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भाभी की चुदाई पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 596 बार

जिनके लिए दिल में इज्जत थी, उनकी चुत चुदाई

वरुण राय

14 Sep 2022 को प्रकाशित

जिनके लिए दिल में इज्जत थी, उनकी चुत चुदाई
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यहाँ कुछ फ्रेश और सच लिखने के इरादे से आज मैं पहली बार अपना एक रियल एक्सपीरियेन्स आप लोगों के साथ शेयर करने जा रहा हूँ।

यह जून 2014 का वाकिया है, मेरी कम्पटीशन की क्लासेस चल रही थीं, कुछ 5-6 दोस्त भी बन गए थे, क्लास में 2 लड़कियां भी थीं।

क्लास का माहौल बहुत अच्छा था.. हम लोग रोज समय से जाते, पढ़ते.. हंसी मज़ाक चाय-कॉफ़ी चलती रहती थी। मैं सभी दोस्तों में उम्र में सबसे छोटा था, इसलिए हर किसी से बहुत मज़ाक करता था। क्लास में साथ पढ़ने वाली उन दोनों लड़कियों के लिए मेरे दिल में बहुत इज्जत थी। वे दोनों बहुत इंटेलिजेंट और अच्छे स्वभाव की भी थीं।

उनमें से रीना (नाम बदला हुआ) की उम्र 21 साल थी और दूसरी अंजलि जो कुछ सीनियर थी.. वो 25 साल की थीं। अंजलि के कपड़े पहनने का अंदाज़ बहुत लाजवाब था.. वो ज़्यादातर सूट या साड़ी पहनती थीं, कभी-कभार जीन्स टॉप भी पहन लेती थीं, पर मुझे वो सूट में बहुत ही सुंदर लगती थी। वो शादीशुदा थीं, लेकिन उनके पति कहीं साउथ में जॉब करते हैं। पतिदेव वहाँ अकेले रहते हैं, उनके कोई बच्चा नहीं था। मैं उन्हें सम्मान से मैडम ही बुलाता था।

मेरे सब फ्रेंड्स मुझे एक छोटे बच्चे की तरह ही ट्रीट करते थे.. और मेरी किसी बात का बुरा नहीं मानते थे, मैं भी हंसते हँसता रहता था।

एक दिन काफ़ी तेज़ बारिश होने लगी, हम लोग क्लास में मस्ती कर रहे थे। लेकिन अंजलि मैडम बहुत परेशान थीं, वे बोल रही थीं- बहुत बारिश हो रही है, सड़कों पर पानी भी भर गया है, ऐसे मैं मैं अपनी एक्टिवा लेकर कैसे जाऊंगी!मैंने कहा- आप चिंता ना करें मैडम.. मैं आपको अपनी कार से ड्रॉप कर दूँगा।वो बोलीं- नहीं तू परेशान मत होना.. देखते हैं, बारिश थोड़ी कम होगी.. तो चली जाऊंगी।

हमारी क्लास 5 बजे खत्म हुई और उसके बाद भी बारिश चालू थी। लगभग दो घंटे के बाद भी बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, अब तो 7 बज गए थे।

मैंने फिर मैडम से आग्रह किया- दस मिनट लगेंगे.. मैं आपको जल्दी से छोड़ आता हूँ.. फालतू मैं आप परेशान हो रही हैं।वो बोलीं- ठीक है.. चल!

उनकी एक्टिवा कोचिंग की पार्किंग में ही खड़ी रही और हम दोनों कार से उनके घर की ओर चल दिए। उनको घर छोड़ने के बाद मैंने कहा- ओके मैडम.. मैं चलता हूँ।मैडम बोलीं- अब यहाँ आया है.. तो घर में अन्दर चल, मैं तुझे अपने मम्मी-पापा से मिलवाती हूँ।मैंने कहा- नहीं.. कभी और मिल लूँगा।

मुझे अंजाने लोगों से मिलने में कुछ अजीब सा लगता है। लेकिन वो नहीं मानीं, तो मुझे अन्दर जाना पड़ा।

अन्दर जाकर देखा तो उनके घर पर मम्मी-पापा नहीं थे। उन्होंने कॉल किया.. तो उनके पापा ने बताया- हम दोनों तुम्हारे मामा ससुर के यहाँ आए हुए हैं.. (जो जयपुर में ही हैं) लेकिन बारिश हो रही है, तो वो बोल रहे हैं कि कल चले जाना.. सो बेटा हम दोनों आज नहीं आ पाएँगे.. कल आते हैं।

यह कह कर उन्होंने फोन रख प्रिया। फोन पर जो बात हुई वो मैडम ने फोन रखने के बाद मुझे बताया।मैंने कहा- तो फिर मैं चलता हूँ।

अब वो पहला पल था, जब मैंने मैडम को गंदी नज़र से देखा। उन्होंने ब्लू साड़ी पहन रखी थी.. जो हल्की-हल्की सी भीगी हुई थी।

वो मेरी ओर पीठ करके जब अपने पेरेंट्स से फोन पर बात कर रही थीं.. तब मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था। मैं मन ही मन में ख्याल आने लगे कि इतनी हसीन लड़की के बारे में मैंने पहले कभी क्यों नहीं सोचा!

उनका फिगर तो मैंने मापा नहीं, लेकिन अंजलि मैडम फ़िल्मी अदाकारा पायल अग्रवाल से किसी भी मामले में कम नहीं लग रही थीं। उनके गालों पर बालों की एक लट.. होंठों पर बारिश का हल्का सा पानी.. और भीगी सी साड़ी में उनके उभरे हुए नितम्ब.. मुझे बहुत ही कामुक शरीर का सा अहसास हो रहा था। उनमें एक मर्द को अपने काबू में करने का पूरा सामान दिखाई दे रहा था।

मैडम ने कहा- अब आ ही गया है.. तो रुक थोड़ी देर.. चाय-वाय पी ले, फिर चले जाना। मुझे तो ठंड भी लग रही है, मैं चाय बनाती हूँ।

मैडम चाय बनाने गईं.. मैं पागल हो रहा था और अपने आपको समझा रहा था कि तू मैडम की बहुत रिस्पेक्ट करता है, उनके बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकता है!

लेकिन मेरे पैंट के निचले हिस्से के आगे मेरे सिर का ऊपरी हिस्सा टिक नहीं पाया और मैं मैडम के पास जाकर खड़ा हो गया।मैडम- अरे रॉय.. तू बैठ ना, मैं बस आई बना कर!मैंने कहा- नहीं मैडम मैं यहीं ठीक हूँ।

यह कह कर मैंने मैडम की गोरी-गोरी सी और मोटी सी गांड पर जल्दी से हाथ फेर कर हटा लिया।

उस वक़्त मेरे साथ जो हुआ, मैं सोच भी नहीं सकता था।मैडम ने मेरी इस हरकत पर मेरे गालों एक खींच के थप्पड़ जड़ा.. और बोलीं- निकल जा यहाँ से.. तुझे मैं क्या समझती थी और तू भी सब लड़कों जैसा ही निकला।

मेरी आँख से आँसू आने लगे और मैंने सॉरी कहा, पर वो नहीं मानी।मैंने कहा- मैं इस रूप में आपको देखकर अपने आपको रोक नहीं पाया मैडम.. आई एक सॉरी!

उन्होंने मुझे बहुत खरी-खोटी सुनाईं और शर्मिंदा कर प्रिया।एक मिनट पहले जो लंड फुंफकार मार रहा था, वो अब ना जाने कौन से बिल में छुप गया था।

मैं जाने लगा.. तो मैडम ने बोला- रुक.. देख रॉय, मैं जानती हूँ कि तू एक अच्छा लड़का है, लेकिन तुझे पता है कि मेरी शादी हो चुकी है ओर मेरे हसबेंड मुझसे बहुत प्यार करते हैं! मैं उन्हें कभी धोखा नहीं दे सकती और तेरे बारे में तो मैंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था।

मैंने कहा- अंजलि मैडम.. मैं क्या करूँ.. मैंने इतने दिन तो कभी आपके साथ ऐसा कुछ नहीं किया। पर आज पता नहीं क्यों, आपको देखकर मैं सा पागल हो गया हूँ.. इसलिए मैं अपने आपको रोक ही नहीं पाया।उन्होंने कहा- चल चुप हो जा.. जो हुआ भूल जा! ले, ये चाय पी ले.. और चला जा।

वो मेरे आँसू पोंछने लगीं। मेरे दिमाग़ का शैतान उनको बिना चोदे जाने को राज़ी ना था.. मैंने फिर से उनको कस के गले लगा लिया और उनकी गांड को अपने दोनों हाथों से दबा दी। मैंने फिर से उन्हें किस करने की कोशिश की, पर उन्होंने मुँह हटा लिया और एक और थप्प्पड़ मेरे गालों पर जड़ प्रिया।

मैंने फिर भी उनकी गांड दबाता रहा और वो मुझे मारती रहीं। कुछ 5-6 थप्पड़ मारने के बाद उनकी आँखों में भी आँसू आ गए और मैंने अपने होंठ उनके गुलाब की पंखुड़ियों से नर्म होंठ पर लगा दिए।

मैं बता नहीं सकता दोस्तो.. क्या आनन्द मिल रहा था!

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उनके मुँह से बस ‘उम्म्म ओह.. उम्म्म्म..’ ही निकल रहा था। मैंने अपनी जीभ उनके मुँह से हटा दी और उनके कान के निचले हिस्से को हल्के-हल्के दाँतों से काटने लगा।

अंजलि मैडम अब ‘आह.. अह..’ कर रही थीं और बड़बड़ाते हुए बोल रही थीं- ये सब ग़लत है रॉय.. आअहहा.. प्लीज़ मुझे छोड़ दो, हमें ये नहीं करना चाहिए!

मैं उनकी गर्दन पर अपनी जीभ घुमाए जा रहा था।

कुछ ही पलों में नजारा बदल गया और वो मुझे सहयोग करने लगीं। अब वो मेरे शर्ट के बटन खोल कर मेरी छाती को चूमने लगीं।अब मेरे मुँह से ‘आह.. अंजलि..’ निकलने लगा।

वो बहुत मादक तरीके से मेरे पूरे सीने और पेट को चूमने-चाटने में लगीं थीं। मैं उनके बालों की लट को उनके चेहरे से हटाता हुआ उन्हें प्यार कर रहा था। तभी वो मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड को दबाने लगीं।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. उन्होंने मेरी पैंट का बटन खोलने का प्रयास किया तो मैंने अपनी पैंट खुलवाने में उनकी मदद की और अंजलि मैडम ने मेरी जॉकी भी मेरे लंड पर से हटा दी।

मैं पूरा नंगा हो गया था। जबकि मैडम अभी भी साड़ी में थीं। वो कितनी हॉट और सेक्सी लग रही थीं.. मैं बयान नहीं कर सकता!

तभी वो पीछे मुड़ कर जाने लगीं.. मैंने उनके पीछे से दोनों हाथ पकड़े और उन्हें अपनी ओर खींचा। उनकी गांड में मेरा लंड समा जाने को बेताब हो रहा था।मैडम की साँसें तेज हो रही थीं- ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… आअहह.. रॉय आहहा… प्लीज़..!’

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू नीचे उतारा और उनके गोरे-गोरे बोबों को किस करने लगा.. उन पर अपनी जीभ घुमाने लगा, उनको काटने लगा।

मैडम यह सहन नहीं कर पा रही थीं, वे बस इतना ही बोल पा रही थीं- रॉय आह आउच.. रॉय प्लीज़ हट ना प्लीज़ हट जा, मुझसे नहीं सहा जा रहा है!

मैंने मैडम को दीवार के सहारे खड़ा किया, उनकी पीठ मेरी तरफ थी.. और मैं उनका डोरी वाला ब्लाउज खोलने लगा, इसी के साथ मैं उनकी पीठ को काट रहा था और चाटे जा रहा था।‘अहहा आ.. उम्म्म्म.. आहह..’

उनका ब्लाउज उतारने के बाद लाल रंग की जालीदार ब्रा में मैडम के चूचे मुझे किसी जन्नत के नजारे से कम नहीं लग रहे थे। मैंने ब्रा को भी जल्दी से खोला और उनकी सबसे प्यारी चीज़.. उनके मम्मों पर टूट पड़ा।

अब मैं मैडम के एक मम्मे के निप्पल को एक हाथ की दो उंगलियों से मसल रहा था, तो दूसरे निप्पल को अपने मुँह में लेकर आम की तरह चूस रहा था।मैं कभी निप्पल को दाँतों से काटता.. तो कभी धीरे से जीभ से सहला देता।

मैडम उत्तेजना से मरी जा रही थीं- ओह्ह.. रॉय.. प्लीज़ चोद दो ना.. रॉय चोद दे!

मैंने पहली बार उनके मुँह से ये शब्द सुने और मैं पूरा पागल होने लगा। किसी ऐसी औरत के मुँह से चोदने के लिए सुनना, जिसने कभी आपके सामने एक भी ग़लत शब्द न बोला हो.. और जो कपड़ों में इतनी ढकी मुंदी रहती हो.. कोई समझने वाला ही समझ सकता है कि उनकी क्या स्थिति हो रही होगी।

मैंने उनकी अधखुली साड़ी को खींचना शुरु कर प्रिया। अगले ही पल वो पेटीकोट में थीं। मैं घुटने के बल बैठ कर उस परी की नाभि पर अपनी जीभ घुमाने लगा।वो कामुकता से सीत्कार किए जा रही थीं- ओह.. करो.. ओह.. ऐसे ही और कर रॉय.. मुझे अच्छा लग रहा है आह.. ओह..!

मुझे उनकी कामुक आवाजों को सुन कर बड़ा मज़ा आ रहा था। मैंने जल्दी से उनका पेटीकोट खोल प्रिया और पेटीकोट नीचे खींचते हुए मैंने उनकी पेंटी भी उतार दी।

आह्ह… मैडम एकदम संगमरमर की नंगी मूरत दिख रही थीं। मैंने मैडम को लिटा कर अपने लंड को उनकी चूत से सटा प्रिया।अहह.. क्या फीलिंग्स थी यारों!

मैं उन्हें बेतहाशा पूरे बदन को चूमे जा रहा था। मेरी जीभ से किसी कुत्ते की तरह लार टपक रही थी। उनके पूरे बदन को मैंने अपने थूक से सान प्रिया था।

वो मादक तरीके से मोन कर रही थीं- आह.. उहह गॉड.. अपना लंड तुम मेरी चूत में डाल दो रॉय.. मैं मर जाऊंगी प्लीज़ अह.. जल्दी करो.. प्लीज़ जल्दी अन्दर करो.. उह्ह.. मेरा स्वीट बच्चा!

मैं अपने लंड को उनकी चूत के ऊपर से रगड़ने लगा, मैं उनको तड़पा रहा था।अचानक मैडम ने अपनी गांड उठाई और ‘घचाक..’ की आवाज़ से साथ मेरा लंड मैडम की चूत में घुस गया- आह्ह.. मर गई.. धीरे.. प्लीज़.. धीरे करो..

लंड के घुसने के साथ ही मैडम की चीख निकल गई और मैं उन्हें चोदता रहा। मैंने मैडम को सीधा करके.. उल्टा करके.. घोड़ी बना कर उनको खूब चोदा।

ज़िंदगी की असली खुशी क्या होती है.. यह मैंने अब जाना था।

कुछ पलों बाद मैडम और मैं दोनों निढाल होकर पड़े थे।

मैडम- रॉय, ये बहुत ग़लत हुआ!हालांकि यह कहते समय उनके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी।

दोस्तो, सेक्स स्टोरी लिखने का यह मेरा एक सच्चा प्रयास था। आप लोगों के मेल मुझे कुछ नया लिखने को प्रेरित करेंगे, मुझे मेल जरूर कीजिए।support@mohakkisse.com

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