सारिका कंवलअब मैंने उसका लिंग हाथ में ले लिया तो मुझे करन्ट सा लगा और मेरी आँखें खुल गईं।तभी मेरी नजर बिस्तर पर सोये हुए मेरे बच्चे पर गई और मैं रुक गई।इस पर अमर ने पूछा- क्या हुआ, भयभीत क्यों हो रही हो, मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा जिससे तुम्हें तकलीफ़ हो।तब मैंने उसे बताया कि क्या बात है। उसने बच्चे को पालने में सुला प्रिया और फ़िर मेरे पास आ गया।अब अमर मेरे पास आए और मुस्कुराते हुए कहा- मुझे लगा तुम मेरे लिंग का आकार देख कर भयभीत हो गई..!और वो जोर-जोर से हँसने लगा। मैंने उसको शान्त किया कि कोई सुन ना ले।फ़िर मैंने उससे कहा- ऐसी बात नहीं है..!पर उसके लिंग का आकार को देख कर मुझे जरा भय तो लगा क्योंकी उसका लिंग काफी लम्बा था।अब हम फ़िर से एक-दूसरे की बांहों में खोकर प्यार करने लगे।अब तो मैं पूरी तरह से गर्म और गीली हो चुकी थी और अमर के लिंग में भी काफ़ी तनाव आ गया था।अमर ने मुझसे कहा- सारिका, अब और नहीं रहा जाता, मैं जल्द से जल्द सम्भोग करना चाहता हूँ।मैंने भी सिर हिला कर उसको इशारे से ‘हाँ’ कह प्रिया। मेरे अन्दर चिंगारी जल रही थी और मैं भी जल्द शांत होना चाह रही थी।अब उसने एक तकिया मेरी कमर के नीचे रख प्रिया और मेरी जाँघों के बीच आ गया और मेरे पैरों को फ़ैला कर मेरे ऊपर लेट गया।उसका लिंग मेरी योनि से स्पर्श कर रहा था, उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया और मैंने भी उसे जकड़ लिया।अमर ने मुझसे पूछा- क्या तुम तैयार हो?मैंने भी हाँ में जवाब प्रिया। अब अमर अपने लिंग को मेरी योनि में घुसाने की कोशिश करने लगा, पर जब भी वो करता लिंग फ़िसल जाता।तब उसने मुझे सहयोग करने को कहा। अब मैंने उसके लिंग को हाथ से योनि के ऊपर रखा और अमर से जोर लगाने को कहा।उसका लिंग मेरी योनि में घुसता चला गया। और मुझे हल्की सा दर्द हुआ, मैं सिसक गई। यह देख कर अमर ने मुझे चूम लिया।