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चुदाई की कहानी • पठन समय: 6 मिनट • पढ़ा गया: 1,247 बार

बल्लू की बहन

toxysex

13 Oct 2015 को प्रकाशित

बल्लू की बहन
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प्रेषक : टोक्सी

हाय पाठको !

आपका शुक्रिया कि मैं अपने एक नये अनुभव को आप के सामने पेश कर रहा हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं सर्दी के दिनों में धूप सेंक रहा था। मेरे पड़ोस की कुछ लड़कियां भी हमारे घर की छत पे धूप सेंकने आती थीं क्योंकि हमारे घर की छत पे धूप बहुत अच्छी लगती थी।

मेरा एक दोस्त, जिसका नाम बल्लू भाई है, की बहन भी धूप सेंकने हमारी छत पे ही आती थी। उसका नाम बॉबी था। गज़ब की सेक्स बॉम्ब थी वो। उसकी मस्त गांड को देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता था। उसको चोदने का बहुत मन तो था लेकिन बल्लू से डर की वज़ह से कभी हिम्मत नहीं हो पाई थी। मेरी और उसकी बहुत अच्छी दोस्ती थी लेकिन शायद बल्लू भाई को हमारी ये दोस्ती पसंद नहीं थी। वो बार बार मुझे धमकी देता था कि मैं उसकी बहन से किसी तरह की दोस्ती न रखूं, लेकिन आप तो जानते हैं कि लंड की प्यास के आगे हर कोई बेबस है।

उस दिन मेरी मॉम डोक्टर के पास गई हुई थी। मैं घर पे ब्ल्यू मूवी देख रहा था। मुझे पता भी नहीं चला कि कब बॉबी मेरे पीछे आ के खड़ी हो गई। वो मूवी देखने लगी। अचानक उसके हाथ से कुछ टकराया, मैने मुड़कर देखा तो बॉबी मेरे सामने थी। मैने पहले तो टीवी बंद किया, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करुं।

अचानक बॉबी ने कहा- तुम तो बहुत गंदे हो।

मैंने कहा- नहीं बस टाइम पास कर रहा था।

उसने कहा- बल्लू भैया ठीक कहते हैं कि तुमसे कोई वास्ता ना रखूं, मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम ऐसी मूवीज़ भी देखते होंगे।

मैंने कहा- मूवी तो तुमने भी देखी है।

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- प्लीज़ मॉम या डैड से इस बारे में कुछ नहीं कहना !

जबकि मैं भी जानता था कि वो कुछ कहने वाली नहीं है। मैंने देखा कि उसने अपना हाथ छुड़ाने की ज़रा भी कोशिश नहीं की। मेरा हौंसला और भी बढ़ गया। मैंने उसके हाथ को धीरे धीरे दबाना शुरु किया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। शायद फ़िल्म देख के वो भी गरम हो चुकी थी। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसके होठों को हल्का सा चूम लिया और कहा- प्लीज़ !मॉम से मत कहना !

उसने जवाब नहीं प्रिया।

मैंने उसकी चूची को चूम लिया और कहा- मोम से मत कहना प्लीज़ !

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गलती की सजा-2

उसने कोई जवाब नहीं प्रिया। वो मस्त हो चुकी थी।

मैंने धीरे धीरे अपना हाथ उसकी कमीज़ में डाल प्रिया और उसके मोम्मे दबाने लगा। मैंने अब मोर्चा सम्भालना शुरु कर प्रिया था, मैंने धीरे से उसकी ब्रा के हुक खोल दिये और उसकी कमीज़ और ब्रा को अलग कर प्रिया शायद वो मज़ा ले रही थी अब उसकी चूचियां मेरे सामने थी, मैने उसकी चूचियों को अपने मुँह मे डाल लिया।

वो तड़प उठी- नहीं समीर ये ठीक नहीं है !

मैंने उसके होठों पे अपने होठों को रखते हुये कहा- जब मज़ा आये तो सब ठीक हो रहा है।

उसने कहा- अगर बल्लू भाई को पता लग गया तो?

मैंने कहा- उसने कौन सा तुझे चोदना है जो उसे पता लग पायेगा। हम इस बात को राज़ ही रखेंगे।

और मैंने समय खराब ना करते हुये उसकी शलवार को भी अलग कर प्रिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ़ पैंटी में थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि बल्लू की सेक्सी बहन को आज मैं चोदने जा रहा हूं। मैंने उसकी चूचियां चूसते हुये उस की पैंटी को भी उस से अलग कर प्रिया। मैंने उसे ६९ पोजिशन में लिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो मेरे लंड को चूस रही थी।

वाह क्या आनंद के लम्हे थे वो? वो १५ मिनट में झड़ गई लेकिन मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी बिना बालों की चूत को उंगली से सहलाना शुरु किया।

अब वो दोबारा जोश में आ रही थी। मैंने उसकी टांगों को ऊपर उठाया और अपना ७” का लंड उसकी चूत में डाल प्रिया वो चीख उठी। मैंने उसके मुँह पे हाथ रख प्रिया ४-५ धक्के लगाने के बाद जब लंड पूरी तरह अन्दर घुस गया और उसे भी मज़ा आने लगा तब मैंने हाथ हटा प्रिया। अब उसके मुंह से आआआआह ऊऊऊऊउह करो ! और करो ! की आवाज़ निकल रही थी। अब हम जोश में थे।

डू इट फ़ास्ट, डू इट फ़ास्ट, फ़क मी, फ़क मी, फ़क मी की आवाज़ से कमरा गूंज रहा था। मैंने २० मिनट तक उसको चोदा। हम दोनो खुश थे। उसके बाद वो कहने लगी- तुमने अपना वीर्य तो चखाया ही नहीं?

तो मैंने कहा- उसमें क्या बड़ी बात है और फ़िर मेरा लंड उसके मुँह में था। एक बार फ़िर वो मेरा लंड चूस कर मज़ा ले रही थी।

सच बताऊँ तो दोस्तो जितना मज़ा बल्लू भाई की बहन को चोद कर आया उतना मज़ा ज़िंदगी में कभी भी नहीं आया। गज़ब का नशा है उसकी चूत में। उस दिन के बाद मैंने कई बार बल्लू की बहन को चोदा। और बल्लू आज भी इस बात से बेखबर है।

तो चोदो चुदाओ और लाइफ़ को खुश हाल बनाओ।

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी
र

राज गुप्ता

3 months ago

बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी लिखी है भाई। मजा आ गया।

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