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चुदाई की कहानी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 487 बार

कॉलेज़ की दोस्त

friendsforever1860

11 Oct 2010 को प्रकाशित

कॉलेज़ की दोस्त
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प्रेषक : पंकज मयूर

मैं आज आपको एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।

यह कहानी मेरे साथ १० दिन पहले हुई एक घटना है।

मैं एक विद्यार्थी हूँ और बी ए के पहले साल में पढ़ता हूँ।

मैं कॉलेज में जब नया नया गया तो कुछ दिनों बाद ही हमारा एक नया ग्रुप बन गया जिसमें ३ लड़के और ८ लड़कियाँ थी। हम सब हर रोज एक साथ ही बैठते थे क्लास में, क्योंकि हमारी क्लास में पूरे लम्बे लम्बे बैंच थे जिस पर तक़रीबन ८ से १० विद्यार्थी बैठ सकते थे। जब भी हमारा कोई पीरियड फ्री होता तो हम सब या तो कैंटीन में बैठ जाते थे या फिर ग्राउंड में बैठ जाते थे। हम सब दोस्त आपस में अपनी सभी बातें करते थे एक दूसरे के साथ, यहाँ तक कि निजी बातें भी।

कई बार मैंने शेफाली यानी हमारे ग्रुप की एक लड़की को मेरी तरफ गौर से देखते हुए देखा। वो टकटकी लगा कर मुझे ही देख रही होती थी। यह सिलसिला काफी दिनों तक चला तो मुझे महसूस हुआ कि उसे मुझमें रूचि है। वो हर किसी से मेरे बारे में ही बात करती थी। यह सब देख कर मुझे भी उसमे रूचि बढ़ने लगी। उसके बाद जब भी हम कभी कैंटीन या क्लास में बैठते तो वो और मैं एक साथ बैठने लगे।

आपको मैं बताना तो भूल ही गया कि उसका रंग एक दम सफ़ेद था, वह थोड़ी पतली थी जिससे बहुत सेक्सी लगती थी। उसका फिगर ३४-२६-३६ के करीब होगा।

एक दिन मैंने सोचा क्यों न इससे बात की जाए इस बारे !

तो मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मुझ से प्यार करती हो? मेरे इस सवाल से वो हक्की बक्की रह गई और चुप चाप खड़ी रही। तो मैंने उससे फिर से कहा कि जवाब तो दो !

तो वो शरमाते हुए वहां से भाग गई और बोली कि मुझे नहीं पता !

तो मैं समझ गया कि आग तो दोनों तरफ लगी है। मैंने उससे अगले दिन फिर जवाब माँगा तो उसने धीरे से हाँ कर दी और कहने लगी कि ग्रुप में इस बारे में किसीको पता नहीं चलना चाहिए तो मैंने हाँ में जवाब प्रिया क्यों कि मैं भी यही चाहता था। इस तरह हम दोनों में बातें गहरी होती गई और सारी सारी रात हम दोनों फ़ोन पर बात करने लगे।

एक दिन हम दोनों ने मूवी देखने की सोची और वो मान गई। मूवी लगी थी- दोस्ताना !

हम सुबह ही कॉलेज से निकल गए और थिएटर जाकर टिकेट ख़रीदे। हमें एक तरफ कोने की सीट मिली और अन्दर की तरफ मैं बैठ गया और बाहर उसे बिठाया।

पिक्चर शुरू हो गई। शुरुआत में ही शिल्पा शेट्टी के गर्म दृश्य आने लगे। मैं गरम होने लगा, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो काफी देर तक मैं ऐसे ही उसके हाथ के साथ अपना हाथ फेरता रहा। मैं पूरा गरम हो चूका था पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं इससे आगे बढूँ !

इतनी देर में मुझे पता ही नहीं चला कि कब मध्यांतर हो गया और मैं कोल्ड ड्रिंक्स लेने बाहर चला गया। फिर थोड़ी देर बैठ कर कोल्ड ड्रिंक्स पीने के बाद मैं फिर से बाहर चला गया और अपने लण्ड को सेट करके फिर से आकर बैठ गया। मैंने फिर से उसका हाथ पकड़ा पर इस बार मैंने मन बना लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए अब काम को आगे बढ़ाया जाए।

यह सोच कर मैंने एक हाथ उसकी जांघ पर रखा वो सहम गई पर कुछ नहीं बोली। शायद वो भी यही चाहती थी फिर धीरे धीरे मैं अपना हाथ उसकी चूत तक ले गया। अब भी उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया तो मैं हिम्मत करके जीन्स के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। वो तो पहले से ही बहुत गर्म हो चुकी थी। फ़िर मैंने एक हाथ उसके टॉप के अन्दर डाला और ब्रा को थोड़ा सरका कर उसके चूचे दबाने लगा।

शायद वो भी यही चाहती थी और मैं उसके चूचुक मसलने लगा। वो हल्के हल्के सिसकारियाँ लेने लगी। उसने अपने आप को ऐसे अवस्थित किया कि किसी को भी पता ना चले कि हम क्या रासलीला रचा रहे हैं। फ़िर मैंने बिना बटन खोले एक हाथ उसकी जीन्स में डाल प्रिया और सीधा पैन्टी के अन्दर ही ले गया। ऐसा करने में मुझे परेशानी हो रही थी क्योंकि उसने बैल्ट बांध रखी थी। वो मेरी परेशानी समझ गई और उसने अपनी बैल्ट थोड़ी ढीली कर दी।

अब मेरा हाथ आसानी से उसकी चूत तक पहुँच रहा था। मैंने महसूस किया कि उसकी चूत से पहले ही पाही निकल रहा है और उसकी पैन्टी भी गीली हो रही थी। मैं समझ गया कि वो झड़ चुकी है। फ़िर मैं उसकी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा, वो सिसकारने लगी। इसी बीच उसका हाथ मेरे लण्ड तक पहुँच गया। मैंने अपनी जांघों पर एक बैग रखा हुआ था। उसने बैग के नीचे से ही मेरी ज़िप खोली और मेरे 8 इन्च के लण्ड को, जो पहले ही लोहे के डण्डे की तरह खड़ा हुआ था, अपने हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी।

जब जब मैं उसकी चूत में उंगली डालना तेज़ करता, वो भी मेरे लण्ड को तेज़ तेज़ हिलाने लगती।

थोड़ी देर में मैं अपनी चरमरीमा तक पहुँच गया और शायद वो भी दोबारा झड़ने वाली थी। मैंने अपना हाथ तेज़ तेज़ चलाना शुरू कर प्रिया और वो भी तेज़ हो गई और अन्त में हम दोनों एक साथ झड़ गए। फ़िर हम दोनों ने अपने अपने रूमाल से अपने अपने औज़ार साफ़ किए और पिक्चर के बीच में ही उठकर चल दिए। उसके बाद मैंने उसे कॉलेज़ के बाहर छोड़ा और खुद घर आ गया।

वो बहुत खुश लग रही थी उस समय।

बाकी कैसे मैंने उस्र अपने दोस्त के कमरे पर जहाँ वो पेईंग गैस्ट रहता था, वहाँ कैसे चोदा, आपको अगली कहानी में बताऊँगा-

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

रोहण गुप्ता

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

विकास ठाकुर

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

सागर सोमवंशी

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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