मेरा नाम राहुल है। यह मेरी पहली चुदाई की सच्ची कहानी है। उस समय मैं 22 साल का था।
हमारा गांव उत्तर प्रदेश के एक छोटे से इलाके में था। चारों तरफ खेत फैले हुए थे — बाजरा, अरहर और गेहूं की खेती। घरों के बीच पुरानी हवेलियां और कच्ची सड़कें थी। सर्दियों में इतनी ठंड पड़ती थी कि रात 8 बजे के बाद कोहरा इतना घना हो जाता कि 10 मीटर दूर भी कुछ साफ दिखाई नहीं देता था। पूरा गांव शांत और सुनसान हो जाता। हमारे घर में संयुक्त परिवार था, करीब 18 लोग रहते थे। लड़के बाहर वाले हिस्से में और लड़कियां अंदर वाले कमरों में सोती थी। घर से करीब 500 मीटर दूर खेतों के पार एक पुराना मकान था जहाँ जानवर रखे जाते थे।
उस समय मेरे घर पर मेरी बुआ की बेटी रुची पढ़ने के लिए आई थी। वह कॉलेज के प्रथम वर्ष में पढ़ रही थी। इससे आप लोग अंदाजा लगा लो कि वह कितने साल की थी। लेकिन मुझे हमेशा छोटी और मासूम लगती थी। हाइट सिर्फ 5 फीट 1 इंच, रंग दूध जैसा गोरा, शरीर हेल्दी, लेकिन अभी पूरी तरह मेच्योर नहीं हुआ था — 30-26-34 का फिगर। उसकी चूचियां गोरी, गोल और नरम थी, कमर पतली और गांड थोड़ी मोटी। देखते ही मैं उसके दीवाना हो गया था।
खेल-खेल में मैं उसके चूचियों को दबा देता था। वो नाराज होती थी, मुंह फुला लेती थी, लेकिन किसी से शिकायत नहीं करती थी। इसी वजह से मेरी हिम्मत बढ़ती गई।एक दिन आंगन में उसकी खटिया पर बैठ कर टीवी देख रहा था। आंगन में अंधेरा था, किसी को कुछ साफ दिखाई नहीं दे रहा था। टीवी में सुहागरात का सीन आ गया। मैं उत्तेजित हो गया और मेरा हाथ सीधे रुची की चूचियों पर चला गया। जैसे ही मैंने दबाया, वो चौंक गई, मेरा हाथ झटक कर हटा दिया और उठ कर चली गई। मैं डर गया।
लेकिन कुछ ही देर बाद वो वापस आकर मेरे बगल में बैठ गई। मैं समझ गया कि रास्ता साफ था। हिम्मत करके फिर से उसकी नरम चूचियों पर हाथ रख दिया। इस बार वो कुछ नहीं बोली। बस उसके मुंह से हल्की-सी “अह…” जैसी आवाज निकली। मैंने धीरे-धीरे उसके चूचियों को दबाना और मसलना शुरू कर दिया। वो शर्म से दुपट्टे से मेरे हाथ ढकने लगी, लेकिन हटा नहीं पाई। करीब आधा घंटा मैंने उसके चूचियों को थपथपाया और दबाया। वो बहुत उत्तेजित हो गई, हांफने लगी, सांसें तेज हो गई। मुझे लगा वो झड़ गई थी।
इसके बाद यह सिलसिला रोज होने लगा। जब भी मौका मिलता, मैं उसके चूचियों को दबा देता। कुछ ही महीनों में उसकी चूचियां बढ़ कर 34″ साइज की हो गई।
ठंड का महीना था। रात के करीब 8 बजे मैं डिनर करने घर गया। रोज की तरह रुची की खटिया पर बैठ कर खाना खाने लगा और टीवी देखने लगा। थोड़ी देर बाद वो आई और मेरे बगल में बैठ गई। मैं एक हाथ से खाना खाते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को दबा रहा था। वो बहुत धीमी आवाज में “आह… आह…” कर रही थी। डिनर के बाद जब मैं जाने लगा तो उसने मेरे हाथ में एक चिट्ठी थमा दी।
दूसरे घर पर आकर मैंने चिट्ठी पढ़ी तो पागल हो गया। उसमें लिखा था — “तुम आज रात 11 बजे घर पर आ जाना।”
मैं बहुत खुश और उत्साहित था। 11 बजने का इंतजार करने लगा। ठंड के कारण घना कोहरा छाया हुआ था, 10 मीटर दूर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। 11 बजे मैं घर की तरफ निकल पड़ा। घर के पास पहुंचा तो रुची बाहर ही खड़ी थी। वो जल्दी से आई, मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अंदर अपने कमरे में ले गई। बोली, “खटिया पर बैठो, मैं क्लास का कुछ काम कर रही हूं।”
वो सलवार सूट पहने थी, जो बहुत टाइट था। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां साफ उभरी हुई दिख रही थी। मैं उसे घूर रहा था। उसने मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और कापी साइड में रख दी। बस इतना देखते ही मैंने उसे दबोच लिया। उसे जोर से किस्स करते हुए उसके चूचियों को दबाने लगा। करीब 5 मिनट तक हम किस्स करते रहे। फिर मैंने उसे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। किस्स करते हुए उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थी।
मुझे जल्दी जाना था, इसलिए मैंने उसके सूट उतारने शुरू कर दिए। वो शर्म से मना कर रही थी। मैंने लाइट बंद कर दी और एक कैंडल जला दी। अब कमरे में सिर्फ हल्का उजाला था। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। वो ब्रा नहीं पहनी थी। जैसे ही उसकी गोरी चूचियां बाहर आई, कमरा मानो और चमक उठा। मैंने उसकी खड़ी-खड़ी निप्पल्स को चूसना शुरू किया। वो मुझे रोक रही थी, “नहीं… गुदगुदी हो रही है… पहली बार है…” लेकिन मैं नहीं रुका। फिर चूसना बंद करके दबाने और मसलने लगा। कुछ ही देर में वो बहुत उत्तेजित हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी।
मैंने जल्दी से टी-शर्ट और लोअर उतार दिए। उसने खुद मेरे अंडरवियर को एक झटके में उतार दिया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड पूरा जोश में खड़ा था। उसे देख कर वो डर गई, “इतना बड़ा होता है क्या भैया…?”
मैंने उसके हाथ में पकड़ा दिया। वो डरते-डरते सहलाने लगी। मैंने देर ना करते हुए उसे लिटा दिया, उसके ऊपर चढ़ा और किस्स करने लगा। चूचियों को दबाते-चूसते 15 मिनट बीत गए। अचानक उसने मेरे हाथ पकड़े और मेरे कान में धीरे से बोली, “अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है…”
मैं समझ गया कि वो चुदाई के लिए तैयार है। मैंने उसके कान में पूछा, “किसी ने चोदा है क्या? या पहली बार है?”
उसने मुझे हल्का मारते हुए शर्माते हुए बोली, “यह मेरा पहली बार है… आज तक किसी ने मुझे हाथ भी नहीं लगाया…”
अब पटाने वाला हिस्सा:-
मैंने उसे चुपचाप लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया। मेरा लंड उसकी नाभि पर दब रहा था। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “रुची… आज रात मैं तुझे अपनी बना लूंगा… बस एक बार मुझे अंदर आने दे… मैं बहुत प्यार करता हूं तुझे…”
वो तुरंत घबरा गई, “नहीं भैया… ये गलत है… मैं डर रही हूं… बहुत दर्द होगा… मेरा वो जगह बहुत छोटी है… प्लीज मत करो…”
मैंने उसे जोर से किस्स किया और बोला, “देख, मैं वादा करता हूं… अगर तुझे ज्यादा दर्द हुआ तो तुरंत बाहर निकाल लूंगा। बस एक बार ट्राई करने दे… तेरी छोटी-सी चूत को मैं बहुत प्यार से चोदूंगा… तुझे भी मजा आएगा, विश्वास कर।”
वो सिर हिला रही थी, आंखों में आंसू आ गए थे, “नहीं… मैं नहीं कर सकती… अगर किसी को पता चल गया तो… प्लीज छोड़ दो मुझे…”
मैंने उसके गालों पर किस्स करते हुए कहा, “कोई नहीं पता चलेगा… कोहरा इतना घना है कि बाहर कोई आवाज भी नहीं सुन सकता… तू सिर्फ चुप रहना… मैं तेरी चूचियों को चूसता रहूंगा, तुझे दर्द नहीं होने दूंगा… बस एक बार… प्लीज रुची… मेरे लंड की नसें फट रही हैं तेरे लिए…”
वो फिर भी मना कर रही थी। मैंने फिर मिन्नतें शुरू की — “देख, मैं तेरा भाई जैसा हूं ना… तुझे कभी दुख नहीं पहुंचाऊंगा… अगर तू आज मना कर देगी तो मैं कभी तुझे छू भी नहीं लूंगा… लेकिन एक बार मुझे अंदर आने दे… मैं तेरे अंदर झड़ कर तेरी चूत को अपनी बना लूंगा। तू मेरी हो जाएगी हमेशा के लिए।”
करीब 10-12 मिनट तक मैं ऐसे ही पटाता रहा — कभी प्यार से, कभी वादा करके, कभी उसके कान में गंदी-गंदी बातें करके (“तेरी छोटी चूत मेरे मोटे लंड को देख कर कांप रही है… उसे अंदर ले लेगी तो कितना मजा आएगा…”), कभी उसके चूचियों को चूस-चूसकर उत्तेजित करता रहा।
आखिरकार वो हार गई। सांसें तेज करते हुए, आंसू पोंछते हुए धीरे से बोली, “ठीक है… लेकिन बहुत धीरे करना… और अगर दर्द हुआ तो तुरंत बाहर निकाल देना… वादा किया ना?”
मैंने खुशी से उसका मुंह चूम लिया और बोला, “वादा है… लेकिन एक बार अंदर गया तो थोड़ा तो सहना पड़ेगा… दर्द में ही असली मजा है मेरी जान।”
फिर चुदाई शुरू:-
फिर मैं उठा, अपने लंड और उसकी छोटी-सी चूत दोनों में हल्की वैसलीन लगाई। मैंने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। वो तड़प उठी, “प्लीज़… डाल दो अब… और नहीं सहा जा रहा…”
इतना सुनते ही मैंने लंड उसकी चूत पर सेट किया और एक धक्का दिया। लेकिन लंड फिसल गया। उसकी चूत बहुत छोटी और टाइट थी, अभी पूरी तरह मेच्योर भी नहीं हुई थी। वो चौंककर बोली, “धीरे-धीरे डालो भैया… मुझे बहुत दर्द होगा…”
मैंने उसके कान में कहा, “दर्द में ही मजा है रुची…” और बोला, “तुम खुद मेरे लंड को अपनी चूत पर सेट करो।”
उसने कांपते हाथों से मेरा लंड अपनी छोटी चूत पर सेट किया और बोली, “धीरे… बहुत धीरे…”
मैंने हल्का दबाव दिया। सिर्फ 5 मिमी अंदर गया और वो जोर से कसमसा गई, “आआह्ह्ह…!”
मैं समझ गया कि ये छोटी सी चूत मेरे लंड को झेल नहीं पाएगी। मैंने उसी पोजीशन में उसे जोर से किस्स करना शुरू किया। किस्स करते-करते अचानक एक ही जोरदार झटके में पूरा 7 इंच का मोटा लंड उसकी छोटी चूत में पेल दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह! भैया… मार डाला…!”
रुची बहुत तेज चीखी। लेकिन मैं उसके होंठों पर अपना मुंह रखे हुए था, इसलिए चीख बाहर नहीं निकल पाई। उसका पूरा शरीर जोर से कांप रहा था। कुछ पलों के लिए वो बेहोश-सी हो गई। मैंने खून का रिसाव महसूस किया। उसकी सील टूट चुकी थी।
होश में आने के बाद वो रोते हुए मेरे कान में चीखी, “भैया… बाहर निकाल दो… बहुत दर्द हो रहा है… मैं मर जाऊंगी… आआह्ह्ह…!”
लेकिन मेरे ऊपर हवस सवार थी। मैंने उसे फिर से किस्स किया और लंड को बाहर खींच कर एक और जोरदार धक्का लगाया।
“नाहीईईईई…! बाहर निकालो… दर्द हो रहा है… आआआह्ह्ह!”
वो हाथ-पैर पटक रही थी, रोते-रोते मिन्नतें कर रही थी, लेकिन मैं नहीं रुका। पूरी स्पीड में उसकी छोटी-सी टाइट चूत को चोदने लगा। करीब 10 मिनट तक जोर-जोर से धक्के लगाए। वो छटपटा रही थी। दर्द के साथ-साथ धीरे-धीरे उसे प्लेजर भी होने लगा और वो मुझसे पहले ही झड़ गई। थोड़ी देर बाद मैं भी उसके अंदर ही झड़ गया।
जब मैं उसके ऊपर से हटा तो वो फिर से रोने लगी। उसकी छोटी चूत बहुत लाल हो गई थी और सूज गई थी। मेरा मोटा लंड उसकी चूत के लिए बहुत बड़ा था। मैंने उसके चूत को कपड़े से साफ किया और किस्स करते हुए उसे मनाया।
थोड़ी देर बाद जब वो थोड़ी नॉर्मल हुई तो मुझे बहुत कोसने लगी। मैंने माफी मांगी और फिर एक बार चुदाई के लिए मिन्नतें करने लगा। वो पहले नहीं मान रही थी। मैंने वादा किया, “अगर दर्द होगा तो मैं तुरंत बाहर निकाल लूंगा।”
बहुत मिन्नतों के बाद वो फिर तैयार हो गई। इस बार मैंने बहुत धीरे-धीरे लंड डाला। फिर भी उसे असहनीय दर्द हुआ। वो फिर रोने लगी और मुझे धक्का देने लगी, “निकालो… बहुत दर्द है… आह्ह्ह…!”
लेकिन मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया, मानो कोई बोरिंग मशीन चल रही हो। वो दर्द से छटपटा रही थी, चीख रही थी, लेकिन मैं आंखें बंद करके सिर्फ चुदाई पर फोकस किए हुए था। करीब 20 मिनट तक लगातार जोर-जोर से चोदा। इस दौरान वो दो बार झड़ चुकी थी। आखिर में मैं भी उसकी छोटी चूत के अंदर ही झड़ गया।
जब मैंने लंड निकाला तो उसकी चूत से खून और वीर्य का मिश्रण बाहर निकल रहा था। वो बेसुध पड़ी हुई थी। मैं अभी भी उसे किस्स कर रहा था और उसकी चूचियों को दबा रहा था ताकि उसे थोड़ा आराम मिले।