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Office Sex पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 436 बार

डलहौजी का सुहाना सफ़र

जिम्मी

08 May 2009 को प्रकाशित

डलहौजी का सुहाना सफ़र
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जिम्मी

मेरा नाम जिम्मी है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 27 साल है और मैं शादीशुदा हूँ, मैं एक बिजनेसमेन हूँ!

वैसे तो मेरी ज़िन्दगी में बहुत सी लड़कियाँ आईं उनमें से आपको एक अपनी ज़िन्दगी की सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

कहानी तब की है, जब मेरी शादी नहीं हुई थी, मैंने अपना नया-नया कारोबार चालू किया था और मैंने तीन नए दफ़्तर चालू किए थे और मैंने अपने हर एक नए दफ़्तर में तीन-चार लड़कियाँ रखी थीं और सब की सब एक से बढ़ कर एक सुन्दर थीं।

उनमें से कुछ लड़कियाँ मुझे पसन्द करने लग गई थीं। इस बात का मुझे तब पता चला जब मैं उनको दफ़्तर का काम समझाता था और वो समझती कम और मेरी तरफ़ ज्यादा देखती थीं।

मैं भी इस बात का फ़ायदा उठाता था और मैं एक-एक लड़की को अलग-अलग ‘समझाता’ था।

मैंने एक बात सोची और मैंने सभी को बोल प्रिया- हर महीने काम के सिलसिले में एक टूर रहा करेगा!

तो सभी ने ‘हाँ’ बोल दी और अपने-अपने घर पर भी बोल प्रिया।

मैं और मेरा बिजनेस पार्टनर बहुत खुश थे। तो हम दोनों ने पन्द्रह दिन के बाद डलहौजी का टूर फ़िक्स कर लिया और हम दोनों ने चार में से दो लड़कियाँ जाने के लिए पसन्द कर लीं और उनको अपने केबिन में बुलाकर बता प्रिया।

वो दोनों बहुत खुश थीं। हमने जाने का प्रोग्राम शनिवार और रविवार का फ़िक्स कर लिया और उन्होंने अपने घर पर भी बता प्रिया।

मेरी वाली का नाम खुशी और दूसरी का नाम पूजा था।

जल्दी ही वो दिन भी आ गया और हम दोनों शनिवार सुबह उन दोनों को लेकर अपनी कार से डलहौजी के लिए निकल पड़े। रास्ते में से मैंने एक बोतल व्हिस्की और चार बोतल बियर की ले लीं।

मैंने पूजा को आगे वाली सीट पर भेज प्रिया और मैं पीछे खुशी के पास बैठ गया।

अब हमारा सफ़र तीन घंटे का था, इसलिए मैंने एक बियर की बोतल अपने दोस्त को दी और मैंने जब पूजा और खुशी को दी, तो उन्होंने पहले तो मना कर प्रिया, पर मेरे ज़ोर देने पर उन्होंने भी ले ली और मैंने व्हिस्की का एक बड़ा पैग लगाया।

थोड़ी देर में ही हम सब सुरुर में आ गए थे पूजा और खुशी ने एक-एक बियर और खत्म कर दी थी।

मैंने जल्दी-जल्दी से बड़े दो पैग लगाए। पूजा और खुशी तो जैसे बेहोश ही हो गई थी।

मैं भी पूरा टल्ली हो चुका था, मैंने धीरे से खुशी को अपनी बांहों में लिया और मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। उसमें तो जैसे जान वापस आ गई, वो भी मेरे होंठ चूस रही थी।

मैं होंठ चूसते-चूसते उसके मम्मों को उसकी कमीज के ऊपर से ही चूसने लगा। उसकी सिसकारियां बढ़ने लगीं। उसने मुझे अपनी बांहों में जोर से दबा लिया…

मेरे से रहा नहीं गया और मैंने उसकी कमीज में हाथ डालकर उसके मम्मों को पकड़ लिया। उसकी सिस्कारी निकल गई- आह्ह्ह ह… …आह… सर्…आह सर…!

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वाह.. क्या मम्मे थे..!

मैं उनको जोर-जोर से दबाने लगा। मैंने पहली बार किसी लड़की को इस तरह से छुआ था। वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।

उसने मेरा लौड़ा पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया। मैं उसकी गोदी में बच्चों की तरह लेट गया और उसकी कमीज ऊपर करके उसके एक मम्मे को अपने मुँह में डाल लिया और दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगा।

मैंने अपना लौड़ा पैन्ट में से बाहर निकाल कर उसके हाथ में दे प्रिया। वो मेरे लौड़े को जोर-जोर से आगे-पीछे करने लग गई।

मैं तो जैसे डलहौजी पहुँचने से पहले ही वहाँ की हसीन वादियों में पहुँच गया। मैं उसके मम्मे को मुँह में लेकर बुरी तरह से चूस रहा था और बीच-बीच में उसके दाने को भी काट लेता था और वो जोर से सिसकारियाँ भरती।

ऐसे ही मैंने पन्द्रह मिनट तक उसके मम्मे चूस-चूस कर लाल कर दिए।

अब मैं सीधा होकर लेट गया और अपना लौड़ा उसके मुँह में दे प्रिया। वो तो जैसे इस काम में माहिर थी। वो मेरे लौड़े को ऐसे चूस रही थी जैसे भूखे बच्चे को चूसने के लिए लॉलीपॉप दे प्रिया हो।

उसने लौड़ा चूस-चूस कर मेरा बुरा हाल कर प्रिया था। मैं जल्दी ही उसके मुँह में झड़ गया और वो मेरा सारा का सारा वीर्य गटक गई।

फिर मैंने जल्दी से सीधे होकर उसकी सलवार में हाथ डाल कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और आगे-पीछे करने लगा।

वो जोर से सिसकारियाँ लेने लगी- आह सर जोर से… और जोर से… उई माँ …उमाह… ओह यस…उई उई…!

वो पूरे जोश में आ गई थी। मैंने दो उँगलियां उसकी चूत में डाल दीं।

‘सर जोर से… सर जोर से… आह मैं गई… सर जोर गई…गई…जोर से…!’ और वो जोर से झड़ गई।

हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े सही किए और एक-दूसरे से चिपक कर बैठ गए।

मैंने आगे देखा कि पूजा तो बिल्कुल बेहोश पड़ी थी और मेरा दोस्त कार चलाते हुए हमारी सारी हरकतें शीशे में से देख रहा था और मुझे देख कर बोला- क्यूँ मजा आया…? और हँसने लगा।

हम जल्दी ही डलहौजी पहुँच गए और हमने होटल में जाकर दो रुम रेन्ट पर ले लिए।

आगे की कहानी यही थी कि मैंने खुशी और पूजा को अलग-अलग तरीके से चोदा और फिर हम चारों ने ग्रुप-सेक्स किया। एक कारनामा और भी किया कि खुशी और पूजा की चूत में मैं और मेरे दोस्त ने एक साथ दो-दो लन्ड पेल दिए। मेरी इस कहानी पर अपने कमेन्ट देने के लिए मुझे मेल कीजिए।

support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सुनील कश्यप

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

नितिन वर्मा

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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