दोस्तों मेरा नाम अवंतिका है, और मैं अपनी पहली चुदाई की कहानी लेकर आई हूँ। उम्मीद है आप सब मेरी कहानी को पसंद करोगे। चलिए अब बिना ज्यादा टाइम बर्बाद किए सीधी कहानी पर आते हैं।
नाम तो मैंने आपको बता ही दिया है। मेरी उमर 24 साल है, और मैं एक एम.एन.सी. में नौकरी कर रही हूं। ये बात 2 साल पहले की है जब मैं कॉलेज के फाइनल ईयर में थी। रंग मेरा गोरा है, और उस वक़्त मेरा फिगर 34-30-34 था। मैं ज्यादा जींस और टी-शर्ट ही पहनती हूं। हां लेगिंग्स-कुर्ती और लेगिंग्स-टी-शर्ट पहनती हूं।
2 साल पहले जब मेरे एग्जाम होने वाले थे, तो घर में मम्मी-डैडी के बहुत झगड़े हुआ करते थे। झगड़े इतने बढ़ गए कि घर में टेंशन का माहौल था, और मम्मी-पापा के तलाक तक की बात आ गई थी।
क्योंकि मेरे एग्जाम थे, और मैं घर पर रह कर पढ़ नहीं पा रही थी, तो दादा-दादी ने मुझे चाचू के घर भेज दिया। मेरे चाचू, चाची के साथ दूसरे घर में किराए पर रहते थे। वो घर हमारे घर से 40 किमी दूर था। चाचू-चाची वहां रहते थे, क्योंकि उनका ऑफिस वहां से पास पड़ता था।
चाचू उस वक्त 32 साल के थे, और अभी 2 साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। उनका कोई बच्चा नहीं था। मैं वहां गई, तो वहां का माहौल बहुत अच्छा था। चाचू और मेरी तो पहले से ही बनती थी। चाची भी बहुत अच्छी थी।
अभी कुछ ही दिन हुए थे मुझे वहां, कि एक रात मैंने चाचा-चाची की चुदाई देखी। हुआ यू, कि मैं रात में सो रही थी, और अचानक से मेरी नींद खुल गयी। मुझे बाहर से कुछ आवाज़ आ रही थी। आवाज़ सुन कर मैं थोड़ा घबरा गई कि कहीं किसी को कुछ नहीं हुआ।
फ़िर मैं जल्दी से बाहर चली गई। आवाज़ चाचा-चाची के कमरे से आ रही थी। उनके कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था, तो मैंने अन्दर झांक कर देखा। अंदर देखते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए। चाची नंगी होके चाचा के ऊपर बैठी थी, और चाचा का लंड चाची की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। चाची लंड पर कूद रही थी, और चाचू भी नीचे से धक्के लगा रहे थे। दोनों ज़ोर-ज़ोर से आह्ह आह्ह कर रहे थे।
ये नजारा देख कर मेरे जिस्म में करंट सा दौड़ने लगा। चाचू का लंड देख कर मुझे अजीब सी लगने लगी। ऐसा नहीं था कि मैंने कभी पोर्न नहीं देखा था। लेकिन ये पहली बार मैं किसी की लाइव चुदाई देख रही थी।
फिर मैंने सोचा कि मुझे वहां से अपने कमरे में चले जाना चाहिए। लेकिन पता नहीं कहां से मेरे अंदर से आवाज आई कि देख के जाती हूं। तो मैं वहीं रुक गयी, और चुदाई देखने लगी।
कुछ देर चाची उछल कर चुदती रही। फिर वो नीचे उतरी, और गांड बाहर निकल कर घोड़ी बन गई। अब चाचू पीछे आये, और चाची की चूत में अपना लंड डाल कर चोदने लगे। ये नजारा देख कर मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चूत पर चला गया, और मैं चूत मसलने लगी।
धीरे-धीरे मैं बहुत उत्साहित हो गई, और मेरी आंखें बंद होने लगी। मैं मदहोश होने लगी, और मेरा शरीर झटके देने लगा। फ़िर मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। ये मेरे साथ पहली बार हुआ था, जब मेरी चूत ने पानी छोड़ा हो। उसके बाद मैं वहां से अपने कमरे में चली गई।
अगले दिन मुझे चाचू को देख कर आकर्षण सा महसूस होने लगा। मेरी नज़र बार-बार उनकी पैंट की तरफ जा रही थी, कि वो इतना बड़ा लंड अंदर कैसे छुपाते थे। सारा दिन ऐसे ही निकल गया। फिर रात में जब मैं सोने लगी, तो मुझे पिछली रात के ख्याल आने लगे। आज मुझे कोई आवाज नहीं आ रही थी। लेकिन फिर भी मैं उनके कमरे के बाहर जाके खड़ी हो गई। फिर उनकी चुदाई का मजा लिया।
Pehli girlfriend shikha ki chudai-2
अब ऐसा रोज़ होने लगा। वो हर रोज चुदाई तो नहीं करते थे। लेकिन जिस दिन भी करते थे, मैं देख रही होती थी। इस दौरान मुझे पता ही नहीं चला कि चाचा ने मुझे कब देख लिया उनके कमरे में झांकते हुए। ये मुझे बाद में पता चला, जब चाचा मेरे कमरे में आये।
एक रात मैं जब चाचा-चाची के कमरे से बाहर चली गई, तो वो सो चुके थे। मुझे चुदाई देखने की बहुत तलब लगी थी। फिर मैं अपने कमरे में गई, और नीचे से नंगी होके अपनी चूत में फिंगरिंग करने लगी। मैं बिल्कुल मदहोश होके फिंगरिंग कर रही थी। फिंगरिंग करते हुए मेरे मुँह से चाचू का नाम निकल रहा था।
मुझे इतना भी पता नहीं चला कि कब चाचू मेरे कमरे में आये, और मुझे फिंगरिंग करते देखने लगे। मैं फिंगरिंग कर रही थी, तो अचानक चाचू ने मेरे पास आके मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया। इससे मैं उछल पड़ी, और डर गई। मैं सीधी होके बैठ गई। फिर मैंने देखा कि वो कोई और नहीं चाचू थे, जिन्होंने मुँह लगाया था।
चाचू मेरी तरफ कामुक नज़रों से देख रहे थे। मैं नजरें झुका कर बैठी थी, बोलती भी क्या? फिर चाचू मेरे करीब आये, और मेरी जांघ पर हाथ रखा। मेरी पूरी बॉडी में सिहरन होने लगी। चाचू का हाथ आगे बढ़ गया, और वो मेरी गांड तक आ गए।
अब वो मेरे बिल्कुल करीब थे। फ़िर चाचू ने अपना मुँह चूमने के लिए आगे किया। मैं हां और ना के बीच फंसी हुई थी कि क्या करूं। जब तक मैं कोई फैंसला करती, जीजू के होंठ मेरे होंठों से चिपक गए, और हम किस्स करने लगे। मैं किस में खो गई, और चाचू की मर्जी मेरी मर्जी हो गई।
किस्स करते हुए चाचू मेरे बदन को सहलाने लगे, और मेरे कपड़े उतारने लगे। कुछ ही मिनटों में मैं उनके सामने नंगी थी। फ़िर उन्होंने मेरी कुंवारी चूत को देखा। उसके बाद उनका लंड चूत के मुँह पर रखा, और दबाव बनाया। उनके लंड का टोपा मेरी सील तोड़ कर अंदर घुस गया।
मुझे दर्द हुआ, लेकिन मैंने अपनी चीख दबा ली। ऐसे ही उन्होंने धीरे-धीरे अपना पूरा लोड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। साथ में वो मेरे होंठ चूस रहे और स्तन दबाते और चूसते रहे।
शुरू-शुरू के दर्द के बाद मुझे मजा आने लगा। फिर मैंने उनको चोदने को बोला तो वो लंड चूत में अंदर-बाहर करने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने स्पीड बढ़ाई, और मुझे उसी स्पीड में चोदने लगे जैसे चाची को चोदते थे। मैं सोच रही थी कि चाची कितनी किस्मत वाली थी, जो उनको जब चाहे इतने बड़े लंड का स्वाद मिल रहा था।
चाचू ने मुझे आधे घंटे तक चोदा। इस बीच मैं 3 बार झड़ गई। फ़िर उनको लंड चूत से निकाला, और मेरे पेट पर अपने माल की पिचकारी निकाल कर चले गए। मैं वैसे ही सो गयी। मैं 15 दिन और वहां रही, और इस दौरान चाचू ने हर रात मुझे चोदा। अपनी पहली चुदाई का अनुभव हमेशा याद रहेगा।
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