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भाभी की चुदाई • पठन समय: 23 मिनट • पढ़ा गया: 884 बार

चुदासी भाभी का इलाज चुदाई से

माइसेल्फ

08 Jun 2024 को प्रकाशित

चुदासी भाभी का इलाज चुदाई से
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मैं उड़ीसा का रहने वाला हूँ. मेरी पिछली कहानी थीऔरतों की गांड मारने की ललकमेरे जीवन में कुछ अजीब घटनाएँ घटीं, जिनके बारे में मैंने कभी सुना या देखा नहीं था.ऐसी ही एक घटना मैं अंतर्वासना के पाठकों को सुनाना चाहता हूँ.

उस समय मैं कॉलेज में था, शायद 19 साल की उम्र होगी. मेरी चाची के घर में एक किरायेदार रहने आए. वो लोग बिहार के थे. पति दर्ज़ी था, एक टेलर की दुकान में काम करता था. पत्नी का नाम रज़िया था. पति मंसूर की उम्र 40 के पार थी, जबकी रज़िया कोई 24-25 की होगी. मंसूर काफ़ी मज़ाक़िया, हँसमुख आदमी था. अपने अच्छे व्यवहार के चलते वह कुछ ही दिनों में पड़ोसियों से घुलमिल गया था. किसी का कोई भी काम हो, वह आगे बढ़कर करता था.बड़े-बूढ़े तो उसे पसंद करते ही थे, नौजवान और बच्चे भी उससे काफी प्यार करते थे.

रज़िया भी सबसे हंसकर बात करती थी तथा ज़रूरत पर सबकी मदद करती थी. उनका सिर्फ़ एक ही दुख था कि उनकी कोई औलाद नहीं हुई थी. दोनों को ही बच्चों से बहुत प्यार था पर शादी के 7 साल बाद भी उनकी गोद खाली थी. पर इस दुख के बावजूद दोनों बड़े हँसमुख थे.मेरी चाची का घर हमारे घर से थोड़ी ही दूर था, तो मैं अक्सर खाली समय में वहाँ जाया करता था. मेरी मुलाक़ात उन दोनों से हुई, बातें हुई, और अच्छी पहचान बन गई क्योंकि मैं भी मज़ाक और जोक्स का माहिर था, तो हमारी खूब जमने लगी. मैं जब भी जाता, रज़िया भाभी को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देता. हाल यह हुआ कि अगर कभी पति-पत्नी में झगड़ा हो गया, भाभी रूठ गई, या उदास हुई, तो मंसूर भाई मुझे बुलवाते थे ताकि मैं भाभी को हँसा सकूँ.

भाभी बहुत खूबसूरत थी. गोरा रंग, बड़ी-बड़ी शरारती आँखें, गुलाबी होंठ. उनका शरीर सामान्य था, न ज़्यादा दुबला, न मोटा. उनकी चूचियाँ भी मंझले आकार की थीं, पर नितंब बड़े-बड़े थे, पीछे को निकले हुए. मुझे उनके शरीर में सबसे ज़्यादा आकर्षक उनकी गांड ही लगती थी. हालाँकि मैं उन्हें बुरी निगाह से नहीं देखता था, न ही उनकी नज़र में मुझे कुछ वैसा दिखाई देता था.

पर एक बात थी, जिसके लिए वह मेरी चाची से डाँट सुनती थी. उसे कपड़े पहनने का सलीका नहीं था. वह कुछ भी पहने, उसके शरीर के उभार दिखाई देते थे. उसका आँचल या दुपट्टा कभी सही जगह पर नहीं रहता था. कभी उसकी चूचियाँ आधी दिखाई देती थीं, तो कभी जांघें. और उसके बात-बात पर खिलखिलाने पर भी मेरी चाची उसे डाँटती रहती थी.

धीरे-धीरे जैसे-जैसे हम क्लोज़ होते गए, रज़िया भाभी मुझसे ज़्यादा मज़ाक करने लगी. कभी कभी वो इशारों में सेक्स की बात भी मज़ाक में कह देती थी.जैसे कि ‘अभी क्या पता चलेगा बच्चू, जब दिन भर ऑफिस में क़लम घिसने के बाद रात में बीवी की धान कुटाई करनी पड़ेगी, तब समझोगे.’या फिर ‘लगता है तुम्हारी तो सील भी नहीं टूटी है.’या फिर ‘कभी अंदर भी पिचकारी मारी है, या बाथरूम में ही बहा देते हो सब?’

एक बात मैंने नोट की थी, कि रज़िया भाभी की तबियत कभी-कभी अचानक ख़राब हो जाती थी. वह चादर ओढ़ कर दिन भर सोई रहती थी, किसी से बात नहीं करती थी. पति और दूसरे लोग लाख बोलें, पर अस्पताल भी नहीं जाती थी. मैं उन्हें ऐसी हालत में देखता, तो हाल-चाल पूछकर चुपचाप चला आता था.

एक दिन मेरी छुट्टी थी, तो मैं सुबह ही भाभी के घर गया, दोनों ने खूब बातें की, हँसी मज़ाक़ किया, फिर मैं चला आया. दोबारा लगभग 4 बजे मैं उनके घर गया कि उनके हाथ से बनी चाय पी जाए, तो वह चादर ओढ़कर सोई हुई थी.मैंने पूछा- क्या हुआ?तो धीरे से बोली- तबीयत ठीक नहीं लग रही. तुम बैठो.तो मैंने पूछा- क्या हुआ, कैसा लग रहा है?

तो थोड़ी देर चुप रहने के बाद वह बोली- छोड़ो, तुम नहीं समझोगे. मैंने कई बार पूछा तो बोली पूरे बदन में दर्द है, सिर चकरा रहा है.मैंने कहा- लाइए, मैं आपके सिर पर बाम लगा देता हूँ.उन्होंने मुझे मना किया पर मैं ज़िद करके उनके माथे पर बाम लगाने लगा.वो आँखें मूंदकर लेटी रही.

थोड़ी देर बाद उन्होंने आँखें खोलीं, मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर बोली- तुम तो बड़ी अच्छी मालिश करते हो. तुम्हारी बीवी बड़ी खुश रहेगी तुमसे. वैसे बीवी को खुश करने के लिए और क्या-क्या जानते हो?मैं शरमा गया और चुप रहा.

फिर मैंने उनके पैरों पर तेल लगाने की पेशकश की तो उन्होंने फिर मना किया, पर मैं नहीं माना और चादर के अंदर हाथ घुसाकर उनकी नाइटी के अंदर उनके पैरों पर तेल लगाकर मालिश करने लगा. थोड़ी देर में मुझे महसूस हुआ कि भाभी के शरीर में कंपन हो रहा है, वह बेचैन सी हो रही है और उनकी साँसों की रफ़्तार तेज़ हो रही है.मुझे लगा कि उनकी तबियत ठीक न होने के कारण ऐसा हो रहा है.

फिर उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ कर और ऊपर सरकाया, तो मेरे हाथ उनकी मोटी जांघों पर पड़े. मैं जांघों पर मालिश करने लगा. उनकी नर्म, गुदाज़ जांघें छूकर मुझे अजीब सी सनसनी होने लगी और मेरा लंड तनने लगा.

वह अब धीरे-धीरे सिसकारियाँ भरने लगी. उनका बदन ऐंठने लगा. थोड़ी देर बाद उन्होंने अचानक मेरा एक हाथ पकड़ा और उसे एकदम दोनों जांघों के बीच रख प्रिया.मुझे नर्म-नर्म बलों का एहसास हुआ और मैं समझ गया कि यह उनकी चूत है.

मैंने इससे पहले न कोई वयस्क चूत देखी थी, न छुई थी. मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया. मेरी समझ में नहीं आया कि क्या करूँ. उन्होंने मेरे हाथ को ऊपर नीचे किया, तो मैं उनकी बुर को सहलाने लगा. वह अब ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने के साथ आह … ओह … करने लगी. फिर उन्होंने अपनी टाँगों को फैला प्रिया और मेरे हाथ को पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख प्रिया. मैंने उनकी बुर के छेद को सहलाना शुरू किया तो उसमें से पानी निकलने लगा.

मैंने अपनी एक उंगली उनकी बुर में घुसा दी, तो उनके शरीर ने ज़ोर का झटका लिया. मैं उंगली को अंदर बाहर करने लगा, तो वह अपने चूतड़ हिलाकर उसे जगह देने लगी. फिर मैंने दो उंगलियाँ अंदर बाहर करनी शुरू की. अब उनके शरीर की हरकत बेक़ाबू होने लगी थी. वो ज़ोर-ज़ोर से ऊपर-नीचे होकर मेरी उंगलियों को अंदर-बाहर करने लगी. साथ ही उनके मुँह से अजीब-अजीब आवाज़ें निकलने लगीं.मैं और ज़ोर से उनकी बुर में उंगलियाँ पेलने लगा. थोड़ी देर बाद वो ज़ोर-ज़ोर के झटके लेने लगी, और फिर शांत हो गई. उनकी चूत से ढेर सारा पानी निकलने लगा. मेरी उंगलियों से लेकर मेरी हथेली तक भीग गई. उनके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान खिल गई.

फिर उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया. मैं उनके पास जाकर खड़ा हो गया. उन्होने मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ कर दबाया, उसे लोहे की तरह सख़्त देख हँसने लगी. फिर उन्होंने मेरी ज़िप खोलकर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. अपनी हथेली में उन्होने मेरे लंड को थाम कर हिलाना, सहलाना शुरू किया.

मुझे ऐसी सनसनी हुई जो पहले कभी नहीं हुई थी. उनके हाथ का स्पर्श मुझे मदहोश कर रहा था. थोड़ी देर में ही काफ़ी समय से खड़ा, बेचैन लंड बेक़ाबू हो गया और मेरे रोकते रोकते भी मेरे लंड से सफेद वीर्य की पिचकारी निकल गई, जो पहले उनके बिस्तर के पार की दीवार से टकराई, फिर उनके शरीर पर गिरी. उन्होंने मेरे लंड को सहलाना जारी रखा, जब तक कि मेरे लंड का एक-एक बूँद रस निकल नहीं गया.उनकी नज़रें मेरे चेहरे पर टिकी हुई थी, और मैं शर्म से उनसे आँखें नहीं मिला पा रहा था.

उन्होंने धीरे से कहा- किसी से कहना मत.मैं वहाँ से ऐसे भागा, जैसे भूत देख लिया हो.

मुझे उस दिन हर पल वो घड़ियाँ याद आती रहीं. अजीब सा एहसास मेरे अंतर्मन को गुदगुदाता रहा. मुझे बार-बार रज़िया भाभी के पास जाने का मन करने लगा, पर मैं गया नहीं. मैं दूसरे दिन भी उनके घर नहीं गया.तीसरे दिन मैं गया तो शर्म के मारे मैं रज़िया भाभी से नज़र नहीं मिला पा रहा था. पर वह उसी तरह हँसी ठिठोली कर रही थीं. उनकी आँखों मे एक अलग ही चमक नज़र आई मुझे.धीरे-धीरे मैं भी सामान्य हो गया और फिर से हम पहले की तरह बातें करने लगे.

10-12 दिनों के बाद फिर वैसी ही घटना हुई. मैं भाभी के घर गया तो वह चादर ओढ़े सोई थी.मैंने पूछा- क्या हुआ?तो उन्होने कहा- तबीयत ठीक नहीं, सारा बदन दर्द कर रहा है, सिर चक्कर खा रहा है. थोड़ी मालिश कर दो न!

मैं फिर से तेल लेकर उनकी मालिश करने लगा. इस बार वह बड़े आराम से मालिश करवा रही थी. 10 मिनट की मालिश के बाद फिर से वो सिसकारियाँ लेने लगी, बदन मरोड़ने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने खुद ही उनकी चूत को सहलाना शुरू कर प्रिया. उन्होंने अपनी टाँगें खोल दी और मेरी उंगलियों को जगह देने लगी. लेकिन इस बार उनकी बुर एकदम साफ, चिकनी थी, एक भी बाल नहीं था उस पर.मैंने फिर से पहले एक, फिर दो उंगलियाँ उनकी चूत में घुसा दीं और उन्हें अंदर बाहर करने लगा. वह तड़पने लगी, आह … ओह करने लगी. काफ़ी देर मैं उनकी बुर में उंगलियाँ पेलता रहा और वह कराहती रही.

फिर उसने अजीब सी हरकत की. अचानक उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ा और खींच कर अपनी दोनों टांगों के बीच घुसा प्रिया. मैं समझ नहीं पाया कि वह चाहती क्या है.तो उसने अपनी उंगली को मेरे होंठों पर फेरा, और फिर उन्हें अपनी चूत पर रगड़ा. फिर धीरे-धीरे मेरे सिर को पकड़ कर अपनी जांघों के बीच ऐसे खींचा कि मेरे होंठ उनकी बुर से जा लगे. फिर वह अपने चूतड़ को उठा कर मेरे होंठों पर अपनी चिकनी चूत को रगड़ने लगी. मैं अनायास ही उनकी चूत को चाटने लगा. इस बार उनकी सिसकारी उम्म्ह… अहह… हय… याह… एक चीख जैसी थी.साथ ही उनका पूरा बदन थरथरा गया.

वह ज़ोर-ज़ोर से अपनी गांड को उचका-उचका कर मेरे मुँह पर अपनी चूत को रगड़ने लगी, साथ ही दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी. मैं जोश में आ गया था, हालाँकि यह सब मैंने पहले कभी किया नहीं था. पर न जाने कैसे, अपने आप मुझसे सब कुछ होता जा रहा था. पहली बार मैं कोई चूत चाट रहा था, पर मुझे कोई घिन्न नहीं आ रही थी, बल्कि सच बोलूं तो मुझे भी मज़ा आ रहा था भाभी को आनंद से सर धुनते देख कर. मुझे तब पता चला कि औरत के इस छोटे से छेद में उनके आनन्द का दरिया छिपा है.

अब मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत के ऊपर की घुंडी को सहलाना शुरू किया, तो वह और ज़ोर-ज़ोर से गांड हिलाने लगी. मैंने अपनी जीभ को उनकी बुर के अंदर घुसा प्रिया. इस बार उनके शरीर ने पहले से भी ज़ोरदार झटका लिया, और उनके गले से ऐसी आवाज़ निकली, जैसे उनकी साँस फँस गई हो.मैं जीभ से उनकी चूत के अंदरूनी हिस्से को चाटने लगा. उनकी बुर से झरने की तरह पानी निकलने लगा, जिसे मैं पीता गया.

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फिर मैंने अपने होंठों को गोल करके उनकी मांसपेशियों को अपने मुंह के अंदर खींचा. और बार-बार ऐसे ही करने लगा. अब भाभी जैसे पागल हो गई. उन्होंने मेरे सिर को ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी बुर की ओर खींचने के साथ ही अपनी चूत को मेरे मुंह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी. मेरी साँस बंद हो गई, पर मैं बदस्तूर उनकी बुर को ज़ोर-ज़ोर से चाटता, चूसता रहा. ऐसे कुछ ही मिनट किया कि भाभी के शरीर ने ज़ोर-ज़ोर से झटके लेने शुरू किए, और उनके मुंह से आ … आह … उम्म्म … ओह्ह … अहा … माँ … ओह्ह … की आवाज़ें निकलने लगीं.उनकी चूत से गाढ़ा-गाढ़ा पानी निकलने लगा, जिसमें एक अजीब सी सुगंध थी. मैं उसे पीने लगा … स्वाद भी मुझे बड़ा अच्छा लगा. इधर मेरा लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था. कुछ देर झटके लेने के बाद वह शांत हो गई.

अब भाभी की बारी थी. उन्होंने मुझे पास बुलाया, मैं उनके पास जाकर खड़ा हो गया. उन्होंने मेरी पैंट को खोला, और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया. उसे देखकर मुस्कराई, फिर हाथ से थाम कर पहले की तरह आगे-पीछे करने लगी. जोश के मारे मेरा लौड़ा तनकर खड़ा था, उसके छेद से चिपचिपा पानी निकल रहा था. पानी को भाभी ने पोंछ प्रिया और अपनी जीभ से उसे धीरे-धीरे चाटने लगी.पहले सुपाड़े को गोल-गोल जीभ घुमाकर चाटा, फिर दोनों साइड पर जीभ फेरने लगी. मेरे सारे शरीर में सिहरन होने लगी और लौड़े में जैसे करंट भर गया.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद भाभी ने पूछा- अच्छा लग रहा है?मैंने सिर हिलाकर हाँ कहा.

वह फिर मेरे लंड पर झुक गई. इस बार उन्होंने मेरे सुपारे को मुंह में भर लिया और चूसने लगी. आनंद के कारण मेरी आंखें बंद होने लगीं. धीरे-धीरे वह अपने सिर को आगे पीछे करके मेरे लंड को चूसने लगी. साथ ही वह मेरे लंड को थोड़ा-थोड़ा अंदर लेने लगी. ऐसे करते-करते आखिर उसने मेरे पूरे लंड को मुंह में भर लिया. उसके होंठ मेरे लंड की जड़ पर जा सटे, उसके गले तक मेरा लौड़ा पहुंच गया था.

फिर वह ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को चूसते हुए सिर को आगे-पीछे करने लगी. मेरी कमर अपने आप आगे-पीछे होने लगी और जैसे मैं उसके मुंह को चोदने लगा. एक हाथ से वह मेरी गोलियों को सहलाने लगी. मुझे इतना मज़ा आया, जैसे मैं जन्नत में पहुँच गया हूँ.

धीरे-धीरे मेरी कमर की रफ़्तार बढ़ने लगी और जोश में मैंने भाभी के सिर को पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींचने लगा. अब मैं पूरी रफ़्तार से उनके मुंह को चोद रहा था, उनके गले से घुटी-घुटी आवाज़ निकलने लगी थी और आँखों से पानी बहने लगा था.मैं पूरे लंड को उनके मुंह में धकेल रहा था जो उनके गले तक जा रहा था.

अब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपने लंड को उनके मुंह से निकालना चाहा पर उन्होंने सिर हिलाकर मना किया और मेरी कमर के पीछे हाथ रखकर मुझे आगे को खींचा. मेरे पास सोचने का समय नहीं था, मैं और ज़ोर-ज़ोर से उनके मुंह में लंड घुसाने-निकालने लगा.उनके मुंह से लार निकलकर नीचे टपकने लगी था. अब मैं बेकाबू हो गया था. दो चार ज़ोरदार झटकों के साथ मैंने भाभी के मुंह में अपने लंड को धकेला, और मेरे लंड से गर्म-गर्म लावा उनके मुंह में गिरने लगा. भाभी उसे पीने लगी.

आखिर मेरे लंड से एक-एक बूँद वीर्य उनके मुंह में गिर गया और वो सारा पी गई. मैं हांफने लगा था. भाभी ने तब तक मेरे लंड को चूसना जारी रखा, जब तक मेरा लंड सिकुड़ कर अपने आप उनके मुंह से निकल न आया. मुझे बहुत मज़ा आया और फिर मैं वहां से चला आया.

अब मेरी समझ में आ गया था कि रज़िया भाभी को चुदाई न मिलने पर उनकी तबीयत खराब हो जाती है. उम्र का फासला ज़्यादा होने के कारण शायद मंसूर भाई उनकी प्यास पूरी तरह बुझा नहीं पाते थे. या शायद उन्हें जितनी बार चाहिए, उतनी बार चोद नहीं पाते थे. पर दोनों का प्यार देखने से यह पता नहीं चलता था. शायद भाभी कभी मंसूर भाई को बोल नहीं पाती होगी, ताकि उन्हें बुरा न लगे.और भी एक बात थी, भाभी ऐसे कभी मुझसे सच में चुदाई के लिए उत्सुक दिखाई नहीं देती थी, वह तभी ऐसा करती थी, जब उनकी तबीयत ख़राब हो जाती थी. तो मुझे अगली बार उनकी तबीयत खराब होने तक इंतज़ार करना था उनके साथ असली चुदाई करने के लिए.

फिर आखिर वह दिन आ गया, जिसका मुझे इंतज़ार था. उस दिन मैं रज़िया भाभी के घर गया तो फिर से भाभी चादर ताने सोई थी.मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी, फिर से तबियत ख़राब? आप ठीक से इलाज क्यों नहीं करवाती?उन्होंने लगभग कराहते हुए कहा- तो कर दो न इलाज…

मुझे तो यही चाहिए था. मैंने उनके गालों को सहलाया, फिर गले को. धीरे-धीरे मैं अपने हाथ चादर के अंदर ले गया और उनकी चूचियों को पकड़ लिया. मैं यह देखकर हैरान हुआ, और खुश भी कि उन्होंने कोई कपड़े नहीं पहने थे, पूरी तरह नंगी, चादर में लिपटी सोई थी. मैंने उनकी चूचियों को दबाना, मसलना शुरू किया तो वह कसमसाने लगी.

मैंने चुटकी में उनकी निप्पल्स को पकड़ कर मसला तो वह सिसकारी लेने लगी. मैं पहले धीरे-धीरे, फिर ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूचियों को मसलने लगा. वह मज़े लेने के साथ-साथ सी-सी कर रही थी.फिर मैंने अपने हाथ को नीचे ले जाते हुए उनकी जांघों को सहलाना शुरू कर प्रिया. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने एक हाथ उनकी चूत पर रख प्रिया … वह मचल उठी. मैं भाभी की चूत को धीरे-धीरे सहलाने लगा, उन्होंने मुझे खींच लिया और मेरे मुंह को अपनी चूचियों में दबाने लगी. मैं होंठों से उनकी चूचियों को चूमने लगा. उनका शरीर सिहरने लगा.

मैंने अपनी दो उँगलियाँ उनकी गीली चूत में घुसा दीं, और अंदर बाहर करने लगा. वह गहरी गहरी सांसें लेने लगीं और सिर इधर-उधर पटकने लगी.

फिर अचानक वह उठकर बैठ गई. उन्होंने मेरी पैंट को खोलकर ज़मीन पर गिरा प्रिया, मेरे अंडरवियर को खींच कर उतार प्रिया और मेरे लंड को मुंह में भर लिया. वह ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को चूसने लगी. मैं उनकी चूचियों से खेलता रहा.

फिर वह बेड के किनारे पर लेट गई और अपनी दोनों टांगों को फैलाते हुए ऊपर उठा लिया. यह मेरा पहला मौक़ा था जब मैं एक वयस्क चूत को सच में देख रहा था. उनकी चूत के लिप्स बड़े-बड़े था जो जोश के पानी से गीले हो गए थे. तराशे हुए झांट फिर से उगने लगे थे. उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर ऊपर नीचे रगड़ा और फिर छेद में थोड़ा सा घुसाकर टिका प्रिया. अब मेरी बारी थी. मैंने धक्का मारकर पूरा लौड़ा उनकी चिकनी, गीली बुर में घुसेड़ प्रिया.

भाभी को कोई बच्चा न होने के कारण उनकी चूत एकदम टाइट थी. उनके गले से एक ज़ोर की आह निकली. मैंने लंड को बाहर खींचा, और दोगुनी ताक़त से फिर से घुसेड़ा. वह मचल उठी. अब मैंने लय बनाकर अपने लंड को उनकी बुर के अंदर बाहर करते हुए उन्हें चोदने लगा. उनकी गीली चूत मुझे बड़ा मज़ा दे रही थी. थोड़ी ही देर में उनकी चूत की मांसपेशियां सिकुड़ने लगीं और मेरे लंड को दबाने लगी.उनके गले से अजीब-अजीब आवाज़ें निकलने लगीं. और वह अपनी गांड को ऊपर उचकाकर मेरे लंड की मार लेने लगी.

मैंने रफ़्तार बढ़ा दी और थोड़ी ही देर में दोनों हांफते हुए एक दूसरे में समा जाने को कसरत कर रहे थे. यह मेरी पहली चुदाई थी इसलिए ज़्यादा देर मैं टिक न पाया और मेरा सारा रस उनकी चूत में गिर गया. न जाने कितनी देर तक दोनों हांफते रहे. मेरा लौड़ा सिकुड़कर खुद उनकी चूत से बाहर निकल आया. उनकी चूत से मेरा गाढ़ा माल बहकर नीचे गिरने लगा.

फिर दोनों बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गए. बहुत देर हो गई थी, इसलिए मैं निकल आया.निकलते-निकलते मैंने पूछा- भाभी, अब तबीयत कैसे है आपकी?तो वह हंसकर बोली- एकदम तंदरुस्त. मुझे इसी इलाज की ज़रूरत थी.

इसके बाद हर 8-10 दिन में रज़िया भाभी मुझसे चुदवाने लगी. उन्होंने मुझे कई नए पोज़ भी सिखाए.

पर यह सिलसिला ज़्यादा दिन नहीं चल पाया. भाभी प्रेग्नेंट हो गई. मंसूर भाई का स्पर्म काउंट बहुत काम था, इसलिए वह बाप नहीं बन सकते थे. पर यह बात मंसूर भाई ने भाभी को बताई नहीं थी, तो वह समझती थी कि उनमें ही कमी है. वह तो खुश थी कि वह माँ बनने वाली है. पर मंसूर भाई समझ गए कि रज़िया भाभी ने किसी और से चूत मरवाई है और प्रेग्नेंट हो गई है.

पर उनके प्यार को मुझे सलाम करना पड़ा कि फिर भी उन्होंने रज़िया भाभी की माँ बनने की ख्वाहिश का सम्मान किया. वह समझ गए थे कि उस बच्चे का बाप मेरे सिवा कोई नहीं हो सकता. पर वह मुझ पर भी नाराज़ नहीं हुए. बस, ज़िन्दगी में पहली बार उन्होंने बड़ी संजीदगी से मुझे भाभी से मिलने को मना किया. और फिर एक महीने के अंदर ही वो शहर छोड़ कर कहीं और चले गए.तब से आज तक हमारी न मुलाक़ात हुई, न कोई बात. तब मोबाइल तो था नहीं, लैंड लाइन फोन भी बहुत कम घरों में था.

आज जब मैं 45 का हूँ, तो सोचता हूँ, उनका (या मेरा) बच्चा कितना बड़ा हो गया होगा? और यह भी, कि यहाँ से जाने के बाद चुदाई न मिलने पर भाभी की तबियत खराब होती होगी, तो वो क्या करती होगी? वैसे ही तड़प-तड़प कर दिन काटती होगी, या फिर मेरी तरह कोई मिल गया होगा?support@mohakkisse.com

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