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Pehli Chudai पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 356 बार

चाची के साथ पहली चुदाई-1(Chachi ke sath pehli chudai-1)

thor

07 Mar 2012 को प्रकाशित

चाची के साथ पहली चुदाई-1(Chachi ke sath pehli chudai-1)
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नमस्कार दोस्तों, मैं विशाल आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूं। उम्मीद करता हूं आप सब को कहानी पढ़ कर मज़ा आएगा। तो चलिए शुरू करते है।

मैं 21 साल का हूं और कॉलेज का स्टूडेंट हूं। मेरे परिवार में मैं, मम्मी-पापा, दादा-दादी, और चाची है। कुछ दिनों तक चाचा भी हमारे साथ थे, लेकिन अब नहीं हैं। और उनकी गैरहाजरी में ही मुझे अपनी चाची के साथ अपनी पहली चुदाई का मौका मिला। वहीं कहानी मैं आप सब को बताने जा रहा हूं।

मेरे चाचा की उम्र 32 साल है। मेरे पापा से वो काफी छोटे है। जब वो 27 साल के थे, तब उनका एक लड़की से प्रेम था। उन्होंने दादा जी को बोला भी कि उनकी शादी उस लड़की से करवा दे, लेकिन दूसरी जाति की होने के कारण दादा जी ने चाचा को मना कर दिया।

ये बात एक बार के लिए वहीं खत्म हो गई। फिर उसके 3 साल बाद चाचा की शादी चाची से हुई। जब मैंने पहली बार चाची को देखा, तो देखता ही रह गया। ऐसा लग रहा था जैसे दुल्हन के जोड़े में कोई परी हो।

गोरा रंग, 25 साल की खूबसूरत लड़की, और फिगर 34-28-34 का। कोई भी देखे तो पहली नजर में दीवाना हो जाए। मैं चाची से मन ही मन प्रेम करने लगा। लेकिन सच तो यहीं था ना कि वो मेरी चाची थी, और कभी भी मेरी प्रेमिका नहीं बन सकती थी।

चाचा की शादी तो हो गई, लेकिन उनके मन में से उनका पुराना प्यार अभी भी नहीं गया था। शादी के कुछ महीनों बाद ही चाचा और चाची के बीच झगड़े होने लगे। गलती हमेशा चाचा की ही होती था, और इस बात पर उन्हें दादा जी से डांट भी पड़ती थी।

फिर एक दिन पता चला कि चाचा आज भी उस लड़की से प्यार करते थे, और छुप कर मिलने जाते थे। दादा जी ने जब सारे परिवार के सामने चाचा जी को उस लड़की, या परिवार में से किसी एक को चुनने को कहा, तो चाचा जी ने उस लड़की को चुना। फिर वो घर से निकल गए।

चाची का परिवार उनको घर ले जाने के लिए आया, लेकिन चाची ने जाने से मना कर दिया। क्योंकि वो हमारे परिवार को अपना परिवार मानती थी। दादा जी ने भी चाची को अपनी बेटी बना कर रखने का फैसला किया।

चूत की आग बड़ी कुत्ती चीज़ है। इंसान से क्या-क्या करवा देती है। मैं कुछ दिन से नोटिस कर रहा था कि चाची मुझसे ज्यादा बातें करने लगी थी, और छूती रहती थी। मैं तो पहले से चाची का दीवाना था, तो मुझे मजा आ रहा था। लेकिन मैंने चाची को ऐसा कोई हिंट नहीं दिया कि मैं भी उनको उस तरह से लाइक करता था।

अब मैंने भी चाची को मौका मिलते ही छूना शुरू कर दिया था। वो इस पर मुझे कुछ नहीं कहती थी। जब मैं उनके सामने होता, तो वो जान बूझ कर झुक कर मुझे अपनी क्लीवेज दिखाती थी। उसको देख कर मुझे रात को मुठ मारनी पड़ती थी। फिर एक दिन उन्होंने अपनी वासना का खुला ऐलान कर दिया।

हुआ कुछ ऐसा, कि सुबह का वक्त था, और मैं कॉलेज के लिए लेट हो रहा था। हमारे घर में 2 बाथरूम है। एक अंदर है, और एक बाहर। वैसे तो सारे लोग घर के अंदर वाला बाथरूम ही इस्तेमाल करते है, लेकिन जब इमरजेंसी हो, तो बाहर वाले में भी चले जाते है। वैसे तो मैं अंदर वाले में ही जाने वाला था। लेकिन उसमें दादा जी थे। और दादा जी बहुत देर लगाते थे बाथरूम में। इसलिए मैं बाहर वाले में चला गया।

जब मैं जा रहा था, तो रास्ते में मुझे चाची दिखी। वो सामने से आ रही थी। उन्होंने सारी पहनी थी। तभी मुझे आते देख उन्होंने अपना पल्लू गिरा दिया। इससे उनके कोमल स्तन मुझे दिख गए, और मैं उत्तेजित हो गया।

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बाथरूम में जाके देख तो मेरा लंड खड़ा था। मैंने सोचा क्यों ना मुठ मार ली जाए। ये सोच कर मैंने कपड़े उतार दिए, और चाची का नाम लेते हुए मूठ मारने लगा।

अभी कुछ सेकंड्स ही हुए थे मुझे मुठ मारते कि तभी दरवाज़ा खुल गया (उस बाथरूम की कुंडी ढीली थी, धक्का मारने पर खुल जाती थी)। जब मैंने सामने देखा, तो सामने चाची खड़ी थी। उनके चेहरे पर एक अलग तरह का एक्सप्रेशन था।

फिर मैं बोला: चाची, आप यहां क्या कर रही हो?

चाची: मेरा नाम लेके क्यों कर रहा है, मेरे साथ कर ले।

अभी मैं कुछ सोचता या समझता, चाची मेरे करीब आई, और घुटनों पर बैठ कर मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया। उनके मुंह में लंड जाते ही मुझे एक अलग सा एहसास हुआ, जो मैंने इससे पहले कभी महसूस नहीं किया था, क्योंकि ये मेरा पहली बार था। फिर चाची मेरे लंड को चूसने लगी। मैं तो मानो जन्नत में पहुंच गया। उनके मुंह की गर्माहट पा कर मैं कुछ ही मिनिट में झड़ गया। चाची मेरा सारा माल पी गई।

फिर वो उठी और बोली: रात को तेरे कमरे में आऊंगी, तैयार रहना।

मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था जो मैंने सुना था। मुझे ये सब एक सपना लग रहा था। लेकिन ये सब सच था। अब मैं शाम का इंतजार करने लगा। सारा दिन शाम के इंतजार में ऐसे ही बीत गया। रात के डिनर के बाद जब मैं कमरे में गया तो चाची के बारे में सोच-सोच कर मेरा लंड खड़ा हो गया। रात को 11 बजे मेरे रूम का दरवाजा खुला। चाची अंदर आई और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।

उनको आता देख मैं बेड से उतर कर खड़ा हो गया। चाची ने पिंक कलर का नाइट सूट पहना था, जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी। नाइट सूट सिल्क का था, जिसमें से उनके जिस्म की पूरी शेप नज़र आ रही थी।

चाची मेरे बिल्कुल पास आके खड़ी हो गई। इतने पास की हम दोनों की सांसें भी एक-दूसरे से टकरा रही थी। फिर वो और पास आई, और अपने बदन को मेरे बदन से चिपका दिया। अब मैं अपनी छाती पर उनके स्तनों का दबाव महसूस कर पा रहा था। फिर उन्होंने अपनी बाहें मेरे गले में डाल ली। इसके आगे क्या हुआ आपको अगले पार्ट में पता चलेगा।

दोस्तों आपको यहां तक कि कहानी कैसी लगी, उसकी फीडबैक आप support@mohakkisse.com पर दे सकते है।

अगला भाग पढ़े:-चाची के साथ पहली चुदाई-2

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