होम पर वापस जाएं
भाभी की चुदाई पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 356 बार

देवर भाभी की चुदाई : मेरा पहला सेक्स

राजेश सेक्सी

21 Mar 2023 को प्रकाशित

देवर भाभी की चुदाई : मेरा पहला सेक्स
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

देवर भाभी की चुदाई की यह कहानी बात उस समय की है, जब मेरी शादी तय ही हुई थी. मेरी दूर की भाभी मेरे घर आई हुई थीं. भाभी दिखने में तो किसी हिन्दी फिल्म की नायिका से कम नहीं लगती थीं, मैं हमेशा से उन पर नज़र रखता था. वो भी मुझसे बिंदास हंसी मजाक करती रहती थीं.कई बार मैं अकेले में उनको चोदने का सोच कर उनके घर गया हूँ, पर कभी हिम्मत ही नहीं हुई. हाँ मजाक और दारू पीने पिलाने की बातें ज़रूर कर लेता था. वो भी मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा करती थीं.उनको चोदने के लिए बहुत सोचने के बाद भी बात मेरी नहीं जमी.

मगर एक दिन ऐसा आ ही गया. जब वो मेरे घर पर रुकने के लिए आईं. हम सब लोग देर रात तक बातें करते रहे और रात में जिसको जैसे नींद आती गई, वो सोता गया.

सभी एक ही कमरे में नीचे बिस्तर लगा कर सो रहे थे. भाभी मेरे बगल में ही बैठी थीं, मैं भी वहीं लेट गया. फिर भाभी भी मेरे बगल में कब सो गईं, पता ही नहीं चला. रात में मेरी नींद खुली तो मेरा पैर भाभी के पैरों पर चढ़ा हुआ था. अब क्या था… मेरा तो बुरा हाल हो रहा था. मेरे को तो बिन माँगे मेरी बरसों पुरानी चाहत मिल रही थी. मैं धीरे धीरे उनके पैरों पर पैर फेरने लगा, उनकी जाँघों तक पैर भी लाया, पर डर के मारे हालत भी खराब थी और मज़े के लिए डर को भी सह रहा था.

कुछ देर बाद भाभी सीधी हो गईं. मैंने पैर को हटा लिया, पर फिर जब नहीं रहा गया तो हाथ को हौले से उनकी जाँघों पर फेरने लगा. बस 5 मिनट बाद ही भाभी का हाथ मेरे हाथ पर आ गया था. पहले तो मैं डर गया, पर ये क्या… वो तो खुद मेरे हाथ को अपनी चुत तक ले गईं. उनके इस एक्शन से मेरे तो वारे न्यारे हो गए, देवर भाभी की चुदाई मुझे हकीकत लगाने लगी.

उन दिनों सर्दियों का समय था, तो सब गहरी नींद में सो रहे थे. एक दूसरे की गर्मी लेते हुए रज़ाईयों में घुसे थे. हमको भी ये मौका एक ही रज़ाई में होने के कारण मिल गया था.

उस रात तो बस मैं ऊपर ही ऊपर हाथ फेर पाया, भाभी के सेक्सी बदन का मजा लेता रहा. भाभी ने मेरे लंड की मुठ मारी. वाओ… क्या सनसनी हो रही थी… जब वो लंड के मुँह से नीचे तक हाथ ले जाती थीं तो पूरा शरीर सिहर उठता था. यह मेरा पहला अनुभव था… जब मैं किसी लड़की के हाथों अपने लंड की मुठ मरवा रहा था.

मैंने इस बीच भाभी के मम्मों को मसलता रहा और उनका ब्लाउज खोल कर दूध चूसता रहा. लेकिन चुत में लंड डालने की स्थिति इसलिए नहीं बन सकी क्योंकि सभी लोग सटे हुए सो रहे थे, जरा भी हल्ला या झटका लगने से चिल्लपों होती तो गेम बज जाता.

मैंने भी भाभी की चुत में उंगली डाल कर उनकी चुत को सहला कर मजा ले लिया. हल्ला के डर से चुम्मा-चाटी भी थोड़ी बहुत ही हो पाई.

दूसरे दिन हम दोनों एक दूसरे से चुपके चुपके ही नज़रें मिला पा रहे थे. मगर रात का मजा मुझे उनके साथ सेक्स की सीमा तक पहुँचा देता था और मैं सोच रहा था कि कब वो समय आएगा, जब मैं और भाभी अकेले मिलेंगे.

ऐसे ही दो दिन निकल गए, बस बीच बीच में मैं उनको टच ही कर पाया.

आख़िर वो समय आ गया, भाभी को वापस जाना था और उनको छोड़ने जाने के लिए मुझको बोला गया. उनका घर मेरे शहर से 50 किलोमीटर दूर था. मैंने दिन में कुछ काम होने के कारण शाम को छोड़ने जाने का बोला और सब मान गए क्योंकि में पहले भी कई बार ऐसे ही उनको छोड़ने जाता था.

शाम को मैं और भाभी मेरी कार से उनके घर के लिए चल दिए. शुरूआत में तो हम दोनों में कोई बात ही नहीं हो रही थी. फिर मैंने कुछ रोमांटिक गाने बजा कर इधर उधर की बात करके माहौल को हल्का किया.हम दोनों में बात शुरू हुई तो धीरे से मैंने उस रात की बात को छेड़ा. भाभी उस टॉपिक पर कोई बात ही नहीं करना चाह रही थीं.खैर… मैंने भी ज़्यादा कुछ ना बोल कर चुप रहने में ही भलाई समझी.

हम लोग उनके घर पहुँच गए. भाई साहब तो टूर पर गए हुए थे तो घर में हम दोनों अकेले ही थे. पहुँच कर चाय पी फिर इधर उधर की बातें करते रहे.भाभी बोलीं- तुम ड्राइव करके थक गए होगे, हाथ मुँह धोकर आराम कर लो.

मैंने भी ऐसा ही किया. हाथ मुँह धोकर आया फिर से एक एक कप चाय पी और रात ज़्यादा हो गई तो भाभी ने मेरे घर फोन करके बोल दिया कि राजेश अब कल सुबह आएगा क्योंकि रात हो गई है और अकेले में कार से परेशानी होगी.मेरे घर वालों ने भी हाँ बोल दिया क्योंकि मैं कई बार ऐसे ही उनके यहाँ रुक जाता था.

मैंने भाभी को बोला- आज तो पीने का मन हो रहा है.वो बोलीं- तो ले आओ.मैंने उनसे पूछा कि क्या आप भी पियोगी?भाभी बोलीं- मैं वोड्का पियूंगी.

तो मैं उनकी एक्टिवा लेकर मार्केट से एप्पल फ्लेवर विद स्प्राइट वाली वोड्का ले आया. हम दोनों बेडरूम में बैठ कर वोड्का पीने लगे और भाभी ने डिनर भी यहीं पर लगा लिया था. दो दो पैग पीते ही हम दोनों पर शुरूर चढ़ गया.

मैंने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और एक सिगरेट सुलगा ली. भाभी की तरफ धुंआ छोड़ते हुए उनको आँख मारी और कहा- आती क्या खंडाला?

बस भाभी ने एकदम से मेरे पास आकर मेरे सिगरेट निकाल कर खुद कश खींचा और धुंआ मेरे मुँह पर छोड़ते हुए मुझे किस करने लगीं. बस फिर क्या था हम दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगे. वोड्का से ज़्यादा मजा तो उनके होंठों को चूसने में आ रहा था.

इसके बाद मैं उनके गालों और गले को किस करता हुआ उनकी चूचियों की घाटी वाली लाइन पर पहुँच गया. भाभी सामने से खुलने वाली नाइटी पहने हुए थीं. मैं नाइटी के बटन खोल कर उनके मम्मों को हाथ डालकर निकाल कर चूसने की कोशिश करने लगा.

भाभी ने पैर पसारते हुए बोला- ऐसे क्यों खींच रहे हो… रूको जरा, खोल दूँ फिर मजे से चूसो.

यह भी पढ़ें (Recommended)

Bhaiya Ke Kehne Par Bhabhi Sang Masti – Part 2

उन्होंने अपनी नाइटी निकाल दी. ब्लैक कलर के अंडरगार्मेंट्स में उनका 34-30-36 की फिगर वाला नशीला शरीर बस देखते ही बन रहा था.

मैं एक हाथ से सिगरेट पी रहा था और दूसरे हाथ से लंड को सहलाते हुए उनके मदमस्त शरीर को निहार रहा था.भाभी कामवासना से परिपूर्ण हो चुकी थी, वे जीभ को होंठों पर फेरते हुए अश्लीलता से अपने दूध मसल कर बोलीं- ऐसे क्या देख रहे हो राजा…!मैंने कहा- जान इन दोनों कलमी आमों को मेरे लिए आज़ाद कर दो… इनको तो मसल मसल कर चूसना है.भाभी बोलीं- अब कुछ काम तुम खुद भी कर लो मेरे राजा.

हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या… मैंने उनका इरादा और इशारा दोनों को समझा और तुरंत उनकी ब्रा के हुक को खोल कर दोनों रसीले आमों को बाहर निकाल कर उन पर ऐसे टूटा जैसे कि बरसों बाद चूसने वाले आम मिले हों. एक चूचे को मुँह में तो एक की जम कर मिसाई करने लगा.

भाभी- आह… राजा… धीरे मसलो… उम्म्ह… अहह… हय… याह… प्लीज़ धीरे करो!वो सीत्कार करती ही रह गईं. उनकी आहों भरी मादक आवाज़ों से और भी रोमांच बढ़ता जा रहा था.

जब मैंने भाभी के दूध को थोड़ा ढीला छोड़ा, तब कुछ उन में जान आई और बोलीं- कोई भला आमों को ऐसे भी चूसता है… ऐसे तो आम का रस कई जगह से निकल जाएगा.

मैंने बस मुस्कुरा कर उनकी बात का उत्तर दे दिया. अब तो उनसे भी रहा नहीं जा रहा था, इधर मेरे पैन्ट में मेरा लंड भी सलामी दे रहा था.

भाभी ने मेरे कपड़े निकालने चालू कर दिए. पहले शर्ट खींच दी, फिर बनियान उतार दी. मैंने वोड्का के एक एक पैग और बनाए. अपना गिलास मैंने भाभी के मम्मों पर डाल डाल कर वोड्का को चूसते हुए पिया. भाभी की तो जैसे जान ही निकलने को हो रही थी.

“राजेश आह… प्लीज़ अब आ जाओ अपना लंड निकालो ना.”मैंने भी उनके लहजे में ही बोल दिया- अपना सामान खुद निकाल लो.

भाभी ने मेरा पैन्ट खोला फिर मेरे अंडरवियर को निकाल कर मेरे लंड को आज़ाद किया और लॉलीपॉप की तरह चूसना चालू कर दिया. मैंने थोड़ी देर उनके मुँह को चोदा और फिर मैं उनकी चुत को चाटने लगा. अब तो हम दोनों 69 की पोज़िशन में हो गए थे और मस्ती भरा ओरल सेक्स कर रहे थे.

मैंने मधु भाभी की चुत पर सीधे बोतल से ही वोड्का डाली और लपलप करके भाभी की चुत चाटने लगा. वोदका चूत पर डालने से भाभी को वहां थोड़ी जलन भी महसूस हुई लेकिन मैंने अपनी जीभ से चाट चाट कर भाभी की चूत की सारी जलन मिटा दी,

भाभी की चुत रो पड़ी और इसके बाद भाभी कामुकता से बोलीं- राजेश प्लीज़ अब मेरे ऊपर आ जाओ… अब नहीं रहा जाता.मैंने कहा- मुझे भी कहाँ सब्र है भाभी, आज तो आप मुझे जन्नत की सैर करवा रही हो… मैं आपका ये अहसान कभी नहीं भूलूंगा.भाभी बोलीं- यार भाभी नहीं… प्लीज़ मुझे नाम से बुलाओ.मैंने कहा- ओके मधु डार्लिंग, आज से तुम मेरी जान हो.

मधु ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और अपने हाथ से ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत के छेद पट टिका कर रखा और मुझे एक झटका मारने को कहा. मैंने अपने चूतड़ उछाल कर करारा सा धक्का मारा और भाभी ने मेरा लंड अपनी चूत में ले लिया. लंड चुत में जाते ही मुझे तो जन्नत का अहसास हुआ क्योंकि ये मेरा फर्स्ट टाइम था.

धीरे धीरे भाभी की चुत में लंड के अन्दर बाहर करने का खेल चालू हुआ और फिर भाभी ने अपनी गांड उठा उठा कर झटके मारने शुरू किये और उनके मुझे से निकल रही वासना से भारी बातों ने मुझे और जोश दिला दिया. भाभी बोल रही थी- और अंदर तक घुसा… अह… बहुत मजा आ रहा है. ठोक दे पूरा का पूरा लंड अपनी मधु की चूत में!पूरा कमरा हम दोनों की जाँघों के टकराने की आवाज़ से गूँज रहा था.

थोड़ी देर के बाद मधु भाभी बोलीं- मैं आ रही हूँ जान.मैंने कहा- आ जाओ… मेरा भी बस होने ही वाला है.

पहले मधु भाभी झड़ गईं और उन्होंने मुझे कस कर जकड़ लिया. मेरे झटके और तेज हो गए.

“मधु रानी अन्दर ही झड़ जाऊं या बाहर निकालूं?”मधु भाभी बोलीं- देवर जी, अभी अन्दर ही झड़ जाओ… तुम्हारे गरम गर्म रस का सुख लेना है. अपने वीर्य से मेरी चुत को भर दो राजा…

बस फिर क्या था… जोरदार झटकों के साथ मैं भी झड़ गया. कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद हम दोनों देवर भाभी ने एक दूसरे को धन्यवाद दिया और उठ कर सफाई करके फिर से वोड्का के जाम लेने लगे फिर खाना खाया.

उस रात मैंने मधु भाभी को 3 बार चोदा साथ ही उनकी गांड भी मारी.मेरी देवर भाभी की चुदाई कहानी के बारे में अपने विचार, सुझाव मुझे मेल करें.राजेशsupport@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Newly Bhabhi Ki Roz Chudai
भाभी की चुदाई

Newly Bhabhi Ki Roz Chudai

Hi ,dosto mera naam sanjeev hai or is time meri age 40 hai. Mai aap ko apni jindgi ki kucch real story bata raha hu ye sab ek dum sacchi hai, ye baat lagbhag jab ki hai jab meri age 18 year ki thi .Mere bhai ki marriage hui .Mai aap ko apne bare m...

11 मिनट 1,128
अकेली डॉक्टर भाभी की प्यासी चूत चोदी
भाभी की चुदाई

अकेली डॉक्टर भाभी की प्यासी चूत चोदी

सेक्सी भाबी हिंदी कहानी में पढ़ें कि मेरे पड़ोस में एक तलाकशुदा लेडी रहती थी. उससे मेरी दोस्ती हो गयी. उसके बाद हमारे शारीरिक सम्बन्ध कैसे बन गए?

16 मिनट 882
Bhaiya Ke Kehne Par Bhabhi Sang Masti – Part 2
भाभी की चुदाई

Bhaiya Ke Kehne Par Bhabhi Sang Masti – Part 2

Main – Kya! main kyo? ye galat hai.

15 मिनट 553

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।