Group Sex Story

चाची ने मुझे भी चुदवा प्रिया-2

लेखक: निशा शाह दिनांक: 26-10-2017 पठन समय: 12 मिनट

निशा शाहयह देख कर मैं अब अपने आपको भी काबू नहीं कर सकती थी। मैंने अपने सिर को पीछे मोड़ कर हिमेश की तरफ देखा।वो समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ। हिमेश ने पीछे जाकर अपनी पैन्ट और अंडरवियर को घुटनों तक निकाल प्रिया। फिर उसने मेरे तौलिया वाले गाउन को ऊपर कर प्रिया। मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था।वो मेरे चूतड़ों को देख कर बोला- सुनील.. यह माल तेरे लायक है। इसकी गाण्ड बहुत बड़ी, गोल और एकदम गोरी है। एकदम खरबूज़े की तरह दिख रही है। पहले मैं इस को ठोक देता हूँ।मैंने पीछे मुड़ कर हिमेश का लंड देखा लेकिन वो उतना बड़ा नहीं था जितना सुनील का था। हिमेश ने पीछे से ही मेरी उठी हुई और पनियाई चूत में अपना लंड घुसा प्रिया। मेरी सिसकारी निकल गई। फिर हिमेश मेरे ऊपर लेट गया और पीछे से मेरे कान के नीचे चाटने लगा। मुझे मज़ा आ रहा था।हिमेश ने कहा- साली, तू तो बहुत गीली हो गई है, इस का मतलब तुझे पहले से ही चुदवाना था, तो ले अब मेरा लंड की चोट ले।मैं सिर्फ़ ‘आआहह ऊऊऊओह’ करती रही और हिमेश मुझे चोदता रहा।वहाँ आंटी भी फिर से मस्त हो कर सिसकारी लेने लगी थीं। 2-3 मिनट मे उनका पानी फिर छूट गया। अब सुनील भी छूटने वाला था।उसने बोला- मैं तेरी चूत में अपना माल निकालने वाला हूँ… ये ल्ले..!यह कहकर वो भी छूट गया और आंटी के ऊपर थोड़ी देर पड़ा रहा।इधर हिमेश झटके पे झटका लगा रहा था लेकिन पूरी तरह उसका लंड मेरे अन्दर नहीं जा रहा था, इसलिए मुझे उतना मज़ा नहीं आ रहा था। थोड़े झटके लगा के हिमेश भी छूट गया, उसने मेरी चूत में ही अपना वीर्य छोड़ प्रिया लेकिन मुझे मज़ा नहीं आया।तब तक सुनील आंटी के ऊपर से उठ गया और अपने कपड़े पहनने लगा।आंटी थकान के मारे हिल भी नहीं रही थीं, वो बोली- अब तो तुम्हें जो चाहिए था वो मिल गया ना.. अब तो चले जाओ।सुनील- मीना, तेरा मस्त बदन ऐसे कैसे छोड़ कर जाऊँ, हम तो आज पूरी रात तुम्हें मस्ती से चोदेंगे, फिर सुबह चले जाएँगे।हिमेश भी अपने पैन्ट पहन कर खड़ा हो गया और गुसलखाने में चला गया।उधर सुनील कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे देखा। मैं ऐसे ही उल्टी पड़ी थी और उसको देख रही थी। मेरा गाउन अब भी मेरे चूतड़ों के ऊपर था।सुनील- क्या साली की गाण्ड है, मेरा तो फिर से खड़ा होने लगा है।अन्दर से आंटी चिल्लाईं- मेरी बच्ची को कुछ मत करना प्लीज़ सुनील, तू उसे कुछ मत कर।सुनील बोला- अबे इसकी तो हिमेश ने पहले मार ही ली है, तुझे नहीं पता।यह सुनते ही आंटी ‘हाय..हाय’ करने लगीं।मैंने अब सुनील को ऐसे देखा कि उसे भी लगा कि मैं उसे चोदने के लिए न्यौत रही हूँ। सुनील मेरे पास आया और मुझे सीधा लिटा प्रिया।फिर उसने मेरे तौलिये वाले गाउन के बन्द खोल दिए, मेरे मम्मे देख कर कहा- मीना रानी, इसके मम्मे भी बहुत बड़े है जानेमन, पहले पता होता तो मैं पहले इसकी ठोकता।ऐसे शब्द सुन कर मैं और भी गर्म हो गई।मैं बोली- आंटी अब कुछ फायदा नहीं है, अब जो हो रहा है उसे होने दो।सुनील बोला- देखा.. यह भी मज़ा लेना चाहती है।यह कह कर अपने अपने सारे कपड़े एक एक करके निकाल दिए, उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था। यह देख कर मेरे मन में अजीब सा आनन्द मिल रहा था, मेरे बॉयफ्रेंड का लंड भी हिमेश की तरह छोटा है।मैंने अपने आपसे कहा ‘निशा, आज बड़े ही मजे से अपना बदन सुनील से चुदवा ले, जाने फिर इतना बड़ा लौड़ा कब मिले।’फिर सुनील मेरे ऊपर आ गया, धीरे-धीरे से उसने मेरे होंठ चूसने शुरू किए। मैं भी मस्ती से उसके होंठों से अपने होंठ चुसवा रही थी। मैंने इशारे से हाथ खोलने को कहा लेकिन सुनील ने मना कर प्रिया। फिर उसने मेरी गर्दन को चूमना शुरू किया, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने ज़ोर से मेरे मम्मे दबाए।‘आाआईयईईईईई… सस्स्स्सस्स..!’ मैं मस्ती से चिल्लाई।तब तक हिमेश बाथरूम से वापस आया।हिमेश- सुनील, है ना यह मस्त चीज़, मेरा तो इस मक्खन जैसे बदन को छूते ही जल्दी निकल गया, तू आराम से चोद, मैं अब मीना को चोदता हूँ।यह कह कर वो कमरे में जाकर पलँग पर बैठ कर आंटी के मम्मे दबाने लगा। इधर सुनील ने मेरे मम्मों के चूचुक अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।‘म्म्म्मलम… आईउ..’ मेरे मुँह से सिर्फ़ मस्त सिसकारियाँ ही निकल रही थीं, अब मैं अपने बस में नहीं थी, मैंने सुनील को अपने पैरों से ज़कड़ लिया और कहा- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में पेल दो।सुनील ने कहा- ऐसे नहीं रानी.. पहले मज़ा ले.. फिर मज़ा दे।फिर उसने मेरी नाभि को चाटना शुरू किया। मैं सिर्फ़ अपना सिर हिला रही थी और जल्दी से उसके लंड का मज़ा लेना चाहती थी। फिर सुनील थोड़ा और नीचे गया और मेरी चूत को चाटने लगा और बोला- वाह… क्या चूत है, शेव करके तैयार रखी है, अपनी झांटें रोज़ शेव करती हो क्या?मैंने अपना सिर ‘हाँ’ में हिलाया। फिर वो भूखे कुत्ते की तरह मेरी चूत को चाटने लगा।मैं ‘आआअम्मऊहह’ करती रही।उधर हिमेश भी फिर से तैयार हो गया था। उसने अपने कपड़े उतारे और आंटी के ऊपर चढ़ गया।यहाँ सुनील ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूत चाट रहा था। उसकी मदमस्त चटाई से थोड़ी ही देर में ‘आआहह..ईसस्स..मम्म’ करते हुए मेरा पानी निकल गया, मुझे बहुत मज़ा आया।हिमेश भी आंटी के बदन के सभी हिस्सों पर चूम रहा था। आंटी भी फिर से गरम हो रही थीं। वो भी अब सिसकारियाँ ले रही थीं।अब सुनील भी फिर से मेरे ऊपर आया और अपने लंड को मेरी चूत के दरवाज़े पर रखा। अब मैं थोड़ा सा डर गई।मैंने कहा- सुनील.. यह अन्दर नहीं जाएगा, प्लीज़ मत डालो, मेरी चूत फट जाएगी।सुनील ने कहा- अरे रानी चूत फाड़ने में ही तो मज़ा है, थोड़ी देर दर्द होगा लेकिन फिर मज़ा आएगा।ऐसा कहते ही उसने ज़ोर से धक्का प्रिया।‘आआआऐईईईईई..मर गई.. मत डालो… प्लीज़.. निकालो इसे…!’ मैं चिल्लाई।उसने मेरे होंठ अपने होंठ से चिपका कर ज़ोर से चूसने लगा। फिर एक और ज़ोर से धक्का प्रिया और आधा लंड घुसा प्रिया। मैं बेबस चिल्ला भी नहीं सकती थी सिर्फ़ छटपटाती रही।थोड़ी देर वो रुका और धीरे-धीरे झटके देने लगा। फिर उसने धीरे से अपना लंड थोड़ा बाहर निकाल कर एक और ज़ोर से धक्का प्रिया। मुझे लगा कि मैं मर ही जाऊँगी।अब पूरा लंड अन्दर घुस गया था। मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई बहुत ही गरम सरिया मेरी चूत में फंसा है। थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद सुनील ने झटके देना शुरू किया।अब उसने अपना मुँह मेरे मुँह से हटाया और मेरी गर्दन और चूचियों पर फिराता रहा, अब उसने अपने झटके तेज़ कर दिए थे।‘म्म्म्महम आअहह… ईआयइ.. उम्म’ मैं सिर्फ़ चुदाई के दर्द को बयान कर रही थी।ऐसा बड़ा लंड अपनी चूत में कोहराम मचा रहा था, मेरे आनन्द की कोई रीमा नहीं थी, मैं मस्त हो कर अब उसका साथ दे रही थी। करीब 5-6 मिनट ऐसा चलता रहा।फिर ‘आआअहह.. थोड़ा और ज़ोर से चोदो ना.. प्लीज़… म्म्म्मक… राजा.. तुम तो कमाल के हो.. और ज़ोर से चोदो मुझे… आज फाड़ कर ही रख दो मुझे..!’ न ज़ाने मेरे मुँह से ऐसे शब्द निकल रहे थे।‘अरे मेरी रानी… तेरे जैसा माल मुझे भी पहली बार चोदने को मिला है… रानी तू भी मज़ा ले… आज तो तुझे जन्नत की सैर कराऊँगा रानी.. पूरी रंडी बना दूँगा तुझे…!’ऐसे शब्द सुनील के मुँह से सुन कर मैं भी आस-पास का सब भूल चुकी थी और मस्ती में बोल रही थी- आअहह मेरे राजा..उम्म्म.. तू जैसा कहेगा मैं करूँगी.. पर ज़ोर से चोद..आअहह… और ज़ोर से मैं झड़ने ही वाली हूँ…और सुनील ने अपने झटके और तेज कर दिए। उसका हलब्बी लौड़ा मेरी फूल सी कोमल चूत को चीर कर हल्ला मचा रहा था।मेरी ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ से पूरा कमरा भर गया, मैं झड़ चुकी थी और एकदम टूट कर बिखर चुकी थी।उधर हिमेश अब आंटी की चूत में अपना लंड घुसा चुका था और आंटी भी मज़े से चुदवा रही थीं लेकिन हिमेश 4-5 मिनट में ही झड़ गया और आंटी की चूत में अपना वीर्य उड़ेल कर उठ गया।लेकिन सुनील अपनी मशीनगन को रोकने के मूड में नहीं था। वो झटके पे झटका दिए जा रहा था, मैं फिर से गर्म हो गई थी।ऐसा एक घंटे भर तक चलता रहा, मैं अब तक तीन बार झड़ चुकी थी, फर्श पर मेरी चूत का रस फ़ैल रहा था।फिर सुनील बोला- ले रानी.. अब तेरी चूत में भी अपना बीज डाल रहा हूँ।ऐसा कह कर वो झड़ गया और मेरी चूत के अन्दर अपना गर्म वीर्य निकाल प्रिया, मेरी चूत को अपने वीर्य से पूरा भर प्रिया।थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा, फिर उन दोनों ने अपने कपड़े पहने।तब तक रात के 10 बज चुके थे, उन दोनों ने फ्रिज में से पानी की बोतल निकाली और पूरी बोतल पी गए। दूसरी बोतल से हमको भी पिलाया, फिर रसोई से एक बड़ा चाकू ले आया।सुनील बोला- अगर तुम लोग अब कुछ उल्टा-सीधा ना करो तो मैं तुम दोनों को खोल देता हूँ लेकिन अगर कुछ उल्टा-सीधा किया तो मैं इस चाकू से दोनों को ख़त्म कर दूँगा।हमने ‘हाँ’ में सर हिलाया तो उसने हम दोनों को खोल प्रिया। मेरी बाहें अकड़ गई थी, आंटी का भी बुरा हाल था।आंटी ने कहा- अब तुम दोनों को संतोष मिल गया है, अब तुम जाओ यहाँ से।सुनील ने कहा- अरे अब तो तुम दोनों हमसे एक बार चुद चुकी हो, अब एक बार चुदो या 3-4 बार चुदो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, इसलिए आज हमारी रात रंगीन कर दो, सुबह हम चले जाएँगे। हमें भी मालूम है कि तुम दोनों को मज़ा आ रहा है।आंटी मेरी पास आई और बोलीं- निशा, क्या करें? एक बात मैं तुझे बताऊँ कि तेरे चाचा से मुझे इतना संतोष कभी नहीं मिला और तुझे भी तेरे बॉय-फ्रेंड से इतना संतोष नहीं मिलता होगा। आज की रात मज़े करने हैं?मैं उनकी स्कीम समझ तो रही थी पर मुझे भी चुदाई में मजा आ रहा था तो मैंने उनको ‘हाँ’ कहा। फिर रसोई में कुछ खाना बना पड़ा था, उसे निकाल कर हम सबने खाया।अब हम सब खुल कर मजे करना चाहते थे।उस रात उन दोनों ने और दो बार हमको चोदा, सुबह होते ही वो दोनों चले गए, हमने भी रात वाली बात अपने मन में दबा ली।फिर 4-5 दिन वहाँ रहने के बाद मैं वड़ोदरा वापस अपने माता-पिता के पास आ गई लेकिन उसके बाद मेरा मासिक नहीं आया तो मैं समझ गई कि गड़बड़ हो गई है।मैं बहाना बना कर वापिस अमदाबाद आंटी के पास आ गई और उनको बताया। फिर हमने महिला चिकित्सक के पास जाकर मेरा गर्भपात करवा लिया।आंटी ने मुझसे कहा- उस रात के बाद सुनील और हिमेश के साथ दुश्मनी ख़त्म हो गई है और जब भी मौका मिलता है, हम तीनों चुदाई करते हैं।मैं मुस्कुरा उठी लेकिन मैं कुछ बोला नहीं।मुझे मालूम था कि अंकल की गैरमौजूदगी में आंटी की चूत के लिए लण्ड की जरूरत पूरी करने के लिए कोई तो साथी चाहिए ही था। आपके विचार मेरी ईमेल आईडी पर आमंत्रित हैं।support@mohakkisse.com