कोई मिल गया

जन्म दिन पर चुदी शिखा रानी-3

लेखक: चूतेश दिनांक: 16-05-2023 पठन समय: 2 मिनट

चूतेशअब तक मैं भी बेतहाशा उत्तेजित हो चुका था। मैंने तुरंत शिखा रानी की टांगें चौड़ी कीं और उनके बीच में घुटनों पर बैठ के लंड को चूत से लगाने ही वाला था कि शिखा रानी ने रोका- एक पल रुक राजे…ज़रा मैं अपने भोले का स्वाद तो चख लूँ…उसने तपाक से उठ कर मेरे तन्‍नाये हुए लौड़े के सुपारे को पहले तो चमड़ी पीछे खींच कर नंगा किया और फिर उस पर अपनी गीली जीभ फिराई।ऊऊऊँ… ऊऊँ… ऊऊऊँ… आवाज़ निकालते हुए शिखा रानी ने लंड को मुख में ले लिया और थोड़ी देर मज़े ले ले कर चूसा।एक बार गले तक लंड को अंदर लिया और फिर बाहर निकाल कर बोली- राजे… राजे मज़ा आया… अब कर ले संगम !मैंने शिखा रानी की दोनों पैर अपने कंधों पर टिका लिये और उसकी चूत को निहारा।गुलाबी गुलाबी सी चूत रस छोड़े जा रही थी, बाहर तक गीली हो गई थी, झांटें बिल्कुल साफ की हुई थीं और चूत के आसपास का सारा बदन एकदम चिकना था।मैंने लंड को चूत के होठों पर घुमाया, टोपा चूत रस से बिल्कुल भीग गया।शिखा रानी ने एक सीत्कार भरते हुए मेरी बाहों को ज़ोर से जकड लिया- राजे, क्यों तड़पाता है… राजे प्लीज़ अब देर मत कर…बस घुसा दे मूसल चंद को.. अब नहीं सबर हो रहा।मैंने लौड़े को उस खूबसूरत सी भीगी भीगी बुर के मुँह पर रखा और आहिस्ता से टोपा घुसाया।‘माँ….माँ….ये क्या हो रहा है हमें…इतना मज़ा क्यों आ रहा है….हाय हाय हाय हम क्या करें राजे…राजे तू ही बता….आआआह आआआह…’ वो अपना सिर इधर उधर हिला रही थी मस्ती में चूर मतवाली हो गई थी।मैंने थोड़ा सा लण्ड पीछे लिया और फिर धमाक से पूरा लंड पेल प्रिया कि सुपारा जाकर शिखा रानी की बच्चेदानी से ठुका।उसके मुख से एक तेज़ सीत्कार निकली, उसके नाखून मेरी कलाइयों में गड़ गये, वो हाँफने लगी और हाँफते हाँफते बोली- राजे..बस यूं ही पड़े रहो…ज़रा भी धक्का ना लगाना… हम लंड को अपने अंदर महसूस करना चाहते हैं.. इसका तुनका हमें अपनी चूत में चाहिये… बस तुनके मारे जा… हाँ…यूं ही… हाँ… हाँ…हाँ… तू बहुत होशियार है राजे… मैं जो चाहती हूँ समझ लिया तैने… हाँ… हाँ… हाय मैं मर जाऊँ…