर्ट पहनी, और पैरों में जूती डाली ही थी कि तभी दीपक का कॉल आ गया। जब मैं हॉस्टल से बाहर आई तो देखा दीपक मेरा इंतजार कर रहा था। मैं जाकर उसके साथ बाइक पैर बैठ गयी, और सिनेमा पहुंच गए।

जब मूवी शुरू हुई तो दीपक ने मेरी सीट के पीछे हाथ रख लिया और धीरे धीरे मेरे कन्धे पर हाथ रख प्रिया। मुझे अजीब सा लगा परन्तु मैंने कुछ नही कहा. फिर उन्होंने अपना हाथ हटा लिया पर मेरे पैर पर रखकर सहलाने लगे।मैंने मना नहीं किया क्योंकि मुझे भी अपने बदन पर उनके हाथ की सरसराहट अच्‍छी लग रही थी।

इंटरवल तक यही चलता रहा और इंटरवल के बाद उन्होंने मेरे बूब्स पर हाथ रखकर धीरे से मेरे कान में कहा- तनुजा, अगर तुमको अच्‍छा नहीं लगा तो बता दो, मैं कुछ भी नहीं करूँगा।मैंने कुछ नहीं कहा तो वो समझ गए कि इसमें मेरी भी मौन सहमति है और भैया मेरी चुचियों को दबाने लगे।

मैं गर्म होने लगी थी, 10 मिनट बाद मैंने उनका हाथ हटा प्रिया तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ?असल में तो मैं नहीं चाहती थी कि भिया मुझे गर्म करके यूं ही छोड़ दें तो मैंने बहना बना कर उनके कान में कहा- भैया कोई देख लेगा, तो अच्‍छा नहीं लगेगा।

मूवी खत्म होते ही मैं उनसे नजर नहीं मिला पा रही थी और चुपके से उनके पीछे बाइक पर बैठ गयी।

वहां से भैया मुझे एक पार्क में चले गए। वहां बैठकर दीपक ने मुझसे कहा- देख तनुजा, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। इसलिए मैं तुमको यहां ले आया था और मैं तुमसे प्यार करता हूं। प्लीज मना मत करना।मुझे भी अब लण्ड की जरूरत थी तो मैंने भी कहा- ठीक है!और मेरी हां सुनते ही उन्होंने मुझे गाल पर किस कर प्रिया।मैंने कहा- यहां नहीं भैया, यहाँ कोई देख लेगा!और हम वापिस हॉस्टल चले गए।

अब हम रोज फ़ोन पर सेक्सी बातें करते और मैं हर रोज सुबह बाथरूम में जाकर नंगी होकर दीपक भाई को वीडियो कॉल करके नहाती, उन्हें अपना बदन दिखाती।एक दिन दीपक ने कहा- चलो, कल मेरे घर चलें। कल मां सोनाक्षी (बुआ की लड़की) के साथ तुम्‍हारे घर जा रही है।तो मैंने हां कर दी।

अगले दिन दोपहर में जब हम दोनों उनके घर पहुंचे तो बुआ भी जा चुकी थी।मैं बहुत रोमांचित थी क्योंकि आज मुझे एक नया लण्ड जो मिलने वाला था।

घर जाकर मैंने दीपक और मेरे लिए चाय बनाई और दीपक से पूछा- बाथरूम कहां है? मुझे कपड़े बदलने हैं।तब दीपक भी मौके का फायदा उठाते हुए बोले- बाथरूम की क्‍या जरूरत है, लाओ मैं तुम्‍हारे कपड़े चेंज कर देता हूं।और भैया ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।

मुझे बहुत अच्‍छा लग रहा था और मैं भी दीपक का साथ देने लगी। दीपक ने धीरे से मेरी चूचियों पर हाथ रख प्रिया और दबाने लगा। मेरे निप्‍पल तन गए। मेरा मन कर रहा था कि एकदम से भाई का लण्ड पकड़ लूं। लेकिन ऐसा करती तो उनको गलत लगता।

उन्होंने धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और शर्ट को निकाल प्रिया, और मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगे। कभी कभी जोर से अपनी बाँहों में भर लेते तो मेरी चुचियां उनके चोड़े सीने से दब जाती। मुझे बहुत मजा आ रहा था।फिर भाई ने मेरी ब्रा खोल दी मेरी बड़ी बड़ी चूचियां कूद कर उसके सामने आ गयी थी। दीपक मुझे उठा कर अपने बैडरूम में ले गये और बेड पर लिटा प्रिया. फिर अपनी शर्ट उतारकर मेरे ऊपर लेटकर मेरे होंठों को चूमने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था.

तभी दीपक ने उठकर मेरी जीन्स उतार दी, मैं सिर्फ ब्लैक पैंटी में उनके सामने बेड पर लेटी थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो अब मैंने भी दीपक को पैंट उतारने के लिए बोला।उन्होंने भी अपनी पैंट उतार दी।

उनके पैंट उतारते ही मैंने उनका अंडरवियर नीचे खींच प्रिया।

मैं दीपक का लण्ड देखकर हैरान रह गयी; 8 या 9 इंच लम्बा और 3 इंच से भी मोटा … मेरी आँखों में चमक आ गयी। मुझे भी चुदाई करवाये हुए बहुत दिन हो गए थे, मैं भैया के लण्ड को देख रही थी तभी दीपक ने कहा- सिर्फ देखोगी या इसे पकड़ोगी भी?इतना सुनते ही मैंने उनका लण्‍ड हाथ में पकड़ लिया। भाई का लण्ड एकदम कठोर और गर्म था।

दीपक ने कहा- तनुजा, चूसोगी क्या?मुझे और क्या चाहिए था … इतना कहते ही मैंने उनके लण्ड पर अपने होंठ रख दिए। लेकिन लण्ड मेरे मुंह में नहीं जा रहा था।

कुछ देर बाद दीपक ने कहा- तनुजा यार अब पैंटी तो उतार दो।मैंने खड़ी होकर उनको ही मेरी पैंटी उतारने का आफर प्रिया।

उन्होंने आगे बढ़ कर मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत पर मुंह रख प्रिया और मेरी चूत को चूसने लगे. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। कभी जीभ को अंदर डाल देते तो कभी मेरी क्लिट को मसल देते। अपने हाथों को मेरे कूल्हों पर ले जाकर सहलाते तो कभी कभी हल्के हल्के थप्‍पड़ से मारते जिससे मेरे कूल्हे लाल हो गए।

अब मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और उनसे मुझे चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी और बेड पर लेट गयी। भैया मेरे ऊपर आ गए और बूब्स को चूसने लगे, फिर नाभि को चूमा और चूत पर लण्ड को फिराने लगे.मुझसे रहा नहीं गया और उनका लण्ड पकड़कर चूत पर लगा प्रिया और अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ धकेल प्रिया जिससे उनका लण्ड का थोड़ा सा हिस्‍सा चूत में चला गया।

तभी उन्‍होंने अचानक से मेरी चूत में लण्ड को पूरा डाल प्रिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने भैया को कुछ देर रुकने को बोला तो भाई रुक गए और मुझे किस करने लगे. जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने कूल्हों को हिलाया और भाई को अपनी बांहों में भरकर ऊपर नीचे होने लगी।

भाई ने भी सब समझकर मेरी चूत को चोदना चालू कर प्रिया. मैं चिल्लाने लगी ‘आअहह… हह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम्मम्म… आअहह… ‘और वो तेज़ी से धक्के मारते रहे।

मैं पहले भी एक भाई के लण्‍ड से चुद चुकी थी लेकिन इस बुआ के बेटे के चोदने के तरीके से मैं बिल्कुल मदहोश हो गयी थी और इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक मेरे भाई ने भी नहीं की थी। उसका जोश इतना ज़्यादा था कि वो मुझे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय से वो मुझे अलग-अलग स्टाइल में लेकर चोदता रहा। कभी घोड़ी बनाकर तो कभी मुझे अपने लण्ड पर बैठने को बोलते।मैं 3 बार झड़ चुकी थी।

आधा घण्टा तक चुदाई चली और तब हम दोनों एकसाथ झड़ गए। मुझे बहुत अच्‍छा लगा दीपक से चुदवाकर … मेरी तो जैसे तृप्ति हो गई।तभी भाई बोला- तनुजा, तुम्हारी गांड मुझे बहुत पसंद है!और मेरे ऊपर से उतर कर साइड में लेट गए.

कुछ देर बाद हम दोनों ने शावर लिया और नंगे ही बेड पर आकर लेट गए। पता नहीं कब हमें नींद आ गयी।

जब मेरी नींद खुली तो शाम के 8 बज चुके थे। मैंने दीपक को उठाया, हमें भूख भी लगी थी तो मैं खाना बनाने के लिए जाने वाली थी और जब कपड़े पहनने लगी तो भाई ने कहा- तनुजा, कल शाम तक कोई कपड़ा नहीं पहनना।मुझे अजीब लगा।

खैर मैंने खाना बनाया और डाइनिंग टेबल पर लगा प्रिया और दीपक को बुला लिया- भैया, आ जाओ, खाना तैयार है, खा लो!दीपक भाई नंगे ही आये, मैंने देखा तो दीपक का लण्ड खड़ा था।

वो कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपने पास बुलाकर अपने लण्ड पर बैठा लिया और खाना खाने लगे। बीच बीच में भाई मेरी चूचियों को दबा देते थे।

खाना खाकर हम फिर से बिस्तर पर चुदाई की दुनिया में खो गए।अगले दिन और रात को भी हमने बहुत बार चुदाई की और दिन रात हम दोनों नंगे रहे।

मेरी आगे की स्टोरी आप पर निर्भर है। स्टोरी मेरी हो या मेरी सिस्टर की ये आपको बताना है।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी।support@mohakkisse.comपर मेल कर के जरूर बताना!

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