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दोस्त की माँ की चूत मारी

नवदीप शर्मा

20 Aug 2009 को प्रकाशित

दोस्त की माँ की चूत मारी
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नमस्कार दोस्तो, मैं आप का जाना पहचाना नवदीप, एक बार फिर आपके सामने एक नई कहानी लेकर आया हूँ यह कहानी बिल्कुल सच्ची है.. जो कि मेरी ज़िंदगी में घटी है।

इस कहानी में मेरी हीरोइन है मेरे दोस्त की माँ.. मैंने उसकी दो-तीन बार चुदाई की है और जितनी बार भी की है.. उसे हर बार खुश ही किया है। उसका नाम शांति है.. वो दिखने में ठीक-ठाक है और उसका कद भी कुछ ज्यादा लंबा नहीं है।पहले तो मुझे उसकी माँ में कोई इंटरेस्ट नहीं था.. पर फिर मुझे कहीं से पता चला कि वह एक नंबर की रंडी बन चुकी है.. तो मैंने भी ठान ली कि इस माल की चूत का मजा तो लेकर ही रहूँगा।

मुझे जब पता चला कि उसकी चुदाई तो मेरा एक दोस्त भी कर चुका है। यह बात जानने के बाद उसकी चूत की सेवा करने के लिए मेरा लिंग और भी मचलने लग गया। मैंने सोचा कि यदि वह चुदक्कड़ है तो आसानी से पट जाएगी। मैंने प्लानिंग बनाना शुरू कर दी, जब भी वह काम पर जाती.. मैं उसके पीछे-पीछे चला जाता, उस पर लाइन मारने लग गया।

उसका बेटा मेरा बहुत ही अच्छा दोस्त था.. तो मैं उससे मिलने के बहाने उसके घर चला जाता था। पर जब मेरा दोस्त टीवी देख रहा होता तो मैं पानी पीने के बहाने रसोई में चला जाता और उसकी माँ से बातें करने लग जाता।बातों-बातों में पता चला कि उनका पति बहुत शराब पीता है और रात को लेट आकर उनसे लड़ाई करके सो जाता है। मुझे यह सब बातें सुनकर पहले तो दुख हुआ पर बाद में मैंने सोचा कि लाइन क्लियर है.. यह भी लंड के लिए तरस रही है।

एक दिन उसका बेटा घर नहीं था.. तो मैंने मौका देख कर उसके घर जाना सही समझा। उसके घर में उस वक्त तक कोई भी नहीं था.. मैंने पहले तो दो कंडोम लिए और उसके घर को चल प्रिया। मुझे तो पता ही था कि आज मैं इसकी चूत का रस जरूर चख पाऊँगा।

मैं उनके घर गया.. जाकर सोफे पर बैठ गया तो वो मेरे लिए पानी लेकर आई और हम बातें करने लग गए।मैं धीरे-धीरे उसके पास होता रहा, मैंने अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रख प्रिया.. धीरे-धीरे मसलने लगा।

दोस्त की माँ को भी पता चल गया था कि मेरे साथ अब कुछ होने वाला है.. तो वह भी मेरा साथ देने लगी।अचानक से ही वह उठी और मेरे पर आकर बैठ गई और मुझे जोर-जोर से किस करने लग गई।मैं भी उसे किस करता रहा।

पांच मिनट तो किस करने में ही बीत गए। फिर मैंने उनको उठाया और उनको सोफे पर लिटा प्रिया। धीरे-धीरे उनके सारे कपड़े निकाल दिए।अब वह सिर्फ मेरे सामने एक लाल कलर की पैंटी और ब्रा में थी।यकीन नहीं आ रहा था कि मैं अपने दोस्त की माँ को चोद रहा हूँ।

मैंने धीरे-धीरे करके उसके शरीर को चूमना शुरू कर प्रिया। वह भी बड़े मजे से चुसवा रही थी अपने बदन को.. उसका बदन एकदम गोरा था। मैं तो पागल हुए जा रहा था उसका इतना हसीन शरीर देखकर।

फिर उसके बाद मैंने उनकी लाल कलर की पैंटी को अपने दांतों से धीरे-धीरे नीचे किया और मैं क्या देखता हूँ एक गुलाबी रंग की चूत.. जिस पर एक भी बाल नहीं था।

उसकी गुलाबी रंग की चूत देखकर मैं तो समझो पागल ही हो गया। मैं उसकी चूत पर टूट पड़ा.. अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में डाल कर अन्दर-बाहर करने लगा। वह तो पागल की तरह ‘आहें’ भर रही थी। मैं यह देख कर और पागल होता रहा और उसकी सारी चूत का रस मैंने निकाल लिया और पी गया।

अब उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को भी दांतों से निकाला और उसके मम्मों पर टूट पड़ा। उसके मम्मे कुछ ज्यादा बड़े नहीं थे.. पर फिर भी काम चलाऊ थे।मैं उसके मम्मों को 10 मिनट तक चूसता रहा। फिर उसके गुलाबी होंठों पर आ गया और उसके होंठों को चूसता रहा। मैंने उसको इतना गर्म कर प्रिया कि मानो अभी के अभी फट जाएगी।

और फिर उसके सब्र का बाँध टूट गया.. वह बोलने लग गई- आह्ह.. फाड़ डालो मेरी चूत.. डाल दो अपना इतना बड़ा लंबा लंड.. मेरी चूत में.. और बुझा दो मेरी सारी की सारी प्यास.. अब सब्र नहीं होता..

मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड उसकी चूत पर सैट किया। तभी मुझे याद आया कि मैं कन्डोम भी लेकर आया हूँ। तो मैंने कंडोम लगाना शुरू किया..दोस्त की माँ ने बोला- मुझे कन्डोम के बिना सेक्स करना अच्छा लगता है.. प्लीज कन्डोम मत लगाओ।

मैंने और देर ना करते हुए अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर सैट किया और एक धक्का मारा।उसकी चूत बड़ी टाइट थी.. मेरे धक्के से वो कलप उठी। क्योंकि इतना बड़ा लंड उसने आज पहली बार लिया था.. उसकी चीख निकल गई।

मैं बिना रुके उसको चोदता रहा। फिर मैंने उसको डॉगी स्टाइल में कर प्रिया और वह मेरे सामने अपनी दोनों टाँगें चौड़ी कर अपनी चूत को ऊपर उठाकर मुझे निमंत्रित कर रही थी कि आओ राजा डालो अपना लंड मेरी सेक्सी गुलाबी चूत में..। तो मैंने देर ना करते हुए अपना लौड़ा उसकी चूत पर फिर से सैट किया और धक्का मारा तो मेरा पूरा का पूरा 8 इंच का लंड उसकी चूत में चला गया। उसकी चीख निकल गई।

मैं बेरहमी से उसे चोदता रहा और 10 मिनट चोदने के बाद मैंने पोज चेंज किया। अब मैं नीचे लेट गया और वह मेरे और लंड पर आकर बैठ गई। दिक्कत हो तो होनी ही थी.. क्योंकि मेरा लंड बड़ा था उसकी चूत छोटी थी। तो कैसे भी करके मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर सैट किया और धीरे-धीरे उसको नीचे कर प्रिया। तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया था और उसकी बच्चेदानी को हिला रहा था।

मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए और उसकी चीखें तो मानो कान फाड़ देने वाली निकल रही थीं और मुझे पागल बना रही थीं। मैंने बड़ी बेरहमी से उसे चोदना शुरू कर प्रिया और उसकी चूत में अपना 8 इंच का लंड पेलता चला गया।

मैं उसको हचक कर चोदते हुए बोल रहा था- ले साली.. ले आज मेरा लंड.. देख कैसा है.. और ले अपने खसम का तो रोज लेती है.. ले..‘हाँ राजा चोद मुझे.. आज से तेरा ही लण्ड लूँगी अपनी चूत में.. मेरे खसम की तो लुल्ली है.. तेरा असली मर्दों वाला लंड है.. आज से मैं तेरे से ही चुदवाऊँगी में. आह्ह.. पेल.. तेरी रखैल बन कर रहूँगी.. आज से तू जैसे कहेगा मैं वैसे ही करूँगी.. पर मेरी चूत की सेवा तो जरूर करते रहना.. इसमें बहुत आग भरी है..आह्ह.. पेल.. इसकी आग पर पानी डाल दो आज.. ओहह.. मेरी चूत के राजा.. चोद..’

फिर 15 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना सारा का सारा माल उसकी चूत में ही छोड़ प्रिया और हम शांत हुए।

जब टाइम देखा तो पता चला उसके बेटे के आने का टाइम हो गया था.. तो मैंने अपने कपड़े और उसने भी अपने कपड़े पहने और हमने एक किस किया। फिर मैं अपने घर आ गया।

तो दोस्त कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी.. आप लोग मुझे ईमेल भी कर सकते हैं और मुझे बता सकते हैं कि मेरी स्टोरी में कैसी लगी।support@mohakkisse.comआप लोग मुझे फेसबुक पर भी मिल सकते हैं इसी आईडी को फेसबुक पर सर्च करें।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

राजन चौधरी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

R

Rohan77

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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