जवान लड़की

पायल की चुदाई: दूध वाला राजकुमार-8

लेखक: लव शर्मा दिनांक: 17-04-2023 पठन समय: 13 मिनट

एक बार फिर मैं लव आप सभी प्यारे पाठकों का स्वागत करता हूँ अपनी कहानी ‘पायल की चुदाई’ के अंतिम भाग में।

कामवासना से भरपूर इस कहानी के पिछले भागपायल की चुदाई: दूध वाला राजकुमार-7इस अब तक आपने पढ़ा कि रत्नेश भैया से किये वादे के अनुसार मैंने उन्हें बिल्डिंग वाली लड़की पायल से मिलवाया और चुदाई के लिए जगह का भी इंतज़ाम किया. और अब दोनों ही चुदाई में मशगूल होने लगे थे।

अब रत्नेश भैया ने अपनी पूरी उंगली उसकी चूत में डाल दी और इससे वह पागल सी हो गयी उसने रत्नेश भैया का जीन्स और अंडरवियर खोलकर खीरे जैसे मोटे लन्ड को आज़ाद कर प्रिया और सुपारे को आगे पीछे करने लगी और कहने लगी- इसको मेरी चूत में डाल दो जल्दी… प्लीज़ प्लीज़… अब मत तड़पाओ।

पायल के हाथ लन्ड पर लगने से रत्नेश भैया भी जोश में आ चुके थे और उन्होंने पायल की बनियान भी उतार दी… वाह क्या माल थी पायल… उसके बिल्कुल गोरे गेंद की तरह गोल और सख्त मम्मों पर गहरी काली निप्पल और पूरी नंगी चुदाई की आग में तड़पती पायल…हाय!

रत्नेश भैया अब पायल के बूब्स को बेइंतहा मसलने और चूसने लगे और मानो वो आज पूरे बूब्स को खा ही जाने वाले थे। वो मम्मे को अपने मुँह में पूरा भर लेने की नाकामियाब कोशिश करने लगे थे और इधर पायल लन्ड को सहलाकर पागल हुए जा रही थी।

अचानक से पायल नीचे झुकी और रत्नेश भैया का कड़क फ़नफनाता लन्ड अपने मुँह में भर लिया और बेइंतहा चूसने लगी। पायल अभी मुश्किल से 10 बार भी नहीं चूस पाई थी लन्ड को तभी रत्नेश भैया ने पायल को गोद में उठा लिया और वहां बिछे सिंगल बेड पर लेटा प्रिया।

अब रत्नेश भैया ने पायल की पेंटी भी पूरी तरह से निकाल फेंकी और अपने कपड़े भी निकाल दिए।वाह क्या नज़ारा था वहां का… दोनों ही बिल्कुल गोरे और खूबसूरत जिस्म।

रत्नेश भैया का बिल्कुल नंगा गठीला लंबा चौड़ा जिस्म जिस पर मोटा खीरे सा मोटा ताज़ा सीधा लन्ड वही कमसिन पतली कमर गोरा बदन, छोटे होंठ और बड़ी आंखों वाली पायल जिसकी चिकनी चूत पर बहुत ही हल्के बाल, पतली टांगें और छाती पर मस्त कड़क वाले बड़े बड़े बोबे… वाह… पूरी नंगी… और दोनों ही काम और चुदाई की आग में जलते तड़पते हुए।

बेड पर लिटाकर रत्नेश भैया ने अपनी जुबान पायल की चूत पर रख दी और अपने मुँह से गर्म हवा चूत छोड़ दी और अपनी तीखी जुबान को चूत में घुसा घुसा कर चाटने लगे. पायल की चूत से हल्का पानी आ रहा था जिसे रत्नेश भैया पी जा रहे थे और अब पायल बहुत ज्यादा गर्म होकर तड़प रही थी। अब पायल चूत में जुबान जाने पर बिस्तर से उछल जाती और जुबान को ज़्यादा से ज़्यादा अंदर तक ले जाने की कोशिश करती।

वास्तव में यार… रत्नेश भैया भी चुदाई के खिलाड़ी निकले, उन्होंने पायल को तड़पा प्रिया था।

अब तो पायल एक पल भी रुकना नहीं चाहती थी, उसने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाते हुए चौड़ी कर दी और बड़बड़ाने लगी- अब मत तड़पाओ रत्नेश राजा… मैं मर जाऊंगी… प्लीज़ जल्दी से इस अजगर लन्ड को घुस दो चूत में… फाड़ दो इसको… जानू…. यह बहुत तड़पती है… फाड़ो इसे…

रत्नेश भैया भी बहुत गर्म हो चुके थे और अब उन्होंने अपने लन्ड पर कॉन्डम लगाया… क्या मस्त लन्ड लग रहा था… ऐसा लग रहा था कि ये कॉन्डम लन्ड को झेल नहीं पायेगा और फट जाएगा. जब रत्नेश भैया कॉन्डम लगाने लगे तो पायल रोकने लगी, कहने लगी- जानू नहीं… ऐसा मत करो… लन्ड और चूत के बीच में ये दीवार मत लगाओ… आज मेरी चूत को तुम्हारा कामरस पी लेने दो!

लेकिन रत्नेश भैया ने बिना माने खीरे जैसे मोटे लन्ड पर कॉन्डम की परत चढ़ा दी, शायद प्रेगनेंसी, अबॉर्शन का लफड़ा पालना नहीं चाहते थे वे।

रत्नेश भैया ने अब अपने खीरे से मोटे लन्ड का माशरूम सा फूला हुआ सुपारा पायल की गीली चूत पर रखा और चूत पर 3-4 बार सुपारे को रगड़ा जिससे पायल छटपटाने लगी और पायल ने खुद ही लन्ड को अपनी चूत के बीचोंबीच रखा और लेटी अवस्था से बैठी हो गयी और एक झटके में आगे सरक गयी जिससे रत्नेश भैया के लन्ड का सिर्फ सुपारा ही चूत के अंदर गया और पायल को भयंकर दर्द हुआ।

दर्द के कारण पायल फिर से पीछे होने लगी लेकिन रत्नेश भैया ने अब पायल को अपनी बांहों में जकड़ लिया और पायल के गले और कान पर अपने होंठ रगड़ते हुए चूमने लगे जिससे पायल को एक बार फिर हिम्मत और जोश आया और उसने एक बार फिर से एक झटका आगे की तरफ प्रिया.फिर दर्द बढ़ा और रत्नेश भैया ने अबकी बार पायल के होंटों को ही अपने होंटों में भर लिया।

अब क्या बाकी था… इतने सेक्सी जवान मर्द से यदि इतना प्यार मिले तब तो चूत ही क्या चाहे पूरा जिस्म फट जाए तो भी मंज़ूर होगा किसी लड़की को। पायल ने एक और झटका प्रिया और लगभग 50% लन्ड पायल की चूत में चला गया।

अब दोनों ही मानो मूर्ति बन गए, कोई हलचल नहीं थी. पायल की चूत को थोड़ा आराम मिले और लन्ड चूत में सेट हो जाए इसीलिए दोनों रुके हुए थे।

अब रत्नेश भैया ने अपने दोनों हाथों से पायल का चहरा पकड़ा और होंटों को चूमते हुए पायल को इशारा किया कि पायल धीरे धीरे खुद ही हल्के झटके शुरू करे, जिससे उसे दर्द कम हो और अच्छा भी लगे।

वास्तव में रत्नेश भैया जिस्म से कसरती पहलवान ज़रूर थे लेकिन प्यार और दूसरों के दर्द तकलीफ की बड़ी परवाह थी उन्हें, जो किसी को भी उनका दीवाना बना सकती थी।

अब पायल ने हल्के से झटके शुरू किये जिसके लिए रत्नेश भैया पायल को प्यार करके और चूमकर ओर भी प्रोत्साहित करने लगे। अब रत्नेश भैया ने पायल के बालों में अपनी उंगलियां डाल दी और पायल ने रत्नेश भैया की पीठ पर बने मसल्स के उभार और गड्ढों को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू कर प्रिया और दोनों के होंठ चुम्बन में मशगूल हो गए।

इस तरह धीरे धीरे झटकों से 70% लन्ड चूत में चला गया लेकिन इस तरह के छोटे मोटे झटकों से रत्नेश भैया का लन्ड भला कैसे शांत होता। अब पायल को भी दर्द से राहत मिल चुकी थी और काफी समय बीत चुका था। रत्नेश भैया का लन्ड भी अब अपनी पिचकारी की बौछार से चूत के आंगन को गीला करना चाहता था।

अब भैया ने पायल को आहिस्ता से फिर से लेटा प्रिया और अपने लन्ड को चूत से बाहर नहीं आने प्रिया। रत्नेश भैया ने अब फिर से पायल की टांगों को ऊपर करते हुए पकड़ लिया और अब बिल्कुल सही चुदाई की पोजिशन बन चुकी थी… अब पायल को बड़े लन्ड के नुकसान पता चलने वाले थे।

रत्नेश भैया ने धीरे धीरे झटके मारना शुरू किये जिससे पायल को हल्के दर्द की साथ मज़ा भी आने लगा। रत्नेश भैया की गर्मी बढ़ती जा रही थी और साथ ही साथ झटके की तीव्रता भी बढ़ती जा रही थी. अब रत्नेश भैया ने आंखें बन्द कर ली थी और मस्त ठुकाई में जुट गए थे, आखिर कब तक वो पायल के दर्द का ध्यान रख पाते।

पायल को हल्के आंसू आने लगे थे लेकिन मुस्कुराते हुए वह एक जवान ग्रामीण मर्द की चुदाई का आनन्द ले रही थी। अब तो 85-90% लन्ड अंदर जा चुका था और मस्त घप घप की आवाज़ के साथ चुदाई चल रही थी।

पायल इसके बीच एक बार झड़ चुकी थी लेकिन गर्म लन्ड के झटकों ने उसे एक बार फिर से गर्म कर प्रिया था और अब रत्नेश भैया भी जबरदस्त चुदाई कर रहे थे जिससे पायल हांफने लगी थी और अब चेहरे की हंसी दर्द और दुख में बदल गयी थी क्योंकि पूरा लन्ड अब चूत में जा चुका था और अब हर झटके में लन्ड पूरा बाहर तक आता और फिर बिल्कुल जड़ तक जाता।

मतलब अब चूत की चटनी बनने लगी थी लन्ड के मूसल से…लेकिन अब ओखली में सर प्रिया तो मूसल से क्या डरना…यही सोचकर पायल दर्द, आंसू, मुस्कुराहट, गुस्से के बीच आनन्द ले रही थी।

पायल अब दर्द से थोड़ी आवाजें कर रही थी उम्म्ह… अहह… हय… याह… जिसे बाहर किसी के सुन लेने का डर मुझे लग रहा था। मैं लगातार मुआयना कर रहा था घूमते हुए कि कहीं कोई आसपास है तो नहीं, मैंने खिड़की दरवाजे बिल्कुल पैक कर दिए थे ताकि आवाज़ बाहर नहीं जाए। हालांकि इस पांचवें और छठे फ्लोर के सभी फ्लैट खाली ही थे।

चुदाई चलते हुए भी अब लगभग 25 मिनट हो चुके थे लेकिन रत्नेश भैया झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे। अब पायल का दर्द भी बर्दाश्त से बाहर होने लगा था। मुझे पायल की हालत देखकर तरस आ रहा था। अब तो मैं भी एकटक पायल को ही देख रहा था कि आखिर क्या होने वाला है आगे।

मैं अब जोश जोश में पायल के चेहरे के पास ही पहुंच गया कि कहीं ये अब और ज़ोर से चिल्लाने न लगे… और आखिर कब तक ये खेल चलेगा।

अब रत्नेश भैया के झटके और भी तेज़ होने लगे और पायल बुरी तरह से पूरी की पूरी हिलने और तड़पने लगी क्योंकि रत्नेश भैया तो कसरती मज़बूत जिस्म और लन्ड वाले थे, वहीं पायल एक शहरी कमसिन लड़की।पायल की हालत ऐसी हो चुकी थी मानो उसे मिक्सर में एक मिनट घुमा प्रिया हो। बाल कहीं जा रहे थे, आंखों का पायल भी फैल गया, होंटों से पानी बाहर आ चुका और आंखें बन्द।इसके अलावा चूत की जड़ तक जाते झटकों से अब पायल का सर भी पीछे दीवार से टकराने लगा था।

अब तेज़ झटकों के साथ रत्नेश भैया ने भी आह… आह… उम्मह… सी..सी… की आवाज़ की और बहुत तेज़ झटके चूत में दिए जिससे पायल की चीख निकल गयी, मैंने तुरंत पायल के मुँह पर अपना हाथ रख प्रिया और मुंह दबा प्रिया ताकि आवाज़ बाहर ना जा सके।

इसी के साथ रत्नेश भैया का काम रस पायल की चूत में छूट गया और 6-7 बड़े झटकों के बाद रत्नेश भैया शांत हुए और मैंने पायल के मुँह से अपना हाथ हटाया।

पायल बिल्कुल बेहोश सी हो चुकी थी। करीब 2-3 मिनट के बाद रत्नेश भैया ने अपना लन्ड चूत से बाहर निकाला।

इतने में पायल भी सामान्य हुई और उसने अपने हाथों से रत्नेश भैया के लन्ड पर लगा कॉन्डम निकाला और कॉन्डम में भरे हुए नमकीन वीर्य में एक उंगली डालकर उसे चाट लिया और बाकी का वीर्य कॉन्डम में ही अपनी मुट्ठी में दबा लिया।

अब मेरा लन्ड भी तनकर झटके मार रहा था जिसे मैंने बाथरूम में जाकर मुठ मारकर शांत किया।

मेरा वादा और ज़िम्मेदारी दोनों पूरी हो चुकी थी। मेरे बाथरूम से आने तक दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए थे।

मैंने दोनों को वहीं बैठने के लिए कहा और मैं पूरी बिल्डिंग का मुआयना करके आया कि कौन कहाँ है और कोई खतरे की घंटी तो नहीं है।

तब जाकर फ्लैट में ताला लगाकर हम लोग नीचे आये और दोनों ने ही दिल से मुझे थैंक यू कहा और रत्नेश भैया दुकान वापस चले गए, वहीं पायल अपने घर।

इसके बाद मैं और इन सभी मामलों में उलझना नहीं चाहता था. इसके अलावा मेरा समय भी खत्म हो चुका था इसलिए मैं इंदौर से लौट आया।रत्नेश भैया, सर्वेश और पायल के मोबाइल नम्बर भी थे मेरे पास जो समय के साथ कहाँ गए, मुझे भी नहीं पता।

मेरे भैया ने भी वह फ्लैट बेच कर अपना प्लॉट लेकर खुद का घर बना लिया था। इसके बाद उस जगह जाने का मौका भी नहीं मिला और ये कहानियां जीवन की यादें बनकर रह गयी।

उम्मीद करता हूँ कि आठ भागों की यह कहानी आपको पसंद आयी होगी।एक नई श्रृंखला के साथ फिर लौटूंगा।

पाठको, आप द्वारा मुझे मिल रहे मेल उनके प्यार को दर्शाते हैं, आपका प्यार ही प्रेरणा है।मुझे बतायें कि मेरी सेक्सी कहानी कैसी लगी आपको!support@mohakkisse.com