नमस्ते दोस्तो, इससे पहले कि मैं अपनी कहानी शुरू करूं, मैं आप सभी पाठकों को बता देना चाहता हूं कि मैं अंतर्वासना का पुराना पाठक हूं परंतु कभी भी मैंने अपने जीवन कुछ कामुक कहानी लिखने की कोशिश नहीं की. कभी विचार आया नहीं या फिर मेरे पास ऐसी कोई अपनी जीवन की कहानी नहीं थी.परंतु आज जब मेरे साथ कुछ कामुक घटनाएं हुई हैं तो मैंने उसे अंतर्वासना पर लिखने के जहमत उठाई है. मुझे पता नहीं कि यह सबको पसंद आएगी या नहीं परंतु फिर भी कामुकता के अंदाज में मैं ऐसे लिख रहा हूं जिसे पढ़कर आप सब को अच्छा लगेगा और अगर किसी की कामोत्तेजना इसे पढ़ने के बाद नहीं जागती है तो मुझे क्षमा कीजिएगा क्योंकि मैं कोई कामुक लेखक नहीं हूं. तो अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूं.
मेरा नाम विचित्रगुप्त, मैं यूपी के लखनऊ का रहने वाला हूं. मेरे परिवार में मेरे पिताजी मेरे मां और मेरे दादा-दादी सभी लखनऊ में रहते हैं, कुल मिलाकर हम 5 सदस्य है. मैं कानपुर में निजी आईआईटी कोचिंग कॉलेज में आईआईटी की तैयारी कर रहा हूं. उस कॉलेज के हॉस्टल में ही में रहता हूं.
कॉलेज में मेरे कई दोस्त हैं लेकिन उन सबसे अमीर सबसे अच्छा दोस्त संजय है. संजय के साथ मेरी दोस्ती बहुत ही अच्छी और गहरी है. उससे दोस्ती तब हुई जब मैं उस कॉलेज में पहली बार आया था. वह भी फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट था और हम दोनों में एक अच्छी दोस्ती हो गई. कुछ ही दिनों की दोस्ती के बाद मुझे उसके रंग ढंग समझ में आने लग गए. वह तरह तरह की कॉलेज की लड़कियों के बारे में मुझसे बात करता था. जैसे ‘वह देखो उस लड़की की गांड बहुत सेक्सी है … सीमा के बूब्स बहुत मटक रही है … स्वाति की तो कमर लाजवाब है.’
दोस्तो, मेरे कॉलेज में एक से एक हसीन लड़कियां थी. कभी-कभी मुझे उसके बाद तो बहुत गुस्सा आता था और उसकी बातों से दिल में हलचल तो मुझे भी हो जाती थी.
एक दिन तो अजीब ही हो गया, संजय ने मुझे अपनी बड़ी भाभी के बारे में बताना शुरू किया. उसने अपनी भाभी की कामुक तारीफें शुरू कर दी. उसने बताया कि वे तीन भाई हैं. बड़े भाई का नाम सूरज उससे छोटा विनोद और वह संजय सबसे छोटा.
“बड़े भैया सूरज की पत्नी जो मेरी भाभी है, बहुत ही सुंदर और सेक्सी है.” संजय ने कहा.“हे … तुम क्या बोल रहे हो यार?” मैंने कहा.“अरे यार … वह है ही इतने कमाल की … कि मैं क्या बोलूं!” संजय ने कहा.
अब मैंने कुछ नहीं बोला और चुपचाप उसकी बातें सुनता रहा. उसकी बातें सुनकर मेरे दिल में थोड़ा थोड़ा हलचल होने लगी थी शायद इसी को कामुक अनुभव कहते हैं जो में महसूस कर रहा था.
संजय- तुम कुछ भी कहो विचित्र, लेकिन सच तो यह है कि मेरी भाभी का कोई जवाब नहीं … वह लाजवाब है. उसके गुलाबी होंठ, हसीन चेहरा, हिरनी जैसी आँखें, घने काले लम्बे बाल, गोल मटोल और सुडौल बूब्स, साड़ी में लिपटी हुई उसकी आकर्षक कमर, उसकी मटकती हुई गांड … मन करता है कि उसे अपने दोनों हाथों से पकड़कर हिला दूँ. जब वह सारी में सीढ़ी से उतरती है तो उसकी मटकती कमर और गांड तो देखते ही बनती है. मत पूछ यार, तब मेरे दिल की क्या हालत होती है. मेरा मन करता है कि अपने दोनों हाथों से उसकी गांड पकड़ कर उसे उठा लूं और उसकी कमर पे अपने माथे को सटा दूं और ऐसे ही मिनटों तक उसी अपनी बांहों में भर के मजे से चिपका रहूं और उनके यौवन का रसपान करूं. तुम्हें पता है मेरी मीनू भाभी की चूत के पास कभी बाल नहीं रहते, और उनकी चूत के थोड़ा सा ऊपर एक तिल है।
संजय की यह बात सुन कर मेरी पैंट में तम्बू बन गया। उसके बाद हमारी खूब बातें होती रही। पहले उस डांटने वाला मैं, अब खुद उससे उसकी भाभी के बारे में पूछता था। और वह खूब सारी बातें अपनी भाभी के बारे में बताता था।एक बार संजय ने मुझे कहा- क्यों, बड़ी दिलचस्पी हो रही है मेरी भाभी के बारे में जानने की?तभी मैं थोड़ा शर्मा गया।
लेकिन संजय मुस्कुराते हुए बोला- कोई नहीं यार, मेरी भाभी तो है ही ऐसी कि हर कोई उसके बारे में जानना चाहेगा।अब मेरी भी थोड़ी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उससे पूछ लिया- यार, तुम्हें अपने भाभी के बारे में कैसे पता कि वह अपने चूत पर एक भी बाल नहीं रखती; और उसकी चूत के थोड़ा ऊपर में तिल है, क्या तुमने अपनी भाभी को चोदा है।
संजय मेरी तरफ गौर से देखने लगा।मैं थोड़ा डरा लेकिन तुरंत संजय मुस्कुराते हुए बोला- अरे यार … तुम इतना घबराते क्यों हो। तुम्हारी बात भी सही है कि मैं अपने भाभी की इतनी अंदरूनी बातें बता रहा हूं तो मुझे कैसे पता है. क्योंकि यह बात तो केवल भाभी के माता पिता और उनके पति या फिर भाभी ने किसी और मर्द से चुदावाया हो वही जान सकता है। तुम्हारा शक सही है, मैंने अपनी भाभी के शरीर के एक एक हिस्से का जम कर मजा लिया है। मैंने मीनू भाभी की जबरदस्त चुदाई की है।
मैं यह सुनकर दंग रह गया. मैंने संजय से चौंकते हुए पूछा- यह तुम क्या कह रहे हो? तुमने अपनी भाभी को चोदा है?“हां यार … मैं सच कह रहा हूं!” संजय बोला.
मैं यह सुनकर आश्चर्यचकित था. मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था. थोड़ी ही देर में मैं और चौंक गया जब संजय ने मुझसे यह कहा- क्यों, तू इतना क्यों पूछ रहा है? तुझे भी मेरी भाभी को चोदना है क्या?यह सुनते ही मैं और दंग रह गया और संजय ठहाके मार मार के हंसने लगा.
मुझे लगा कि संजय मजाक कर रहा है तब मैंने भी मजाक में ही हां कह प्रिया.तब संजय ने कहा- ठीक है मेरे दोस्त, तुम्हारी यह तमन्ना बहुत जल्द पूरी हो जाएगी.तो मैंने भी हिम्मत जुटाकर बोल प्रिया- वह कैसे?“यार मेरे मंझले भैया की शादी होने वाली है, जिसमें मैं छुट्टी लेकर घर जाने वाला हूं. और कमाल की बात यह है कि गर्मियों की छुट्टी में शादी होने वाली है तो तुम्हें भी छुट्टी होगी. तू मेरे भैया की शादी में मेरे साथ चलना; तब तुम्हारा काम बन जाएगा, मैं तुम्हारी हसरत पूरी कर दूंगा.”
मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था कि मुझे खूबसूरत औरत को चोदने को मिलेगा। एक ही बार में मैं भाभी चोदने जा रहा था। आजतक मैंने किसी की भी चुदाई नहीं की थी और मुझे पहली बार में ही एक खूबसूरत औरत मिल रही थी।पर मैं थोड़ा घबराहट में भी था कि पता नहीं उनसे मिल कर क्या होगा, वह मुझसे चुदावाएँगी या नहीं?या मैं एक 26 साल की औरत को चोद पाऊंगा या नहीं?वो तो मुझसे 6 साल बड़ी हैं उन्हें तो मुझसे ज्यादा चुदाई का अनुभव होगा।
लेकिन मैं फिर सोचता हूं कि जब मेरा दोस्त संजय उनसे 7 साल छोटा होने के बावजूद अपने भाभी की अच्छी चुदाई कर देता है। तो मैं तो संजय से 1 साल बड़ा हूं और मीनू भाभी से सिर्फ 6 साल छोटा हूं तो मैं तो मीनू भाभी कि मस्त चुदाई कर सकता हूं. और रही बात कि भाभी मुझसे चुदवायेगी या नहीं? तो पहली बात तो कि जब वह संजय से चुदवा सकती हैं तो किसी और गैर मर्द से चुदवाने में वह बिल्कुल नहीं हिचकेंगी और भाभी मुझसे चुदवा लेगी. और अगर संजय उनसे कहेगा तब तो फिर मीनू भाभी मुझसे खूब प्यार से चुदवायेंगी और अपना सारा यौवन मुझ पर लुटा देंगी।
मैं खुशी-खुशी संजय के साथ गर्मियों की छुट्टी में उसके मंझले भैया की शादी में मथुरा चला गया और अपने घर वालों को बता प्रिया कि मैं अपने फ्रेंड की भैया की शादी में जा रहा हूं।
जब मैं मथुरा पहुंचा तो संजय का बड़ा हवेली जैसा घर देखकर दंग रह गया। राजा महाराजा के घर जैसा लग रहा था, जैसे फिल्मों में ठाकुरों और नवाबों की हवेली होती है, वैसे ही लग रहीथी।पर मेरी नजर तो उस यौवन की रानी मीनू भाभी के सुंदर और सेक्सी बदन को ढूंढने में लगी हुई थी। घर के भीतर जाते ही संजय के माता-पिता और भैया से मुलाकात हुई। पर अभी रूपसुंदरी मीनू भाभी का दर्शन नहीं हुए थे।
हम लोग बाहर हॉल में सोफे पर बैठे थे और चाय नाश्ता आ गया था। सभी आपस में बातें करने लगे, सभी मुझसे मेरे बारे में पूछ रहे थे कि मैं कहां से हूं, मेरा क्या नाम है.मैंने अपने बारे में सब कुछ बता प्रिया।
बहुत देर हो गई थी और मीनू भाभी के दर्शन अब तक नहीं हुए थे, मेरा नीरज अब खोने लगा था। मुझे लगा कि कहीं संजय झूठ तो नहीं बोल रहा था।और जब बहुत देर हो गई तब मुझे यकीन होने लगा कि संजय झूठ बोल रहा था; उसकी ऐसी कोई भाभी है ही नहीं। जरूर संजय ने मुझे अपनी झूठी भाभी की झूठी सुंदरता की व्याख्या करके मुझे यहां बुला लिया है। दरअसल उसे अपने भैया की शादी में मुझे शरीक करना था इसलिए उसने भाभी की झूठी सुंदरता और यौवन का बखान मेरे सामने किया।मैं अपने आप को बेवकूफ बना हुआ समझ रहा था कि संजय देना मुझे बेवकूफ बना प्रिया।
पर अब मैं यह सोच रहा था कि संजय मेरे बारे में क्या सोचेगा कि उसने झूठ बोला और मैं उसकी भाभी को चोदने के लिए उसके घर चला आया। मैं अपने आप में शर्म महसूस कर रहा था कि तभी काजल की खनक सुनाई दी मुझे; मैंने सीढ़ी की ओर घूम कर देखा तो मेरा मुंह खुला का खुला रह गया.एक अप्सरा सी सुंदर औरत हल्का लाल चटकदार लहंगा और हल्का लाल रंग के ब्लाउज पहने हुए अपनी कमर मटकते हुए नीचे उतर रही थी। मेरा दिल धक धक धक धक कर रहा था।
मीनू भाभी की मटकती हुई गोरी दूधिया कमर देख मेरी आंखें चमक उठी, वाह … क्या लाजवाब कमर है। मेरा मन मेरे काबू में नहीं था। मेरा हाथ अपने आप हिलने लगा और इस तरह थरथर कांपने लगा कि मन कर रहा था कि दौड़कर मीनू भाभी के पास जाऊँ और उनकी कमर को अपने हाथों से पकड़ लूं और जोर से उन्हें अपने गोद में उठा लूं। मेरा मन तो उनकी गांड को पकड़कर अपने गोद में उठा लेने को हो रहा था। मैं बता नहीं सकता कि मैंने मुश्किल से अपने भावनाओं पर से काबू किया। उफ़ उनकी ये मुस्कुराती हुई गुलाबी होंठ, उनके ऊपर नीचे डोलते बूब्स। मुझे तो रहा नहीं जा रहा था। तभी मैंने महसूस किया कि मेरे पैंट में 6 इंच का लन्ड खड़ा हो गया है। मैंने बहुत मुश्किल से अपने पैंट में खड़े लंड को छुपा या।
तब तक मीनू भाभी हमारे पास आ चुकी थी और वह मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गई और बैठते ही उनकी नजर मुझ पर पड़ी।मीनू भाभी- यह तुम्हारे साथ कौन है संजय?संजय- भाभी, यह मेरा दोस्त विचित्रगुप्त है। मेरे साथ ही पढ़ता है।“और आप कुछ नहीं बोलेंगे?” मीनू भाभी ने मुझसे कहा।“जी वो …” मैं लड़खड़ाते हुए बोला- मैं क्या बताऊं?
दरअसल मैं कब से मीनू भाभी को ही देखे जा रहा था, ऊपर से नीचे तक उनके शरीर के एक-एक अंग को देख रहा था। और अचानक हुए इस सवाल से मैं थोड़ा हक्का बक्का रह गया था। मुझे उम्मीद नहीं थी कि भाभी मुझसे कोई सवाल कर देंगी।शायद उन्होंने देख लिया था कि मेरी नजर तो उनकी बूब्स और कमर पर है।
उनकी बातें चलती रही और मैं मीनू भाभी को गौर से देखता रहा। वह मुस्कुरा मुस्कुरा कर सब से बाते कर रही थी।तभी सूरज भैया बोले- अरे, जब से आए हो यहीं हॉल में बैठे हो, जाओ अपने कमरे में जा कर आराम करो। सफर से आये हो, थक गए होगे, और अपने दोस्त को भी ले जाओ।उसके बाद हम दोनों ऊपर उसके कमरे में चले गए।
कमरे में जाते ही सबसे पहले हम बारी बारी से नहाये और फ्रेश होकर हल्का टीशर्ट और पजामा पहन लिया। उसके बाद बेड पर लेट कर आराम करने लगे।
तब संजय बोला- क्यों कैसी लगी मेरी मीनू भाभी?तब मैंने कहा- मत पूछ यार … मज़ा आ गया। दिल में तरंगें बज उठी। यार … क्या कामुक महिला है। उसके यूं चलने का अंदाज़, ये कमर मटकाती, बाल लहराती और कातिलाना मुस्कान। क्या बूब्स है आहा… क्या कमर है … क्या गांड है। और उनकी बड़ी नाभि आहा … पूरा का पूरा यौवन ही लाजवाब है। संजय मुझे वो चाहिए, मुझे मीनू भाभी चाहिए। प्लीज यार संजय, मुझसे चुदवा दो, मीनू भाभी को मुझसे चुदवा दो। मुझे मीनू भाभी को चोदना है,चोदना है मुझे। उसकी कमर, उसके बूब्स, उसकी मटकाती गांड सब चाहिए मुझे। उसका पूरा का शरीर चाहिए मुझे। उसके पूरे यौवन का मज़ा लेना चाहता हूं। मैं उसके एक-एक अंग के मज़े लूंगा।
अब संजय समझ चुका था कि मैं मीनू भाभी के यौवन में गिरफ्तार हो चुका हूं और बिना उसे चोदे मैं नहीं रह पाऊंगा।संजय- संभालो अपने आप को दोस्त! उस कामसुंदरी को देख कर तो मैं भी अपना लन्ड खड़ा होने से नहीं रोक सकता हूं, तो तुम क्या हो। दोस्त तुम नहीं जानते कि अपने आप को मैं कैसे संभाल पा ता हूं। पढ़ाई में मेरा मन बिल्कुल नहीं लगता है। फिर भी जैसे तैसे अपने आप को कानपुर में लगाये रहता हूं। मेरा तो मन करता है कि पढ़ाई छोड़ कर मथुरा आ जाऊं और दिन रात मीनू भाभी की गोद में सोया रहूं, इस यौवन का रसपान करता रहूं। घर में इतना सुंदर माल है, उसे चोदता रहूं। पर सब काम संभाल कर करना पड़ता है। ऐसे होश खोओगे तो काम नहीं चलेगा; समझे?“ठीक है दोस्त!” मैंने कहा।
शाम होने वाली थी, मैं जरा हवेली में घूम रहा था। घूम क्या रहा था, यूं कहिए कि मीनू भाभी को ढूंढ रहा था। मैं आगे की ओर देखते पीछे चल रहा, तभी अचानक मीनू भाभी मुझसे टकरा गई और हम दोनों ही गिर पड़े। मीनू भाभी नीचे और मैं उसके ऊपर पर मैं पेट के बल भाभी पर नहीं गिरा था, पीठ के बल गिरा था। लेकिन फिर भी उसके उन्नत स्तन मेरी पीठ से दब गये। मैं तो सर से पैव तक हिल गया।मैं जल्दी से उठा।
मीनू भाभी- तो देवर जी की नजर किधर और किसको ढूंढ रही थी?“नहीं तो … किसी को तो नहीं!” मैं घबराते हुए बोला।“आप ठीक तो हैं न भाभी?” मैंने पूछा।“हाँ!” मीनू भाभी ने कहा।
मैं मीनू भाभी की बस देखे ही जा रहा था, अब भाभी ने साड़ी पहनी हुई थी.तभी भाभी चुटकी बजाती हुई बोली- क्या बात है, ऐसे क्या देख रहे हो?मैंने कहा- नहीं … कुछ तो नहीं, बस ऐसे ही।“बस ऐसे ही?” मीनू भाभी ने कहा।मुझे लगा कि कहीं भाभी नाराज़ हो जाये, मैंने तुंरत बोल प्रिया- भाभी आप बहुत खूबसूरत हो। आपके लिप्स कमाल के हैं.इतना बोलना था कि भाभी हंसने लगी। मुझे तो लग रहा था कि मैंने ऐसा क्या कह प्रिया? पर तसल्ली थी कि भाभी बुरा नहीं माना।और फिर मैंने सोचा कि वो बुरा भी क्यों मानेगी, जो अपने देवर से चुदवाती हो तो भला इतना कहने से क्यों बुरा मानेगी।
मैंने नजर जरा नीचे झुकाई तो मैंने देखा कि भाभी की दूधिया कमर मस्त लग रही थी।तभी भाभी ने कहा- क्यों नीचे कहाँ देख रहे हो?मैं चौंका और नजर ऊपर कर ली।
तब भाभी मेरे नज़दीक आई। मैंने एक फ्रेंच परफ्यूम लगा रखा था, भाभी नजदीक आई तो उसकी खुश्बू सूंघकर थोड़ी मदहोश होने लगी। उसके बाद भाभी और नज़दीक आई।तभी नीचे से किसी ने भाभी को नाम लेकर आवाज़ लगा दी तो भाभी मुझे देखते हुए चली गई। मैं भी जब तक वो नजर आती रही, देखता रहा।
तभी संजय आया और पूछने लगा- क्या हुआ?मैंने संजय को थैंक्स कहते हुए कहा- यार लगता है कि तुमने मीनू भाभी से मेरे बारे में बात कर ली है। इसलिए लगता है भाभी अब मुझसे चुदने को तैयार हो गई है, थैंक्स यू यार!संजय- क्या .. क्या बोल रहे हो?“क्यों क्या हुआ? तुमने भाभी से मेरे बारे में बात नहीं की क्या?” मैंने पूछा।तभी वो थोड़ा लड़खड़ाते हुए बोला- हाँ … हाँ मैंने बात की है।ऐसा कह कर वह चला गया।मुझे थोड़ा अजीब लगा पर मैंने ज्यादादा ध्यान नहीं प्रिया।
मैंने नीचे आंगन में झांक कर देखा तो गीत संगीत चल रहा था। मैं भी नीचे गया। सभी औरतें नाच रही थीं।अब मीनू भाभी के नाचने की बारी आई। मैं बेसब्री से उनका नाच देखने के लिए तैयार था।
तभी नाच शुरू हुआ।वाह लाजवाब डांस किया भाभी ने … लेकिन मैं तो उनकी कमर नाभि और सुडौल बूब्स देखे जा रहा था जो डांस में ऊपर नीचे हो रही थी।भाभी का डांस खत्म हुआ तो कोई और महिला डांस करने लगी। यह प्रोग्राम लंबा चलने वाला था, और अभी ती शुरुआत ही हुई थी।
तभी मैंने देखा कि भाभी वहां से उठ कर ऊपर चली गई। तो मैं भी वासना के वशीभूत धीरे से उनके पीछे पीछे ऊपर चला गया।मैंने देखा कि भाभी और ऊपर तीसरी माले पर जा रही है। मैं भी वहां जाने लगा और जैसे ही पहुंचा तो देखा किभाभी एक बड़े हॉल कमरे में गई। मैं भी हिम्मत करके वहां चला गया लेकिन अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं गेट पर हीं खड़ा था।
बावले उतावले-1
तभी अंदर से एक हाथ ने मुझे अंदर खींच लिया। अंदर जाते ही मैंने देखा कि वह हाथ मीनू भाभी का था. मीनू भाभी बोली- क्यों मेरा पीछा कर रहे हो?मैंने कहा- नहीं भाभी ऐसा नहीं है, मैं तो बस ऐसे हीं आ गया। यह देखने कि इस बड़े से कमरे में क्या है।मीनू भाभी- ओ अच्छा जी, ऐसा है। तो ठीक है, मैं दिखा देती हूं।
फिर भाभी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे कमरा दिखाने लगी- देखो यहाँ घर में काम आने वाले सामान हैं। पुराना पलंग है, मेज कुर्सियां हैं। और कुछ देखना है?मीनू भाभी जैसे थोड़े गुस्से में थी।
फिर मैंने भी सोचा कि एक तो संजय मेरे बारे में बात कर चुका है। भाभी संजय से कह चुकी है कि तुम्हारे दोस्त से भी चुदवाऊँगी। इसीलिए भाभी ऊपर आई होगी। सब लोग नीचे लगे हैं। अब अच्छा मौका है और मैं फालतू में ही नखरे कर रहा हूं, तो भाभी गुस्सा नहीं होंगी तो और क्या?
फिर मैंने भी देर न लगाते हुए काम शुरू करने का तय कर लिया.मैंने सबसे पहले मैंने भाभी नंगी कमर पर हल्के से हाथ रखा तो मेरे अचानक हुए इस हमले से मीनू भाभी मचल गई, उनके मुंह से निकल पड़ी. वो आवाज़ जिसे सुनने के बाद हर मर्द मदहोश हो जाता है, और वह आवाज़ थी “आह … आह आ … हा …
बस फिर क्या था, मैंने एक अच्छे खिलाड़ी की तरह भाभी को बायें हाथ से उनकी कमर तो दायें हाथ से उनकी बाजू को पकड़ उन्हें पीछे से थाम लिया। उसके बाद मैंने अपने ओठों से उनके गाल पर किस कर लिया।तभी भाभी की दूसरी ‘आह … ह’ निकली।
मैं लगातार मीनू भाभी को किस किए जा रहा था। उनके गाल पर से होते हुए उनके गले और कंधे पर किस करने लगा। मैंने भाभी पर चुम्बनों की बौछार कर दी थी। भाभी भी भरपूर मेरा साथ दिये जा रही थी।मैं किस किये जा रहा था, भाभी मुस्कुराती और ‘उह… ह आह … ह अहा … हा यूं ओहो … हो आह … ह आराम से … से आह … ह किये जा रही थी। मैं तो भाभी की इन आवाजों से और भी मदहोश हुए जा रहा था। मैं पहली बार टीवी या मोबाइल में नहीं, अपने असली जीवन में किसी औरत की कामुक आवाज़ सुन रहा था।
मैंने मीनू भाभी के गाल, गले और कंधों पर चुम्बन किये जा रहा था, भाभी मचलती हुई मेरी बांहों में और कसती जा रही थी। मैंने भाभी की कमर को सहलाना शुरु कर प्रिया।‘आह आह …’ करती भाभी अपने हाथ से मेरे हाथ और दबाये जा रही थी। मैं भी और रगड़ रगड़ के उसकी कमर को दबाए मसले जा रहा था। अब मैंने भाभी की नाभि में उंगली डाल दी और उससे खेलने लगा और भाभी हंसने लगी।
फिर मैं अपने एक हाथ को धीरे धीरे ऊपर ले गया और उनके बूब्स पर हाथ हल्के से रखा और महसूस किया। मैंने पहली बार की औरत के बूब्स पकड़े थे। उसके बाद मैंने धीरे धीरे भाभी की चूची दबानी शुरू की तो भाभी आह आह कर रही थी। फिर मैंने दोनों हाथों से भाभी की चूची मसलानी शुरू की तो भाभी की साँसें तेज हो गई ‘आह … हआह … उह … हउह … हउहूं … हूं!’
भाभी की सेक्सी आवाज़ से मैं मदमस्त हुए जा रहा था। अब मैंने ज्यादा देर न लगाते हुए भाभी का पल्लू नीचे गिरा प्रिया। अब भाभी का पेट बिल्कुल नंगा हो चुका था। अब मैंने बूब्स को छोड़ कर भाभी कि फिर से नंगी कमर को मसलना चालू कर प्रिया।“आह … हआह … ह ऑफो … मार ही डालोगे क्या! हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है मेरे देवर राजा! जल्दी से मेरी भड़काई हुई आग को बुझाओ!” मीनू भाभी ने कहा।
फिर मैंने भाभी की कमर पर किस किया तो भाभी की सिसकारी निकल गई। मैंने बेतहाशा भाभी की कमर पर चूमा चाटी की। उसके बाद उसकी साड़ी के कमर में लगे सेफ्टी पिन को निकाल कर साड़ी पकड़ कर खींचने लगा और मीनू भाभी गोल-गोल घूमते हुए दूर जाने लगी और उसकी साड़ी भी खुलने लगी।पूरी तरह से खुल जाने पर साड़ी को मैंने ज़मीन पर छोड़ प्रिया और भाभी अब लाल साया और लाल ब्लाउज में और भी मस्त और सेक्सी लग रही थी।
अब मैं भाभी के पास भागते हुए पहुंचा और उन्हें अपने दोनों हाथों से उनकी गांड के नीचे से पकड़ कर उन्हें उठा लिया और अपने माथे को भाभी की कमर में सटा के उन्हें लेकर के गोल-गोल घूमने लगा।वाह … क्या आनंद आ रहा था मुझे। मैं तो भाभी के यौवन के सागर में गोते लगा रहा था।
धीरे-धीरे मीनू भाभी को पलंग पर लेटा लिया और माथे और गाल को भाभी की कमर से ऊपर की ओर सरकाते हुए उसके बूब्स, छाती, गर्दन और होंठों पर सटाते हुए भाभी के ऊपर आ गया।भाभी को मैंने अपनी मजबूत बाजुओं में कस लिया और हम दोनों कुछ पल एक दूसरे में खोए रहे।
उसके बाद मैं भाभी एक गाल को अपने हथेलियों से दबाते हुए उसके गुलाब की पंखुड़ियों से होंठों को हल्के से किस करने लगा. फिर हम दोनों एक दूसरे को जोर जोर से किस करने लगे। लिप-किस का दौर लंबा चला. उसके बाद मैंने भाभी के गले और छाती पर पर खूब किस किया। ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तनों को जोर जोर से दबाया।
अब तो भाभी ने भी अपने दोनों हाथों को मेरे दोनों हाथों पर कर अपने सेक्सी बूब्स को दबाने चालू कर प्रिया था। हम दोनों काफी देर तक यह खेल खेलते रहे. उसके बाद मैं अपने हाथों को भाभी के चूतड़ों पर रख कर उन्हें भी मसलने लगा।“आह आह … क्या मस्त गांड है आपकी भाभी!”“ओ हो … क्या बूब्स हैं आपके!” और ऐसा कहते ही मैंने अपना माथा भाभी के बूब्स पर रख प्रिया. उसके बाद एक बार फिर मैंने भाभी को लिप-किस करना शुरु किया और साथ ही में उनकी सेक्सी गांड भी दोनों हाथों से दबाए जा रहा था।
उसके बाद मैं सीधा नीचे सरका और साया के ऊपर से ही भाभी की चूत पर ज़ोर का किस किया, फिर उसकी चूत को चूसने चाटने लगा। भाभी की मदहोशी का ठिकाना नहीं रहा, वो अब और जोर ज़ोर से ‘उह आह …’ करने लगी और अपने चूत को मेरे मुंह की ओर धकेलने लगी और अपने दोनों हाथों से मेरे मुंह को अपने चूत में सटाये जा रही थी। मैं भाभी की चूत पेटीकोट के ऊपर से ही बेतहाशा चाटे जा रहा था।“उई मां…ह ओह उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई… ई रे … ए अंहा… हां, मज़ा आ गया रे तेरे साथ!” मीनू भाभी ने कामुक सिसकारी भरते हुए कहा।
अब मैंने अपने हाथों से भाभी के साया के डोरी को खोल प्रिया और साया उनकी चिकनी जांघों पर से सरका प्रिया। अब मीनू भाभी पेंटी और ब्लाउज़ में थी। ऊपर उठ कर मैंने ब्लाउज पीछे के बटन खोलकर उतार प्रिया।मेरे दोस्त की मीनू भाभी अब काली पेंटी और काली ब्रा में थी।
“मां कसम … क्या मस्त माल है।” अचानक में मुंह से निकल गया।अब मैं पेंटी के ऊपर से ही भाभी की चूत चाटने लगा। भाभी की कच्छी तो मेरे चूसने चाटने से ही गीली हो गई थी. और साथ ही मैं ऊपर उनके बूब्स को भी ब्रा के ऊपर से ही रगड़ रहा था। अब मैंने अपने हाथों से उनकी पेंटी को निकाल कर भाभी को नीचे से पूरी नंगी कर प्रिया।
मैं तुरंत अपनी टीशर्ट, पैंट, गंजी और अंडरवीयर निकाल कर पूरा का पूरा नंगा हो गया। और अब मैं भाभी की नंगी गांड अपने हाथों से पकड़ कर उसकी नंगी चूत पर अपने होंठ रखकर चूसने-चाटने लगा और भाभी भी मेरा माथा पकड़ कर अपने चूत को चटवाए जा रही थी, चूत की ओर मेरा मुंह धकेले जा रही थी।
अब तो भाभी की जोर-जोर से सिसकारी निकलने लगी ‘आह … माह… उह… आह आह आहा… उफ़ ओह आः औच आह आह आहाह… ओच उई मां… आह आह ओह ओह ओह उम… हिस… आहश…मैंने अपने दोनों हाथों से भाभी की गांड, जांघें, ऊपर से नीचे तक सब दबाया और रगड़ा। भाभी को चूसते चाटते मैं ऊपर की ओर बढ़ा और भाभी के बूब्स पर मुंह मार प्रिया। ब्रा के ऊपर से ही चूसते चाटते मैंने भाभी की ब्रा की हुक पीछे से खोल दी। भाभी की ब्रा ढीली हो गई और उसका मंगलसूत्र ढीली ब्रा पर लटकने लगा।
मैंने भाभी की ब्रा भी उतार दी और मंगलसूत्र भी। अलग रखने के बाद मैंने बड़े ध्यान से भाभी के स्तनों को देखा। पहली बार मैं किसी जवान और खूबसूरत औरत के बूब्स देख रहा था।अब देर न करते हुए मैं भाभी के बूब्स को अपने मुंह से चूसने चाटने लगा; उम्म आह ओह की आवाज़ फिर से कमरे में गूंजने लगी।
मैंने भाभी को ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा चूसा चाटा जिसमें भाभी के दोनों गाल, नाक, लिप्स, ठोडी, गला, छाती, दोनों स्तन, पेट, कमर, चूत, गांड, दोनों घुटने, पैर के ऊपरी और निचले हिस्से यानि हर तरह से भाभी को चूसा, चाटा, रौंदा, रगड़ा और अपने शरीर से उनके शरीर को सटाया सहलाया।
अब मीनू भाभी ने मुझे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया। मैंने अपने 6 इंच का कठोर हो चुके लंड को भाभी की चिकनी चूत पर रखा और रगड़ने लगा। हम दोनों को ही मज़ा आ रहा था। अपने लंड से भाभी की चूत पर घर्षण करने के बाद अब मैंने भाभी की चुदाई करने की सोची।चूंकि यह मेरा पहली बार था तो मैंने हल्के से झटका प्रिया, मेरा लंड थोड़ा अन्दर घुसा, उसके बाद मैंने झटके को तेज करना चालू कर प्रिया। अब भाभी की चुदाई शुरू हो चुकी थी। मैं अपने लंड को और ज्यादा अंदर तक घुसाने में लगा हुआ था और उधर मीनू भाभी अपने दोनों हाथों से मेरे गांड को दबा रही थी और अपनी गांड भी नीचे से ऊपर की ओर उछाल रही थी।
मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपने दोस्त की मीनू भाभी को चोद रहा हूं। मैं किसी औरत को चोद रहा हूं और वो भी शादीशुदा औरत को।इस कामुक माहौल में मैं जोर जोर से भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा।
“आह … आह … और चोदो, और चोदो … मज़ा आ गया … इतनी मस्त चुदाई तो आज तक मेरे पति ने भी नहीं की जितना कि तूने की है मेरे छोटू देवर!” मीनू भाभी ने कहा।“अच्छा छोटू देवर? तू अब इस छोटू देवर का कमाल देख!” ऐसा कहते हुए मैंने और जोर से धक्के देना शुरू किया और भाभी की चुत में मेरा पूरा 6 इंच का लन्ड अंदर बाहर हो रहा था। मैं भाभी की चिकनी चूत में धक्के पर धक्का देता रहा और भाभी की चुदाई करता रहा, भाभा ‘आह आह … आमह अमह …’ करती रही और मैं भाभी को चोदता रहा।
चोदते चोदते मैं भाभी के स्तन भी दबाता, चूसता और लिपकिस भी करता। आखिरकार मेरे लंड से वीर्य के फव्वारे निकले और हम दोनों के मुंह से एक साथ निकला- आह…ह!और मैं जोर जोर से झटके मारते हुए भाभी के नंगे वक्ष पर ही लेट गया।
इतनी कामुक और जबरदस्त चुदाई के बाद हम दोनों ही एक दूसरे की बांहों में सो गये। रात के करीब 10 बजे हम दोनों को होश आया और हम दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गये, नीचे आये तो देखा कि प्रोग्राम अब बंद ही हुआ है।
हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराये जा रहे थे।
जब सब सोने जाने लगे तो तभी मेरे घर से फोन आया कि घर पर दादा जी की तबियत खराब है, जल्दी घर आ जाओ।मैंने यह बात सभी को बतायी तो सभी को बुरा लगा, खासकर मीनू भाभी को।पर मैं खुश था कि जिस काम के लिए आया था, वह हो गया। सुबह होते ही मुझे जाना था.
सोते समय संजय ने कमरे में आते ही कहा- क्यों मना ली सुहागरात मीनू भाभी के साथ?मैं- तुम्हें कैसे पता कि मैंने मीनू भाभी को चोदा है?संजय- मैंने खिड़की से सब देख लिया। शुरू से लेकर अंत तक सब कुछ। अरे यार, तुम इसी काम के लिए तो आये थे न! पर दुख इस बात का है कि मैं अभी तक भाभी को नहीं चोद पाया।मैं- अरे तो क्या हुआ, तुम तो रोज भाभी को चोदते ही हो। कल चोद लेना। अच्छा बताओ भाभी को चोदते हुआ मैंने देखा कि उनकी चूत के ऊपर कोई तिल नहीं था।संजय- क्योंकि मैंने तुमसे झूठ बोला था यार! मैंने कभी भी अपनी भाभी को चोदा ही नहीं है।
यह सुनकर तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। मैं बोला- मुझे लगा कि भाभी को तुमने भेजा मुझसे चुदवाने लिए। बाप रे बाप … इसका मतलब मैंने भाभी को पटाकर चोदा। अगर वो नहीं मानती तो मैं तो बदनाम हो जाता।संजय उदास था तो मैंने कहा- उदास मत हो, मैंने भाभी को पटा लिया है. कल जाते वक्त मैं तुम्हारे लिए उनको सेट करके जाऊंगा।
अगली सुबह होते ही मैं तैयार होकर अपना समान पैक कर जाने वाला था कि तभी भाभी हमारे कमरे में आई और बोली- ओह तो जा रहे हो?संजय भी कमरे में ही था।मैं- हाँ भाभी … पर मैं चाहता हूं कि जो चुदाई आपने मेरे साथ की है, वह आप मेरे दोस्त संजय के साथ भी करें। आपका अपना देवर है, आप उस पर अपना यौवन लुटाइए। मेरी बात सुन घबराइए नहीं भाभी, संजय भी यह सब जानता है। यह आपके साथ की झूठी चुदाई की कहानी बता कर मुझे अपने घर लाया था। लेकिन मैंने तो आपके साथ सच में चुदाई कर ली। यह सोच कर संजय उदास है।
मीनू भाभी- ओह तो यह बात है। पर तुमने कभी बताया क्यों नहीं संजय कि तू मुझे चोदना चाहता है?संजय- डर लगता था भाभी कि आप भैया को सब बता दोगी।मीनू भाभी- अरे भैया से क्या डरना, उन्हें अपने बिजनेस से फुर्सत मिले तब न तुम्हारे या मेरे बारे में सोचेंगे। पर कोई बात नहीं मेरी झूठी चुदाई की कहानी सुनाने की जरूरत नहीं है। तुम मुझे अब सच में चोद सकते हो।“क्या भाभी … आप सच कह रही हो न?” यह कहते हुए संजय अपनी मीनू भाभी को बांहों में भर लिया।अपने देवर को किस करते हुए मीनू भाभी ने कहा- हाँ मेरे राजा।फिर दोनों देवर भाभी एक दूसरे पर चुम्बनों की बौछार करने लगे।फिर मीनू भाभी ने संजय अपने से अलग करते हुए कहा- अभी नहीं, बाद में।
उसके बाद मैं सबसे विदा लेकर चला गया.और जब कभी भी संजय से मिलता हूं तो वह हर बार अपनी भाभी की सच्ची चुदाई की कहानी सुनाता है। मैंने तो मीनू भाभी को सिर्फ एक बार एक ही रंग की साड़ी में चोदा है पर संजय ने तो न जाने कितनी ही बार कितने ही रंग की साड़ी, सलवार कुर्ता, पजामा, नाइटी में मीनू भाभी को चोदा है।
आज भी मैं मीनू भाभी के साथ की अपनी ज़िन्दगी की पहली चुदाई को याद करता हूं तो मेरा 6 इंच का लन्ड खड़ा हो जाता है।
मेरे जीवन की लिखी यह पहली कहानी आप को कैसी लगी? कॉमेंट और ईमेल जरूर करना।support@mohakkisse.com