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भाभी की चुदाई • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 587 बार

देवर भाभी की सुहागरात की चुदाई की कहानी

सत्येन्द्र सिंह

27 Dec 2020 को प्रकाशित

देवर भाभी की सुहागरात की चुदाई की कहानी
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मैं सत्या आप के सामने आज अपनी और भाभी के बीच चले दो महीने के रोमांस के बाद की एक ऐसी घटना का वर्णन कर रहा हूँ जो हर किसी इच्छा है।

हुआ यों कि मकान के काम चलने के बहाने से मेरी और भाभी की चुदाई की आदत बन गई और हम लोग किसी ना किसी बहाने से चुदाई करने लगे।लेकिन भाभी ने एक दिन मेरे मन की बात कर दी वो थी- सुहागरात!भाभी बोली- हम दोनों ने ‘सुहागदिन’ बीसियों बार मनाया है लेकिन कभी एक बार सुहागरात का भी सुख भोग लें!

यह सुनते ही मानो मेरी तो लॉटरी ही निकल पड़ी।,और हमारी किस्मत में वो दिन आ ही गया जिसका दो आत्माओं को बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था।

एक दिन मेरे मुँह बोले भाई की फसल कटाई का काम शुरू हुआ और भाई और उनकी माँ अपने गाँव गये, भाभी से दो दिन बाद आने का बोल कर चले गये। भाई के पिताजी रेलवे में जॉब करते हैं तो उनका अक्सर आना जाना लगा रहता है लेकिन किस्मत से उनके पिताजी का अगले 20 दिन तक घर आने का कोई प्लान नहीं था इसलिए हम देवर भाभी को मौका मिल ही गया ‘सुहागरात’ मनाने का!उसी दिन शाम को हमारा प्लान तैयार हुआ लेकिन रात को मुझे भाभी के पास जाने के लिए किसी बहाने की ज़रूरत थी, सेक्स के नाम पर बहुत बहाने याद आते हैं, तो मैंने अपने सबसे पुराने मित्र के यहाँ कुछ पढ़ाई करने जाने का बहाना बनाया और शाम को अपने घर से सीधा अपने दोस्त के घर जा पहुँचा, उसे अपनी कहानी सुनाई।उसने मेरी बात को समझते हुए मेरे घर से फोन आने पर मुझे बचा लेने का वादा किया क्योंकि वो सेक्स की कीमत जानता था क्योंकि उसकी भी एक गर्लफ्रेंड थी।

मेरा कम बन गया और मैं अपने मिशन की ओर बड़ी उमंग के साथ भागा और छुपते हुए भाभी के दरवाजे जा पहुँचा। दरवाजा खुला होने के कारण तुरंत अंदर दरवाजा बंद करते हुए दाखिल हुआ।

लेकिन जैसे मैं भाभी के कमरे तक पहुँचा तो भाभी की आवाज़ आई- मेरे देवर राजा, तुम जल्दी से बाथरूम में जाकर नहा लो और जो कुर्ता-पजामा वहाँ पर रखे हैं पहन कर आ जाओ!

मैं बगैर देर लगाए तुरंत नहा कर, नए कपड़े पहन कर भाभी के कमरे की तरफ भागा लेकिन जैसे ही मैंने दरवाजा खोला, मैं उस स्वर्ग को देखकर पागल सा हो गया और उस स्वर्ग की अप्सरा को देखकर तो मेरा पप्पू लट्टू की तरह फूलकर हिचकोले खाने लगा।

उस दिन भाभी गुलाबी लहंगे में इतनी सुंदर लग रही थी जैसे कोई अप्सरा हो, जो कई धारावाहिकों में दिखाई जाती हैं, भाभी की सुंदरता में चार चाँद लगाने वाले उनके सुंदर आभूषण थे, जिसमें गले के दो सोने के हार, एक सोने का मंगलसूत्र, दो बाजूबंद, दो हाथों के फूल, कमर पर सोने का कमरबंद और पैरों की बड़ी-बड़ी काजल जो कई सारे छोटे छोटे घूँगरुओं की संग्रह थी।

मुझसे रहा नहीं गया, मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया लेकिन भाभी ने तभी मुझसे कहा- मेरे देवर जी, अब सुहागदिन की तरह जल्दबाजी ना करो, अब तो मैं तुम्हारे साथ पूरी रात रहूंगी, तो तुम जल्दी से ये दूध पी लो!

और मैंने एक अबोध बालक की तरह एक साँस में पूरा दूध पी लिया और भाभी को पकड़ा।तभी भाभी मुझसे बोली- तुम अब ब्रश करके आओ क्योंकि मुझे दूध से बहुत चिढ़ है।

मैं तुरंत ब्रश करके आ गया, भाभी से लिपट गया।मेरे स्पर्श के लिए तैयार भाभी मुझसे लिपट गई, मैं भाभी के होठों को अपने दाँतों से काटने लगा और उनकी चुची को बड़ी ज़ोर से मसलने लगा।

तभी मैंने भाभी के ब्लाउज की डोरी को खोल प्रिया, पीछे से भाभी के ब्रा का हुक खोल प्रिया, और भाभी की गोरी गोल चुची को आज़ाद करके चूसने लगा।भाभी उत्तेजना के शिखर की ओर अग्रसर होने लगी।

मुझसे अब एक पल रहा ही नहीं जा रहा था, मैंने भाभी के लहंगे की गाँठ को बड़े ज़ोर से खींचा, लहंगा तुरंत नीचे जा गिरा लेकिन मदहोश भाभी को यह पता भी ना चला।मैंने भाभी को बेड पर पटक प्रिया, अब भाभी सिर्फ़ गुलाबी रंग की की पेंटी में मेरे सामने थी और मैं पागलों की तरह भाभी के नंगे अंगों की चुसाई करने लगा।

मैंने भाभी की पेंटी में अपना हाथ डाला तो उनकी योनि पानी छोड़ने में व्यस्त थी, मैंने भी बगैर समय गंवाए उसके रसपान करने का सौभाग्य लिया और उस नमकीन से रस को पूरा चाट लिया, भाभी की योनि को चाट चाट कर बिल्कुल लाल कर प्रिया।

पहली रात के इस दृश्य से मेरे लंड ने बहुत सारा वीर्य छोड़ प्रिया और मैं कुछ समय के लिए अपने सेक्स के नये तरीके के बारे में सोचने लगा।

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तभी मैंने भाभी से कुछ और सोने के आभूषण की माँग की लेकिन भाभी समझ नहीं पाई, और मुझे अपनी सासू माँ की अलमारी की चाबी देकर अपनी पसंद के आभूषण लाने को कहा।

मैं गया तो अलमारी में एक बड़ा सा टिफिन रखा था जिसमें कई सारे आभूषण थे, मैंने उनमें से कानों के बड़े-बड़े झुमके निकाले और भाभी की चूत की बालियों को निकाला और उसमें उन झुमकों को पहना प्रिया, आज भाभी की योनि अपने अलग ही शवाब में थी जिसे देख कर मैं पागल हुआ जा रहा था।

मैं भाभी के कमरबंद से उनके नाभि प्रदेश से होते हुए उनके बड़ी सी नथ पहने मुखारविन्द को चूमने लगा और मेरा लंड फिर से अपने पूर्ण रूप में आ गया।

मैंने तभी भाभी की चूत से झुमकों को निकाला, अपने लिंग के सुपारे को उनकी चूत पर लगाया और बड़े ज़ोर का एक झटका लगाया तो उस कामरस से सराबोर योनि में मेरा सम्पूर्ण लिंग समाहित हो गया और मेरे तेज़-तेज़ धक्कों की मार से भाभी अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश में उछल-उछल कर मेरा साथ देने लगी।

मैंने भाभी की टाँगों को अपने कंधों पर रखा और उनकी योनि में मेरा लिंग उनकी योनि की अंत तक की रीमा तक जा पहुँचा और उन्हें पूर्ण आनन्द की अनुभूति होने लगी।मेरे जोरदार झटकों की वजह से भाभी की इन काजलों की झनक सारे कमरे की दीवारों से टकरा कर पूरे कमरे में गुंजायमान होने लगी।

काजल की झंकार के साथ भाभी की सुंदर आहों का स्वर कमरे के माहौल को और भी अधिक शोभनीय बनाने लगा, भाभी के मुख से बरबस स्वर स्फुटित होने लगे- उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय चोद दो मेरे देवर राजा… मोटे लंड का स्वाद अच्छा लग रहा है हाय रे… आऽऽऽह ओऽऽऽह मेरे राजा… चोद डालो… हाऽऽऽय… जोर से…!

तभी भाभी ज़ोर से चिल्लाई- क्या कर रहे हो? मसल डालो ना इन्हें… जल्दी… आऽऽऽह… मैं गई… आह रे… मेरा निकला…! मैं गई… राजा… मुझे कस लो…

भाभी ने अपनी कमर हिलानी शुरु कर दी, लंड पहले की भान्ति अन्दर बाहर होता रहा और मैं अथाह आनन्द में डूबने लगा।लंड में प्यारी सी सरसराहट, गुलाबी सा मीठा मीठा सा मजा आने लगा, तेज़ धक्कों की रफ़्तार धीरी होने लगी और हल्के से धक्के लगने लगे, पर आह… कुछ ही देर में वो ढीला पड़ने लगा और मेरा वीर्यपात हो गया।

भाभी ने मुझे कसकर जकड़ लिया और हम दोनों काफ़ी देर उसी अवस्था में लेटे रहे।

इस तरह से मैंने रात को भाभी को तीन बार जम के चोदा और अपना पूरा वीर्य भाभी की योनि में छोड़ प्रिया और गर्भधारण का सही समय होने के कारण भाभी को गर्भ ठहर गया।सुबह भाभी के सभी गहनों को सही सलामत तरीके से रखवा कर अपने घर आ गया।

भाभी ने होने वाली औलाद का नामकरण करने का जिम्मा मुझे सौंप प्रिया।इस प्रकार मैं अपनी भाभी का असली पति बन बैठा।

और तब से अभी तक हम दोनों लोगों को दोबारा ऐसी सुहागरात की चुदाई करने मौका नहीं प्राप्त हुआ। हम लोग मकान के चक्कर में जल्दबाजी में सेक्स कर लेते हैं और भगवान से फिर सुहागरात जैसी एक और मदमस्त रात देने की विनती करते हैं।

अगर मेरे साथ कोई नई घटना हुई तो मैं अपने दोस्तों को इस बारे में ज़रूर बताऊँगा। आपको मेरी सुहागरात की चुदाई की कहानी कैसी लगी?मैं अपनी पहली कहानी में आप सभी से अच्छे दो नामों की माँग कर चुका हूँ (लड़का, लड़की)आशा करता हूँ कि आप लोग मेरी माँग का जवाब ज़रूर देंगे।support@mohakkisse.comअभी समय काफ़ी है, इत्मिनान से जवाब देना!आपका अपना सत्या

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