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चुदाई की कहानी पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 190 बार

दोस्त की माँ की मस्त चुदाई

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बात तब की है जब मैं पढ़ता था. हमारे ही अपार्टमेन्ट में हमारे फ्लैट के ऊपर मेरा दोस्त रहता था जिसका नाम रोहित था. हम साथ साथ एक ही क्लास में पढ़ते थे और एग्जाम टाइम में उसके घर ही पूरी रात रहता था.उसकी माँ का नाम भावना है जो दिखने में एकदम सेक्सी थी उनके बूब्स की तो क्या बात.. खरबूजे जैसे बड़े थे. वो रात को हमेशा नाईटी में रहती थी और वो ब्रा पहनती नहीं तो उनके बूब्स साफ़ दिखाई देते थे.

एक बार की बात है जब मैं और रोहित उसके घर पर स्टडी कर रहे थे तब वो पौंछा लगाने आई, वो झुक कर पौंछा लगाने लगी, उनके पूरे बूब्स नंगे दिख रहे थे, मेरा तो लंड पूरा खड़ा हो गया.मैं छुप कर देख रहा था, तभी भावना ने मुझे और मेरे खड़े लंड को देख लिया और तुरंत वहां से चली गयी.

अगले दिन जब मैं उसके घर गया तो वो घर पर अकेली थी और सो रही थी.मैंने देखा रोहित घर पर नहीं था, मैंने उसे फ़ोन किया तो उसने कहा कि वो और उसके पापा आउट ऑफ़ स्टेशन हैं और रात को घर आयेंगे.

मेरी तो लॉटरी निकल गयी मानो… मैं भावना के पास गया और देखा तो वो गहरी नींद सो रही थी, मैंने हिम्मत करके उनके बूब्स को टच किया, उन्होंने कुछ किया नहीं.तो मैंने उनके लिप्स पर मेरे लिप्स लगा दिए, तब भी वो सो रही थी और मैं किस करने लगा.

अचानक उनके हाथ मेरे सर पर आ गए और वो भी मुझे किस करने लगी, मैंने देखा कि वो पूरी तरह जग चुकी थी.मैं डर गया और मैं हट गया.उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि मैं जरूर आऊंगा.

भावना ने मुझे बताया कि वो कबसे तड़प रही थी चुदवाने के लिए, उनके पति ने उन्हें एक साल से छुआ भी नहीं है. वो रोने लगी.मैंने उनको कहा- आंटी, आज आपकी प्यास में बुझाऊंगा.और उनको किस करने लगा, बूब्स दबाने लगा. मैंने उनकी साड़ी निकाल दी और उनका ब्लाउज भी निकाल दिया, अब वो सिर्फ ब्रा में थी, उनका पेटीकोट भी मैंने निकाल दिया.

अब वो ब्रा और पेंटी में थी, उनके सिर्फ आधे बूब्स ही ब्रा में समा रहे थे. मैं तो पागल हो गया और बूब्स को चूसने लगा.वो अहह.. अह्ह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… चुसो…. अह्ह्ह्ह… जैसी आवाज निकल रही थी.

बाद में मैंने आंटी को पूरी नंगी कर दिया और मैं भी पूरा नंगा हो गया, वो मेरा लंड देख कर पागल हो गयी और चूसने लगी और हम 69 पोजीशन में आ गए.

मैंने उनकी चूत को देखा बिल्कुल क्लीन शेव, एक भी बाल नहीं था, मैं चूत को चूसने लगा, आंटी को बहुत मजा आ रहा था, वो मेरा लंड भी अच्छी तरह चूस रही थी. 5 मिनट के बाद आंटी झड़ गयी और पूरा पानी मेरे मुख पर छोड़ दिया, मैं सारा पानी चाट गया.आंटी ने कहा- अब रहा नहीं जाता, मेरी चूत को चोद डालो!मैंने आंटी को कहा- मेरा पहली बार है.तो वो और भी ज्यादा खुश हो गयी.

वो बेड पर लेट गयी और मैंने उनकी चूत उंगली में डाल दी, बहुत ही टाइट चूत थी, उंगली भी मुश्किल से जा रही थी.आंटी सिसकारियां भरने लगी. अह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह्ह…फिर मैंने लंड उनकी चूत के सेण्टर पर रखा और थोड़ा रगड़ने के बाद एक जोर का झटका मारा और मेरा 2 इंच तक अन्दर चला गया.

मेरा पहली बार था इसलिए मुझे भी दर्द हुआ और भावना की आँखों से आंसू आ गए, उन्होंने कहा- निकालो इसे…फाड़ दी मेरी चूतभोसड़ी के!मैं थोड़ी देर रुका और बाद में जब आंटी का दर्द कम हुआ तो मैं लंड आगे पीछे करने लगा और वो भी गांड उछाल कर चुदवा रही थी. मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया और वो अह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… अह्ह्ह्ह… चोदो… अह्ह्ह.. जैसी आवाजें निकाल रही थी और पूरे रूम मे फ़च्छ.. फच… की आवाज आ रही थी.

10 मिनट के बाद वो झड़ गयी पर मैं अभी झड़ा नहीं था, मैं लगातार शॉट लगा रहा था. बाद में मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डालकर चोदने लगा और फट.. फट्ट… शॉट लगाने लगा थोड़ी देर में मैं झड़ गया और सारा वीर्य मैंने उनकी चूत में डाल दिया और वो आहें भरने लगी और वीर्य उनकी टाईट चूत के बाहर टपक रहा था.

मैं उनके ऊपर करीब 15 मिनट तक पड़ा रहा.

मैंने उनकी गांड को देखा तो मैंने उनको गांड मारने को कहा, वो मान गयी और मैंने लंड उनकी गांड पर रखा, धक्का मारा, पर अन्दर नहीं गया तो मैंने लंड पर तेल लगाया, उनकी गांड पर भी तेल लगाया और एक जोर का झटका मारा और आधा लंड आंटी की गांड में!वो चिल्लाई और रोने लगी.

मैं थोड़ी देर रुक कर उनके बूब्स दबाने लगा और बाद में एक जोर का झटका मारा तो पूरा लंड उनकी गांड में! मैं लंड आगे पीछे हिलाने लगा, उन्हें भी मजा आने लगा. कुछ मिनट के बाद मैं झड़ गया और सारा माल उनकी गांड में गिर गया.मैंने भावना की तरफ देखा तो वो बहुत खुश थी, आंटी मुझे किस करने लगी.

बाद में जब हम खड़े हुए तो मैंने उनकी टाईट चूत और गांड की तरफ देखा तो चूत का मुख तो बहुत बड़ा हो गया था और सूज गयी थी, गांड का मुख भी खुल गया था.फिर हम दोनों ने साथ में शावर लिया और एक दूसरे को अच्छी तरह साफ़ किया और कपड़े पहन लिए और मैंने घड़ी में देखा तो करीब 4 बज रहे थे.

और मेरा लंड अब शांत नहीं हो रहा था तो मैंने उनको फिर से चोदने को कहा तो उन्होंने कहा कि वो थक चुकी हैं पर मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उन्हें बेड पर पटका और किस करने लगा और बूब्स दबाने लगा, निप्पल को काटने लगा, चूसने लगा.इसके बाद मैंने आंटी की चूत चुदाई की!

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

डॉक्टर मंकी

1 week ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

शेखर वर्मा

1 week ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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