राहुल और गीता भाभी के घर से लौट कर आया तो रोमा ने मुझे उत्तेजित करके सेक्स किया।
अगले दिन राहुल दोपहर को मेरी फैक्ट्री आये और बोले- चल ठण्डा पिला!मैंने फ्रिज से बोतल निकाल कर उसे दो गिलासों में करी।ठंडा पीते पीते मैंने उनको सॉरी बोला।
राहुल हंसकर बोले- सॉरी तो तुझे बोलना चाहिए पर गीता को जिसका बर्थडे तूने ख़राब कर प्रिया।वो बोले- चाहे फिर कभी नहीं मानता, पर कल तो तुझे गीता को किसी बात के लिए मना नहीं करना चाहिए था।
मैंने राहुल को बोला- आप मेरी ओर से भाभी को सॉरी बोल देना!राहुल बोले- गलती तूने की है, सॉरी तुझे खुद घर आकर बोलनी होगी।
मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी, घर आने की तो राहुल ने अपने मोबाइल से गीता का नंबर मिलाया और बोले- ले सनी से बात कर ले!
गीता ने मुझसे फ़ोन पर चुम्बन करते हुए कहा- जो कुछ हुआ, वो सबकी मर्जी से हुआ… उसे भूल जाओ और आज घर आ जाना!
मैं शाम को फैक्ट्री से घर जल्दी आ गया और रोमा को झूठ बोल कर कि मुझे किसी पार्टी के साथ फैक्ट्री पर ही डिनर करने जाना है, नहा धोकर निकल लिया।
घर से निकला ही था कि राहुल का फ़ोन आ गया- कितनी देर में आ रहा है?
मैंने कहा- तुम लोग खाना खा लो, मैं रात को आऊँगा, जब तुम फ्री हो जाओ तो मुझे फोन कर देना!
जब आदमी बेईमानी पर आता है तो वो बहुत प्लानिंग करता है, मैंने होटल से खाना पैक कराया, फैक्ट्री जाकर खाना खाया।
तभी राहुल का फ़ोन आ गया।अब मेरे पास यदि रोमा शक करती या कुछ पूछती तो होटल का बिल भी था और राहुल के घर जाने का बहाना भी था कि राहुल ने फ़ोन करके बुलाया था।
मैं रात को नौ बजे करीब राहुल के घर पहुँचा, राहुल ने मेन गेट खोला और मुझे अन्दर करके बंद कर प्रिया।चाचाजी चाचीजी अपने कमरे में सोने की तैयारी में होंगे, हम दबे पाँव ऊपर आये।
गीता भाभी ने आज काले रंग की स्लीवलेस मिडी पहन रखी थी और गोरी होने से उसके ऊपर खूब फब रही थी।गीता की आँखें नशीली हो रही थी।
राहुल ने मुझसे कहा कि मैंने गीता को उसके बर्थडे पर रुलाया है, इसलिए अब मैं ही उसे खुश करूँगा।
मैंने गीता के पास जाकर सॉरी बोला तो उसने मेरे बाल पकड़कर मुझे अपनी ओर खींचा और होठों से होंठ मिला दिये।
मुझे लगा कि शायद यही सही है तो मैंने कुछ एतराज नहीं किया और गीता के सर के पीछे दोनों हाथ ले जाकर उसे अपनी ओर भींच लिया और अपनी जीभ उसके मुंह के अन्दर कर के उसकी जीभ को चूसने लगा।
वो पागलों भी की तरह मेरी जीभ को अपनी जीभ से चूस रही थी।
अब अचानक ही मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर आ गया और उसका एक हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था।अचानक ही राहुल की आवाज़ आई- अरे भाई हमें भी शामिल कर लो बर्थडे पार्टी में!
सच में हम दोनों को ही झटका लगा… वाकयी हम तो यह भूल ही गए थे कि कमरे में राहुल भी है।पर गीता बहुत प्रैक्टिकल निकली, उसने राहुल को भी खींचा और अब उसके होंठ राहुल के होंठों से मिल चुके थे और उसके एक हाथ में मेरा और दूसरे हाथ में राहुल का लंड था।
मैं भी थोड़ा झुककर उसकी मिडी के ऊपर से ही उसके मम्मे चूस रहा था।यह देख राहुल ने उसकी मिडी उठाकर उसकी चूत में अपनी उंगली कर दी थी।
दो मिनट के बाद ही गीता ने हम दोनों को धक्का देकर अलग कर प्रिया और नीचे बैठकर कभी मेरा कभी राहुल का लंड चूसने लगी। उसका चूसने का स्टाइल ऐसा ग़जब था जैसे वो चूस कर अंदर का माल निकालना चाहती हो।
राहुल और मेरे दोनों के लंड पूरे तने हुए थे। भाभी शिश्न की खाल को अपने हाथ से आगे पीछे कर के पूरी उत्तेजना पैदा कर रही थी।
राहुल ने थोड़ा झुक कर गीता की मिडी ऊपर खींच कर उतार दी।हम लोगों ने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिये।अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।
गीता खड़ी हुई और हम दोनों के हाथ पकड़कर बेड तक ले गई, वो बीच में लेटी, उसकी एक ओर मैं और दूसरी ओर राहुल था।
उसने अपने हाथों में हम दोनों के लंड ले लिए, मैं उसके होंठों से चिपक गया, मेरे हाथ उसके चेहरे को मजबूती से अपनी ओर भींचे हुए थे।
राहुल को कुछ और समझ में नहीं आया तो वो गीता से अपना लंड छुड़ाकर उसकी चूत को चूसने लगा।गीता की चूत तो पहले ही पानी छोड़ चुकी थी।
राहुल ने अपनी जीभ उसकी चूत में पूरी अन्दर कर रखी थी और उसने उसकी चूत में अपने मुँह से खूब सारा थूक भी वहाँ डाला हुआ था जो बहकर गीता की गांड तक आ रहा था।
राहुल के चूमने चाटने से गीता की आग बहुत भड़क उठी थी।
अब मैं भी उसके होंठ छोड़कर उसके मम्मे चूस रहा था। गीता के मम्मे मांसल और गोरे थे और उसकी निप्पल भी उठी हुई थी। निप्पल के चारों ओर भूरे रंग की गोलाई थी, कुल मिलकर हूरों जैसा रूप था गीता का…शायद किसी के लिए भी उसके नजदीक आना एक नसीब की बात थी और ऐसे हुस्न की मलिका आज नंगी मेरी बाँहों में थी।
राहुल ने चूत चूसते चूसते अपनी एक उंगली गीता की गांड में कर दी, गीता हल्का सा चीखी!
तभी मैंने उसके निप्पल पर दातों से काटा था, मुझे लगा कि गीता मेरे काटने से चीखी है तो मैंने अपने होंठों से उसका मुँह सिल प्रिया। राहुल ने भी अपनी जीभ की स्पीड और बढ़ा दी।
गीता ने मेरे कान में फुसफुसा कर कहा- अन्दर आ जाओ!मैं वहाँ से हटा तो राहुल को भी हटना पड़ा और राहुल एक बार बेड से नीचे उतरा।
मैंने मौका साफ़ देखा तो गीता की टांगों के बीच में आ गया और धीरे से उसके ऊपर आ गया, गीता ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के ऊपर रख प्रिया।
मैंने भी अपने लंड का दवाब गीता की चूत पर डाला और धीरे से उसकी चूत के अन्दर किया। चूंकि गीता की चूत को राहुल पहले ही चिकना किये हुए था, इसलिए गीता को एक नए लंड से कोई दिक्कत नहीं हुई।
गीता भाभी और मेरे लिए अपने साथी के अलावा किसी अन्य से सम्भोग करने का पहला अवसर था इसलिए आग पूरी लगी हुई थी, दो जिस्म एक होने को बेक़रार थे, हम भूल चुके थे कि राहुल कमरे में ही है।
गीता ने अपनी बाहें मेरी गर्दन में डालकर मुझे झुका लिया था और मैं भी अपना लंड पूरा अन्दर कर चुका था। गीता की कामाग्नि भड़क चुकी थी, वो मेरे लंड को और गहराई से अन्दर करना चाह रही थी।
मैंने धक्के देने शुरू किया… अब गीता की सीत्कारें निकलने लगी, वो हाँफ रही थी और कह रही थी- सनी और अन्दर करो… जोर से करो, और तेज करो प्लीज सनी… मुझे पूरा मजा दो… आज फाड़ दो मेरी चूत को!
मैंने भी पूरा जोर लगा कर अपनी स्पीड बढ़ा रखी थी।
अब राहुल भी अब बेड पर पर गीता के सर के पास आ गया था, गीता ने हाथ बढ़ाकर राहुल का लंड अपने मुँह में ले लिया।
राहुल मुझे देखकर मुस्कुराया, मैंने अपने हाथ से राहुल का हाथ पकड़ा।
तभी मुझे लगा कि मैं छूटने ही वाला हूँ, मैंने कहा- गीता भाभी, मैं आने वाला हूँ कहाँ निकालूँ?
गीता ने मुझे भींचते हुए कहा- बाहर मत निकालना!
मैं दो-चार धक्कों में ही आ गया, मैंने अपना सारा माल गीता भाभी की चिकनी चूत में डाल प्रिया और साफ़ करने के लिए उठने की कोशिश की पर गीता ने मुझे जकड़ लिया, बोली- कहीं मत जाओ, ऐसे ही पड़े रहो!
मगर मुझे लगा कि अभी राहुल का तो हुआ नहीं है इसलिए मैं जोर देकर उठ गया और बाथरूम की ओर चल प्रिया।
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